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10
Oct

Mat nursery मैट नर्सरी

यांत्रिक विधि से किया जाने वाला धान-प्रतिरोपण (सेल्फ-प्रोपेल्ड राइस ट्रांसप्लांटर या हस्त चालित ट्रांसप्लांटर द्वारा) बिचड़े की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

a.आवश्यक सामग्री: पॉलिथीन शीट, लकड़ी या लोहे का फ्रेम, अच्छी तरह तैयार कर महीन की गई मिट्टी, एफवायएम, अंकुरित और उपचारित धान के बीज।

b.बीज की तैयारी :  बीज को अनुशंसित तरीके से तैयार किया जाता है और जूट के बोरे में बंद कर एक रात तक पानी में भिंगोया जाता है। इसके बाद बीज की बोरी को पानी से निकाल कर खुली हवा में रखा जाता है ताकि 1-2 मिमी लंबे अंकुर निकल आएं। बीजों के अगर ढेले बनें हों तो उन्हें तोड़ लेना चाहिए ताकि बीजों का वितरण समान रूप से हो सके।

c.बिचड़ों के लिए प्रयुक्त खेत की माप: बिचड़े वाला खेत बिल्कुल समतल और घास या खर-पतवार से बिल्कुल मुक्त होना चाहिए। 16 x 1 मी. की वस्तविक बुआई क्षेत्रफल वाली तीन क्यार

10
Oct

जल प्रबंधन

सली चावल की स्थिति में मध्यम तथा भारी मिट्टी में जमे जल के खत्म होने के 3 दिनों के बाद 5 सेमी तक सींचाई जल डालना चाहिए। 

10
Oct

मुख्य खेत में प्रतिरोपण

प्रति टीला बिचड़ों की संख्या :i) सामान्य प्रतिरोपण (जुलाई- अगस्त) के लिए 2-3 बिचड़े (July – August)ii) सितम्बर में बुआई के लिए 4-6 बिचड़े। 

रोपण की गहराई::  रोपण की गहराई 4-5 सेमी की होनी चाहिए तथा यह सभी प्रजातियों के लिए लागू करना चाहिए। 

इंटरकल्चर :

i). प्रतिरोपण के बाद 20 तथा 40 दिनों के अंतराल पर पैडी वीडर से दो निराई-गुड़ाई देनी चाहिए।  

ii) खर-पतवार नाशी के नियंत्रण के लिए:  रोपण के 3 दिनों के बाद प्रेटिलैक्लर @ 0.75 kg/ha या ऐनिलोफोस  @ 0.4 kg/ha का इस्तेमाल करना चाहिए।  

 

 

 

10
Oct

खाद तथा उर्वरक

खेत की तैयारी के समय अच्छी तरह से सड़े FYM या कम्पोस्ट @ 10t/ha का इस्तेमाल करना चाहिए। इसके अलावा मध्यम उर्वरता वाले इलाके में निम्न पोषक तत्त्वों का भी प्रयोग करना चाहिए। 

कमजोर मिट्टी की स्थिति में, उर्वरकों की दर 60:30:30 kg/ha क्रमश N, P2O5 तथा K2O के हिसाब से बढ़ानी चाहिए। रॉक फॉसफेट के साथ डायामोनियम फॉसफेट (DAP) या सलाह के मुताबिक अकेले भी (40:20:20) इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। बराक वैली ज़ोन में मोनो क्रॉप सली वाले इलाके में सली चावल के रोपण से पहले ढैंचा का रोपण किया जाता है, जो एक बेहतर हरा खाद माना जाता है। सली चावल के  HYV  के लिए NPK का आदर्श ख़ुराक 60:20:40 तथा पहाड़ी क्षेत्रों के निम्न और मध्यम उर्वरता वर्ग की मिट्टी में 60:20:20 का अनुपात होता है।  

उर्वरकों के इस्तेमाल का समय: a) छोटी अवधि की प्रजातियों के लिए 100-120 दिनों की अवधि। 

i) यूरिया की आधी मात्रा तथा सुपर फॉस्फेट की पूर

10
Oct

भूमि की तैयारी

1. बैलों द्वारा खींचे जाने वाले मॉडिफायड हेलिकल ब्लेड पड्लर द्वारा जमीन की तैयारी: मॉडिफायड हेलिकल ब्लेड पड्लर बैलों द्वारा कीचड़ के निर्माण का एक उन्नत उपकरण है।     

2. इस औजार का वजन 26 किग्रा होता है, तथा यह एक बार में 50 सेमी की कतार को कवर करता है। इसे असम में पाए जाने वाले सभी प्रकार के बैलों द्वारा खींचा जा सकता है। 

3. अच्छी गुणवत्ता की कीचड़ युक्त मिट्टी के निर्माण के लिए दो बार पडलर कार्य तथा एक बाद मोल्ड बोर्ड प्लो का इस्तेमाल करना चाहिए। पडलर से प्रतिदिन 2 से 2.5 बीघा जमीन में कीचड़ बनाया जा सकता है।  

4. मॉडिफायड हेलिकल ब्लेड पड्लर के लिए कुछ ध्यान रखने योग्य बातें: अच्छी तरह से जुताई किए खेत में पडलर चलाने के समय पर्याप्त पानी होना चाहिए।  

5. फाल की धार को भोथरा होने से बचाने के लिए उसे कभी पत्थर या कड़ी जमीन पर नहीं चलाना चाहिए। कार्य खत्म होने

1. ज्योंही एक या दो ब्लास्ट स्पॉट दिखाई पड़े कार्बेंडाजिम @ 1g/लि. या एडिफेंफॉस @ 1 ml/lit जल के साथ स्प्रे किया जाता है। 

2. रूट नॉट नेमाटोड:  फ्युरॉडॉन 3 G ग्रेनुल्स @ 3 g/m2 रूट नॉट नेमाटोड के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। 

3. बिचड़ों की जड़ के लिए उपचार: जमीन से उखड़े बिचड़े को पानी से धोया जाता है  और फिर उनके जड़ों के हिस्सों को 0.02% क्लोरपाइरोफोस (1 ml/lit जल) तथा 1% यूरिया (10g/lit जल) में 3 घंटे तक डुबो कर रखना चाहिए। इससे स्टेम बोरर, गॉल मिज तथा होपर्स से बिचड़ों को सुरक्षा मिलती है। इसकी बजाए कार्बोफ्युरॉन @ 3g/sq.m या फॉरेट अथवा डायजिनोन 1g/sq.m की मात्रा को सीड बेड में बिचड़ों की अपरूटिंग से 5 से 7 दिन पहले इस्तेमाल करना चाहिए या बिचड़ों के उखड़ने से 5-7 दिन पहले क्लोरपाइरिफोस 20 EC @0.02%  की मात्रा का इस्तेमाल करना चाहिए। 

 

 

10
Oct

नर्सरी बेड में जल प्रबंधन

1. सींचाई जल को हल की जुताई वाली कतारों में भर कर रखना चाहिए ताकि नर्सरी बेड की ऊपरी मिट्टी में नमी बनी रहे।

2. हालांकि अपरूटिंग से कम से कम 2-3 दिन पहले स्थिर पानी का 2 से 3 सेमी के स्तर को बनाए रखना चाहिए।

10
Oct

बीज दर

1. अच्छी तरह से अंकुरित बीज को 650 ग्रा से 1 किग्रा की दर से बुआई करना चाहिए, जो दाने के आकार पर निर्भर करता है।

2. मुख्य खेत के एक हेक्टेयर भूमि में 40 से 45 किग्रा बीज प्रतिरोपण की आवश्यकता होती है।

प्रत्येक बीज क्यारी में 20 से 30 किग्रा गोबर/कंपोस्ट, 80 ग्रा. यूरिया, 80 ग्रा एसएसपी तथा 40 ग्रा एमओपी को मिट्टी में मिश्रित कर इस्तेमाल करना चाहिए।

10
Oct

बीजों का विकास

बीजों की क्यारी का निर्माण: भूमि को अच्छी तरह से चौरस कर 10 मी लंबाई तथा 1.25 मी चौड़ाई के टुकड़े का निर्माण करना चाहिए, कतारों के बीच 30 सेमी का अंतराल होना चाहिए। 

क्यारी की लंबाई सुविधानुसार बदल सकती है। 

 

 

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