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Chhatisgarh

18
Feb

India States Receive 2012-13 ‘Krishi Karman’ Awards for Higher Rice Production

Two Indian states, Chhattisgarh and Maharashtra, have received this year’s "Krishi Karman" awards for achieving higher rice production during the crop year 2012-13 (October – September).

Chhattisgarh received the 2012-13 Krishi Karman Award for best performance in paddy rice yield. According to government sources, the average rice yield in the state increased to around 2.041 tons per hectare in 2012-13, up about 71% from around 1.75 tons per hectare in 2011-12. Chhattisgarh produced around 6.28 million tons of rice in 2011-12, which is about 6% of India’s total rice production of around 104.3 million tons. The western state of Maharashtra, which produces around 2.8 million tons of rice annually, was awarded with commendation prize for rice.

The northern state of Haryana won the Commendation Award for Sustained High Productivity of Rice and Wheat for the year 2012-13. According to the Haryana Agriculture Department, the state recorded all-time high rice production at 3.98 million tons during the 2012-13 fiscal, which is about 4% of India's rice production. Haryana was the highest contributor of food grains (including both rice and wheat) to the Central Pool and ranks first among states in basmati rice exports, according to local sources.

The central state of Madhya Pradesh won the award in large category (food grain production more than 10 million tons), eastern state of Odisha won the award in medium category (food grain production 1 to 10 million tons) and Manipur won the award in small category (food grain production less than 1 million tons). In individual food grain crops, Chhattisgarh won the award for rice, Bihar for wheat, Jharkhand for pulses and Andhra Pradesh for coarse cereals.

Krishi Karman awards were instituted in 2010-11 by the Government of India, Ministry of Agriculture. They are given to Indian states for their effort and contribution towards increasing the country’s food grain production.

Courtesy :  http://oryza.com/news/rice-news/india-states-receive-2012-13-%E2%80%98kr...

22
Nov

Paddy arrival picks up at procurement hubs in State

There had been consistent rise in paddy arrivals in the procurement centers of the primary agriculture produce co-operative committees in Chhattisgarh.

Latest Government data reveals that 24 of the 27 districts in the State had so far registered arrivals of 2.91 lakh metric tonnes of paddy during the ongoing special paddy procurement drive having been taken up between October 21, 2013 to February 15, 2014 in the State.

Out of the 2.91 lakh metric tonnes of paddy, 1.16 lakh metric tonnes is of grade ‘A’ category and 1.30 lakh metric tonnes is that of ‘Common’ category.

The maximum paddy arrival had been recorded in Mahasamund district  at 48,210 metric tonnes.

As per the paddy arrival data provided by MARKFED,  Raipur district has recorded 42,068 metric tonnes of paddy, Baloda Bazar-Bhatapara (21,782 metric tonnes), Gariaband ( 18,068 metric tonnes), Dhamtari ( 42,076 metric tonnes), Durg (21,909 metric tonnes), Balod ( 30,562 metric tonnes),  Bemetara (24,985 metric tonnes), Rajnandgaon (30,416 metric tonnes), Kabirdham (Kawardha) (2,486 metric tonnes), Bilaspur (2,924 metric tonnes), Mungeli (278 metric tonnes), Janjgir-Champa (54 metric tonnes),  Korba ( 48 metric tonnes),  Raigarh (2,398 metric tonnes),  Surguja ( Ambikapur) (321 metric tonnes), Balrampur-Ramanujganj (24 metric tonnes),  Koria ( Baikunthpur) (48 metric tonnes), Jashpur (192 metric tonnes), Bastar (Jagdalpur) (189 metric tonnes), Kondagaon (97 metric tonnes),  Narayanpur (47 metric tonnes),  North Bastar (Kanker) (2,204 metric tonnes) and Sukma (1 metric tonne). 

Courtesy : http://www.dailypioneer.com/state-editions/raipur/paddy-arrival-picks-up...

6
Sep

छत्तीसगढ़ में 100 लाख टन धान उत्पादन संभव

खरीफ सीजन में धान की बुवाई का शत-प्रतिशत बुवाई लक्ष्य हासिल होने के बाद मौजूदा सीजन में छत्तीसगढ़ में धान का बंपर उत्पादन होने की उम्मीद बढ़ गई है। कृषि विभाग के अनुसार इस साल 100 लाख टन धान की पैदावार होने की संभावना है। वहीं, धान की बंपर पैदावार को देखते हुए सरकारी धान खरीद में भी 10 फीसदी इजाफे के साथ ८० लाख टन तक पहुंचने की संभावना है।

राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल 36.58 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

इस साल हुई जोरदार बारिश के चलते धान की शत-प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है। साथ ही राज्य के मैदानी इलाकों में जारी जोरदार बारिश के सिलसिले को देखते हुए अभी भी राज्य में धान की रोपाई का दौर जारी है। कृषि अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में इस साल सामान्य बारिश हुई है। केवल तीन जिलों जशपुर, कोरबा और सूरजपुर में सामान्य से कम बारिश हुई है।

इसे देखते हुए लक्षित रकबे से अधिक जमीन पर इस साल धान की पैदावार होने की संभावना है। रायपुर राजस्व संभाग में धान की बोनी के लिए 16.8 लाख हेक्टेयर, बिलासपुर राजस्व संभाग में 8.98 लाख हेक्टेयर, सरगुजा राजस्व संभाग में 5.49 लाख हेक्टेयर और बस्तर राजस्व संभाग में 6.09 लाख हेक्टेयर में लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यहां बुवाई का लक्ष्य पूरा हो चुका है।

लक्ष्य से अधिक धान की बुवाई के चलते राज्य सरकार इस साल 100 लाख टन धान के उत्पादन की उम्मीद जता रही है। हालांकि इस बार भी छत्तीसगढ़ में 90 फीसदी से अधिक पैदावार मोटे धान की ही होगी। जिसमें महामाया और आई आर36 जैसी वैरायटी प्रमुख है।

राजनांदगांव एवं आसपास के क्षेत्रों में करीब 2.5 लाख टन सुगंधित धान की पैदावार की उम्मीद है। इस बंपर पैदावार को देखते हुए सरकार ने धान खरीद अभियान की भी तैयारी कर ली है। इस साल जल्द मानसून की आमद के चलते धान की सरकारी खरीद एक सप्ताह पहले अर्थात अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से शुरू होगी। इसके साथ ही इस साल समर्थन मूल्य के तहत होने वाली धान की खरीदी में भी 10 फीसदी का इजाफा हो सकता है।

पिछले साल सरकार ने 71 लाख टन से अधिक धान की सरकारी खरीद की थी। जिसकी मदद से 38 लाख टन चावल के उत्पादन की प्रक्रिया चालू है। वहीं इस साल 80 लाख टन धान की खरीद हो सकती है। ऐसे में चावल का उत्पादन भी 40 लाख टन से अधिक होने की संभावना है। इसके लिए राज्य सरकार ने 9 हजार करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट लेने का फैसला किया है।

Courtesy : http://business.bhaskar.com/article/BIZ-possible-to-produce-100-million-...

3
Sep

किसानों के खाते में जमा होगा धान का पैसा

बिलासपुर:
किसानों को धान बेचने के बाद अपने ही चेक के लिए बैंक का चक्कर लगाना नहीं पड़ेगा। राशि सीधे उनके खाते में जमा हो जाएगी और वे चेक के झंझट से हमेशा के लिए छुटकारा पा जाएंगे। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी में यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी में जुट गया है।
जिले में 128 ख्ररीदी केंद्रों में पांच अरब रुपए के धान की खरीदी होती है। 2012-13 में 56 हजार से \'यादा किसानों से करीब 38 लाख क्विंटल धान खरीदा गया और उन्हें 1200-1250 रुपए प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य दिया गया। हर बार की तरह इस बार भी चेक बांटे गए, लेकिन इससे पहले किसानों को अपना चेक लेने के लिए कई दिनों तक समिति और बैंक के चक्कर लगाने पड़े। चेक आने के बाद भी किसानों को नहीं देने, उसके एवज में रिश्वत मांगने और योजना का लाभ नहीं देने जैसी शिकायतें इस बार भी मिलती रही। किसानों ने इसकी शिकायत नोडल अधिकारियों के माध्यम से बैंक के सीईओ तक पहुंचाई और इसके बाद इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाने की दिशा में कोशिश शुरू हुई। नतीजा ये हुआ कि बैंक ने धान बेचने वाले किसानों की राशि सीधे उनके खाते में जमा करने का निर्णय लिया। मंथन में यह बात सामने आई कि सभी किसानों का बैंक में एकाउंट है। इसके बावजूद चेक देने की परंपरा गलत है। बोनस की राशि भी किसानों को चेक से दी जाती है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। किसानों को अपने ही अनाज के बदले मिलने वाले रुपए के लिए भटकना पड़ता है जिससे बैंक की छवि खराब हो रही है। इन बातों को गंभीरता से लेते हुए अब यह कोशिश की जा रही है कि इस बार धान खरीदी शुरू हो तो किसानों को सीधे उनके खाते से रुपए दिए जाएं। यानी, किसान अपना पासबुक लेकर बैंक जाएं और रुपए निकाल सके। इससे चेक को लेकर होने वाली दलाली पर अंकुश लगेगा। हालांकि, इस दिशा में कोई तैयारी नहीं की गई है और योजना अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन उम्मीद है जल्द ही इस दिशा में प्रयास शुरू होगा। बैंक का अनुमान है कि इस बार जिले में ४० लाख क्विंटल धान की खरीदी समितियों में होगी, जिसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

Courtesy : http://www.bhaskar.com/article/MAT-CHH-BIL-c-2-181720-NOR.html?PRVNX=

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