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Pests

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11
Oct

ईयर कटिंग कैटरपिलर्स

1. प्रारंभिक चरण में, वे युवा पौधों के पत्तों के गुच्छे पर पोषित होते हैं एवं बाद के चरण में, पुष्पगुच्छियों को काटकर एवं फसलों को बहुत गंभीर प्रकार की हानि का कारण बनते हैं।

11
Oct

आर्मी वर्म

1. केवल मिडरिब एवं तने को छोड़ कर, लार्वा द्वारा पत्तों को किनारे से खाने के कारण हानि होती है।

2. गंभीर पर्याक्रमण में पूर्ण बीज परतें एवं खेत नष्ट हो जाते हैं एवं ऐसे दिखाई देता है जैसे कि वह जानवरों द्वारा चरा गया हो।

11
Oct

राईस हिस्पा

1. हानि नवजात एवं वयस्क दोनों के कारण होती है। नवजात निचले एवं ऊपरी ऍपिडर्मिस में सुरंग द्वारा पोषित होते हैं जिसका परिणाम, नियमित रूप से पारदर्शी सफेद धब्बे होते हैं।.

 2. वयस्क आम तौर पर, केवल निचले ऍपिडर्मिस को छोड़कर, पत्ते की धार की सतह को कतरते हैं। .

3. क्षतिग्रस्त पौधे के भाग मिडरिब के समानांतर, सफेद धारियाँ के रूप में दिखाई देते हैं।

11
Oct

लीफ़ रोलर

1. लार्वा युवा पत्तियों को पीड़ित करते हैं।

2. वे पत्ता ऊतक पर पोषित होते हैं एवं जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, वे पत्ती को नली के रूप में बनाने के लिए मोड़ देते हैं।

3. गंभीर पर्याक्रमण के समय, पत्ते के किनारे पूर्ण रूप से सूख जाते हैं। 

 

11
Oct

ग्रीन लीफ़-हॉपर

1. नवजात एवं वयस्क पत्तियों से रस को सोखते हैं।

2. पीड़ित पत्ते क्लोरोफिल के हटने के कारण बने छोटी खरोंच की तरह के निशान के द्वारा विशिष्ट होते हैं।

3. वे "यैलो ड्वॉर्फ" एवं "टुन्ग्रो वायरस" रोगों को चावल में संचारित करते हैं।

11
Oct

बीपीएच एवं डब्‍ल्यूबीपीएच

1. नवजात एवं वयस्क रस सोख कर एवं अपने भोजन के साथ ज़ाइलेम एवं फ्लोएम के अवरोधन द्वारा पौधों को नुकसान पहुँचाते हैं।

2. कोष एवं ऊतकों के टुकड़े इन नलिकाओं में प्रारंभिक भोजन के समय धकेले जाते हैं एवं पौधे के विकास के प्रारंभिक चरण को प्रभावित करते हैं, ऊंचाई एवं सामान्य ताक़त को कम करते हैं।

3. परिणामस्वरूप प्रभावित पौधे का रंग पीला पड़ जाता है एवं वह मर जाता है।

4. बाद के चरणों में, फसल मर जाती है एवं घब्बों को "हॉपर बर्न" कहा जाता है। बीपीएच "ग्रासी स्टंट वायरस" भी प्रेषित करता है।

डब्ल्यूेबीपीएच एवं बीपीएच के प्रबंधन

11
Oct

व्हर्ल मॅगट

संरचना

1. लार्वा व्हर्ल की ओर जाते हुए विकासशील पत्तियों के सबसे भीतरी किनारे में पोषण लेता है, पत्तियों पर छाले बनाता है एवं डेड हार्ट्स उत्‍पन्न करता है।

11
Oct

स्टेम बोरर

1. कैटरपिलर तने में भेद करते हैं एवं मध्य में स्थित "डेड हार्ट्स" की क्रमशः दूधिया अवस्था में एवं वानस्पतिक अवस्था में "व्हाइट ईयरहेड" की मौत का कारण बनते हुए आंतरिक तौर पर भोजन करते हैं।.

2. इसके परिणामस्वरूप अनाज तुषमय हो जाता है।.

स्टेम बोरर(छिद्रक) का प्रबंधन

11
Oct

केस वर्म

1. लार्वा पत्तियों की नोक को काटता है एवं दोनों किनारों की कताई द्वारा घूमकर नलीदार बनाता है।

2. वे नली के अंदर रहते हैं, पत्तियाँ खाते हैं, एक से दूसरे पौधे तक जाने के लिए पानी के ऊपर तैरते हैं एवं महत्तम जुताई से पूर्व चावल के पौधे को निष्पत्रित कर देते हैं।

3. भारी क्षति के समय, पत्ते बेजान हो कर रंग में श्वेताभ दिखाई देते हैं।

11
Oct

गुंढी बग एवं सकिंग बग

क्षति का प्रकार:

नवजात एवं वयस्क दोनों ही विकासशील अनाज से दूधिया अवस्था में रस सोखते हैं, जिससे  अनाज तुषमय, खाली हो जाता है एवं कुछ अनाज विकसित होते हैं परंतु कुछ पिसाई के दौरान टूट जाते हैं। 

प्रबंधन:

मेलेथियन या कारबोरिल बुरादा @ 30 कि.ग्रा./हे.।

 

 

 

11
Oct

राईस रूट ऍफिड

क्षति का प्रकार:

1. नवजात एवं वयस्क कोमल जड़ों से रस सोखते हैं।.

2. भारी पर्याक्रमण में अंकुरों का विकास अवरुद्ध हो जाता है, रंग फीका पीला पड़ जाता है एवं फूल नहीं खिलते।.

3. पर्याक्रमण बीजारोपण के 25-30 दिनों के पश्चात, वानस्पतिक अवस्था में आरंभ होता है, एवं परिपक्व होने तक जारी रहता है।

10
Oct

Pest out breaks in Manipur and Meghalaya मणिपुर और मेघालय में कीटों का प्रकोप

1. राइस ईयर-कटिंग कैटरपिलर को असम और मणिपुर(Pathak et aI., 2001), अरुणाचल, मेघालय और त्रिपुरा में 1982 में पाया गया था(Barwal, 1983)।

2. 1977 में काले रोएं वाले कैटरपिलर का प्रकोप मेघालय में देखा गया था( Sachan और Gangwar, 1979)। राइस हिस्पा का प्रकोप मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में 1987 में देखा गया (Pathak, 1987)। 

3. 1986 से 1990  के बीच शील्ड बग की दो प्रजातियों (Eusarocoris gultieger Jhunl. and Nezara viridula L.) ने मणिपुर मे चावल की फसल को दाने में तरल दूध और दूध के ठोस होने की अवस्था में प्रभावित किया (pathak et aI., 2001)।

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice slug caterpillar राइस स्लग कैटरपिलर

1. स्लग कैटरपिलर (Parasa lepida) चावल की फसल में कभी-कभी लगने वाला कीट है। लार्वा पत्तों को खाता है और केवल पत्ते के मध्य सिरा ही शेष बच पाता है।

2. इसे पहली बार उत्तर-पूर्व के राज्यों में बरसात के दिनों में धान की फसल को आक्रांत करते देखा गया था (Shylesha et al., 2006)।

3. आर्थिक रूप से कम नुकसान पहुंचाने वाले अन्य कीट हैं- फ्ली बीटल ( Chaetocnema basalis and Monolepta signata ), स्टेमफ्लाई, मोल और खेत के झींगुर, ब्लैक बग, स्टिंक बग, ब्लू बीटल और काले ऐफिड।

 

 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Rice Skipper राइस स्किपर

1. स्किपर (Pelopidas mathias) के कैटरपिलर पीलापन लिए हुए हरे

रंग के होते हैं और उनके पृष्ठ पर चार सफेद धारियां होती हैं 

2. इसका सिर बड़ा होता है और शरीर शुण्डाकार होता है। कैटरपिलर द्वारा पौधे को पत्रविहीन कर दिया जाता है। 

3. वयस्क तेज गति करने वाला स्किपर होता है।

 

 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
Image Courtesy: 
http://www.indianaturewatch.net/displayimage.php?id=147697
10
Oct

Rice Horned caterpillar राइस हॉर्न कैटरपिलर

1. राइस हॉर्न कैटरपिलर (Melanitis leda ismene) चावल की फसल का एक कम गंभीर कीट है। 

2. मादा वयस्क गहरे भूरे रंग की तितली होती है जो धान के पत्तियों पर सफेद रंग के अंडे देती हैं।

3. कैटरपिलर का रंग हरा होता है। यह रात के समय पत्तियां खाता है और दिन के समय निष्क्रिय पड़ा रहता है।

4. प्यूपा की अवस्था पत्तियों पर ही संपन्न होती है। निम्नभूमि चावल की फसल में इस कीट द्वारा फसल को उसकी वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था में क्षति पहुंचाई जाती है।

 

 

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
10
Oct

Root aphids रूट ऐफिड

1. रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdommalls and tetraneura  

nigriabdominalis) को पहली बार भारत में पहचाना गया था जिससे चावल की फसल को इस संपूर्ण क्षेत्र की उच्च्भूमि अवस्था में भारी क्षति होती है (Sbylesha et a/. , 2006)। 

2. रूट ऐफिड की दो प्रजातियां काले रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdominalis) और भूरे रूट ऐफिड (Tetraneura nigriabdominalis) उच्चभूमि चावल के पौधे की जड़ों को क्षति पहुंचाती हैं। 

File Courtesy: 
ICAR NEH,उमियम
Image Courtesy: 
CRRI
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