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Production Know How

Production Know How
24
Sep

Mn विषाक्तता के लक्षण

1. निचले पत्र फलक तथा आवरण पर भूरे धब्बे का उभरना। 

2. दो महीने पुरानी फ़सल में पत्तियों की टिप्स का सूखना।

3.Fe की कमी की तरह ही नई पत्तियों में क्लोरोसिस।

4 .उच्च शूकि अनुर्वरता। 

 

File Courtesy: 
DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
Image Courtesy: 
NEH कॉम्प्लेक्स
24
Sep

Mn की कमी का प्रबंधन

1.5 –10 kg ha-1 Mn का MnSO4 (25-30% Mn) के जरिए मृदा अनुप्रयोग की सलाह दी जाती है। MnSO4 का स्रोत चूंकि MnO2 (40% Mn) तथा MnCO3 (31% Mn) की तुलना में अधिक तीव्रता से कार्य करता है, इसलिए इसकी कमी वाली मिट्टी में इसका प्रयोग करना चाहिए। 

2. तीव्र रिकवरी के लिए 0.2 से 0.5 % MnSO4 का पत्र छिड़काव करना चाहिए, जो टिलरिंग की अवस्था से आरंभ किया जाना चाहिए। कई बार 3-4 दिनों के अंतराल पर बहु-अनुप्रयोग (तीन बार) की आवश्यकता पड़ती है।  

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

Mn की कमी के कारण

1. मिट्टी में Mn सामग्री की कम उपलब्धता (वर्षापूरित उच्च भूमि की चावल वाली मिट्टी)।

2. अत्यधिक Fe सामग्री (अपघटित /अम्ल सल्फेट वाली मिट्टी).

3. निक्षालित गैर-जलमग्न बलुई मिट्टी (पंजाब में खरीफ चावल के मौसम में अत्यधिक निक्षालन के कारण Mn की कमी से गेहूं को काफी नुकसान पहुंचता है।)

4. अत्यधिक ऋतुक्षरित अम्लीय उच्च भूमि की मिट्टियां (जलोढ़  मिट्टी)।

5. कार्बनिक मिट्टियां (पीट / हिस्टोसोल्स), अम्लीय मिट्टियों का अत्यधिक चूनाकरण।

6.NO3 –N, Ca, Mg तथा Zn का उच्च सांद्रण। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

Mn की कमी के लक्षण

1. अगतिशील होने के कारण सबसे पहले युवा पत्तियां लक्षण दिखाती हैं

(अंतरशिरीय क्लोरोसिस तथा उसके बाद नेक्रोटिक ब्राउन स्पॉट)

2. कमी वाले पौधे छोटे होते हैं, इसलिए उनमें कम टिलर्स होते हैं। 

3. प्रभावित पौधे ब्राउन स्पॉट के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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DRR SSINM
24
Sep

Mn के कार्य Functions

1.Mn मैंगेनिन नामक एक वनस्पति यौगिक का घटक होता है। 

2. यह जल रिसाव प्रक्रिया में एक अहम भूमिका निभाता है (हिल अभिक्रिया) तथा बाद में होने वाले यह O2 उत्सर्जन (फोटो सिस्टम II) में भी भाग लेता है। 

3.NO3 – अवकरण तथा नाइट्रेज रिडक्टेज के जरिए यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक होता है। 

4.Mn क्रेब्स चक्र/ऑक्सीकरण-अवकरण अभिक्रिया के लगभग 35 एंजाइम्स का को-फैक्टर होता है। 

5. यह ऐरोमेटिक ऐमीनो अम्लों के जैव-संश्लेषण तथा फाइटोलेक्सिन (रोगाणुओं के विरुद्ध वनस्पति की प्रतिरक्षा) जैसे द्वितीयक वनस्पति उत्पादों के निर्माण में शामिल रहता है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

मैंगनीज (Mn)

1. कवकों के प्रत्यक्ष रूप से विषाक्त होने के अलावा Mn यह लिग्नीफिकेशन तथा जड़ रिसाव को बढ़ावा देने के लिए प्रकाश-संश्लेषण को भी बढ़ावा देता है, जिससे जड़ रिसाव में वृद्धि होती है और एंटीफंगल माइक्रोफ्लोरा को प्रोत्साहन मिलता है। 

2. यह सिंचित मिट्टी में जहां  Mn की उपलब्धता उच्च होती है, राइस ब्लास्ट तथा ब्राउन स्पॉट के लिए प्रतिरोध प्रदान करता है। 

3.NO3 –N अवकरण में भूमिका होने के कारण, Mn की कमी से NO3, NO4 का जमाव होता है। इस प्रकार उच्च भूमि का चावल  Mn  की कमी से विपरीत रूप से प्रभावित होता है। 

 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
24
Sep

Fe की विषाक्तता का प्रबंधन

1.K, P, Ca तथा Mg स्रोतों के प्रयोग (लाइम/SSP/MOP) की स्थिति में

Fe की विषाक्तता अधिक होती है। 

2.pH बढ़ाने के लिए ऊपरी मिट्टी में चूने का प्रयोग @ 2-3 t ha-1।

3.Fe 2+ की मात्रा को घटाने के लिए MnO2 (100-200 kg ha-1) का प्रयोग। 

4. संचित  Fe  को हटाने से मध्य मौसम के जल-निकास की व्यवस्था होनी चाहिए। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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DRR SSINM
24
Sep

Fe विषाक्तता के कारण

1. प्रबल रूप से क्षीण मिट्टी।                                                    

2. निम्न मृदा pH (एसिड सल्फेट वाली मिट्टी).

3. काफी क्षीण स्थिति, जो स्थायी जलजमाव/अपर्याप्त जल निकास व्यवस्था (तटीय मिट्टी) वाली निम्न भूमी की मिट्टी में होती है। 

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DRR टेक्निकल बुलेटिन नं. 11, 2004-2005, एम. नारायण रेड्डी, आर. महेन्दर कुमार तथा बी. मिश्रा, चावल आधारित फ़सल प्रणाली हेतु स्थल-विशिष्ट समेकित पोषण प्रबंधन
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NEH कॉम्प्लेक्स
22
Sep

स्टेम बोरर के लिए प्रतिरोधी प्रकार, स्टेम बोरर का प्रबन्धन

रत्ना, सास्याश्री और विकास 

स्टेम बोरर का प्रबन्धन

1. राइस बोरर प्रबन्धन में शामिल हैं कल्चरल, होस्ट प्लांट रेसिस्टेंट, केमिकल बायोलॉजिकल और केमिकल विधि। 

 

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

ग्रीन लीफ होपर का वर्गीकरण

वर्ग         :   इंसेक्टा Insecta

क्रम        :   होमोप्टेरा Homoptera

फैमिली   :  सिकाडेल्लीडे Cicadellidae

जीनस     :  नेफोटीटिक्स Nephotettix  

स्पीसीज  : विरेसेन्स virescens 

 

 

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फील्ड रेडी रेकनर
22
Sep

ग्रीन लीफ होपर परभक्षियों की जैव-पारिस्थितिकी

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

गन्धी कीट का प्रसार

1. गन्धी कीट की तीन स्पीसीज भारत में धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार है।  

•लेपटो कोरिसा ओरटोरियास Leptocorisa oratorius  (L.acuta), 

•एल. वारिकोर्निस L. varicornis and 

•एल. लेपिडा L.lepida  

उनके अलग-अग क्षेत्र होते हैं जहां वे प्रमुख अथवा नगण्य कीट के रूप में पाए जाते हैं।

2.आसाम, बिहार, दिल्ली, केरल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रमुख है जबकि केरल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु तथा प. बंगाल के भागों में  L.ornatus गंभीर रूप से पाया जाता है। .

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

गन्धी कीट का जीवनचक्र

अंडे:                                                                                        

अंडे प्राय: एक ही पंक्ति में दिए जाते हैं, खासकर पत्ती के मध्य-नस पर। 

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IPM –NCIPM निबन्ध
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फील्ड रेकनर
22
Sep

राइस गन्धी कीट का होस्ट विस्तार

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1. बहुत से घास और यहां तक कि डायकॉटीलिडोनस (dicotyledonous) पौधों को होस्ट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।  

2. विभिन्न घासों का एकैनोक्लोआ कोलोना Echinocloa colona सफल उत्तरजीविता और प्रजनन के लिए विशिष्ट होस्ट माना गया है। 

3. जब खेतों में असमान रूप से दाने पकते हैं तब कीटों का सफलतापूर्वक गुणन देखा गया है और वे अगात फूल वाली किस्म से पछात फूल वाली किस्मों वाले खेतों की ओर चले जाते हैं। 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

गन्धी कीट द्वारा हुई क्षति की प्रकृति

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1. दाना निर्माण के शुरुआती समय में वयस्क और नवजात कीट नवविकसित दानों का रस चूसते हैं।  

2. दानों के निर्मण से पहले छोटे दूदेदार पत्ते और कलियों पर भी हमले होते हैं। पुष्प-गुच्छ में खाली अथवा चुकटे हुए दाने की उपस्थिति से पर्याक्रमण का पता चलता है। 

3. दाने में एक छिद्र पाया जाता है और उस छिद्र के आसपास एक भूरे रंग का धब्बा प्रकट हो जाता है जिसके कारण पुष्प-गुच्छ बदरंग दीखता है। 

 

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

राइस हिस्पा का रासायनिक नियंत्रण

1.ट्रियाजोफोस triazophos 40 EC @ 400 मिली/हेक्टेयर अथवा  

फोसलों Phosalone 35 EC @ 850  मिली/हेक्टेयर अथवा

कलोरपाईरीफास Chlorpyriphos 20 EC @ 1500  मिली/हेक्टेयर अथवा

क्वीनालफास Quinalphos 25 EC @ 1200  मिली/हेक्टेयर अथवा 

मोनोक्रोटोफास Monocrotophos 36 WSC @ 850  मिली/हेक्टेयर अथवा  

इथोफेनप्रोक्स Ethofenprox 10 EC @ 450  मिली/हेक्टेयर अथवा

फिप्रोनिल Fipronil 5 SC @ 600  मिली/हेक्टेयर का छिड़काव करें। 

2.कार्बिफ्युरान Carbofuran 3G @ 25 किग्रा /हेक्टेयर का प्रयोग करें। 

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

राइस हिस्पा का कल्चरल नियंत्रण

1. आरंभिक वानस्पतिक अवस्था में अंडे और ग्रब्स द्वारा फसल के अत्यधिक क्षतिग्रस्त पत्ते को ऊपर से तीन-चौथाई काट कर नष्ट करने से इसके जनसंख्या कम हो जाती है।

2. हिस्पा के अत्यधिक प्रभाव की स्थिति में, नाइट्रोज के उपरिवेशन की प्रक्रिया छोड़ दें। ध्यना दें कि कीट के नियंत्रित हो जाने के बाद यदि नाइट्रोजन का उपरिवेशन किया जाए तो इसकी संख्या पुन: बढ़ सकती है।

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

राइस हिस्पा द्वारा हुई क्षति की प्रकृति और लक्षण

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1. वयस्क भौड़े पत्ते के त्वचीय ऊतकों को खाते हैं और मोटा कीट पत्ते के ऊतक में सुराख बनाकर उसमें प्यूपा को जन्म देते हैं।  

2. भौंड़े लेमिना के शिरों के बीच क्लोरोफिल को कुरेदते हैं जिसके कारण सफेद रंग की समांतर धारियां बनती हैं। बाद में,  यहां तक कि पत्ते के शिरे को अन्धाधुन्ध खाने के कारण पत्ते पर सफेद छाले दिखाई देने लगते हैं।

3. गंभीर रूप से संक्रमित पत्ते सूख जाते हैं और फसल झुलसा हुआ दिखाई देने लगता है।  

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

राइस हिस्पा की जैवपारिस्थितिकी

1. मादा भौंड़े पत्ते के नर्म हिस्से को कुतरती है और मेसोफिल के अन्दर अंडे देती है। एक मादा कीट 33-101 अंडे देती है।  

2. अंडे सेने की अवधि 3-5 दिनों की होती है।  ग्रब्स 4 बार मोल्ट होता है और लार्वा की अवधि 10-15 दिनों की होती है। प्यूपा के अवधि 4-6 दिनों के एहोती है और वयस्क 78 दिनों तक जेवित रहते हैं। 

3. छोटे बर्रे अंडे और लार्वा पर हमला करते हैं। reduviid कीट वयस्कों को खाते हैं। तीन फफूंदी रोगजनक (पैथोजन) होते हैं जो वयस्कों पर हमला करते हैं।

 

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IPM –NCIPM निबन्ध
22
Sep

राइस हिस्पा का विस्तार

1. पहले, एक छोटा विनाशक कीट, Hispa (Dicladispa armigera) अब चावल का एक प्रमुख कीट बन गया है खासकर भारत के उत्तर-पूर्वी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में।

2. आसाम, बिहार, प. बंगाल, मध्य प्रदेश और आन्ध्र प्रदेश में हिस्पा एक प्रमुख विनाशक कीट के रूप में पाया जाता है।

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IPM –NCIPM निबन्ध
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