Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

1. ट्रांसैक्ट अथवा क्वाड्रंट फेंककर अथवा मार्कर का इस्तेमाल कर नमूने तैयार करने की तकनीक को निर्धारित करें।

2. दूरी मापन के इस्तेमाल के वक्त क्वाड्रंट को अपने पैर के कुछ भाग पर रखना अच्छा माना जाता है।

3. हर बार कुछ और स्थापनों का प्रयोग भी करना चाहिए।

4. बिचड़े की संख्या को गिनकर दर्ग करें। सावधानीपूर्वक बिचड़े की गिनती करें ताकि टिलर्स अथवा घास की प्रजातियों की गिनती न हो।

5. प्रत्येक खेत में सभी क्वाड्रंट के लिए दर्ज की गई पौधों की संख्याओं को जोड़ें और कुल क्वाड्रांट क्षेत्रफल से विभाजित करें।

19
Sep

जल की गुणवत्ता

1. पर्याप्त सिंचाई के समय, चावल की उत्पादक फसल पाने के लिए

जल आवश्यक है, खराब किस्म के जल से मिट्टी से जुड़ी समस्याएं आ सकती है और चावल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मिट्टी से संबंधित कुछ समस्याएं जो चावल को प्रभावित करती है उनमें शामिल हैं लवणता (उच्च घुलणशील नमक), जिंक की कमी, फॉस्फोरस की कमी, और सोडियम की अधिक मात्रा जिसके कारण मिट्टी की स्थिति खराब होती है।

2. चावल उगाने वाले क्षेत्रों में लवणता की समस्या सामान्य होती है।

3. अंकुरण की वृद्धि की अवस्था में चावल, क्लोराइड और नाइट्रेट के प्रति बहुत ही संवेदनशील होता है।

4. यदि जल में अत्यधिक ठोसों की मात्रा हो तो इससे नोज़ल ब्लॉकेज उत्पन्न होता है।

5. कुछ रासायनों की प्रभाविता को जबरदस्त तरीके से मिट्टी के निलंबित कणों द्वारा कम किया जा सकता है।

19
Sep

रोपण तकनीक

1. सबसे उपयुक्त रोपण तकनीक स्थान, मिट्टी का प्रकार,

और फसल पारिस्थितिकी पर निर्भर करता है।

2. फसल का सीधा रोपण किया जाता है अथवा स्थानांतरण किया जाता है। इसी प्रकार, स्थानांतरित पौधों को हाथ से या मशीन द्वारा संस्थापित किया जा सकता है।

3. सीधे रूप से बोया हुआ फसल प्रतिरोपित फसल की तुलना में तेजी से वृद्धि करता है लेकिन उन्हें खर-पतवारों से अधिक प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

19
Sep

बीज का स्वास्थ्य (Seed Health)

1. इसका अर्थ है फफूंदी, जीवाणु, विषाणु तथा कीट जैसे कटवार्म, विनाशकारी कीट के कारण बीज में बीमारियों की मौजूदगी।

2. बीज के स्वास्थ्य का परीक्षण आवश्यक है क्योंकि

a) बीज जनित इनॉक्युलम (inoculum) से खेत में क्रमिक रूप से बीमारियां फैल सकती हैं।

b) आयातित बीज से नई बीमारियों का जन्म हो सकता है।

बीज-जनित रोगों के जांच की विधियां:

1. प्रत्यक्ष जांच: निमैटोड गॉल्स, स्मट बॉल्स, बदरंग बीज, आवरण का मुरझाना (सूक्ष्मदर्शी द्वारा)।

2. इम्बाइब्ड बीज की जांच: अच्छे बीजों की पहचान के लिए उसे जल में डालते हैं, लक्षण पता चल जाता है।

3. पानी द्वारा साफ किए गए छोटे जीवों की जांच: बीजों को पानी में डाला जाता है अथवा अल्कोहल में डाला जाता है और अच्छी तरह से फूलने दिया जाता है ताकि कवक के बीजाणु, हायफेट इत्यादि दूर हो सके।

19
Sep

बीज का स्थान नियोजन

1. चावन के बीज को मिट्टी की सतह के करीब अवश्य रखना चाहिए।

2. जब सूखी चिकनी मिट्टी में बीज बोई जाए तो बीज को सतह से 10 से 15 मिमी नीचे डालनी चाहिए।

3. यदि बीज को इस गहराई में बोई जाए तो मिट्टी की सतह को समतल करने पर बहुत से अंकुर बाहर नही निकल पाते और निकलने का समय भी बढ़ जाता है।

4. जब गीले बीज की बुआई होती है, तब बीजों को मिट्टी के अन्दर नहीं डालनी चाहिए।

5.जहां संभव है जल डालें और बीज बुआई से पहले आंशिक रूप से जल को बाहर निकाल दें।

6. बीजे को मिट्टी से ढकने के बाद लगभग 48 घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

1. अंकुरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए, बीज अपने आसपास से

कुछ निश्चित मात्रा में नमी का अवशोषण करता है।

2. सूखी बीज परत में अवशोषण तब आरंभ होता है जब इसे मिट्टी में बिखेर दिया जाता है अथवा जल में आंशिक रूप से डुबोया जाता है।

3. बीजे का मिट्टी अथवा मिट्टी के ढेले से अच्छी तरह संपर्क में आने के लिए, बीज का आकार में छोटा होना आवश्यक होता है।

4. रोपण से पहले बीज को भिंगोने (जल में देर तक रखना) से प्राय: पौध निकालने की दर में वृद्धि होती है।

बिचड़े के रूप में बढ़ने के लिए बीज अनेक परिस्थितियों से गुजरता है:

1. वातावरण से नमी का अवशोषण करता है।

2. मिट्टी की गीली परत में जड़ तंत्र को स्थापित करता है।

3. इसकी की कली और पत्ते मिट्टी की सतह से बाहर निकल आते हैं।

4. बहुत सी पर्यावरणीय दशाएं बिचड़े की क्षमता को प्रभावित करती हैं।

5. बीज और जल का संपर्क होता है।

6. जिस गहराई पर बीज रखा जाता है और कितनी संख्या में कीट मौजूद है।

15
Sep

टाइन्ड प्लाउ (कांटेदार हल)

1. टाइन्ड प्लाउ सबसे अधिक बहुपयोगी प्राथमिक जुताई उपकरण है

क्योंकि उनका इस्तेमाल द्वितीयक जुताई के लिए किया जा सकता है और साथ ही यह सीड ड्रिल के रूप में भी प्रयुक्त होता है।

2. इसका इस्तेमाल केवल सूखी स्थिति में ही किया जा सकता है क्योंकि यह मिट्टी को पलटने की बजाए उसे चीरता है। यह खरपतवार को नोंच कर उन्हें सतह पर लाता है।

3. टाइन में विभिन्न साइज के फाल या स्वीप लगाए जा सकते हैं। स्वीप की चौड़ाई 50 मिमि से 500मिमि तक हो सकती है।

4. ये हल ऐसी परिस्थितियों में व्यापक रूप से काम में लाए जाते हैं जहां अवशेषों को सतह पर ही छोड़ देने की जरूरत होती है।

5. टाइन हल को खींचने के लिए तवे और मोल्डबोर्ड वाले हलों की तुलना में कम ताकत की जरूरत होती है और इसे पशुओं या चार पहियों वाले ट्रैक्टर की मदद से खींचा जा सकता है।

6. इन हलों को 3 प्वाइंट लिंकेज माउंटेड या ट्रेलिंग वर्जन क

1. ऊर्वरक की टॉप ड्रेसिंग (ऐच्छिक): यदि तापमान और जल पर्याप्त है लेकिन बिचड़े पीले हों तो इससे नाइट्रोजन की कमी का पता चलता है।

2. बिचड़े पर 0.5% यूरिया (1.5 किग्रा यूरिया को 300 ली पानी में घोलकर) का छिड़काव करें।

1. बुआई के 5 दिन बाद नर्सरी का आवरण हटा दें और नर्सरी को जल से भर दें। मैट के चारों ओर 1 सेमी पानी बनाए रखें।

2. फिर, रोपण के लिए बिचड़े के मैट को हटाने से 2 दिन पूर्व पानी निकाल दें। यदि 7 दिन बाद बिचड़े का रंग पीला पड़ जाए तो इसका अर्थ है कि नाइट्रोजन की कमी हो रही है।

3. बिचड़ॆ पर 0.5% यूरिया के घोल का छिड़काव कर इस कमी की पूर्ति करें। सामान्यतः 1.5 किग्रा यूरिया को 300 ली. पानी में घोलकर 100 वर्ग मी के क्षेत्रफल में छिड़कें।

Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies