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अच्छे कम्बाइन हार्वेस्टिंग के लिए दिशानिर्देश/अनुशंसित तरीके :

1. अन्य कटाई विधियों की तुलना में कम्बाइन हार्वेस्टिंग में फसल को अधिक ऊंचाई से काटा जाता है।

2. कम्बाइन हार्वेस्टिंग से फसल की तैयारी में समय अंतराल कम होता है: अधिक पहले हार्वेस्टिंग से ................

3. दानों का प्रतिशत और अधिक विलंब से की गई कटाई के कारण दानों के अधिक झड़ने की समस्या आती है।

4.थ्रेशर की गति को बहुत अधिक रखने या बहुत कम रखने से लाभशीलता में कमी आती है।

5. ईष्टतम थ्रेशर स्पीड के लिए दानों में नमी की मात्रा, कम्बाइन में डाले जाने वाली सामग्री की मात्रा एकदम सही होनी चाहिए। 

6.फील्ड लॉस को कम रखने के लिए फाइन ट्यूनिंग फॉर्वर्ड स्पीड और हेडर की ऊंचाई खास तौर से महत्वपूर्ण है। 

 

20
Sep

कम्बाइन हार्वेस्टिंग

1.कम्बाइन हार्वेस्टर द्वारा फसल काटने, उनका संचालन, थ्रेशिंग और

सफाई जैसे कार्य एक साथ किए जा सकते हैं।  

2. धान का  कम्बाइन हार्वेस्टर प्रति दिन 10 एकड़ खेत की फसल तैयार कर सकता है और इसे 30 सेंट तक के क्षेत्रफल वाले खेतों में चालाया जा सकता है।

3. इस मशीन के संचालन में एक ड्राइवर और एक सहायक की आवश्यकता होती है।

4. अनाज की कोई बरबादी नहीं होती और इसके परिचालन पर उतनी ही लागत आती है जितनी इन कार्य में कुल मजदूरी के भुगतान पर व्यय करना होता है।  

 

 बेहतर मशीन थ्रेशिंग के लिए दिशानिर्देश/अनुशंसित तरीके:

1. फसल की कटाई कब करें: ऐक्सिअल-फ्लो थ्रेशर जो खास कर चावल की तैयारी के लिए डिजायन किया गया है बहुत गीली फसल के साथ भी काम कर सकता है। इसलिए धान की तैयारी फसल के पूरी तरह परिपक्व हो जाने पर करें ताकि उपज अधिकतम मिले और हानि कम से कम हो।

2. थ्रेशिंग का समय: आदर्श रूप से मशीन से थ्रेशिंग फसल कटाई के तुरंत बाद शुरू कर दिया जा चाहिए और प्रायः यह काम खेत में ही किया जा सकता है।

कटाई के तुरंत बाद थ्रेशिंग से कटी फसल को कीटों, पक्षियों, चूहों, बीमारियों और कवकों का सामना नहीं करना पड़ता है। 

3. मशीन का समायोजन: गलत तरीके से समायोजित मशीन से थ्रेशिन्ग के दौरान काफी नुकसान होता है और दाने टूटते हैं। हमेशा यह सुनिश्चित करें कि थ्रेशिंग ड्रम की गति और सफाई यंत्रों की सेटिंग फसल की स्थिति के हिसाब से सही तरीके से कि

20
Sep

मशीन से थ्रेशिंग

1. मैनुअल थ्रेशिंग में मानव श्रम की अधिकता के कारण बहुत से देशों

में धान की तैयारी अब छोटे एक जगह पर स्थिर मशीन थ्रेशर के जरिए यांत्रिक रूप से की जाती है। स्थिर मशीन थ्रेशर से धान की तैयारी खेत में या खेत के समीप की जाती है।

2. धान के कई स्थिर (स्टेशनरी) थ्रेशर में पेग टूथ वाले थ्रेशिंग ड्रम होते हैं, हालांकि वायर-लूप या रैस्प-बार वाले थ्रेशर का भी प्रचलन है।

3. प्रायः थ्रेशर फीड-इन प्रकार के होते हैं अर्थात् संपूर्ण फसल को थ्रेशर में डाल दिया जाता है जिससे उच्च संवेश-प्रवाह प्राप्त होता है।

4. होल्ड-ऑन थ्रेशर (जिसमें मशीन में केवल फसल की बालियां डाली जाती हैं) की क्षमता आमतौर पर फीड-इन प्रकार के थ्रेशर की तुलना में कम होती है। इन थ्रेशरों का प्रयोग ऐसे इलाकों में किया जाता है जहां पुआल के बंडलों को बाद में इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।

5.बड़े स्टेशनरी थ्रेशर म

1. हाथ से तैयार की जाने वाली फसलों के लिए जरूरी है कि दो- एक दिन उन्हें खेत में सूखने छोड़ा जाए ताकि उनमें नमी की मात्रा कम हो जाए और थ्रेशिंग आसान हो।

2. हाथ से थ्रेश की जाने वाली फसलों के अधिकतम उत्पादन के लिए धूप से सुखाए गए दानों में नमी की मात्रा 18-20% होनी चाहिए। ध्यान रहे कि फसल जरूरत से ज्यादा न सूखे क्योंकि तब यदि फसल की ढुलाई की जाती है तो दानों के झड़ने की समस्या होगी। 

3.थ्रेशिंग से पहले यदि फसल को सुखाया गया है तो ध्यान रहे कि वे दुबारा भींगने न पाएं क्योंकि इससे मिल में चावल तैयारी के दौरान दानों के टूटने की समस्या आती है।

4. फसल के भींगने की स्थिति में, यदि फसल पहले से पर्याप्त रूप से सूखी हो तो मैनुअल थ्रेशिंग में दिक्क्तें आती हैं (उदा. के लिए, बारिस के दिनों की फसल कटाई)।

 

 

20
Sep

मैनुअल थ्रेशिंग

1.थ्रेशिंग की सामान्य विधि में अनाज को बालियों से अलग करने के लिए आघात का सहारा लिया जाता है। इसके लिए हाथ से पीटकर, रौंदकर या बालियों को स्पाइक या रैस्प बार वाले घूमते हुए ड्रम में रखकर अनाज तैयार किया जाता है।   

2. हाथ से पीटने वाली विधि को ऐसी किस्मों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जहां अनाज का बालियों से अलग होना आसान हो। हैंड थ्रेशिंग के अंतर्गत आते हैं:                                      

• पांव से मसलना: इसमें पांव से मसलकर अनाज तैयार किया जाता है। इसे सफलतापूर्वक करने के लिए फसल को चटाई पर बिछाकर श्रमिक उसे पांव से मसलते हैं।  

• थ्रेशिंग रैक से पीटकर: इसमें किसान फसल को गराड़ी के पास रखकर पट्टीदार बांस या लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर दंवनी करते हैं।

• मूसल: मूसल या लाठी से पीटकर भी धान झाड़े जाते हैं।

• पेडल थ्रेशर या ट्रेडिल थ्रे

20
Sep

कटाई

1. हाथ से कटाई करने के लिए, हंसिए द्वारा तने को जमीन से सटा कर कटे

अथवा केवल दाने वाले ऊपरी हिस्से (बाली) को काटें।  

2. भारत के हाथ से फसल की कटाई बहुत ही सामान्य है। इस विधि में साधारण हंसिए से जमीन से 10-15 सेमी की ऊंचाई से चावल के फसल को काटा जाता है। 

3. चावल के फसल कटाई के बाद इसे पुलिंदा बनाकर खेत में ही सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि थ्रेसिंग में आसानी हो। 

4. चावल के फसल की कटाई में 40-80 मजदूरों की आवश्यकता होती है।  

5. यांत्रिक रीपर द्वारा भी चावल की कटाई की जाती है। रीपर द्वारा फसल काटने के लिए खेत का समतल होना आवश्यक होता है। 1.5 सेमी कटिंग-विड्थ वाले रीपर 2 – 4 हेक्टेयर प्रतिदिन की दर से संचालित हो सकता है। 

 

20
Sep

कटाई का समय निर्धारण

1. लक्षण के अनुसार फसल का औसत समय-अंतराल लें, कटाई की अनुमानित तिथि से 7 से 10 दिन पहले खेत के पानी का निकास कर लें क्योंकि पानी के निकास से फसल जल्दी परिपक्व होता है और कटाई की अवस्था को उन्नत करता है। 

2.जब बाली 80% पुआल के रंग का हो जाए तब समझ लें कि फसल कटाई के लिए तैयार है। यहां तक कि इस अवस्था में, कुछ किस्मों में पत्ते हरे ही रहते हैं। 

3. परिपक्व कल्ले का चयन कर कुछ दानों के छिलके निकालें और परिपक्वता को सुनिश्चित करें। 

4. चुने गए बाली के निचले भाग के अधिकर दाने जब कठोर अवस्था में हो जाए तो फसल कटाई के लिए तैयार है। इस अवस्था में फसल की कटाई करें, थ्रेस करें और दानों को फटकें। 

5. भंडारण के लिए अनाज को 12% नमी स्तर तक सुखाएं। किसी तुलना के लिए चावल की उपज को 14% की आर्द्रता स्तर पर आकलित किया जाता है। 

6. मानसून वर्षा से बचने के लिए कटाई से एक सप्ताह पहले 20% NaCl के छ

भारत में फसल कटाई के सर्वाधिक प्रचलित प्रणाली है: 

1.हास्तचालित औजारों द्वारा: इस प्रणाली में कटाई के लिए पारंपरिक औजारों जैसे थ्रेसिंग रैक्स, सिम्पल ट्रेडल थ्रेसर, और रौंदने के लिए जानवर इत्यादि का इस्तेमाल किया जाता है। मैन्युअल थ्रेसिंग को उन्नत करने के लिए पैडल थ्रेसर एक साधारण मशीन होता है। 

2.मशीन थ्रेसिंग के साथ मैन्युअल थ्रेसिंग: पोर्टेबल थ्रेसर का इस्तेमाल यांत्रिक कटाई की दिशा में पहला कदम है। 

3.यांत्रिक कटाई के साथ मशीन थ्रेसिंग : रीपर के प्रयोग से फसल को काटकर टाल लगाया जाता है, थ्रेसर द्वारा भूरे से अलग किया जाता है और हाथ से या मशीन के प्रयोग से साफ किया जाता है।

4.कम्बाइन द्वारा कटाई: कम्बाइन हार्वेस्टर में सभी प्रक्रियाएं जैसे कटाई, संचालन, थ्रेसिंग और सफाई होती है। 

 

 

20
Sep

चावल के कटाई कब करें

1. उच्च आर्द्रता (20-25%) पर धान की कटाई करें। 

2. परिपक्व होने पर, कुल अनाज का लगभग 80% के पीला हो जाने और तने और पत्ते के हरे रंग के रहने पर कटाई करें। 

3. हेडिंग के 28 से 34 दिनों बाद बाली में वयस्कता आती है। 

4. समय पर कटाई करने से निम्नलिखित कारणों से उपज की क्षति होती है: 

• अनाज के दाने टूट कर नीचे गिर जाते हैं। 

• अनाज के दानों में दरार पड़ जाते है और मिलिंग के समय टूट जाते हैं। 

• आर्द्र मौसम में अनाज बदरंग हो जाते हैं। 

• चिड़ियों और चूहों का हमला होता है।

 

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