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दाने के नमूने को दो घंटे तक 130 डिग्री से. पर सुखाया गया। नमी की जांच के लिए किए जाने वाले कार्य: 

1. खाली बरतन की उसके ढक्कन के साथ वजन करें।

2. अनाज के दिए गए नमूने को एक छोटे चम्मच से अच्छी तरह चलाना चाहिए और इस नमूने के दो भागों को सीधे बरतन में तौलना चाहिए।  

3. अनाज के दानों को बरतन के पेन्दी में समान रूप से फैला देना चाहिए।

4. वजन लेने के बाद बरतन के ढक्कन को हटा दें और खुले बरतन को ओवन में रखें जो पहले से ही सुखाने के अनुशंसित तापमान तक गर्म हो।

5. सुखाने की अवधि के अंत में बरतन को उसके ढक्कन से ढक देना चाहिए।

6. बरतन को एक शोषित्र में डालना चाहिए। शोषित्र को बन्द रखना चाहिए और नमूने को ठंडा होने देना चाहिए।

7. नमूने का फिर से वजन करना चाहिए और नमी की मात्रा की गणना निम्नलिखित सूत्र की मदद से दशमलव के एक स्थान तक की जा सकती है:  

 M2-M3  (100) 

  M2-M1

 

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1. ISTA नियमों के अनुसार, दाने के नमूने में मौजूद नमी की मात्रा वह क्षति है जो अनाज से सूखने के बाद देखने को मिलती है। इसे मूल नमूने के वजन के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है। नमी की जांच की विभिन्न विधियां हैं, जैसे- ओवन विधि, यूनिवर्सल OSAW मीटर विधि, इलेक्ट्रॉनिक मीटर विधि आदि।

1. थ्रेशर के भूसा निकलने वाले रास्ते पर एक बड़ा सा जाल लगा दें जिसमें सभी भूसे जमा होंगे। कुछ देर तक थ्रेशिंग के बाद निकले हुए सारे पदार्थों की जांच करें और हाथ से सभी पके दानों को बालियों में से अलग कर लें।

2. यदि खेत का क्षेत्रफल मालूम हो तो ब्लोअर लॉस को किग्रा/हे. के रूप में व्यक्त किया जा सकता है या थ्रेशर का संवेश-प्रवाह ज्ञात होने की स्थिति में इसे थ्रेशर से तैयार अनाज के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। 

3.समान आर्द्रता, आमतौर पर 14% के आधार पर सभी क्षति की रिपोर्ट करनी चाहिए।

 

 

1.थ्रेशर या क्लीनर को बड़े से प्लास्टिक ट्रैप पर रखें। थ्रेशिंग और सफाई के बाद मशीन को आराम से हटाएं और ट्रैप में एकत्र सभी अनाज को जमा करें।   

2. यदि खेत का क्षेत्रफल मालूम हो तो ब्लोअर लॉस को किग्रा/हे. के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। 

3.  थ्रेशर का संवेश-प्रवाह ज्ञात होने की स्थिति में इसे थ्रेशर से तैयार अनाज के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया ।          

4. समान आर्द्रता, आमतौर पर 14% के आधार पर सभी क्षति की रिपोर्ट करनी चाहिए।

 

 

1.थ्रेशिंग या सफाई के दौरान ब्लोअर इग्जॉस्ट पर जाल लपेटें जिसमें सभी भूसे, तिनके और दानें जमा हो जाएंगे लेकिन उनसे हवा के प्रवाह को बाधा नहीं पहुंचेगी। 

2. सामग्री की सफाई कर अनाज एकत्र करें और उन्हें सुखाकर आर्द्रता को 14% कर लें।  यदि खेत का क्षेत्रफल मालूम हो तो ब्लोअर लॉस को किग्रा/हे. के रूप में व्यक्त किया जा सकता है या थ्रेशर का संवेश-प्रवाह ज्ञात होने की स्थिति में इसे थ्रेशर से तैयार अनाज के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। 

3.समान आर्द्रता, आमतौर पर 14% के आधार पर सभी क्षति की रिपोर्ट करनी चाहिए।  

 

1. परिचालन क्षति = अनाज को उठाने, उसकी ढुलाई, ढेरीकरण, अनाज के उड़ेलने और बोराबंदी के दौरान धान के दानों की क्षति।

1. फसल और आनज के परिचालन के दौरान होने वाली क्षति में शामिल हैं ब्लोअर या क्लीनर लॉस असेसमेंट, स्कैटर लॉस असेसमेंट, थ्रेशिंग लॉस असेसमेंट, अनाज में मौजूद आर्द्रता का निर्धारण।

1.थ्रेशिंग के दौरान अनाज के डंठलों से अलग न हो सकने वाले दानें या थ्रेशिंग लॉस = थ्रेशिंग के दौरान अनाज के डंठलों से अलग न हो सकने वाले दानें। थ्रेशिंग की उच्च दक्षता से थ्रेशिन्ग लॉस कम होता है और थ्रेशिंग लॉस कम हो तो थ्रेशिंग की दक्षता उच्च मानी जाती है।

बिखराव के कारण क्षति = थ्रेशिंग और अनाज की सफाई के दौरान जमीन पर बिखरने वाले अनाज के दानें।

1. लूज डंठलों/भूसों की क्षति या “ब्लोअर क्षति” = सफाई के दौरान अनाज के डंठल और भूसे के साथ मिले हुए परिपक्व दानें।

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