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Uttar Pradesh

20
Feb

किसानों को नहीं मिल रहा भुगतान

रायबरेली, जागरण संवाददाता :  प्रदेश सरकार ने धान बिक्री करने के लिए खरीद केंद्र आने वाले किसानों को भले ही तुरंत भुगतान करने का निर्देश जारी कर रखा है। लेकिन स्थिति यह है कि जिले के सरकारी धान खरीद केंद्रों पर किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। पीसीएफ, खाद्य एवं विपणन समेत कई एजेंसियां किसानों का भुगतान समय से नहीं कर रही हैं।

जिले में 56 सरकारी केंद्रों पर अब तक दस हजार मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है। पीसीएफ और अन्य एजेंसियां किसानों का भुगतान नहीं कर रही है। जगतपुर, ऊंचाहार, लालगंज, हरचंदपुर आदि क्षेत्रों में खुले पीसीएफ केंद्रों पर धान तो खरीद लिया गया है। लेकिन भुगतान के लिए संबंधित बैंकों के खाते में रुपया नहीं है। किसानों के कहने पर दो चार लाख भेजा जाता है। किसान पहले से बैंक में चेक लगाए घूम रहे हैं। इस कारण जिले में गेहूं की तरह धान खरीद की स्थिति भी संतोष जनक नहीं है। जिसके परिणाम स्वरूप साढ़े तीन माह में लक्ष्य का आधा धान ही खरीदा जा सका है। धान खरीद में शुरू से ही लापरवाही की जा रही है। किसान नेता संतोष चौधरी ने कहा कि पीसीएफ खरीद केंद्रों पर खरीदे गए धान का किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा है। पीसीएफ के प्रबंधक राघव किशोर ने बताया कि सीएमआर का भुगतान करने की वजह से कुछ दिक्कत आ रही थी। रुपये का इंतजाम कर लिया गया हैं, सभी बैंकों के खाते में पैसा भेजा गया है। अन्य एजेंसिया भी भुगतान कर रही है।

Courtesy :   http://www.jagran.com/uttar-pradesh/raebareli-11102601.html

17
Feb

तय लक्ष्य से अधिक हुई धान की खरीद

बीएस संवाददाता / जगदलपुर February 16, 2014:

सरकारी धान खरीद के मामले में बस्तर जिला प्रदेश के 27 जिलों में से 18वें स्थान पर रहा। 13 हजार से अधिक किसानों ने जिले के खरीद केंद्र्रों में करीब 138 करोड़ रुपये का धान बेचा है। जिले के 58 धान खरीद केंद्र में इस साल लक्ष्य से अधिक की खरीद की गई। पिछले साल धान खरीद के मामले में बस्तर 19वें स्थान पर था। बस्तर जिले में इस साल 9 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था जबकि 14 फरवरी तक करीब 10 लाख 40 हजार क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है। मार्कफेड ने इस साल उपार्जन केंद्रों के लिए मांग के अनुरूप 4 हजार से अधिक बारदाने भेजी थी। लेकिन बड़े पैमाने पर धान की खरीद होने के कारण गोदाम की कमी के चलते बारदानों को निजी गोदामों और मंडी में रखना पड़ा था।

इस बार धान रखने के लिए प्लास्टिक के बारदाने का उपयोग नहीं किया गया। इस साल बस्तर जिले के 13 हजार 800 किसानों ने 21 अक्टूबर से 14 फरवरी तक 138 करोड़ रुपये का धान बेचा, जिसमें पतले धान की मात्रा अधिक है। जिला सहकारी बैंक से मिली जानकारी के मुताबिक बस्तर, बकावंड और जगदलपुर के साथ ही लोहंडीगुड़ा ब्लाक के किसानों ने धान अधिक बेचा है।

धान बेचने के लिए किसान बड़े पैमाने पर इस साल खरीदी केंद्रों पर पहुंचे लेकिन कर्ज पटाने में उनकी लापरवाही सामने आई। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से 14 हजार से अधिक किसानों ने 84 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था जिनमें से अब तक 13 हजार 800 किसानों ने 45 करोड़ 76 लाख रुपये का कर्ज का भुगतान किया है। यह स्थिति तब है, जब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सभी लैंप्स संचालकों को 15 फरवरी तक 75 फीसदी कर्ज वसूली का लक्ष्य दिया था। इस बारे में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी आरबी सिंह का कहना है कि बैंक से जिन किसानों ने कर्ज लिया है, उनसे पूरी राशि वसूली जाएगी। किसानों के पास अब भी 3 महीने बचे हैं। इस बीच उनसे कर्ज वसूली जारी रहेगी।

Courtesy :  http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=82553

4
Feb

धान की धीमी खरीद को लेकर किसान मायूस

सोनभद्र : जनपद में कछुआ चाल चल रही धान खरीद को लेकर किसानों में मायूसी व्याप्त है। खरीद कार्य बंद होने में मात्र 25 दिन से भी कम का समय बचा हुआ है और अभी तक जिला प्रशासन लक्ष्य से कोसों दूर है।

निर्धारित 45 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष संबंधित विभाग अभी तक 50 प्रतिशत भी खरीद नहीं कर पाया है। किसान मंगला प्रसाद, सुलोचन सिंह, विनोद शुक्ल ने कहा कि हम लोग क्रय केंद्रों पर चक्कर काटते-काटते थक गए हैं अब तो अपने उपज को बाजार में औने-पौने दाम पर बेचना ही मुनासिब है। जिला प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जिलाधिकारी ने पूरे खरीद के दौरान लगातार उदासीन रवैया अपना रहा, जो गलत है।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/sonbhadra-11060052.html

13
Jan

बारिश से भीगा 25 हजार क्विंटल धान

फतेहपुर /बिंदकी अंप्र :  बारिश ने व्यापारियों व किसानों को लम्बे नुकसान में पहुंचा दिया है। बिंदकी मंडी सहित क्रय केंद्रों में पड़ा 25 हजार क्विंटल धान भीग गया है। मौसम खराब होने से तौल बंद हो गई है।
कृषि उत्पादन मंडी समिति बिंदकी से गैर प्रांत के व्यापारियों ने स्थानीय आढ़तियों के माध्यम से धान की खरीद कर आढ़तों के बाहर जमा कर रखा है। यहां से जैसे-जैसे साधन मिल रहा है धान को बाहर भेजने का काम जारी है। गुरुवार की सुबह अचानक मौसम खराब हुआ और बारिश शुरू हो गई। आढ़ती जय कुमार ने बताया कि व्यापारियों को भारी नुकसान है। धान के भीग जाने के बाद उस गुणवत्ता का चावल नहीं बनेगा। अब धूप निकलेगी तो इसे सुखाने में भी कई दिन लग जाएंगें। इसके बाद भी बाहर के लिए लोड हो सकेगा। मौसम का यही हाल और अधिक बारिश हो गई तो व्यापारी संकट में आ जाएगा। आढ़ती आनंद कुमार, राम औतार सोनकर ने कहा धान भीग जाने से उसके चावल की क्वालिटी खराब हो जाएगी। इससे लम्बा नुकसान लगा है। असोथर धान खरीद केंद्र पांच हजार क्विंटल धान किसानों का भीग गया। इसी प्रकार खागा, थरियाव, हसवा सहित अन्य केंद्रों में व्यापारियों सहित किसानों का धान भीग गया है। बताते है कि सरकारी खरीद का भी सैकड़ो क्विंटल धान खरीद भीग गया है। खराब मौसम से यह स्थिति बन गई है कि एक सप्ताह तक खरीद होना मुश्किल हो गया है।

Courtesy :  http://www.jagran.com/uttar-pradesh/fatehpur-10997232.html

21
Nov

धान की मड़ाई में जुटे किसान

जौनपुर: धान की तैयार फसल को काटकर किसान सुरक्षित घर में पहुंचाने में जुट गए हैं। बड़े काश्तकार मड़ाई में मशीनों का प्रयोग कर रहे हैं तो छोटे हाथ का सहारा ले रहे हैं।

विगत कई साल बाद हुई अच्छी बारिश के कारण धान की फसल अच्छी थी लेकिन अक्टूबर माह में आए चक्रवाती तूफान से काफी नुकसान हो गया। गिरे धान को किसानों ने सड़ने से बचाने में कड़ी मशक्कत किया। पककर तैयार हुई बची फसल को काटकर मड़ाई कार्य में जुट गए हैं।

दूसरी तरफ तेजीबाजार क्षेत्र के कपूरपुर स्थित साधन सहकारी समिति पर पीसीएफ का धान क्रय केंद्र खोला गया है। दो माह बीतने को है उक्त केंद्र पर खरीद नहीं शुरु हो सकी है। धान न खरीदे जाने से किसान परेशान हैं। गौराखुर्द गांव निवासी संकठा सिंह का कहना है कि यदि धान बिक जाए तो उस पैसे से रबी की बोआई का काम चल जाता है।

इस संबंध में केंद्र संचालक माता प्रसाद सिंह का कहना है कि गोदाम में यूरिया व डीएपी भरी है। धान रखने के लिए जगह न होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही है।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/jaunpur-10876022.html

11
Sep

UP eyes 2.5 mn tonnes paddy procurement in 2013-14

In spite of lack of preparations, the Uttar Pradesh government is targetting procurement of 2.5 million tonnes (mt) of paddy during 2013-14.

The Food Corporation of India (FCI) would procure 10 per cent of the 2.5 mt target, while the rest would be procured by the state agencies.

The rice procurement season would be effective for five months — from October 1 to February, 2014 — and about 3,250 procurement centres would be set up.

According to the agriculture department, paddy acreage this year stands at 5.964 million hectares (MH) as compared to the target of 5.947 MH. The preliminary paddy production is estimated at 15.30 MT.

The food department’s procurement centres are mandated to pay farmers through Real Time Gross Settlement (RTGS) system, which directly credits money to their bank accounts. The remaining centres would pay by means of account payee cheques.

UP Food Commissioner Archana Agarwal said the total warehousing capacity in UP stood at 3.765 mt. FCI is tasked to prepare an action plan for storage of rice.

The government would accord priority to modernised rice mills in custom milling and levy obligations.

In UP, rice millers have the obligation of 25 per cent rice levy, which is collected by the state for public distribution system (PDS). Under custom milling, the government procures paddy from farmers and gets it milled by paying incidental charges.

“The mills incur Rs 60 in milling per quintal of paddy, while the state has been paying only Rs 10 per quintal as milling cost for the last 10 years. This is grossly inadequate and a loss making proposition. For this reason, the millers are not excited about custom milling,” Uttar Pradesh Rice Millers Association President Rakesh Kumar Agarwal told Business Standard .

The millers have also demanded abolition of rice levy, citing lower realisation.

Paddy is cultivated across UP, while seven districts fall under high productivity, including Bijnore, Kushingar, Pilibhit, Chandauli, Baghpat, Ambedkar Nagar and Varanasi.

Paddy is highly dependent on south-west monsoon, which occurs over the subcontinent from June through September. The kharif crop is chiefly sown between March and August and harvested between June and December.

There are about 1,000 large rice mills in UP, while the number of smaller units is about 3,000. A large mill has a capacity to mill three to four tonnes paddy per hour.

The main elements in mills’ modernisation are dryer and sorting machines, which cost about Rs 20 lakh and Rs 50 lakh respectively. Only about 10 per cent of the state rice mills are equipped with these machines.

The millers have been urging the government for a five year window for modernisation and providing 25-30 per cent subsidy on the cost.

Courtesy : http://www.business-standard.com/article/economy-policy/up-eyes-2-5-mn-t...

10
Sep

यूपी में 25 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ September 09, 2013

उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013-14 में 25 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है। हालांकि खरीद के लिए तैयारियां अभी आधी-अधूरी ही हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) कुल खरीद लक्ष्य की 10 फीसदी खरीद करेगा, जबकि शेष राज्य की एजेंसियां खरीदेंगी।

पिछले साल राज्य में धान की खरीद 30 फीसदी घटकर 17.5 लाख टन रही थी, जबकि लक्ष्य 25 लाख टन का रखा गया था। चावल खरीद का सीजन 1 अक्टूबर से 31 मार्च 2014 तक के पांच महीने चालू रहेगा और राज्य में 3,250 खरीद केंद्रों की स्थापना की जाएगी।

कृषि विभाग के मुताबिक इस साल धान का रकबा 59.64 लाख हेक्टेयर है। हालांकि लक्ष्य 59.47 लाख हेक्टेयर रखा गया था। धान उत्पादन 153 लाख टन रहने का शुरुआती अनुमान जताया गया है। खाद्य विभाग के खरीद केंद्रों को किसानों को रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) सिस्टम के जरिये भुगतान करने का काम सौंपा गया है। इस सिस्टम के तहत सीधे किसानों के बैंक खाते में पैसे जमा किए जाते हैं।

शेष केंद्र अकाउंट पेयी चेक के जरिये भुगतान करेंगे। उत्तर प्रदेश की खाद्य आयुक्त अर्चना अग्रवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गोदामों की कुल भंडारण क्षमता 37.65 लाख टन है। एफसीआई को चावल के भंडारण के लिए एक कार्ययोजना बनाने का काम सौंपा गया है। सरकार कस्टम मिलिंग और लेवी अनिवार्यता में आधुनिक चावल मिलों को वरीयता देगी। उत्तर प्रदेश में चावल मिलों पर 25 फीसदी चावल लेवी की बाध्यता होती है। इसका संग्रहण राज्य द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए किया जाता है। कस्टम मिलिंग के तहत सरकार धान की खरीद किसानों से करती है और इस पर आने वाली लागत चुकाकर मिलिंग कराती है।

Courtesy: http://hindi.business-standard.com/hin/storypage.php?autono=76472

10
Sep

Flood ruins paddy crop in Ghazipur, Chandauli

VARANASI: The flood not only made life difficult in various parts of the city, it also damaged crops in the rice-bowl of east UP - Ghazipur and Chandauli.

The actual loss in Varanasi division would be available only by September end after the completion of final estimation. However, preliminary estimation indicates that 25% of the seed sown in Ghazipur and Chandauli have gone waste.

On Friday, divisional commissioner CK Tiwari said, "government has ordered to prepare an estimate of crop loss in ratio of cultivation area and actual yield." The process would be used to settle claims of crop insurance and to decide the compensation to be provided to affected farmers. These initiatives would provide relief to farmers. However, there is no end to farmers' sufferings as experts and department concerned have not ruled out the possibility of Ganga and its tributaries rising once again before September end.

This year monsoon arrives four days earlier than its scheduled arrival on June 15. It led to four sessions of flood with Ganga crossing the danger mark thrice in the region. Buoyed by early monsoon, farmers went for early sowing of paddy crop in Kharif crop session. However, flood shattered their hopes of a good harvest. The commissioner said that though the water level had receded in Varanasi and Chandauli offering some relief, the situation remained grim in Ghazipur.

The Kharif crop is grown on 1,80,743 hectares of Ghazipur out of which 54,947 hectare was marooned while crop sown on 7,790 hectare in Chandauli was damaged. Apart from damaging the crops, flood marooned 338 of 715 flood-affected villages in Ghazipur. The number of damaged houses too is quite high in Chandauli and Ghazipur, where a large number of flood-victims have been forced to move out to safer places. The commissioner said that state relief commissioner had already inspected the division to take stock of the situation. However, date for disbursement of compensation to flood victims was yet to be announced.

In contrast, Varanasi has suffered heavy loss of public property and infrastructure. The initial estimate of losses caused by damaged roads, drains, sewage and pipelines is around Rs 60 crore. However, this figure can rise further after final estimation by month-end. The commissioner said that apart from the flood, damages caused by heavy rainfall that resulted in massive waterlogging in different parts of city too had been included in it. On the basis of the final estimate, funds would be sought from the government for repair works.

Courtesy : http://timesofindia.indiatimes.com/city/varanasi/Flood-ruins-paddy-crop-...

31
Aug

BHU scientists develop new variety of Basmati rice with higher yield

BHU scientists develop new variety of Basmati rice with higher yield
VARANASI: The agriculture scientists of Banaras Hindu University (BHU) have developed a Basmati rice variety (HUBR 10-9), which recorded 60% higher yield than TarawadiBasmati, 20% higher than PusaBasmati and 12% higher than Pusa 1121.

The 66th meeting of the Central Varietal Release Committee held at New Delhi recommended HUBR 10-9 (Malaviya Basmati Dhan 10-9) developed by BHU scientists for notification to the states of Punjab and Haryana. The scientists of the department of genetics and plant breeding, Institute of Agricultural Sciences, BHU, HK Jaiswal (senior rice breeder), RP Singh (senior rice breeder) and VK Srivastava, (senior rice agronomist) developed this variety. HUBR-10-9 possesses long aromatic fine grains.

Courtesy: http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-08-28/varanasi/41537672...

29
Aug

धान की बिक्री को लेकर किसान आशंकित

घोसी (मऊ) : धान का कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) जमा न होने से किसानों को गत वर्ष बेचे गए धान का भुगतान न मिल सका है। उधर एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) ने मानक के अनुसार चावल न होने से राइस मिलों से चावल लेने से इंकार कर चुकी है। मिलरों के विरुद्ध आरसी जारी है। तमाम मिलों का लाइसेंस निलंबित है। ऐसे में कब मिलेगा भुगतान कहा नहीं जा सकता है। इस वर्ष मिलर धान की कुटाई से अभी से तौबा करने की बात कर रहे हैं। जाहिर है कि इस बार धान की खरीद की राह में तमाम रोड़े होंगे। किसान भी इस समस्या को समझते हुए धान बेचने को लेकर आशंकित है।

जनपद में धान का बेहतर उत्पादन होता है। जनपद के किसानों से धान की खरीद हेतु लगभग चार दर्जन क्रय केंद्र स्थापित किए जाते हैं। इन केंद्रों पर क्रय धान को कुटाई हेतु विभिन्न संबद्ध राइस मिलों को भेजा जाता है। कुटाई के बाद प्राप्त मिलें चावल को सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) के रूप में एफसीआई गोदाम में पहुंचाती हैं। वर्ष 11-12 में एफसीआई का मानक ऐसा कि लगभग 40 राइस मिलों में सीएमआर (वह चावल जो केंद्रों से लिए गए धान की कुटाई के बाद देना आवश्यक है) के रूप में एक लाख पंद्रह हजार कुंतल चावल रिजेक्ट हो गया। गत वर्ष शासन ने बकाया सीएमआर चावल मूल्य के एक फीसदी राशि के समतुल्य बैंक गारंटी लेकर किसी तरह अनुबंध किया। गत वर्ष किसी तरह धान मिलों तक पहुंचा पर सीएमआर जमा करने के वक्त एफसीआई ने एक बार फिर मानक का चाबुक चलाया। हाल यह कि गत वर्ष चंद मिलें ही चावल जमा कर सकीं। उधर शासन ने अंतत: इन मिलरों के विरुद्ध आरसी जारी कर दी है। कुछ मिलों का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया है। अब खरीद के बाद कहां और कैसे होगी धान की कुटाई स्पष्ट नहीं है। राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष शंकर प्रसाद कहते हैं कि जिले की राइस मिलों में कुटाई के बाद प्राप्त चावल एफसीआई के मानक के अनुरूप नहीं होता है तो मिलर क्यों धान की कुटाई करें और आरसी का दंड भुगतें। इस स्थिति के बीच तमाम सवालों में अहम यह कि ऐसे में किसानों के धान की खरीद सरकारी क्रय केंद्र करेंगे या किसान खुले बाजार में सस्ते दाम धान बेचने को विवश होगा।

Courtesy: http://www.jagran.com/uttar-pradesh/mau-10681182.html

26
Aug

धान की रोपाई में लक्ष्य के करीब

रायबरेली, कार्यालय संवाददाता : जिलें में धान रोपाई का लक्ष्य 85 हजार हेक्टेयर मिला था। इसके सापेक्ष अब तक 95 प्रतिशत क्षेत्र में धान रोपाई का कृषि विभाग ने किया है । रुक-रुक हो रही वर्षा के कारण धान की सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। किसानों ने अगस्त माह तक धान रोपाई की है। यद्यपि अगस्त में लगने वाले धान में उत्पादन घट जाता है।

पानी की सुविधा वाले किसानो ने 20 जुलाई के पहले धान रोपाई का कार्य पूरा कर लिया था। लेकिन मंझोले व छोटे किसानो ने बारिश के बाद धान की नर्सरी डाली थी। फिर उसके तैयार होने का इंतजार करते रहे। इसके बाद रोपाई की। 31 जुलाई तक जिले भर में अधिकांश धान रोपाई का काम समाप्त हो गया। 15 अगस्त तक भी कई किसानों ने धान लगाया है।

जिला कृषि अधिकारी एसएन पांडेय ने दावा किया कि धान रोपाई का 95 प्रतिशत रोपाई का दावा किया है। पिछले साल लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई हुई थी। देर लगने वाले धान की पैदावार कम हो जाती है।

बिना डीएपी के रोपा धान

धान की रोपाई के लिए किसानों ने डीएपी महंगी होने के कारण कम प्रयोग की। कुछ किसानों ने इधर उधर से महंगें दामों पर डीएपी खरीद कर खेतों में डाली। तो कई किसानों ने एनपीके डालकर ही काम चलाया। महराजगंज, सेमरौता, सिंहपुर, बछरावां, हरचंदपुर, जगतपुर , ऊंचाहार के किसान यूरिया के लिए भटक रहे हैं।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/raebareli-10670668.html

1
Aug

पीले पड़ने लगे धान के पौधे

सुखपुरा (बलिया) : आषाढ़ बीत गया। सावन का पहला पखवारा भी बीतने को है बारिश जितना होना चाहिए उतना नहीं हुआ। कभी सावन के प्रारंभ में क्षेत्र के ताल तलैया, कुआं पानी से लबालब भर जाते थे। आज हालत यह है कि ताल तलैयों में पानी के स्थान पर केवल कीचड़ दिख रहा है। बारिश की कमी के चलते धान की फसल पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना से किसान काफी चिंतित हैं।

पानी के अभाव में पहले तो धान के बेहन ही सूखने लगे थे। किसी तरह पानी चलाकर किसानों ने धान की रोपाई की तो आज रोपे गए पौधे पीले पड़ने लगे हैं। खेतों में दरारे तक फटने लगी हैं। कहीं-कहीं तो खेतों में धान के पौधों की जगह घास ही घास दिखलाई पड़ रहा है। बिजली की अनियमित आपूर्ति व डीजल की महंगाई ने एक तो पहले ही किसानों की कमर तोड़कर रख दी है दूसरे मौसम भी किसानों के साथ धोखा ही दे रहा है। धान उत्पादक किसानों ने बताया 100 रुपए प्रति घंटे की दर पर पानी चलाकर धान की रोपाई तो किसी तरह कर ली गई लेकिन सूख रहे धान को बचाने की हिम्मत अब नहीं रह गई है। एक बीघा खेतों में सिंचाई के लिए 1200 से 1500 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं ऐसे में अब पाकेट जवाब दे रहा। क्षेत्र के नहरों में भी पानी का अभाव है। नहरों में पानी छोड़ा गया है लेकिन सुखपुरा व उसके समीप के गांवों तक पानी नहीं पहुंच रहा। कारण इसके पूर्व ही किसान पानी को घेर अपने खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के प्रमुख धान उत्पादक किसानों ने प्रदेश सरकार से इस क्षेत्र विशेष को सूखा ग्रस्त घोषित कर किसानों को राहत पहुंचाने की मांग की है।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/ballia-10610434.html

1
Aug

लक्ष्य से आगे निकली बासमती धान की बुआई

 जाब्यू, लखनऊ : समय से पहले झमाझम बरसात के चलते धान बुआई लक्ष्य से आगे निकल रही है। बुधवार को कृषि अनुसंधान परिषद सभागार में आयोजित फसल मौसम सतर्कता समूह की बैठक में खरीफ फसलों के आच्छादन आंकड़ों पर चर्चा की गई। महानिदेशक राजेंद्र कुमार ने बताया कि धान, मक्का, ज्वार व बाजरा फसलों की बुआई क्षेत्रफल अनुमान पूरा होने को है। फसल आच्छादन के लक्ष्य 93.33 लाख हेक्टयर के सापेक्ष 84.98 लाख हेक्टयर की पूर्ति हो चुकी है। बासमती धान की बुआई लक्ष्य से आगे निकल चुकी है। अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 5.91 लाख हेक्टयर के सापेक्ष 6.36 लाख हेक्टयर भूमि में बासमती सुगंधित धान की रोपाई हो चुकी है। इसी क्रम में अरहर, ज्वार, बाजरा व मक्का आदि की बुआई भी लक्ष्य के आसपास है। बुआई क्षेत्र बढ़ने की जानकारी को देखते हुए खरीफ का उत्पादन बढ़ने के आसार है।

बैठक में एकत्रित मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि आने वाले सप्ताह में प्रदेश के समस्त अंचलों में हल्की से मध्यम बरसात के आसार है लेकिन अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, बदायूं, गाजियाबाद और हापुड़ जिलों में भारी वर्षा के संकेत मिल रहे है। सब्जियों की फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए नीम का तेल इस्तेमाल करने की सिफारिश करते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को देर से धान की रोपाई करने के नुकसानों के बारे में बताया।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-10612602.html

1
Aug

Eighty per cent Rice transplanting complete in eastern UP; light rainfall

NEW DELHI (Commodity Online): Light rainfall has been received in Eastern regions of Uttar Pradesh state during past few days and transplanting of rice has been completed up to 66%. In eastern U.P. about 80% transplanting of rice has been completed.

Agricultural operations like transplanting of scented rice such as Type-3, Kalpana and basmati-370, hand weeding in transplanted/direct seeded rice, top dressing of nitrogen fertilizer, thinning in pigeon pea and sesamum, fertilizer application in sugarcane and maize and plantation of fruit trees are in progress. Low intensity of khaira in rice crop was noticed.

Courtesy : http://www.commodityonline.com/news/eighty-per-cent-rice-transplanting-c...

29
Jul

जिले में फैलेगी धान की खुशबू

सहारनपुर: समय से इंद्रदेव मेहरबान हुए। झमाझम बारिश से हालांकि जानमाल से सबका नुकसान हुआ, लेकिन धान की फसल के लिए अच्छी बारिश हुई है। रोपाई समय से होने के नाते कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इस बार धान की खुशबू चौतरफा फैलेगी। धान की अच्छी पैदावार होने की संभावना प्रबल हो गई है।

जिले में धान की पैदावार का मुख्य केंद्र तराई वाले क्षेत्र हैं। इसमें यमुना से लगते बेहट, सरसावा, नकुड़ व गंगोह मुख्य रूप से उपजाऊ होते हैं, मगर कई बार यमुना में पानी अधिक आ जाने के कारण धान की फसल बर्बाद भी हो जाती है, लेकिन इस साल जिले में धान की रोपाई से पहले और बाद में जिस तरह से बारिश हो रही है उसे देख अधिकांश किसानों ने धान को तवज्जो दी है। किसानों को उम्मीद है कि इस साल धान का दाम भी अच्छा रहेगा। यही कारण है कि बासमती धान अधिक लगाया गया है। यूं तो जिले का किसान हमेशा से ही गन्ने को प्राथमिकता पर रखता है। गत वर्ष जनपद में धान का औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 26.17 कुंतल रहा था। इसे देखते हुए ही इस बार यह लक्ष्य 27.38 कुंतल प्रति हेक्टेयर रखा गया है। किसानों के रुख को देखकर ही शासन से लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। गत वर्ष जनपद में धान का उत्पादन 141.428 मीट्रिक टन रहा था। इसे देखते हुए ही इस बार धान का लक्ष्य 150.77 मीट्रिक टन रखा गया है।

विगत वर्षों में यह रही स्थिति

मगर पिछले कई वर्षों से किसान गन्ने के साथ-साथ धान को भी बढ़ावा दे रहे हैं। यही कारण है कि जिले में धान का रकबा 50-55 हजार हेक्टेयर के बीच चला आ रहा है। वर्ष 2010 में किसानों ने 58 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई की थी। वर्ष 2011 में 55 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। वर्ष 2012 में 51 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई की गई थी। इस साल 55 हजार 58 हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 50 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूभाग पर धान की रोपाई की जा चुकी है। कृषि वैज्ञानिक डा. आइके कुशवाहा का कहना है कि यदि किसान अभी से धान फसल की सुरक्षा के उपाय करेंगे तो इस बार अच्छी फसल होगी।

जिले में धान पूर्ति हेक्टेयर

धान नर्सरी -3725

धान सुगंधित- 31050

धान शंकर -3690

धान अन्य - 14976

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/saharanpur-10598650.html

10
Jul

तकनीकी ढंग से हुई धान की रोपाई

आजमगढ़ : आत्मा योजना के प्रसार-सुधार कार्यक्रम अंतर्गत फार्म स्कूल के लालगंज विकास खंड की अचीवर ममता सिंह ग्राम मिर्जा आदमपुर द्वारा धान की लाइन में रोपाई तकनीकी ढंग से की गई।

जनसेवाश्रम की नारी किसान सहभागिता प्रमुख संध्या सिंह ने तकनीकी विशेषज्ञ किसानों के साथ लाइन में रोपाई के लाभ की व्यापक चर्चा की। साथ ही वैज्ञानिक खेती के लिए आगे की समयबद्ध गतिविधियों की जानकारी राजेश्वर सिंह ने दी। इस दौरान आत्मा के उप परियोजना निदेशक राकेश कुमार सिंह भी इस मौके पर उपस्थित थे। उन्होंने प्रशिक्षु किसानों को उपयोगी जानकारियां दी। इस अवसर पर अरुण सिंह, रामचंद्र यादव, श्याम नारायण, ममता सिंह सहित अनेक किसान उपस्थित थे। उनकी जिज्ञासाओं का समाधान और नई तकनीकी की जानकारियां दी गई। रोपाई श्रमिकों को भी प्रशिक्षित किया गया। कजरी गीत के साथ रोपाई के साथ रोचक वातावरण रहा।

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24
Jun

एसआरआई से बढ़ेगी धान की पैदावार

उत्तर प्रदेश  बदायूं : कृषि विभाग सिस्टम आफ राइस इंटेंसीफिकेशन (एसआरआई) पद्धति को बढ़ावा देगा। इस पद्धति से कम बीज, कम पानी, कम लागत में ज्यादा उत्पादन लिया जा सकता है।

धान की फसल के लिए सामान्यता किसान परंपरागत तरीका ही अपनाते हैं। इसमें बीज ज्यादा लगने के साथ ही लागत भी अधिक आती है। कृषि विभाग कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर दे रहा है। इसके लिए एसआरआई पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है। कोशिश यह है कि किसान वैज्ञानिक तरीके से खेती करके अपनी आय बढ़ाएं। डीडीए अनिल कुमार तिवारी ने बताया है कि इस पद्धति से धान की फसल के लिए एक हेक्टेयर के लिए 5-6 किलो बीज की आवश्यकता होती है। जबकि जबकि सामान्य तरीके से धान की पौध डालने पर तीस किलो बीज लगता है। एसआरआई तकनीक से खेती में 8-10 दिन की पौध की रोपाई होती है और परंपरागत खेती में 25-30 दिन की पौध लगाई जाती है। एसआरआई में पौधे की दूरी 25 सेमी रखते हुए एक वर्ग मीटर में 16 पौधे लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसमें नर्सरी तैयार करते समय सावधानी बरतना पड़ती है। इसके लिए खेत को विशेष तौर पर तैयार किया जाता है। इस पद्धति की एक खास बात यह है कि पौध की रोपाई करने के लिए खेत में पानी भरने की आवश्यकता नहीं है। खेत कीचड़नुमा होना चाहिए। यानि इससे पानी की बचत होती है।

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20
Jun

Flash Floods Damage Thousands of Hectares of Paddy Rice Land in North India.

Flash floods have devastated India’s northern states of Uttarakhand, Haryana and Uttar Pradesh, possibly damaging thousands of paddy rice land in the regions affected by heavy and incessant rainfall in the past two days.

Official estimates of the damage to paddy fields are awaited, but local sources say that mud and slush deposits reached up to 2 meters high in some areas and waters washed away houses and cattle of thousands of farmers. Those living along the banks of river Jamuna are the worst affected.

Aromatic rice is grown in Haryana, Uttarakhand and Uttar Pradesh, and officials have to step-up their efforts in rehabilitation of farmers and provide them with the necessary seeds and other inputs to avoid losses this year. Moreover, floods have worsened the labor scarcity problem in the affected states, said sources.

Most of the rice planting in North India is done in July-August, but flooding could increase field preparation work and delay planting this year. However, agriculture officials say that there is enough time to help farmers re-plant their fields and rice production losses would be minimal if the situation improves in the coming days.

Meanwhile, heavy rains damaged standing paddy crop in around 5,000 hectares in the Jeypore region of India’s eastern state of Odisha as well.

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7
Jun

खरीफ फसल के आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित

महराजगंज:जिले में खरीफ अभियान के तहत इस वर्ष कुल 167858 हेक्टेयर क्षेत्र में आच्छादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें सामान्य प्रजाति के धान हेतु 136.38 हेक्टेयर तथा शंकर प्रजाति के लिए 30520 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।

उक्त जानकारी देते हुए उपनिदेशक कृषि अविनाश चंद तिवारी ने बताया कि सुगंधित प्रजाति में बासमती धान की उत्पादन के लिए 13 सौ हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। उन्होने कहा कि शासन के द्वारा चावल की उत्पादकता हेतु 25.73 कुंतल प्रति हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जो विगत वर्ष 24.59 कुंतल प्रति हेक्टेयर से 1.14 कुंतल अधिक है। जबकि उत्पादकता का लक्ष्य 431916 मिट्रीक टन है। जबकि धान का कुल 32422 कुंतल बीज का वितरण लक्ष्य रखा गया है। जिसके सापेक्ष सामान्य प्रमाणित बीज 26250 कुंतल तथा शंकर प्रजाति का 6172 कुंतल का है। लक्ष्य के सापेक्ष 88 प्रतिशत बीज उपलब्ध है। उन्होने बताया कि प्रमाणित बीज भारत सरकार तथा राज्य सरकार अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा मक्का, मूंगफली 1068 हेक्टेयर, अरहर 446 हेक्टयर, सनई 15 सौ हेक्टेयर उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा हरित क्रांति योजना के तहत सात सौ हेक्टेयर धान के प्रदर्शन का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना में शामिल होने वाले किसानों को बीज पर दो हजार रूपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाएगा। लक्ष्य के शत प्रतिशत प्राप्ति हेतु विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है।

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27
May

धान की उन्नत प्रजातियों का उपयोग बढ़ाएं

 जाब्यू, लखनऊ : केंद्रीय कृषि सचिव आशीष बहुगुणा के नेतृत्व शुक्रवार को पहुंची टीम ने खरीफ फसलों की तैयारियों का जायजा लिया और धान की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत प्रजाति के बीज का उपयोग बढ़ाने की सीख दी। इसके लिए कटक के कृषि वैज्ञानिकों से मंत्रणा कर क्षेत्रीय मांग के अनुरूप प्रजाति के बीजों का चयन करने की सलाह दी।

कृषि भवन के सभागार में दो सत्रों में चली चर्चा में प्रदेश के कृषि निवेश प्रबंधन को सराहा गया। कृषि निदेशक डीएम सिंह ने कृषि निवेश प्रबंधन कलेन्डर के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा खरीफ फसलों के बीज, खाद व कीटनाशक दवाओं की समय से उपलब्धता सुनिश्चित होने के बारे में जानकारी दी। किसानों को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा करने का आश्वासन भी दिया।

अपने संबोधन में केंद्रीय सचिव आशीष बहुगुणा ने कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रियता व उपयोगिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया। किसानों को कृषि तकनीक की नवीनतम जानकारी उनकी भाषा में ही उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव कृषि देवाशीष पंडा ने नई कृषि नीति की जानकारी देते हुए सरकार की विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति के दूसरे चरण की उपलब्धियां गिनायी। वहीं पश्चिमी उप्र के लिए तैयार विशेष योजना पर भी बैठक में चर्चा की गई।

इस मौके पर केंद्रीय कृषि संयुक्त सचिव मुकेश खुल्लर, आयुक्त जेएस संधु व सीपी श्रीवास्तव भी मौजूद रहे।

Courtesy : http://www.jagran.com/uttar-pradesh/lucknow-city-10422855.html

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