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Diseases Diseases
Contributed by rkmp.drr on Mon, 2011-08-22 15:36
चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट के विस्तार का प्रकार और उसका जीवन
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट के रोगजनक
हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइजी (Syn : ड्रेक्सलेरा ओराइजी) (लैंगिक अवस्था: कोचलियोबोलस मियाबिनस)।
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट (पत्ती में भूरा धब्बा)
लक्षण:
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल ब्लास्ट का प्रबंधन
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल ब्लास्ट के विस्तार का प्रकार और उसका जीवन
यह बीमारी मुख्यतः वायुजनित कोनिडिया के माध्यम से फैलती है क्योंकि फंगस के स्पोर्स पूरे साल भर विद्यमान होते हैं। संक्रमित तने वाले भाग (सट्रॉ) और बीज में माइसीलियम और कोनिडिया इनोक्युलम के प्रमुख स्रोत हैं। सिंचाई वाला पानी के माध्यम से कोनिडिया अन्य खेतों में भी जा सकते हैं। फंगस अन्य अतिथियों (कोलैट्रल हॉस्ट्स) पर भी बसर करते हैं जैसे पैनिकम रेपेन्स, डिजिटेरिया मैग्रजिनैटा, ब्रैशिएरिया म्यूटिका, लिर्सिया हेक्सैन्ड्रा, डिनेब्रा रिट्रोफ्लिया, एकिनोक्लोओ क्रूसगल्ली और स्टेनोटैफ्रम सेकण्डैटम।
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल ब्लास्ट के लिए उपयुक्त परिस्थितियां
नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों, पारी-पारी से पानी की बौछार, बादल भरा मौसम, उच्च सापेक्षिक आर्द्रता (93-99 प्रतिशत), रात में कम तापमान (15-200c के बीच या 260c से कम), अधिक दिनों तक वर्षा का होना, अधिक समय तक ओस का बना रहना, बादल भरा मौसम, धीमी गति की हवा और साथ में रहने वाले अन्य अतिथियों की मौजूदगी।
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
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चावल ब्लास्ट
लक्षण:
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
Contributed by rkmp.drr on Mon, 2011-08-22 14:53
उत्तर प्रदेश राज्य में चावल की बीमारियां
उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चावल की फसल पर निम्नलिखत 5 मुख्य बीमारियां आक्रमण करती हैं -
1. चावल ब्लास्ट
2. चावल के पत्ती पर प भूरे रंग का धब्बा (चावल का ब्राउन लीफ स्पॉट)
3. चावल का शीथ ब्लाइट
4. चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी)
5. चावल का फॉल्स स्मट
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सी एस आजाद कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:58
కంకర తెగులు
ఆంగ్ల నామం : రెడ్ స్ట్రయిప్
తెగులును కలుగచేసే జీవి : మైక్రోబాక్టీరియం స్పీసీస్
కంకర తెగులు లక్షణా
1.కంకర తెగులు లక్షణాలు పోటాకుపై, ఆకుల పై భాగాలపై కనిపిస్తాయి.
2. నారింజ నుండి ఇటుక రంగు మచ్చలు ఏర్పడతాయి. మచ్చల చుట్టూ తెల్లగా ఉండి, ఆ తెలుపు రంగు పొడవుగా ఆకుల అగ్ర భాగానికి వ్యాపిస్తుంది.
File Courtesy:
http://apsjournals.apsnet.org/doi/pdf/10.1094/PDIS.2004.88.12.1304
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ఎ.పి.ఆర్.ఆర్.ఐ., మారుటేరు
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:52
కాండం కుళ్ళు తెగులు నివారణ
- వేసవి దుక్కులు
- విత్తన శుద్ధి
- మొక్కకీ మొక్కకీ మధ్య తగినంత దూరం ఉంచడం
- పైరులో నీరు నిలువ ఉండకుండా చూసుకోవాలి
- కాండం తొలుచు పురుగును, సుడిదోమను సకాలంలో నివారించుకోవాలి
- వాలిడామైసిన్ 2 మి.లీ. లేక ప్రోపికొనజోల్ 1 మి.లీ. లేక బినామిల్ 1 గ్రా. లేక కార్బెండాజిం 1 గ్రా లీటరు నీటిలో కలిపి పిచికారీ చేసుకోవాలి
- పైరులో ఆకులు మొత్తం తడిచేలా పిచికారీ చేసుకోవాలి
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:50
కాండం కుళ్ళు తెగులు
ఆంగ్ల నామం : స్టెం రాట్
తెగులును కలుగచేసే జీవి : స్క్లిరోషియం ఒరైజే
కాండం కుళ్ళు తెగులు లక్షణాలు:
1. ఈ తెగులు మొదట నీటి మట్టానికి దగ్గరగా, వరి మట్టలపై చిన్న నల్లటి మచ్చలుగా కనిపిస్తుంది.
2. ఈ శిలీంద్రం లోపలి మట్ట వరకూ చొచ్చుకునిపోయి కాండం మొదలుదగ్గర కుళ్ళిపోయేలా చేస్తుంది.
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రైస్ బ్లాస్ట్ డిసీస్ అండ్ ఇట్స్ మానేజ్మెంట్ (వరి అగ్గి తెగులు, యాజమాన్యం) - డా. కృష్ణవేణి
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ఎ.పి.ఆర్.ఆర్.ఐ., మారుటేరు
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:47
ఆకు ఎండు తెగులు
ఆంగ్ల నామం : బాక్టీరియల్ లీఫ్ బ్లైట్
తెగులును కలుగచేసే జీవి : క్సాంథోమొనాస్ కాంపెస్ట్రిస్ పి.వి. ఒరైజేv
ఆకు ఎండు తెగులు లక్షణాలు
1. ఆకు ఎండు తెగులు ఒక నాళ సంబంధమైన తెగులు. ఇది మూడు వేరు వేరు దశలలో వేరువేరు లక్షణాలను కలుగచేస్తుంది - లీఫ్ బ్లైట్ ( ఆకు ఎండు) దశ, క్రేసెక్ దశ మరియు పాలిపోయిన పసుపు ఆకు దశ.
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ఎ.పి.ఆర్.ఆర్.ఐ., మారుటేరు
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:42
అగ్గి తెగులు నివారణ
- తెగులును తట్టుకునే రకాలను సాగుచేసుకోవడం
- విత్తన శుద్ధి
- చేనులోని గట్లపై కలుపు నిర్మూలన
- నత్రజనిని మోతాదుకు మించి వాడకపోవడం
- ట్రైసైక్లాజోల్ 75 శాతం 0.6 గ్రా చొప్పున లేదా ఐసోప్రోథయోలేన్ 40 ఇ. సి. 1.5 మి.లీ. చొప్పున లీటరు నీటిలో కలిపి పిచికారీ చెయ్యడం
Contributed by rkmp.ap on Tue, 2011-08-09 10:38
అగ్గి తెగులు రెండు రకాలుగా ఉంటుంది.
1. ఆకుమీద మచ్చలుగా వచ్చే అగ్గి తెగులు
2. మెడ విరుపు తెగులు
ఆంగ్ల నామం : రైస్ బ్లాస్ట్
ఆకుమీద మచ్చలుగా వచ్చే అగ్గి తెగులు లక్షణాలు
1. ఈ తెగులు మొదట ఆకుల మీద తెలుపు, బూడిద లేక నీలం రంగు గల చిన్న చిన్న (1-3 మి.మీ. వ్యాసం) మచ్చలుగా కనిపిస్తుంది.
File Courtesy:
రైస్ బ్లాస్ట్ డిసీస్ అండ్ ఇట్స్ మానేజ్మెంట్ (వరి అగ్గి తెగులు, యాజమాన్యం) - డా. కృష్ణవేణి
Image Courtesy:
ఎ.పి.ఆర్.ఆర్.ఐ., మారుటేరు
Contributed by rkmp.hr on Wed, 2011-08-03 15:13
लीफ स्कैल्ड (पत्तियों का जलना)(Leaf scald)
लक्षण:
1. यह रोग रिन्कोस्पोरियम ओराइजी के कारण होता है;
2. गहरे और हल्के भूरे क्षेत्रों के साथ पत्तियां मुरझा जाती हैं।
3. लक्षण पत्ती के सिरे या किनारे पर दिखने शुरू होते हैं।
रोग का प्रबंधन ( Management of disease)
- पैनिकल इनिशियएन में 0.1% कार्बेन्डैजिम 50 WP के एक या दो छिड़काव करने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
File Courtesy:
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Contributed by rkmp.hr on Wed, 2011-08-03 15:08
ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)
लक्षण:
- इस रोग का मुख्य कारण हेल्मिन्थोस्पोरियल ओराइजी होता है।
- यह पत्तियों और प्लूम पर अंडाकार गहरा भूरा दाग बनाता है।
- यह रोग मुख्यतः पोषकहीन और कमजोर मिट्टी में पाया जाता है।
- गंभीर स्थिति में यह नर्सरी व खेत की फसलों को हानि पहुंचा सकता है।
ब्राउन स्पॉट रोग का प्रबंधन ( Management of brown spot)
File Courtesy:
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Contributed by rkmp.hr on Wed, 2011-08-03 14:50
ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)
A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें।
B) रासायनिक नियंत्रण
1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए।
2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें।
File Courtesy:
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Contributed by rkmp.hr on Wed, 2011-08-03 14:40
ब्लास्ट रोग (Blast Disease)
1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है।
2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में।
3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।
ब्लास्ट रोग के लक्षण ( Symptoms of blast disease)
File Courtesy:
सीसीएस-एचएयु, राईस रिसर्च स्टेशन, कॉल
Contributed by rkmp.pb on Fri, 2011-07-15 12:25
ਬੰਟ ਜਾਂ ਕੇਰਨਲ ਸਮਟ (Neovossia horrida) Bunt or Kernel Smut
1. ਛੋਟੇ ਗੁੱਛੇ ਵਿਚ ਸਿਰਫ ਕੁਝ ਇਕ ਦਾਣੇ ਹੀ ਖਰਾਬ ਹੁੰਦੇ ਹਨ। ਅਕਸਰ, ਦਾਣਿਆਂ ਦਾ ਸਿਰਫ ਕੁਝ ਹਿੱਸਾ ਕਾਲੇ ਪਾਊਡਰ ਵਿਚ ਬਦਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ।
2. ਕਈ ਵਾਰ, ਪੂਰੇ ਅਨਾਜ ਉੱਤੇ ਵੀ ਹਮਲਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕਾਲਾ ਪਾਊਡਰ ਹੋਰ ਦਾਣਿਆਂ ਜਾਂ ਪੱਤਿਆਂ ਤੇ ਫੈਲ ਜਾਂਦਾ ਹੈ, ਅਤੇ ਇਹ ਅਕਸਰ ਖੇਤ ਵਿਚ ਰੋਗ ਦਾ ਪਤਾ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਅਸਾਨ ਤਰੀਕਾ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।
3. ਰੋਗ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਦੀਆਂ, ਸਮੇਂ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਪਲਾਂਟ ਕੀਤੀਆਂ ਗਈਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਤੇ ਵੱਧ ਵਾਪਰਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵੱਧ ਖੁਰਾਕਾਂ ਨਾ ਵਰਤੋਂ।
File Courtesy:
ਪੰਜਾਬ ਏਗ੍ਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਲੁਧਿਆਣਾ
Contributed by rkmp.pb on Fri, 2011-07-15 12:23
ਫਾਲਸ ਸਮਟ (Ustilaginoidea virens) False Smut 
1. ਇਸ ਦੇ ਵਾਪਰਣ ਦੀ ਘਟਨਾ ਚਾਵਲ ਦੀ ਵੱਧ ਪੈਦਾਵਾਰ ਦੀਆਂ ਕਿਸਮਾਂ ਤੇ ਵੱਧ ਰਹੀ ਹੈ। ਫੰਗਸ ਅਨਾਜ ਦੇ ਇਕ ਇਕ ਦਾਣੇ ਨੂੰ ਵੱਡੇ ਹਰੇ ਮਖਮਲੀ ਜੀਵਾਣੂ ਗੇਂਦਾਂ ਵਿਚ ਬਦਲ ਦਿੰਦਾ ਹੈ।
2. ਫੁੱਲ ਲੱਗਣ ਦੀ ਮਿਆਦ ਦੌਰਾਨ ਵੱਧ ਤੁਲਨਾਤਮਕ ਨਮੀ, ਮੀਂਹ ਅਤੇ ਬੱਦਲ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਰੋਗ ਦੀ ਘਟਨਾ ਦਾ ਵਾਪਰਨਾ ਵਧਾਉਂਦੇ ਹਨ।
3. ਕਾਰਬਨਿਕ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਤੇ ਨਾਈਟ੍ਰੋਜਨ ਖਾਦਾਂ ਦੀ ਵੱਧ ਖੁਰਾਕ ਵੀ ਹਮਲਾ ਬੋਲਣ ਦੀ ਤੀਬਰਤਾ ਵਧਾਉਂਦੀਆਂ ਹਨ।
File Courtesy:
ਪੰਜਾਬ ਏਗ੍ਰੀਕਲਚਰਲ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ, ਲੁਧਿਆਣਾ
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