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27
Aug

KJTRH-3

महाराष्ट्र राज्य में व्यावसायिक खेती के लिए रीजनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन, करजत द्वारा KJTRH-3 को 2004 में सहयाद्री-2 नाम से जारी किया गया। बेहतरीन दाने की क्वालिटी(L.S.), बेहतरीन मिलिंग (70.2 %) और हेड राइस रिकवरी(56 %) के साथ यह जल्द (115-120 दिनों में) तैयार होने वाला हाइब्रिड है, जो राज्य की उच्च भूमि और दोहरी फसल वाले क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। यह किस्म ब्लास्ट, बैक्टीरियल ब्लाइट, फाल्स स्मट, ब्राउन प्लांट होपर और स्टेम बोरर के प्रति सामान्य रोधन क्षमता दर्शाती है। इसने राज्य और देश के विभिन्न कृषि-पर्यावरणीय दशाओं में स्थिर उपज निष्पादन दर्शाया है। औसतन, इसकी उपज 6.0-7.50 टन प्रति हे. होती है। सहयाद्री-2 किस्म के हाइब्रिड के मादा और नर लाइनों के बीच कम स्टैगर पुष्पण के कारण बीजों का उत्पादन आसान होता है।
27
Aug

KJTRH-1

महाराष्ट्र राज्य में व्यावसायिक खेती के लिए रीजनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन करजत द्वारा प्रथम हाइब्रिड चावल KJTRH-1 को 1998 में सहयाद्री नाम से जारी किया गया। इसे बाद में साल 2000 में देश के पश्चिमी क्षेत्रों अर्थात महाराष्ट्र , गोवा और गुजरात के लिए अधिसूचित कर दिया गया।
27
Aug

RARS करजत में विकसित हाइब्रिड

करजत में इन दो हाइब्रिडों का विकास किया गया है: 1. KLTRH-1 2. KLTRH-2
1. दक्षिण में हाइब्रिड चावल की खेती का क्षेत्र जिस प्रकार सिमटा हुआ है उसे देखकर लगता है कि दक्षिण भारत में इसने कोई खास लोकप्रियता हासिल नहीं की है। 2. इसका कारण यह है कि दक्षिण भारत के लोग BPT 5204 जैसे मध्यम मोटाई के प्रीमियम क्वालिटी के चावल पसंद करते हैं, जबकि मौजूदा हाइब्रिड चावल लंबे दाने वाले और लसीले होते हैं। 3. हाल में, डाइरेक्टरेट ऑफ राइस रिसर्च, हैदराबाद ने एक हाइब्रिड किस्म DRR TRAINING MANUALH-3 का विकास किया है जो BPT 5204 (मध्यम पतलापन के साथ सबसे लोकप्रिय किस्म) की तुलना में उपज और दाने की क्वालिटी दोनों ही मामलों में ज्यादा अच्छा है। 4. इस हाइब्रिड को 2009 में आन्ध्र प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में CSCSN&RV द्वारा जारी किया गया। अपने देश में जारी की गई, यह BPT क्वालिटी युक्त मध्यम पतलापन वाले चावल की पहली किस्म है।

1. इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंसटीट्यूट, (IARI), नई दिल्ली में विकसित बासमती क्वालिटी के पैरेंटल लाइनों ( CMS और रेस्टोरर लाइन) का इस्तेमाल कर पूसा RH 10 को विकसित किया गया और इसे जुलाई 2001 में CSCCSN&RV द्वारा हरियाणा, दिल्ली और उत्तरांचल के सिंचित पारितंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन हेतु जारी किया गया। 2. इसके दानों की क्वालिटी बहुत अच्छी रही और और 40% अधिक उपज के साथ सर्वोत्तम चेक वेराइटी पूसा बासमती 1 के 135 दिनों की परिपक्वता अवधि की तुलना में इसकी परिपक्वता अवधि 115 दिनों की होती है । 3. कम समय में तैयार होने के कारण यह मानसून आरंभ होने के बाद लगाने के लिए उपयुक्त है जबकि उपज में कोई कमी नहीं होती। 4. पूसा RH 10 के जारी होने के साथ ही इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंसटीट्यूट और इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च को विश्व का पहला सुपरफाइन दानों वाला सुगंधित हाइब्रिड चावल विकसित
27
Aug

दाने की क्वालिटी

1. बीजों की कुकिंग क्वालिटी क्षेत्रों के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकती है। चावल की क्वालिटी के लिए मिलिंग क्वालिटी, दाने की साइज, आकार, रूप-रंग और उनके पकने की विशेषताओं को ध्यान मेंब रखना चाहिए। 2. हाइब्रिड के कुल मिल्ड चावल में साबुत दानों की संख्या भरपूर होनी चाहिए। उनकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 2.5:3 से लेकर 5.5: 6.6 तक हो सकता है। ज्यादा लंबे दाने 6.6 मिमि से अधिक के हो सकते हैं। वे दिखने में अर्ध पारदर्शी होंगे और उनका जिलेटिनाइजेशन तापमान और उनमें एमाइलेज की मात्रा भिन्न-भिन्न हो सकती है। 3. इसके अलावा, बासमती जैसे उच्च क्वालिटी के चावल का उनकी लंबाई के अनुसार फैलाव अधिक होगा जबकि उनकी मोटाई समान रहेगी और उनकी खास खुशबू होगी। 4. हाइब्रिड चावल के दाने की क्वालिटी लोकप्रिय किस्मों जैसे जया, IR 64 अन्नदा और अन्य लोकप्रिय स्थानीय किस्मों से बेहतर या उन्हीं के जैसी होगी। 5.
27
Aug

बीज की उपज

खरीफ और रबी मौसमों में बीजों की उपज इस प्रकार ली जा सकती है:

बीज का प्रकार         खरीफ (ha-1)                            रबी (ha-1)
F1                                 1 टन                                            1.5 टन
R लाइन                          0.6  टन                                          0.8 टन

1. बीजों को जूट के साफसुथरे और बिल्कुल नए बोरों में पैक करें। 2. यदि आप पुराने जूट के बोरों में बीजों को रखें तो बोरों को संक्रमण मुक्त कर लें ताकि बीजों पर किन्हीं जंतुओं का प्रकोप न हो। 3. उनके अंदर वाले हिस्से बाहर उलट लें और उन्हें अच्छी तरह झाड़ें ताकि कोई अन्य बीज उनके अंदर न रह जाए। बोरों को 10 मिनट तक 0.15% मैलाथियान के घोल में रखें (इस घोल को तैयार करने के लिए 300 भाग पानी में 1 भाग 50 EC मैलाथियान मिलाएं)। 4 . बीज भरने से पहले बोरों को छाया में सुखा लें। 5 . यदि बीजों में नमी 13% से अधिक हो तो उन्हें पैक न करें। ऐसा करने से भंडारित बीज बाद में खराब हो जाएंगे। प्रत्येक बोरे के लिए दो लेबुल बनाएं- एक बोरे के अंदर लगाएं और दूसरा बोरे के बाहर। 6. हर लेबुल में ये जानकारियां होनी चाहिए: आपका नाम और पता। हाइब्रिड का नाम। बीज उत्पादन वाले खेत का लोकेशन। मौसम।
27
Aug

बीजों के अंकुरण की जांच

1. बीजों को हाइब्रिड बीज के रूप में पैक कर बेचने से पहले उनके अंकुरण की दर और शुद्धता की जांच आवश्यक होती है। आम तौर पर बीजों की जांच और प्रमाणन का काम सरकारी बीज जांच एजेंसियां करती हैं। 2. बीजों के प्रमाणन के लिए अंकुरण की दर कम से कम 85% होनी चाहिए। अपने बीज को जांच के लिए ले जाने से पूर्व आप खुद से उनकी अंकुरण दर की जांच निम्नलिखित विधि से कर सकते हैं। 3. नए या पुराने साफ टाट के टुकड़े पर पानी में भींगे 200 बीजों को समान रूप से फैलाकर रखें। एक दूसरे टाट के टुकड़े से बीजों को ढंक दें। 4. बीजों वाले टाट के टुकड़ों को लपेट कर 7 दिनों तक छाया में रख दें। इस पूरी अवधि के दौरान टाट में नमी बनी रहे इस बात का ध्यान रखें और उन्हें सूखने न दें। 5. 200 बीजों के तीन समूह बना लें। 7 दिनों के बाद पूर्ण विकसित अंकुरित बीजों की संख्या गिन लें। पूर्ण विकसित बीजों के मूल और तने सुविकसित होते हैं।
27
Aug

बीजों की सफाई और ग्रेडिंग

बीजों की सफाई के उद्देश्य: 1. अवांछित वस्तुओं जैसे डंठलों के टुकड़ों, पत्तियों, टूटे हुए दाने, मिट्टी या कंकड़ों को दूर करना। 2. घास-फूस के या अन्य पौधों के बीजों को निकालना। 3. अपरिपक्व, सिकुड़े हुए, अधूरे दानों तथा खाली शूकिकाओं को हटाना। 4. बीजों को हाथ से फटककर या हवा में उड़ाकर भी साफ किया जा सकता है। फटककर या हवा में उड़ाकर केवल हल्की वस्तुओं को हटाया जा सकता है। 5. एअर स्क्रीन मशीन बीजों की न केवल सफाई करता है बल्कि उन्हें बड़े और छोटे दानों के रूप में अलग भी करता है। बीजों को छोटे-बड़े एक समान साइजों में अलग करने को ग्रेडिंग कहते हैं। 6. बीज उत्पादक किसानों के लिए एअर स्क्रीन मशीन आम तौर पर काफी महंगे होते हैं। आम तौर पर बीजों की सफाई और ग्रेडिंग सरकारी या निजी एजेंसियों द्वारा की जाती हैं जो बीज उत्पादक किसानों से संपर्क करते हैं।
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