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• योजना का नाम : कृषि इंजीनियरिंग और सेवाओं के लिए योजना • प्रायोजक : राज्य सरकार • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग, हरियाणा • विवरण : कृषि पद्धतियों में ऊर्जा संरक्षण की विभिन्न तकनीकों में किसानों को शिक्षित करने के लिए सरल भाषा में साहित्य का मुद्रण • लाभार्थी : अन्य, • अन्य लाभार्थी : किसान लाभ • पात्रता के मानक : सभी किसान • किस तरह लाभ लें : कृषि विभाग, हरियाणा से संपर्क करें योजना की वैधता • आरम्भ तिथि : 01 / 01 / 1983 • वैधता तिथि : 01 / 01 / 2012 • सन्दर्भ URL : http://agriharyana.nic.in/engineering.htm
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राइथु मिथ्र समूह

उद्देश्य: 1. कृषि विस्तार प्रणाली और किसानों के बीच प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, बाजार की जानकारी और अन्य कृषि संबंधी सलाह के लिए इंटरफेस के रूप में कार्य। 2. वैज्ञानिक कृषि पर विचारों इकट्ठे करने के लिए एक समाशोधन गृह के रूप में कार्य करना। 3. लागत की आवश्यकता का आकलन करना। 4. अधिकतम उत्पादन और उत्पादकता हासिल करने के लिए समूह के सभी सदस्यों को ज्ञान, प्रशिक्षण, सूचना और प्रौद्योगिकियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया में एक वाहक माध्यम के रूप में में कार्य करना। 5. सामाजिक गतिविधियों को लेने के अलावा मृदा परीक्षण, पशु स्वास्थ्य शिविर, कृषि में विशेषज्ञ व्याख्यान की व्यवस्था की तरह विभिन्न विकास गतिविधियों को हाथ में लेना। 6. इष्टतम संसाधन पर आधारित और बाजार चालित किसान रणनीतियां तैयार करना। 7. वित्तीय संस्थाओं, बाजार यार्ड्स, मीडिया आदि जैसी संबंध एजेंसियों क
• योजना का नाम : राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना • प्रायोजक : राज्य सरकार • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण : राज्य सरकार ने रबी मौसम 1999-2000 से यह योजना आरंभ की है। कवर की गई फसलों में गेहूं, जौ, मक्का, धान और आलू हैं। छोटे और सीमांत सानों को प्रीमियम में सब्सिडी की अनुमति दी गई है। योजना ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य है और ग़ैर- ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक है। यह योजना उपज में घाटे अर्थात सूखा, मूसलधार बारिश, बाढ़, कीट रोग आदि के खिलाफ व्यापक जोखिम उपलब्ध कराती है। यह योजना भारत के कृषि बीमा निगम (एआइसी) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है। राज्य के किसान इस कार्यक्रम का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। • लाभार्थी : व्यक्तिगत लाभ • लाभ के प्रकार : अन्य • अन्य लाभ : व्यापक जोखिम बीमा • पात्रता के मानक : योजना ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य है और ग़ैर- ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक है। • किस तरह
• योजना का नाम : गुणवत्तापूर्ण बीज का गुणन और वितरण • प्रायोजक : राज्य सरकार • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश • विवरण : कृषि विभाग के स्वामित्व में 25 बीज गुणन खेत हैं जहां खरीफ और रबी फसलों के आधार बीज का उत्पादन होता है। सालाना, अनाज, दालों और सब्जियों के 3500 से 4000 क्विंटल बीज का उत्पादन होता है। इसके अलावा, राज्य में विभिन्न फसलों के लगभग 1,00,000 क्विंटल प्रमाणित बीज किसानों को वितरित किए जाते हैं। • लाभार्थी : व्यक्तिगत लाभ • लाभ के प्रकार : सब्सिडी • पात्रता के मानक : किसान • किस तरह लाभ लें : कृषि विभाग, हिमाचल प्रदेश से सम्पर्क करें • सन्दर्भ URL : http://www.hpagriculture.com/schemes.html
• शीर्षक : बीज के गुणवत्ता नियंत्रण पर व्यवस्था • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : आधुनिक बीज परीक्षण प्रयोगशाला के साथ राष्ट्रीय बीज प्रशिक्षण केन्द्र (एनएसटीसी) की स्थापना और बीज गुणवत्ता नियंत्रण संगठन का सशक्तिकरण। • मुख्य विशेषताएं : 1. बीज उद्योग की विभिन्न शाखाओं में काम कर रहे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए एनटीएससी की स्थापना। प्रस्तावित बीज परीक्षण प्रयोगशाला बीज अधिनियम,1996 के तहत केन्द्रीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला (सीएसटीएल) के रूप में भी कार्य करेगी। 2. राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशालाओं (एसएसटीएल) और राज्य बीज प्रमाणन एजेंसियां (एसएससीए) सहित 25 बीज विकास संगठनों का सुदृढ़ीकरण। 3. बीज अधिनियम 1966 के तहत स्थापित सांविधिक निकायों, केन्द्रीय बीज समिति (सीएससी) और केन्द्रीय बीज प्रमाणन बोर्ड (सीएससीबी) को सचिवालयीन मदद प्रदान करना। 4. सीएसटीए
• शीर्षक : कृषि में नीति और प्रबंधन "भारतीय किसान की स्थिति – सहस्त्राब्दि का एक अध्ययन" • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : नीति और प्रबंधन के अलावा, तीसरी सहस्राब्दि के प्रारंभ में भारतीय किसानों की स्थिति जानने के लिए एक अध्ययन का आयोजन किया जा रहा है। • मुख्य विशेषताएं : अध्ययन तीन चरणों में संचालित किया जाना प्रस्तावित है, जो एक तकनीकी समिति के समग्र मार्गदर्शन और विशेषज्ञों की एक संचालन समिति के पर्यवेक्षण के तहत लागू किया जाएगा। प्रथम चरण में मौजूदा डेटा स्रोतों और अनुसंधान सामग्री के आधार पर किसानों को प्रभावित करने वाले कृषि के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययन स्थिति पर पर्चों की एक श्रृंखला लाएगा। इस चरण का परिणाम आने वाले दशकों के योजनाकारों को देश में कृषि विकास का पिछले 50 वर्षों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करेगा। दूसरे चरण के दौरान, उनके व्
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बीज फसल बीमा पर पायलट योजना

• शीर्षक : बीज फसल बीमा पर पायलट योजना • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • उद्देश्य : 1. बीज फसल की विफलता के मामले में ब्रीडर/ बीज उत्पादकों को वित्तीय सुरक्षा और आय स्थिरता प्रदान करना। 2. मौजूदा बीज ब्रीडर/उत्पादकों में विश्वास को मजबूत बनाना और नव जारी संकर/उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन कार्यक्रम शुरू करने के लिए नए ब्रीडर/उत्पादकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना। 3. राज्य के स्वामित्व वाले बीज निगमों/राज्य फार्मों द्वारा स्थापित बुनियादी सुविधाओं को स्थिरता प्रदान करना। 4. आधुनिक बीज उद्योग को वैज्ञानिक सिद्धांतों के तहत लाने के लिए बढ़ावा देना। • मुख्य विशेषताएं : खेत के स्तर पर बीज उत्पादन, कच्चे बीज उपज में कमी, बीज फसल की कटाई के बाद नुकसान में शामिल जोखिम को कवर करना ताकि अधिक संख्या में ब्रीडर/ संस्थाएं/ संगठन/ बीज उत्पादक बीज उत्पादन का काम हाथ
• शीर्षक कार्य योजना के माध्यम से ‘राज्यों के अनुपूरण/पूरक’ होने के प्रयासों हेतु कृषि का मॆक्रो प्रबंधन • प्रकार केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजना • उद्देश्य मॆक्रो प्रबंधन योजना का लक्ष्य होगा राज्यों द्वारा तैयार कार्य योजनाओं के माध्यम से कृषि के क्षेत्र में सर्वांगीण विकास। इसमें शामिल हैं • स्थानीय जरूरतों/फसल/क्षेत्रों के अनुसार विशिष्ट/प्राथमिकताओं आदि का प्रतिबिंब; • राज्यों को लचीलापन और स्वायत्तता प्रदान करना; • दुर्लभ वित्तीय संसाधन का इष्टतम उपयोग; • प्राप्तियों को अधिकतम करना; • क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना। • मुख्य विशेषताएं परिशिष्ट 1 में सूचीबद्ध केन्द्र द्वारा प्रायोजित 27 योजनाओं को एकीकृत कर योजनाबद्ध दृष्टिकोण से हटकर मॆक्रो प्रबन्धन मोड पर आगे बढने का निर्णय लिया गया है। पिछला पैटर्न, जिसमें केन्द्र द्वारा प्रायोजित क
परिचय: चावल आंध्र प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण और प्रमुख खाद्य फसल है। आंध्र प्रदेश, देश में दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक राज्य है, और यह राष्ट्रीय चावल उत्पादन में लगभग 12% योगदान देता है। आंध्र प्रदेश में, चावल सालाना 37.8 लाख हेक्टेयर तक के क्षेत्र में उगाया जाता है और 1.19 करोड टन तक की मात्रा का उत्पादन होता है। राज्य की पिछले साल की उत्पादकता 3345 किलो/हेक्टेयर है। आंध्र प्रदेश में 70% ग्रामीण कार्य बल अपनी आय चावल की खेती और संबंधित गतिविधियों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से अर्जित करता है। बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की बढ़ती मांग से निपटने के लिए, देश में आत्म पर्याप्तता को बनाए रखने के लिए खाद्य उत्पादन, विशेष रूप से चावल उत्पादन हर साल 20 लाख टन से बढ़ाने की जरूरत है। आंध्र प्रदेश, देश में बढ़ रहे चावल उत्पादन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता
• योजना का नाम : पादप स्वास्थ्य क्लीनिक की स्थापना • प्रायोजक : राज्य सरकार • वित्तपोषण के पैटर्न : इन क्लिनिक की स्थापना के लिए प्रति इकाई रुपए 20 लाख की अधिकतम सीमा (सार्वजनिक क्षेत्र) और रुपए 5 लाख (निजी क्षेत्र) की दर पर सहायता उपलब्ध है। • मंत्रालय/ विभाग : बागवानी विभाग • विवरण : किसानों के दरवाजे पर इस सेवा को प्रदान करने के लिए कृषि/ बागवानी स्नातकों को प्रोत्साहित कर पादप स्वास्थ्य क्लीनिक निजी क्षेत्र में स्थापित किए जा रहे हैं। • लाभार्थी : व्यक्तिगत, समुदाय लाभ • लाभ के प्रकार : सब्सिडी • पात्रता के मानक : किसान • किस तरह लाभ लें : बागवानी निदेशालय, हिमाचल प्रदेश और जिला मुख्यालयों में सहायक निदेशक के कार्यालयों से सम्पर्क स्थापित करें। योजना की वैधता • आरम्भ तिथि : 01 / 01 / 2002 • वैधता तिथि : 01 / 01 / 2012 • सन्दर्भ URL : http://hphorticulture.nic.in/ince_subsi.htm#HTM
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