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• शीर्षक :  सहकारी शिक्षा एवं प्रशिक्षण

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र

• उद्देश्य :  इस योजना का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में प्रबंधन के विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे पेशेवरों की प्रबंधकीय क्षमताओं में सुधार करना है।

• मुख्य विशेषताएं  :

         (1) भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआइ) को सहायता,

         (2) सहकारी प्रशिक्षण की राष्ट्रीय परिषद (एनसीसीटी) को सहायता,

         (3) शुल्क भुगतान किए गए सामान पर कस्टम शुल्क की प्रतिपूर्ति।

• सहायता का पैटर्न : भारत सरकार सहकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए एनसीसीटी को 100% अनुदान-सहायता प्रदान कर रही है।

• सम्पर्क किए जाने वाले व्यक्ति :  मुख्य कार्यकारी भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ, 3, सिरी इंस्टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्ली 110016 • आरम्भ की तिथि/ अवधि 1962

• शीर्षक : सहकारिता के क्षेत्र में अल्प/न्यूनतम विकसित राज्यों के सहकारिता विपणन, प्रसंस्करण, भण्डारण आदि के कार्यक्रम।

• प्रकार :  केन्द्र द्वारा प्रायोजित

• उद्देश्य :  क्षेत्रीय असंतुलन दूर करना तथा समुदाय के किसानों व कमज़ोर तबके के लोगो की आय में वृद्धि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर सहकारिता के क्षेत्र में अल्प/न्यूनतम विकसित राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के सहकारिता विपणन, प्रसंस्करण, भण्डारण आदि के कार्यक्रमों को आवश्यक गति प्रदान करना।

• मुख्य विशेषताएं  : यह योजना कृषि लागत के वितरण, भंडारण सहित कृषि प्रसंस्करण के विकास, अनाज तथा रोपी गई/हॉर्टिकल्चर फसल के विपणन, कमज़ोर व जनजातीय वर्गों के विकास, सहकारी संस्थाओं, डेयरी, कुक्कुटपालन तथा मत्स्यपालन में मदद करती है।

• सहायता का पैटर्न : वितीय सहायता एनसीडीसी को ऋण व अनुदा

• शीर्षक : भारत के राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ को सहायता (नाफेड)

• प्रकार :  केन्द्रीय क्षेत्र

• उद्देश्य :  उत्पादकों को बेहतर कीमतें उपलब्ध कराने के लिए राज्य महासंघों, प्राथमिक सहकारी विपणन सोसाइटियों आदि के माध्यम से कृषि उपज के विपणन में उसके व्यापार की गतिविधियों में बढौत्री करने के लिए नैफेड की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाना।

• मुख्य विशेषताएं  : यह योजना मूल्य समर्थन संचालनों, बाजार में हस्तक्षेपों, वाणिज्यिक खरीदें करने के लिए नैफेड को सक्षम भी बनाती है। यह नैफेड को आंतरिक रूप से तथा निर्यात को बढ़ावा देने, दोनों के लिए बाज़ार में सहायता प्रदान करने में एक प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करती है।

• सहायता का पैटर्न  : एनसीडीसी को 100 प्रतिशत ऋण जो कि उसे नैफेड को हस्तांतरित करना होता है।

• पात्रता  : नाफेड पात्र है

• सम्पर

• शीर्षक :  कृषि विपणन के क्षेत्र में बाज़ार सर्वेक्षण, जांच, और अनुसंधान अनुदान के लिए योजना

• प्रकार :  केन्द्र क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य :  कृषि विपणन के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट समस्याओं और बाधाओं की पहचान के लिए अनुसंधान/अध्ययन का संचालन करना और उपचारी उपाय सुझाना।

• मुख्य विशेषताएं  : कृषि विश्वविद्यालयों / अनुसंधान संस्थानों को सहायता अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। प्रत्येक अध्ययन के लिए अधिकतम मौद्रिक सीमा रु.5 लाख है। सहयोगात्मक अध्ययन के मामले में वित्तीय सहायता कुल खर्च का 75% होती है और इसकी अधिकतम सीमा रु.4.5 लाख है।

• सहायता के पैटर्न :  सीमा के अध्यधीन, अनुदान का 40% मंजूरी समिति द्वारा इस परियोजना के लिए अनुमोदन प्रदान किए जाने के बाद दिया जाता है, डेटा संग्रह पूर्ण होने तथा प्रारम्भिक रिपोर्ट के साथ

• शीर्षक :  विपणन योग्य अधिशेष और कटाई के बाद खाद्यान्न के नुकसान का आकलन करने के लिए देश में योजना।

• प्रकार : केन्द्र क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य : (ए) विपणन योग्य अधिशेष खाद्यान्न के आकलन में सुधार एवं अद्यतन करना। (बी) खेत में खपत के लिए भंडारण, बीज, फ़ीड, मजदूरी और अन्य प्रकार में भुगतान, आदि के लिए नवीनतम आंकडों का संकलन और (सी) उत्पादकों के स्तर पर फसल कटाई के पश्चात नुकसान का अनुमान।

• मुख्य विशेषताएं : यह सर्वेक्षण फसल वर्ष 1996-97, 97-98, 98-99 के लिए किया गया था जिसमें धान, गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी और जौ और दलहन, अर्थात लाल ग्राम (अरहर या तुअर), ग्राम (चना) , ग्रीन ग्राम (मूंग) जैसी फसलें शामिल थीं। 25 राज्यों के 100 चयनित जिलों से 15,000 कृषक परिवारों के चयन किया गया था। ज़मीनी स्तर पर सर्वेक्षण निर्दिष्ट राज्य एजेंसियों (डीएसए) के फील्ड जांचकर्ताओं द्वारा राज्य

• शीर्षक :  राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (एनएआइएम)

• प्रकार : केन्द क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य :  कृषि विपणन की समस्या के मामलों में प्रयुक्त और परिचालन अनुसंधान में शमिल होना तथा उसका अध्ययन करना। कृषि विपणन गतिविधियों में शामिल विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करना। परियोजनाओं के निर्माण, राज्यों, निर्यात संस्थानों, व्यापारियों तथा किसानों के मास्टर प्लान की तैयारी के लिए राज्य और केन्द्रीय विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सहकारिता आदि को परामर्श सेवाएं प्रदान करना।

• मुख्य विशेषताएं : इस योजना के भाग हैं सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों के लिए कृषि विपणन के क्षेत्र में अनुसन्धान, परामर्श, सेवाएं, प्रशिक्षण व शिक्षा।

• सहायता के पैटर्न : कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 100% अनुदान।

• पात्रता :  ये गतिविधिया

08
Aug

कृषि विपणन सूचना नेटवर्क

• शीर्षक :    कृषि विपणन सूचना नेटवर्क

• प्रकार  :    केन्द्र क्षेत्र की योजना

• उद्देश्य  :    बाजार के आंकड़ों के तेजी से संग्रह और उसके कुशल तथा समयोचित उपयोग हेतु प्रसार के लिए एक राष्ट्रव्यापी सूचना नेटवर्क की स्थापना करना; अपनी बिक्री और खरीद से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए के लिए उत्पादकों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं को नियमित रूप से और विश्वसनीय डाटा के प्रवाह को सुनिश्चित करना, और मौजूदा बाजार सूचना प्रणाली के विपणन में प्रभावी सुधार द्वारा विपणन की दक्षता में वृद्धि करना।

• मुख्य विशेषताएं  :  इस योजना के घटकों में राज्य कृषि विपणन विभागों/ मण्डलों/ बाजारों और डीएमआइ के प्रधान कार्यालय से मिलकर बने 710 नोड्स के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करना शामिल है। इन सम्बन्धित नोड्स को एक कंप्यूटर और उसके बाह्य उपकरणों प्रदान क

शीर्षक: एगमार्क वर्गीकरण व मानकीकरण

प्रकार: केन्द्र क्षेत्र की योजना

उद्देश्य: कृषि उपज (वर्गीकरण और मार्किंग) अधिनियम, 1937 के तहत कृषि और संबद्ध वस्तुओं के वर्गीकरण और मानकीकरण को प्रोत्साहन।

मुख्य विशेषताएं: कृषिगत वस्तुओं के लिए गुणवत्ता मानक उनकी आंतरिक गुणवत्ता के आधार पर बनाए जाते हैं। वैश्विक व्यापार जगत में प्रतिस्पर्धा के लिए मानकों में खाद्य सुरक्षा कारकों को शामिल किया जा रहा है। विश्व व्यापार संगठन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ये मानक अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ संगत किए जा रहे हैं। उत्पादक / निर्माता और उपभोक्ता के लाभ के लिए कृषिगत वस्तुओं का प्रमाणन किया जाता है। मिलावट के खतरे वाली वस्तुओं अर्थात मक्खन, घी, वनस्पति तेल, पिसा - मसाला, शहद, गेहूं का आटा आदि का प्रमाणन बहुत आम है। मिश्रित खाद्य वनस्पति तेल और वसा स्प्रेड क एगमार्

शीर्षक : राष्ट्रीय सहकारी परिसंघों की सहायता.

प्रकार: केन्द्रीय क्षेत्र

उद्देश्य: पदोन्नति और परियोजनाओं के अनुसंधान एवं सर्वेक्षण के विकास के लिए वित्तीय राष्ट्रीय सहकारी संघ को सहायता.

मुख्य विशेषताए: तकनीकी और कंसल्टेंसी सर्विसेज के संवर्धन सुविधाओं, क्षेत्र के अध्ययन के आधिक्य, अनुसंधान और सांख्यिकीय गतिविधियों,अवसंरचनात्मक सुविधाओं / कार्यालय भवनों / परिसर में सुधार.

सहायता के पैटर्न: 90% सहायता केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान की गई है औरशेष 10% फेडरेशन द्वारा वहन किया जाता है.

पात्रता: फेडरेशन शामिल और कमजोर वर्गों या प्रचार भूमिका के साथ मुख्यरूप से अपर्याप्त संसाधनों की कमी से पीड़ित के लिए सहकारी के बड़े.

लागू करने की प्रक्रिया: अनुदान सहायता में की आवश्यकता के पूर्ण विवरण के साथ प्रस्ताव.

व्यक्ति से संपर्क किया जाय

सहयोग प्रभाग,

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13
Jul

రైతు మిత్ర సంఘాలు - Raitu Mithra Groups

రైతు మిత్ర సంఘాలు:

లక్ష్యాలు:

1. సాంకేతిక పరిజ్ఞానం యొక్క బదిలీ కోసం వ్యవసాయ ఎక్స్టెన్షన్ వ్యవస్థ మరియు రైతులు మధ్య ఇంటర్ఫేస్ వలె పని మార్కెట్ సమాచారం మరియు ఇతర వ్యవసాయ సంబంధిత సలహా యాక్సెస్. వరకు

2. శాస్త్రీయ వ్యవసాయం మరియు ఆలోచనల కోసం ఒక క్లియరింగ్ హౌస్ వంటి చట్టం.

3. ఇన్పుట్ అవసరం అంచనా.

4. జ్ఞానం, శిక్షణ, సమాచారం మరియు గుంపు సభ్యులందరికీ సాంకేతికతల గరిష్ట ఉత్పత్తి మరియు ఉత్పాదకతను సాధించేందుకు బదిలీ ప్రక్రియలో ఒక మధ్యవర్తిగా గా చట్టం.

5. సామాజిక చర్యలు అప్ తీసుకొని పాటు వ్యవసాయం నిపుణుడు ఉపన్యాసాలు ఏర్పాటు చేసుకోవటాన్ని, మట్టి పరీక్ష, యానిమల్ హెల్త్ శిబిరాలు వంటి వివిధ అభివృద్ధి చర్యలు చేపట్టారు.

6. సరైన వనరుల ఆధారిత మరియు మార్కెట్ నడిచే రైతులు వ్యూహాలను రూపొందించే.

7. ఇటువంటి ఫైనాన్షియల్ సంస్థలు, మార్కెట్ యార్డ్లో, మీడి

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