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05
Sep

समन्वित कीट प्रबंधन: मणिपुर

• योजना का नाम : समन्वित कीट प्रबंधन • प्रायोजक : केन्द्र सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : केंद्र द्वारा 100% प्रायोजित • विवरण : इस कार्यक्रम के तहत , रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैव कीटनाशकों और जैव एजेंटों के उपयोग पर जोर दिया जाता है। आईपीएम के तहत कवर किए गए कार्यक्रम के प्रमुख घटक हैं: i. फार्मर्स फील्ड स्कूल, ii. जैव कीटनाशक पर सब्सिडी • लाभार्थी : व्यक्तिगत, परिवार, समुदाय, महिलाएं, अन्य • अन्य लाभार्थी : अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग लाभ • लाभ के प्रकार : सब्सिडी • विवरण : इस योजना के तहत पौध संरक्षण उपकरण और जैव कीटनाशकों सहित विभिन्न घटकों पर सब्सिडी उपलब्ध है। सब्सिडी आईपीएम प्रदर्शनों पर भी उपलब्ध है। प्रति किसान या प्रति गतिविधि सब्सिडी लागत के 25% या वर्तमान में योजना के लिए अनुमोदित सब्सिडी के स्तर, जो भी कम हो, से अधिक नहीं होनी चाहिए
• योजना का नाम : कृषि फार्मों का आधुनिकीकरण • प्रायोजक : राज्य सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : कार्य योजना का परिव्यय राज्यों द्वारा साझा होगा • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण : कृषि फार्मों के आधुनिकीकरण का मतलब है मशीनरी, औज़ार, उपकरण आदि को बेहतर बनाना और विभागीय खेतों में बेहतर प्रौद्योगिकी के विभिन्न परीक्षणों का संचालन करना। • लाभार्थी : अन्य • अन्य लाभार्थी : विभाग, किसान लाभ • लाभ के प्रकार : सामग्री • विवरण : किसानों की सभी श्रेणियां • पात्रता के मानक : लाभार्थियों का चयन जिला कृषि अधिकारी की सिफारिश केमाध्यम से किया जाता है। योजना की वैधता • आरम्भ तिथि : 01 / 02 / 2001 • वैधता तिथि : 31 / 07 / 2008
• योजना का नाम : कीट निगरानी और प्रबंधन • प्रायोजक : राज्य सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : कार्य योजना का परिव्यय राज्यों द्वारा साझा होगा • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण : कीट निगरानी और प्रबंधन का लक्ष्य है दस्ते केबुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना और कीट तथा रोग सर्वेक्षण का उचित आयोजन करना ऐर उस घटना का पूर्वानुमान करना जब यह न्यूनतम इच्छित आर्थि स्तर से ऊपर चला जाता है तथा फलस्वरूप पूरे राज्य में उत्पादन में वृद्धि होती है। • लाभार्थी : समुदाय, अन्य • अन्य लाभार्थी : किसान लाभ • लाभ के प्रकार : सामग्री • विवरण : कीट निगरानी और प्रबंधन योजना के तहत राज्य कृषि विभाग, मणिपुर घाटी के साथ-साथ पहाड़ी में प्रभावी नियंत्रण के लिए किसानों को समय पर पौध संरक्षण सुविधाओं को प्रदान करने हेतु मोबाइल दस्ते लागू करता है। • पात्रता के मानक : किसान की सभी श्रेणियां • किस

• योजना का नाम : एकाधिक फसल को लोकप्रिय बनाना

• प्रायोजक : राज्य सरकार

• वित्तपोषण का पैटर्न : कार्य योजना का परिव्यय राज्य सरकार द्वारा साझा होगा

• मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग

• विवरण : यह योजना राज्य के विभिन्न जिलों में प्रति इकाई क्षेत्र में उत्पादन और उत्पादकता वृद्धि के लिए लागू की गई है। इस योजना के तहत कृषि विभाग कृषि आपरेशन के तहत क्षेत्र के विस्तार और एकाधिक फसल के साथ औसत उपज में वृद्धि कर कुल उत्पादन व उत्पादकता बढाने और कई जोड़े फसल को विस्तार देने के माध्यम सेउत्पादन और मुख्य रूप से प्रदर्शन पर आधारित विस्तारित सेवाओं के ज़रिए किसानों को प्रेरित करने का प्रयास करती है।

• लाभार्थी : व्यक्तिगत, अन्य

• अन्य लाभार्थी : किसान

• पात्रता के मानक : किसान की सभी श्रेणियां

• किस तरह लाभ लें : लाभार्थियों का चयन जिला कृषि अधिकारी क

• योजना का नाम : पीपी रसायन एवं ग्रामीण एवं शहरी खाद की खरीद व वितरण • प्रायोजक : राज्य सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : कार्य योजना का परिव्यय राज्यों द्वारा साझा होगा • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण : पीपी रसायन ग्रामीण व शहरी खाद की खरीद व वितरण, किसानों की बढती मांग को पूरा करने और मिट्टी की उत्पादकता में वृद्धि के लिए कार्बनिक खाद और हरी खाद मिलाकर उर्वरता के स्तर में वृद्धि करना। • लाभार्थी : व्यक्तिगत, समुदाय • लाभ के प्रकार : सामग्री, सब्सिडी • पात्रता के मानक : किसानों की सभी श्रेणियां • किस तरह लाभ लें : लाभार्थियों का चयन जिला कृषि अधिकारी की सिफारिश केमाध्यम से किया जाना चाहिए योजना की वैधता • आरम्भ तिथि : 01 / 02 / 2001 • वैधता तिथि : 31 / 07 / 2008
05
Sep

बीज की खरीद और वितरण: मणिपुर

• योजना का नाम : बीज की खरीद और वितरण • प्रायोजक : राज्य सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : कार्य योजना का परिव्यय राज्य सरकार द्वारा साझा होगा • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण : बीज खरीद और वितरण योजना मुख्य रूप से राज्य के किसानों द्वाराविभिन्न उन्नत किस्म के बीज की मांग में वृद्धि को पूरा करने के उद्देश्य से है। राज्य कृषि विभाग, मणिपुर की खरीद और वितरण योजना के तहत. व्यक्तिगत किसानों को उच्च उपज किस्म के विभिन्न बीज वितरित किए जाएंगे। • लाभार्थी : व्यक्तिगत, समुदाय, अन्य • अन्य लाभार्थी : किसान लाभ • लाभ के प्रकार : सामग्री, सब्सिडी • पात्रता के मानक : किसान की सभी श्रेणियां • किस तरह लाभ लें : लाभार्थियों का चयन जिला कृषि अधिकारी की सिफारिश के माध्यम से किया जाना चाहिए। योजना की वैधता • आरम्भ तिथि : 01 / 02 / 2001 • वैधता तिथि : 31 / 07 / 2008
• योजना का नाम : हरी खाद की फसलों को बढावा • प्रायोजक : केन्द्रीय सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : केन्द्र द्वारा 100% प्रायोजित • विवरण : इस कार्यक्रम के तहत, हरी खाद की फसलों के उपयोग के माध्यम से रासायनिक उर्वरक के उपयोग को कम करने पर जोर दिया जाता है। हरी खाद की फसलों को बढ़ावा देने के अंतर्गत कार्यक्रम के प्रमुख घटक निम्नलिखित हैं: i. फील्ड प्रदर्शन ii. जागरूकता कार्यक्रम • लाभार्थी : व्यक्तिगत, परिवार, समुदाय, महिलाएं, अन्य • अन्य लाभार्थी : अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग • लाभ के प्रकार : सब्सिडी • विवरण : बीज की खरीद और बीज के उत्पादन की लागत पर सब्सिडी दी जाती है। प्रति किसान या प्रति गतिविधि सब्सिडी लागत के 25% या वर्तमान में योजना के लिए अनुमोदित सब्सिडी के स्तर, जो भी कम हो, से अधिक नहीं होनी चाहिए। • पात्रता के मानक : किसानों की सभी श्रेणियाँ •
• योजना का नाम : जलभराव की भूमि का पुनरुद्धार • प्रायोजक : केन्द्र सरकार • वित्तपोषण का पैटर्न : केन्द्र द्वारा 100% प्रायोजित • विवरण : इस कार्यक्रम के तहत, कृषि क्षेत्र के क्षैतिज विस्तार पर जोर दिया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत लाए गए कार्यक्रम के प्रमुख घटक हैं: जल निकासी व्यवस्था के पूर्ण संजाल के प्रावधान के साथ जलभराव वाली मिट्टी का पुनरुद्धार, सिंचाई चैनलों की गाद निकालना, रु.10,000 प्रति हेक्टेयर की दर से घेरदार मेडों का निर्माण। • लाभार्थी : व्यक्तिगत, परिवार, समुदाय, महिलाएं, अन्य • अन्य लाभार्थी : अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग • लाभ के प्रकार : सब्सिडी • विवरण : इस योजना के तहत कृषि योग्य भूमि के विकास के लिए विभिन्न गतिविधियों हेतु रु.10,000 प्रति हेक्टेयर की दर पर सब्सिडी उपलब्ध है। • पात्रता के मानक : किसानों की सभी श्रेणियाँ • किस तरह ल
05
Sep

जैविक प्रमाणीकरण

• नाम : जैविक प्रमाणीकरण • प्रदत्त लाभ : जैविक प्रमाणीकरण जैविक उत्पादन नॉर्म्स/ आइएसओ 65 पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुसार किया जाता है। जैविक प्रमाणीकरण में शामिल है: 1) आवेदन की प्राप्ति व छंटनी 2) मौके पर निरीक्षण 3) कटाई के बाद के चरणों में पर्यवेक्षण 4) बीज के नमूने लेकर विश्लेषण 5) प्रमाणपत्र प्रदान करना • पात्रता : जैव उत्पाद पैदा करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति स्वयं को जैव प्रमाणीकरण विभाग में पंजीकृत कराकर ऐसा कर सकता है। रु.5000 के व्यक्तिगत तथा समूह पंजीकरण शुल्क के साथ निरीक्षण शुल्क के लिए रु.1000 तथा यात्रा व्यय के लिए रु.200 चुकाये जाएंगे। इसी तरह से कॉर्पोरेट क्षेत्र से रु.25000 पंजीकरण शुल्क के साथ निरीक्षण शुल्क के लिए रु.2000 तथा यात्रा व्यय के लिए रु.400 लिए जाते हैं। सभी फसलें जैविक प्रमाणीकरण की पात्र हैं। • सम्पर्क किए जाने वाले अधिकारी : आकलनकर्ता, जैविक प
05
Sep

जैविक प्रमाणीकरण

• नाम : बीज उत्पादन/ बीज प्रमाणीकरण/ बीज गुणवत्ता नियंत्रण/ प्रशिक्षण • प्रदत्त लाभ : प्रमाणित बीजोत्पादन तकनीकों व बीज गुणवत्ता नियंत्रण कानून पर प्रशिक्षण निम्नानुसार आयोजित किए जाते हैं: 1) सरकारी बीज उत्पादकों को प्रशिक्षण 2) निजी बीज उत्पादकों को प्रशिक्षण 3) बीज डीलरों को प्रशिक्षण • पात्रता: बीजोत्पादन तकनीकों/ बीज गुणवत्ता नियंत्रण पर प्रशिक्षण प्राप्त करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति प्रशिक्षण में भाग ले सकता है। कोई शुल्क चुकाने की आवश्यकता नहीं है। • सम्पर्क किए जाने वाले अधिकारी : बीज प्रमाणीकरण के सम्बद्ध सहायक निदेशक/ बीज निरीक्षण के सम्बद्ध उप निदेशक • स्वीकार/अस्वीकार करने की समय सीमा : निर्णय 10 दिनों के भीतर बता दिया जाएगा। • अपीलीय प्राधिकारी : बीज प्रमाणीकरण निदेशक 1424 ए, थडगम रोड, कोयम्बटूर – 641 013 फोन: 0422-2432984 टेली फैक्स: 0422-2457554 ई-मेल: dsctn@rediffmail
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