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• शीर्षक :  जलविभाजक विकास परिषद (डब्ल्यूडीसी)

• प्रकार  : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना (मुख्यालय योजना)

• उद्देश्य :  जलविभाजक विकास परिषद (डब्ल्यूडीसी) तकनीकी स्टाफ उन्मुख केन्द्रीय योजना है और इसे विश्व बैंक की मदद वाली परियोजनाओं के साथ-साथ अन्य विदेशी सहायता वाली तथा राष्ट्रीय परियोजनाओं को सेवाएं प्रदान करने के लिए 1983-84 में बनाया गया था। इसे देश के विभिन्न राज्यों में एकीकृत जलविभाजक विकास परियोजनाओं (हिल्स-2) तथा विश्व बैंक से सहायता प्राप्त अन्य परियोजनाओं को संचालित करने के लिए तकनीकी सहायता देने हेतु निष्पादन एजेंसियों में से एक नामित किया गया है। आइडब्ल्यूडीपी (हिल-2) केमूल्यांकन दस्तावेज़ में डब्ल्यूडीसी की भूमिका कुल जलविभाजन से सम्बन्धित नीतियों के समंवयक तथा सन्योजक की बताई गई है। यह परियोजनाओं के लागूकरण को सुविधाजनक बनाने तथा भ

• शीर्षक :  प्राकृतिक आपदा प्रबन्ध कार्यक्रम • प्रकार केन्द्रीय क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य :  आपदा में कमी करने, उसका सामना करने की तैयारी और उसे समाप्त करने के लिए राष्ट की क्षमता में वृद्धि करना। इस योजना से यह अपेक्षा भी है कि सम्भावित आपदा के प्रति समुदाय की जागरूकता के स्तर में वृद्धि हो और भविष्य में वे उचित तरीके से संकट का सामना करने के लिए तैयार किए जा सकें।

• मुख्य विशेषताएं  : इस योजना के भाग हैं मानव संसाधन विकास, अनुसन्धान व परामर्श सेवाएं, बडी घटनाओं का दस्तावेज़ीकरण, राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर आपदा प्रबन्ध केन्द्र की स्थापना, प्राकृतिक आपदा में कमी के अंतर्राष्ट्रीय दशक के अंतर्गत गतिविधियां व कार्यक्रम, जन जागरूकता अभियान।

• सहायता के पैटर्न :  कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 100% अनुदान।

• पात्रता  : ये गतिविधियां अग्रण

• शीर्षक :  कृषि में सूचना के उपयोग को बढ़ावा देना

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य  : कृषि को “ऑन लाइन” बनाने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के उपयोग तथा अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि और सहकारिता विभाग विभिन्न उपाय कर रहा है। यह उम्मीद है कि कृषि से संबंधित सभी जानकारी किसानों, निर्यातकों, व्यापारियों, अनुसंधान संस्थानों, राज्य कृषि विभागों और केन्द्रीय सरकार के इस्तेमाल के लिए समय के साथ वेबसाइट पर उपलब्ध हो जाएगी जिससे उत्पादकता के उच्चतर स्तर हासिल होंगे और किसानों की आमदनी बढेगी। यह परिकल्पना की गई है कि विस्तार और सलाहकार सेवाएं किसानों को इस योजना के फलस्वरूप वास्तविक समय में उपलब्ध होंगी जो उन्हें उनके उत्पादन, कटाई के बाद प्रबन्धन तथ विपणन अधिक कुशल तरीके से करने में सक्षम बनाएगी। आईटी के उपकरण से

• शीर्षक :  चावल, गेहूं तथा दानेदार अनाज के लिए लघुकिट कार्यक्रम

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र

• उद्देश्य :  इस योजना का उद्देश्य है हाल ही में जारी संकर/उच्च उपज की किस्मों को लोकप्रिय बनाकर उत्पादकता में वृद्धि करना और स्थान विशेष के लिए उच्च उपज की किस्मों/संकरों के अंतर्गत क्षेत्र में फैलाव करना।

• मुख्य विशेषताएं  :  स्थान विशेष के लिए उच्च उपज की किस्मों/संकरों के अंतर्गत क्षेत्र में तेज़ी से फैलाव करना। खेत के स्तर पर उन्नत बीज के भंडार को बढाना। नई विकसित प्रौद्योगिकी पर श्रमिकों को प्रशिक्षण देना। उन्नत उत्पादन प्रौद्योगिकी का प्रसार व उसे अपनाना।

• भाग :  बीज लघुकिट वितरण कार्यक्रम राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम व विशेष अनुकूलन कार्यक्रम

• पात्रता  : सभी राज्य

• संपर्क किए जाने वाले व्यक्ति :  कृषि आयुक्त, कृष

• शीर्षक राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस)

• प्रकार केन्द्रीय क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, कीट और रोगों के कारण किसी भी अधिसूचित फसल की विफलता की घटना में किसानों को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदान करना। किसानों को प्रगतिशील खेती के तरीकों, उच्च मूल्य की लागत और कृषि में उच्चतर प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना। कृषि से आय को स्थिर करना, विशेष रूप से आपदा के वर्षों में।

• मुख्य विशेषताएं

- उनके स्वामित्व से अप्रभावित – यह योजना ऋणी और गैर ऋणी – सभी किसानों के लिए उपलब्ध है। - ऋणी किसानों के लिए अनिवार्य और गैर-ऋणी किसानों के लिए वैकल्पिक। - बीमित राशि बीमा क्षेत्र की सीमांत उपज के मूल्य तक विस्तारित की जा सकती है। - सभी खाद्य फसलों (अनाज, बाजरा, और दालों), तिलहन और वार्षिक व्यावसायिक / बागवानी फसलों का कवरेज जिन

• शीर्षक :  राज्य भूमि विकास बैंकों (एसएलडीबी)/ राज्य सहकारी कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंकों (एससीएआरडीबी) के डिबेंचरों में निवेश

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य : योजना का लक्ष्य है लघु सिंचाई, कृषि मशीनीकरण, भूमि विकास, बागवानी, बंजर भूमि विकास, ग्रामीण आवास, ग्रामीण गोदामों, गैर-कृषि क्षेत्र तथा पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डिबेंचर जारी कर एसएलडीबी द्वारा किसानों को लंबी अवधि के ऋण दिए जाने के लिए संसाधन जुटाना।

• मुख्य विशेषताएं  :  एसएलडीबी/एससीएआरडीबी कृषि मशीनीकरण, भूमि विकास आदि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डिबेंचर जारी कर किसानों को लंबी अवधि के ऋण दिए जाने के लिए संसाधन जुटाते हैं। नाबार्ड, संबंधित राज्य सरकारों, भारत सरकार और अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा इन बैंकों के जारी डिबेंचरों में अभिदान दिया जा

• शीर्षक :  कृषि बैंकिंग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए केंद्र (CICTAB)

• प्रकार  : केन्द्रीय क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य :  बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और भारत के लिए उप - क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कृषि बैंकिंग में एक इंटरनेशनल फोरम के रूप में सेवा करना। CICTAB सार्क क्षेत्र के सदस्य देशों और अन्य देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।

• मुख्य विशेषताएं  :  सार्क क्षेत्र के सदस्य देशों और अन्य देशों के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करना।

• सहायता का पैटर्न  : कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 100% अनुदान

• पात्रता  : वर्ष के दौरान आयोजित किए जाने वाले प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की अनुसूची के आधार पर CICTAB को सहायता।

• आवेदन प्रक्रिया  : वर्ष के दौरान कार्यक्रम के तहत CICTAB से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर प्रशिक्षण पा

• शीर्षक :  चुनिन्दा ज़िलों (आइसीडीपी) में एकीकृत सहकारी विकास परियोजनाएं।

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र

• उद्देश्य :  कृषि तथा मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, हथकरघा, ग्रामोद्योग आदि सहित सम्बन्धित क्षेत्रों में सहकारिता प्रयासों से एकीकृत रूप में परियोजना क्षेत्र का समग्र विकास।

• मुख्य विशेषताएं  :  यह योजना पीएसीएस को बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने, आधुनिकीकरण सहित मौज़ूदा सहकारिता ढांचे के विकास और सहकारी संस्थाओं के प्रबन्धन के उन्नयन के लिए वर्तमान प्राथमिक सहकारी सोसाइटियों तथा अन्य कार्यरत सहकारी संस्थाओं को सुदृढ करने का लक्ष्य रखती है।

• सहायता का पैटर्न  : सहकारी संस्थाओं को राज्य सरकारों के माध्यम से वित्तीय सहायता ऋण व सब्सिडी के रूप में प्रदान की जाती है।

• पात्रता  : प्राथमिक कृषि साख सोसाइटियां व अन

• शीर्षक :  बहु-राज्यीय सहकारी सोसाइटियों का विकास तथा सहकारिता प्रभाग का सुदृढीकरण

• प्रकार  : केन्द्रीय क्षेत्र

• उद्देश्य :  यह योजना अनिवार्य रूप से स्टाफ-उन्मुखी है और इसका उद्देश्य है बहु-राज्यीय सहकारी सोसाइटियों का विकास तथा सहकारिता प्रभाग का सुदृढीकरण

• मुख्य विशेषताएं  : केन्द्रीय पंजीयक के कार्यालय में काम कर रहे स्टाफ का वेतन, ओवरटाइम भत्ता, अंतर्देशीय यात्रा व्यय।

• सहायता का पैटर्न  : 100% व्यय केन्द्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

• व्यय की प्रगति  : (रु. करोड में) ग्यारहवीं योजना 1997-98 1998-99 1999-2000 2000-01

                                                                         1.00   0.14        0.14               0.16     &n

• शीर्षक :  बिहार ईईसी में ग्रामीण विकास केन्द्रों का विकास।

• प्रकार :  बाह्य सहायता प्राप्त

• उद्देश्य  : इस योजना का उद्देश्य है ग्रामीण गोदामों के निर्माण, कृषि ऋण में सुधार और पेशेवर / प्रबंधकीय कौशल के उन्नयन से बिहार में प्राथमिक कृषि ऋण सोसायटी (पैक्स) द्वारा कृषि उत्पादन, भंडारण और विपणन में वृद्धि।

• मुख्य विशेषताएं :  एलएएमपीस और एफएसएस सहित 1500 पीएसीएस के बिहार के 28 जिलों में सहकारी ग्रामीण विकास केंद्र के रूप में विकास के लिए बिहार सरकार को सहायता प्रदान करना।

• सहायता का पैटर्न :  भारत सरकार और ईईसी के बीच समझौते के आधार पर यह परियोजना 31.3.1996 से बंद पडी है। वर्ष 2001-02 के लिए एनसीडीसी इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा अप्रयुक्त अनुदान जारी करेगी।

• पात्रता :  प्राथमिक सहकारी सोसाइटियां

• आवेदन प्रक्रिया :  भारत सरकार और ई

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