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1. राइस हॉर्न कैटरपिलर (Melanitis leda ismene) चावल की फसल का एक कम गंभीर कीट है। 

2. मादा वयस्क गहरे भूरे रंग की तितली होती है जो धान के पत्तियों पर सफेद रंग के अंडे देती हैं।

3. कैटरपिलर का रंग हरा होता है। यह रात के समय पत्तियां खाता है और दिन के समय निष्क्रिय पड़ा रहता है।

4. प्यूपा की अवस्था पत्तियों पर ही संपन्न होती है। निम्नभूमि चावल की फसल में इस कीट द्वारा फसल को उसकी वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था में क्षति पहुंचाई जाती है।

 

 

10
Oct

Root aphids रूट ऐफिड

1. रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdommalls and tetraneura  

nigriabdominalis) को पहली बार भारत में पहचाना गया था जिससे चावल की फसल को इस संपूर्ण क्षेत्र की उच्च्भूमि अवस्था में भारी क्षति होती है (Sbylesha et a/. , 2006)। 

2. रूट ऐफिड की दो प्रजातियां काले रूट ऐफिड (Rhopalosiphum rufiabdominalis) और भूरे रूट ऐफिड (Tetraneura nigriabdominalis) उच्चभूमि चावल के पौधे की जड़ों को क्षति पहुंचाती हैं। 

3. भूरा रूट ऐफिड काले रूट ऐफिड की तुलना में अधिक गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। 48 DAS से प्रकोप का आरंभ होता है आगत निम्फ 83 DAS तक बढ़ना जारी रखते हैं और इसके बाद 90 DAS तक घटते हैं।

4. ऐफिड धान के पौधे की जड़ों का रस पीते हैं। इसकारण प्रभावित पौधे की पत्तियां पीली पड़कर मुरझाने लगती हैं और फलस्वरूप पौधे का विकास रुक जाता है। इनके प्रकोप के कारण पौधे में कल्ले कम निकलते हैं और उपज कम होती है।  

 

 

10
Oct

Gundhi bug गन्धी बग

1. गन्धी बग (Leptocorisa oratorious) उच्च भूमि और निम्न भूमि

की चावल की फसल को आक्रांत करने वाला सबसे गंभीर किस्म का कीट है।  

2. निम्फ और वयस्क, दोनों, विकसित हो रहे दानों का रस पी जाते हैं जिस कारण फसल में खोखले दाने की समस्या होती है।  

3. वयस्क की तुलना में निम्फ अधिक हानिकारक होते हैं। ये कीट फसल को 20-40% तक नुकसान पहुंचाते हैं।

 

 

1. राइस ग्रीन सेमीलूपर (Naranga aenescens) चावल की फसल

को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कीट है। 

2. यह 30-40 दिन के हो चुकी उच्चभूमि चावल की फसल पर हमला करता है और 65 दिनों तक इसे आक्रांत करना जारी रखता है। लार्वा मुख्य रूप से पत्तों को खाता है और उसे नष्ट कर देता है। 

3. खेत की अवस्था में  Apanteles sp. द्वारा ग्रीन सेमीलूपर को 80% तक परजीवीकृत किया जाता है।

 

 

1. राइस ईयर कटिंग कैटरपिलर (Mythimna separata) का 1982 में असम में भारी प्रकोप हुआ था और फिर यह मणिपुर, अरुणाचलप्रदेश, मेघालय और त्रिपुरा में फैला।

2. इस क्षेत्र में यह चावल के फसल में लगने वाला एक महत्वपूर्ण कीट है। इसके प्रकोप से खड़ी फसल शत-प्रतिशत नष्ट हो सकती है। 

3. लार्वा धान की बाली के शीर्ष को काट कर उसे पौधे के तने के पीछे डाल देता है जो देखने में ऐसा लगता है मानो किसी जानवर द्वारा चर लिया गया हो। यह सीधे फसल की उपज को प्रभावित करता है।

 

 

 

10
Oct

Rice Hispa राइस हिस्पा

1. राइस हिस्पा (Dicladispa armigera) एक नीले-काले रंग का बीटल है

जो स्पाइन से ढका होता है। लार्वा द्वारा पत्तों में लंबे सुरंग बनाए जाते हैं जबकि वयस्क पत्तियों से क्लोरोफिल खुरच कर हटा दिया जाता है।   

2. प्रभावित पत्तियां सफेद जालीदार हो जाती हैं और आखिरकार सूख जाती हैं। पत्र फलक की ऊपरी सतह के खुरच जाने से निचला एपिडर्मिस सफेद लकीर की तरह हो जाता है और यह मध्यशिरा के समांतर होता है। 

3. पत्ते के ऊतक से होकर लार्वा द्वारा सुरंग बना देने से अनियमित अर्धपारदर्शी धब्बे बनते हैं जो पत्रशिरा के समांतर होते हैं। क्षतिग्रस्त पत्ते मुरझा जाते हैं और इनकी सफेदी से धान का खेत सफेद दिखने लगता है। अधिक गंभीर प्रकोप होने पर फसल जला हुई दिखने लगती है।  

4. क्षति की गंभीरता का संबंध इस तथ्य से है कि पौधे की किस अवस्था में इस कीट का आक्रमण हुआ है। लार्वा पत्रावरण के बीच से होकर न

10
Oct

Rice gall midge राइस गॉलमिज़

1. गॉल मिज़ (Orseolia oryzae) मणिपुर में धान की फसल में

लगने वाला एक बहुत ही हानिकर कीट है और यह संपूर्ण क्षेत्र में एक सामान्य कीट के रूप में पाया जाता है। 

2. चावल की फसल में कल्ले फूटने के समय इसका प्रकोप उच्च और निम्न दोनों प्रकार की भूमियों में होता है। असम के गहरे पानी वाले क्षेत्रों में भी इसके पाए जाने की पुष्टि हुई है।

3. मेघाच्छन्न आकाश या बारिस वाले मौसम में इसकी संख्या तेजी से बढ़ती है। अधिक संख्या में कल्ले निकलने वाली धान की प्रजाति और गहन प्रबंधन विधि अपनाए जाने और निम्न परजीवीकरण की स्थितियां भी इसके लिए अनुकूल होती है।

4. वयस्क कीट रात्रि में सक्रिय होते हैं और उन्हें लाइट ट्रैप की मदद से सरलतापूर्वक पकड़ा जा सकता है। प्रकट होने के साथ ही उनके जोड़े समागम  करते हैं। प्रत्येक मादा मिज केवल एक बार समागम करती है। चार दिनों के अपने जीवन काल में ये 100-200 तक

10
Oct

Rice Thrips राइस थ्राइप्स

1. थ्राइप्स के निम्फ (शिशुकीट) और वयस्क दोनों ही कोमल पत्तियों

के रस पीकर जीते हैं।

2. प्रभावित पौधे के पत्तों के अग्र भाग मुर्झाने लगता है और मुड़ जाता है। पत्तों के इन्हीं मोड़ों में थ्राइप्स रहते हैं।

3. सिक्किम में और त्रिपुरा, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर एवं अरुणाचल प्रदेश के झूम क्षेत्रों में पाए जाने वाला  यह एक गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला कीट है।  

 

10
Oct

Rice Armyworm राइस आर्मीवर्म

1. आर्मी वर्म (Spodoptera mauritia) मेघालय के जोवई जिले के उमरैयांग घाटी, मणिपुर और त्रिपुरा राज्यों घाटी क्षेत्र में चावल की फसल में तेजी से फैलने वाला कीट है।

2. कैटरपिलर पत्ते खाकर जीते हैं और फसल पर इनके गंभीर प्रकोप होने की स्थिति में बिचड़े और मुख्य फसल वाले संपूर्ण खेत नष्ट होकर इस तरह दिखते हैं मानो वे जानवरों के द्वारा चर लिए गए हों।    

3. रात के समय लार्वा बड़ी तेजी से पत्तों को खाते हैं और दिन के समय मिट्टी के छिद्रों और दरारों में छिप जाते हैं। 

 

10
Oct

Rice Caseworm राइस केसवर्म

1. केस वर्म (Nymphula depunctalis) उत्तर पूर्व के बहुत से इलाकों में

पाया जाने वाला गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला कीट है।

2. वयस्क केस वर्म 6 मिमी लंबे होते हैं और इनके डैनों का फैलाव 15 मिमी होता है। हरे रंग के पतले कैटरपिलर 1.25 सेमी लंबे पत्ते के टुकड़े काटते हैं और इनसे नलिकाकार सरंचनाओं का निर्माण करते हैं जिन्हें खाकर वे एक से दूसरे पौधे पर जाते हैं। अधिक क्षति की स्थिति में पत्ते कंकलीय रूप में परिणत हो जाते हैं और उनका रंग सफेद हो जाता है।

 

 

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