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• ब्यौरा विवरण • योजना का नाम : फसल सुधार कार्यक्रम • प्रायोजक : राज्य सरकार • मंत्रालय/ विभाग : कृषि विभाग • विवरण: सरकार किसानों के हित में यह योजना प्रदान कर रही है जिसके तहत ऐसे गुणवत्तापूर्ण बीज का गुणन और वितरण, सब्जी विकास परियोजना, फसल संरक्षण, अदरक विकास, बीज आलू विकास जैसी योजनाएं आती हैं। • लाभार्थी : व्यक्तिगत लाभ • लाभ के प्रकार : अन्य • अन्य लाभ : गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन • विवरण : बीज गुणन के लिए सालाना लगभग 3500 से 4000 क्विंटल अनाज,दालों और सब्जियों के बीज का उत्पादन होता है। सब्जी विकास परियोजना के लिए सालाना 9.30 लाख टन से अधिक ताजा सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। तीव्रीकरण परियोजना केदृष्टिकोण के माध्यम से किया जाता है। वर्तमान में 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र के साथ 100 परियोजनाओं को लिया गया है। फसल संरक्षणके लिए विभाग कीट की स्थिति निगरानी रखता है। इस
• शीर्षक : उत्तर-पूर्वी राज्यों, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तरांचल और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए बीज की आवाजाही के लिए परिवहन सब्सिडी पर केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : पहचाने गए राज्यों में वाज़िब कीमतों पर, सही समय के भीतर किसानों को बीजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना • मुख्य विशेषताएं : 1. देश के अन्य भागों में प्रचलित उचित दर पर बीज उपलब्ध कराने के लिए उत्तर पूर्वी राज्यों, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर, उत्तरांचल और पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों द्वारा वापरे जाने वाले बीजों के परिवहन की लागत पर सब्सिडी देना। 2. उपर्युक्त क्षेत्रों में किसानों को बुआई के मौसम से पहले इच्छित समय पर बीज उपलब्ध कराना। • सहायता के पैटर्न : 1. राज्य के बाहर से कार्यांवयन एजेंसियों तक पहुंचाए गए
• शीर्षक : पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण पर कानून के कार्यान्वयन के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : डब्ल्यूटीओ के ट्रिप्स समझौते के तहत दायित्व को पूरा करने के लिए बीज क्षेत्र को अपेक्षित शक्ति प्रदान करना। • मुख्य विशेषताएं : 1. पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों के संरक्षण के प्राधिकरण की स्थापना। 2. पौधों के ब्रीडर अधिकार देने के लिए विभिन्न परीक्षणों अर्थात स्पष्टता एकरूपता, और स्थिरता (डीयूएस) के लिए पहचान केंद्रों का विकास और सुदृढीकरण करना। • सहायता के पैटर्न : 1. योजना के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार डीयूएस केन्द्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए एकमुश्त अनुदान। 2. पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों संरक्षण के प्राधिकरण के व्यय की पूर्ति करना। • पात्रता : चयनित आईसीएआर केंद्र, राज्य क
• शीर्षक : बीज बैंक की स्थापना और रखरखाव के लिए केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : आकस्मिक स्थितियों के लिए बीज उपलब्ध कराना और बीज के भंडारण के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास भी करना। • मुख्य विशेषताएं : 1. किसानों को समय पर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न फसलों के आधार बीज और प्रमाणित बीज के रखरखाव के लिए बीज बैंक की स्थापना 2. प्राकृतिक आपदा के समय बीज की विशेष आवश्यकता का ध्यान रखना। 3. गुणवत्तापूर्ण बीज के उत्पादन और वितरण के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास करना। • सहायता के पैटर्न : 1. बीज बैंक में रखने के लिए बीज की खरीद के लिए परिक्रामी कोष (कच्चे बीज की 50% लागत) प्रदान करना। 2. प्रसंस्करण/पैकिंग पुनर्वैधीकरण, परिवहन, भंडारण, भंडारण हानि, भंडारण के दौरान बीज के बीमा जैसे बीज रखरखाव के विभिन्न घटकों की लागत और योजन
शीर्षक : खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्रों के स्थानांतरण हेतु जलग्रहण क्षेत्र विकास परियोजना (डब्ल्यूडीपीएससीए) प्रकार : राज्य योजना के लिए केन्द्रीय सहायता उद्देश्य : जलग्रहण के आधार पर झूम क्षेत्रों का समग्र विकास, झूमिया परिवारों को बस जाने के बाद खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु खेती के स्थानांतरण से प्रभावित भूमि को कृषि योग्य बनाना तथा उनका सामाजिक-आर्थिक उन्नयन। मुख्य विशेषताएं : योजना के घटक हैं प्रशासनिक व्यय, सामुदायिक संगठन और प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा घरेलू/भूमि आधारित उत्पादन प्रणाली के माध्यम से पुनर्वास घटक। सहायता का पैटर्न : 100% विशेष केन्द्रीय सहायता पात्रता : यह योजना उत्तर - पूर्वी राज्यों में उन जलग्रहण क्षेत्रों में सरकारी और गैर सरकारी संगठनों, वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों के माध्यम से ली जा सकती है जहां कम से कम 25% क्षेत्र कृषि स्था
• शीर्षक : पौध संरक्षण के लिए प्रशिक्षण • प्रकार : राष्ट्रीय पादप संरक्षण प्रशिक्षण संस्थान, राजेंद्र नगर, हैदराबाद – 500030 (एपी), भारत • उद्देश्य : पौध संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर लंबी और छोटी अवधि के प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के आयोजन द्वारा पादप संरक्षण प्रौद्योगिकी में मानव संसाधन विकास • मुख्य विशेषताएं : i) इस संस्थान को संयुक्त राष्ट्र के एफएओ द्वारा पादप संरक्षण संयंत्र के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में और विश्व बैंक द्वारा पादप संरक्षण प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण के लिए एक उन्नत केन्द्र के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। ii) यह संस्थान द्विपक्षीय कार्यक्रमों/एफएओ/यूएनडीपी, आदि के माध्यम से प्रायोजित विदेशी नागरिकों को भी प्रशिक्षण प्रदान करता है। iii) इस संस्थान में सात संकाय हैं अर्थात, कीट विज्ञान, प्लांट पैथोलॉजी, रसायन विज्ञान, कृषि अभि
• शीर्षक : समन्वित कीट प्रबंधन को प्रोत्साहन • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • आरम्भ तिथि : 1991 • मुख्य विशेषताएं : आईपीएम पारिस्थितिकी कीट नियंत्रण का एक व्यापक तरीका है जिसका लक्ष्य कीट आबादी को आर्थिक दहलीज स्तर (ईटीएल) के नीचे रखने के लिए सभी ज्ञात कीट नियंत्रण उपायों के मिश्रण का इस्तेमाल करना है। यह फसल संरक्षण की एक आर्थिक रूप से उचित और स्थायी प्रणाली है जिससे कुल पर्यावरण पर कम से कम संभव प्रतिकूल प्रभाव के साथ अधिकतम उत्पादकता मिलती है। फसल उत्पादन प्रौद्योगिकी में आईपीएम प्रथाओं का एक कार्यक्रम है जो एक खेत के चयन से शुरू होकर फसल की कटाई तक होता है। इस दृष्टिकोण में प्रमुख घटक कीटों, रोगों, खरपतवार तथा जंतुओं के कृंतक नियंत्रण के लिए सांस्कृतिक, यांत्रिक, जैविक और रासायनिक तरीकों का सुसंगत प्रयोग होता है। i) कृषक समुदाय के बीच आईपीएम दृष्टिक
• शीर्षक : राष्ट्रीय भूमि उपयोग और संरक्षण बोर्ड (एनएलसीबी) • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र • उद्देश्य : राष्ट्रीय भूमि उपयोग नीति का निरूपण, भूमि संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए परिप्रेक्ष्य योजना तैयार करना। • मुख्य विशेषताएं : इस योजना के घटक हैं: i) ज़मीन की बढ़ती मांग को पूरा करने और उसके इष्टतम उपयोग के लिए परिप्रेक्ष्य योजना तैयार करना ii) मूल्यांकन अध्ययन संचालित करना iii) राष्ट्रीय भू-उपयोग नीति रूपरेखा (एनएलपीओ) की अनुशंसाओं का कार्यान्वयन iv) अध्ययन और जागरूकता अभियान आयोजन के प्रायोजन के संबंध में दिशा निर्देश जारी करना। • सहायता का पैटर्न : कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 100% अनुदान • पात्रता : योजना मूल रूप से कर्मचारी उन्मुख है। अपने राज्यों में उपरोक्त गतिविधियों के लिए राज्य सरकारें धन के लिए अनुरोध कर सकती हैं। • आवेदन प्रक्रिया : राज्य सरकारें वि
• शीर्षक : टिड्डी नियंत्रण और अनुसंधान • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • उद्देश्य : i) राजस्थान और गुजरात राज्यों के अनुसूचित रेगिस्तान क्षेत्रों में 2.0 लाख वर्ग किमी में नियमित रूप से सर्वेक्षण आयोजित कर टिड्डी स्थिति की निगरानी। ii) जब आवश्यक हो, तब टिड्डी प्लेग को रोकने के लिए नियंत्रण कार्य का आयोजन। • मुख्य विशेषताएं : i)5 वृत्त कार्यालयों और मैं 23 बाह्य चौकियों के माध्यम से टिड्डी की निगरानी। ii) आयोजन टिड्डी की आबादी में स्थानीय वृद्धि और हमलावर टिड्डी दलों के खिलाफ नियंत्रण आपरेशनों का आयोजन। iii) पाक्षिक टिड्डी स्थिति बुलेटिन जारी करना। iv) भारत-पाक सीमा बैठकों का आयोजन और जून से नवम्बर के दौरान जोधपुर और कराची के बीच वायरलेस संपर्क बनाए रखना। v) अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के एक भाग के रूप में टिड्डी प्रवण देशों और एफएओ के साथ समन्वय। vi) टिड्डी तथा
• शीर्षक : कीटनाशक अधिनियम, 1968 का कार्यान्वयन • प्रकार : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना • उद्देश्य : गुणवत्ता कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग पौध संरक्षण में एक अनिवार्य निवेश है। कीटनाशक आमतौर पर खाद्य उत्पादन बनाए रखने के लिए फसल सुरक्षा के उपाय में इस्तेमाल किए जाते हैं। ये भी वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण के लिए भी प्रयुक्त किए जाते हैं। कीटनाशक, उनकी प्रकृति से ही विषाक्त होने के कारण मनुष्य और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक होते हैं। कीटनाशकों के अवशेष खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर मानव और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए नुकसान का कारण बनते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए कीटनाशकों का आयात, निर्माण, परिवहन, बिक्री, आदि कीटनाशक अधिनियम, 1968 और उसके तहत बनाये गए नियमों के अंतर्गत एक व्यापक क़ानून द्वारा विनियमित किए जाते हैं ताकि कृषक समुदाय को गुणवत्ता, सुरक्षा और प्
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