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किस्म का नाम – भालुम 1

किस्म का नाम – भालुम 1

1. किस्म की मुख्य विशेषताएं: मध्यम अवधि की, ब्लास्ट के प्रति उच्च प्रतिरोधी मध्यम-ऊंचाई के क्षेत्रों की ऊपरी भूमि के लिये किस्म।

2. जारीकरण का वर्ष: 2002

3. पैदावार (टन/हेक्टेयर): 3.5 – 3.8

4. बीज उत्पादन की स्थिति: बीज उत्पादन श्रृंखला में

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एनईएच मेघा चावल 2

एनईएच मेघा चावल 2

1. यह पुसा 33 पूसा और खोनोरुल्लो के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के लिए आईसीएआर शोध परिसर, उमिअम, मेघालय में ब्रीड की गई है।

2. यह एक अर्द्ध लंबी किस्म है (100 सेमी) जिसके पौधे के भाग हरे पौधे और सुगठित तथा अच्छी तरह से बाहर निकले हुए पैनिकल्स (23.0 सेमी) होते हैं। इसके दाने मध्यम मोटे (22-23 ग्राम/1000 दाने) होते हैं जिनके लाल रंग के खोल होते हैं।

3. इसे मेघालय, मिजोरम और नगालैंड के उच्च ऊंचाई क्षेत्रों (औसत समुद्र तल से 1500 मीटर ऊंचाई से अधिक) के वर्षा आधारित तराई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनुशंसित किया गया है।

4. इसे जुलाई के दूसरे सप्ताह तक प्रत्यारोपित किया जा सकता है। यह एक लंबी अवधि की किस्म है जिसे परिपक्व होने में 160 दिन लगते हैं और पैदावार 3.0-3.5 टन/हेक्टेयर होती है। यह स्टेम बोरर व ब्लास्ट के प्रति सहिष्णु है।

5. यह उच्च लौह मात्रा को बर्दाश्त क

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एनईएच मेघा चावल 1

एनईएच मेघा चावल 1

1. यह पुसा 33 पूसा और खोनोरुल्लो के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के लिए आईसीएआर शोध परिसर, उमिअम, मेघालय में ब्रीड की गई है। यह एक अर्द्ध लंबी किस्म है (100 सेमी) जिसके पौधे के भाग हरे पौधे और सुगठित तथा अच्छी तरह से बाहर निकले हुए पैनिकल्स (23.5 सेमी) होते हैं।

2. इसके दाने मध्यम मोटे (23-24 ग्राम/1000 दाने) होते हैं जिनके लाल रंग के खोल होते हैं। इसे मेघालय, मिजोरम और नगालैंड के उच्च ऊंचाई क्षेत्रों (औसत समुद्र तल से 1500 मीटर ऊंचाई से अधिक) के वर्षा आधारित तराई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनुशंसित किया गया है।

3. इसे जुलाई के दूसरे सप्ताह तक प्रत्यारोपित किया जा सकता है। यह एक लंबी अवधि की किस्म है जिसे परिपक्व होने में 165 दिन लगते हैं और पैदावार 3.0-3.5 टन/हेक्टेयर होती है।

4. यह स्टेम बोरर व ब्लास्ट के प्रति सहिष्णु है। यह उच्च लौह मात्रा को बर्दाश्त कर सक

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खोनोरुल्लो

खोनोरुल्लो

1. यह स्थानीय जर्मप्लाज्म से चयनित है। यह एक ऊंची किस्म है (120-130 सेमी) जिसके पौधे के हिस्से हरे और बाहर निकले हुए पैनिकल्स होते हैं। इसके दाने छोटे व मोटे (23-25 ग्राम/1000 दाने) होते हैं जिसका लाल रंग का खोल होता है जो मिलिंग के बाद सफेद हो जाता है।

2. यह मेघालय और नगालैंड के उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों (समुद्र तल से औसत ऊंचाई 1500 मीटर से अधिक) के वर्षा आधारित तराई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अनुशंसित किया जाता है।

3. यह एक लंबी अवधि की किस्म है और इसे परिपक्व होने में 140-145 दिन लगते हैं तथा पैदावार 2.3-2.5 टन/हेक्टेयर होती है। यह स्टेम बोरर, ब्लास्ट व आवरण की सडन के प्रति सहिष्णु है।

4. यह प्रजनन चरण में कम तापमान के प्रति सहिष्णु है और कम सौर विकिरण के लिए सहनशील है। यह राज्य किस्म जारीकरण समिति द्वारा जारी किया गया है।

उच्च ऊंचाई के क्षेत्रों के लिए ठंड के प्रति सहिष्णु किस्में

1. उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाया जाने वाला चावल फूल लगने और पकने के चरण में कम तापमान का सामना करता है जो पैनिकल अधूरे निकलने, अतुल्यकालिक फूल लगने और खराब बीज सेटिंग का कारण बनता है जो उपज के नुकसान के रूप में दिखाई देता है।

2. आधुनिक उच्च उपज इंडिका चावल की किस्मों ने चावल उगाने के इन पारंपरिक क्षेत्रों में तापमान के प्रति उनकी संवेदनशीलता के कारण प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं दिखाया है।

3. इसके विपरीत, शीतोष्ण जापोनिका चावल की किस्में, ठंड के प्रति उच्च सहिष्णुता रखती हैं और इसलिए वे प्रत्यक्ष परिचय के लिए अच्छी उम्मीदवार प्रतीत होती हैं।

4. हालांकि, इन क्षेत्रों में शीतोष्ण जापोनिका चावल का प्रत्यक्ष परिचय, छाया के प्रति एक संयुक्त सहनशीलता की विरली आवश्यकता की वजह से सफल नहीं हुआ।

5. इसल

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आरसी मनिफोउ 7

आरसी मनिफोउ 7

1.यह गामा किरण (30 Kr) के विकिरण के बाद पुन्शी से व्युत्पन्न एक उत्परिवर्ती कल्चर है और एनईएच क्षेत्र के लिए आईसीएआर रिसर्च परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (100 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 30 सेमी लम्बाई के लम्बे और अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल्स होते हैं। इसके दाने लम्बे व पतले (25.0 ग्राम/1000 दाने), सफेद खोल के साथ होते हैं।

3. इसे मणिपुर में खरीफ के दौरान मध्यम से उच्च उर्वरता की मिट्टी में सिंचित/जलभराव (5-15 सेमी) की निचली ज़मीन में, पूर्व से मध्यम बुवाई व पूर्व से विलम्बित रोपण के लिए अनुशंसित किया गया है।

4. यह 130-135 दिन में परिपक्व हो जाता है व 5.0 टन/हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मामूली प्रतिरोधी है। यह ब्लास्ट व बीएलबी के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। यह अस्थायी बाढ के प्

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आरसी मनिफोउ 5

आरसी मनिफोउ 5

1.यह कलिंग 2 व पल्मन के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (96 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 18-20 सेमी लम्बाई के सघन, अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल होते हैं। इसके दाने मध्यम (23.0 ग्राम/1000 दाने) व सफेद खोल के साथ अर्ध पारदर्शी होते हैं।

3. इसे मणिपुर निचली भूमि के मध्य-ऊंचाई के क्षेत्रों में पूर्व खरीफ (फरवरी में बोयी जानी वाली) और मुख्य खरीफ (जून में बोयी जानी वाली) के दौरान लगाने के लिए अनुशंसित किया गया है।

4. यह लघु अवधि की किस्म है और खरीफ में 105-110 दिन में तथा पूर्व-खरीफ में 115-120 दिन में परिपक्व हो जाता है। यह 4.5-5.0 टन/हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

5. यह पूर्व-खरीफ में ब्लास्ट से बच जाता है अन्यथा यह इस र

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आरसी मनिफोउ 4

आरसी मनिफोउ 4

1.यह कलिंग 2 व पल्मन के बीच क्रॉस से चयनित है और एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (88 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और 19-22 सेमी लम्बाई के सघन, अच्छी तरह से बाहर निकले पैनिकल होते हैं। इसके दाने मध्यम बारीक (22.3 ग्राम/1000 दाने) व सफेद खोल के साथ अर्ध पारदर्शी होते हैं।

3. इसे मणिपुर निचली भूमि के मध्य-ऊंचाई के क्षेत्रों में पूर्व खरीफ (फरवरी में बोयी जानी वाली) और मुख्य खरीफ (जून में बोयी जानी वाली) के दौरान लगाने के लिए अनुशंसित किया गया है। यह लघु अवधि की किस्म है और खरीफ में 100-105 दिन में तथा पूर्व-खरीफ में 110-115 दिन में परिपक्व हो जाता है।

4. यह 4.5-5.0 टन/हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। यह पूर्व-खरीफ में ब्लास्ट से बच जाता है अन्यथा यह इ

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लुम्प्पाह १

लुम्प्पाह १

1.यह क्रॉस आइआर29 x न्गोबा से चयनित है और एनईएच क्षेत्र, उमिअम, मेघालय के आइसीएआर शोध परिसर में ब्रीड किया गया है। यह अर्द्ध बौना किस्म (80-85 सेमी) है जिसके पत्ते हरे, मध्यम पैनिकल (20.7 सेमी) होते हैं जो अच्छी तरह से बाहर निकले होते हैं।

2. इसके दाने लम्बे व मोटे (28.5 ग्राम/1000 दाने), सफेद खोल के साथ होते हैं जो केन्द्र में चॉक अपारदर्शी होते हैं। यह मेघालय के मध्य-ऊंचाई की निचली पारस्थितिकी के लिए खरीफ के दौरान जून-जुलाई में बुवाई के लिए अनुशंसित है।

3. यह बोरो फसल के रूप में भी उगाया जा सकता है। यह खरीफ में 125-130 दिन और बोरो मौसम में 155-165 दिन में परिपक्व हो जाता है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है। यह लीफ व नेक ब्लास्ट के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

4. यह अस्थायी बाढ व लौह के मध्यम विषैलेपन के प्रति सहिष्णु है। इसे 2002 में मेघालय राज्य किस्म जारीकरण

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लुन्ग्निलाफोऊ

लुन्ग्निलाफोऊ

1.यह क्रॉस आइआर x प्रसाद की संतति है एनईएच क्षेत्र के आइसीएआर शोध परिसर, मणिपुर केन्द्र, इम्फाल में ब्रीड किया गया है।

2. यह अर्द्ध बौना किस्म (100 सेमी) है जिसके पौधे के हिस्से हरे होते हैं और पत्ती के आवरण पर एंथोसायनिन के धब्बे होते हैं। इसके पैनिकल लम्बे होते हैं (26 सेमी) जो अच्छी तरह से बाहर निकले, विपुल मात्रा में, गुच्छों में होते हैं।

3. इसके दाने लम्बे व पतले (27 ग्राम/1000 दाने), सफेद खोल के साथ होते हैं जो अर्ध पारदर्शी व गैर सुगन्धित होते हैं। इसे मणिपुर में खरीफ के दौरान मध्यम से उच्च उर्वरता की मिट्टी में घाटी की सिंचित भूमि पर पूर्व से मध्यम बुवाई व पूर्व से विलम्बित रोपण के लिए अनुशंसित किया गया है।

4. यह 120-125 दिन में परिपक्व हो जाता है व 6.0-6.5 टन/हेक्टेयर पैदावार देता है। यह स्टेम बोरर व गॉल मिज के प्रति मामूली प्रतिरोधी है। यह ब्लास्ट व बीएलबी

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