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1. फसल के एकसमान स्थापन के लिए भूमि की तैयारी अच्छी तरह करनी पड़ती है, खेत को समतल करना पड़ता है और जल प्रबन्धन की आवश्यकता होती है। 

2. सूखी बुआई में खर-पतवार बहुत ही गंभीर होते हैं और गीली बुआई में गंभीर होते हैं। 

3. घोंघे (गीले खेतों में), चूहे और चिड़ियां पौधे के घनत्व को गंभीर रूप से कम कर देते हैं।

4.  फसल के स्थापन के समय और अंकुरण के समय अत्यधिक वर्षा हो तो फसल बरबाद हो सकता है (खासकर भारी चिकनी मिट्टी में)। 

5.  प्रतिरोपित चावल के पौधे की तुलना में मुख्य खेत का लंबा अधिग्रहण 5 से 15 दिनों का होता है।

6. सूखी बुआई में अधिक जल और पोषण का प्रयोग किया जाता है (उच्च अंत:स्रवण के कारण खासकर हल्की मिट्टी में)।

 

1. सुनिश्चित करें कि खेत समतल हो, कीचड़ अच्छी तरह बना हो और खर-पतवार निकल दि गए हों। 

2. अंतिम रूप से कीचड़ बनने के 2-5 दिन बाद बिचड़ों का रोपण करें। इस स्थिति में मिट्टी इतना ठोस हो जाता है कि उसमें बीज अपनी जगह बना ले तथा कोई खर-पतवार भी नहीं उगा होता है।

3. जल-निकासित खेतों में, कीचड़ बनाने के बाद छोटे-छोटे नाले बनाए जा सकते हैं ताकि बाद के समय जल निकासी में मदद मिल सके और स्नेल की क्षति से तथा जल जमाव वाले क्षेत्रों में बीज के निकलने की समस्या से भी बचा जा सके। 

4. बीजों को अंकुरित कर लें (जल में 24 घंटे के लिए भिंगो दे और 24 घंटे के लिए ढ़ककर सारा पानी बहा दें) इन समयों में 2-3 मिमी की अंकुरित जड़ निकल आते हैं। 

5. पौधे की 100-150 पौधे/वर्ग मीटर की घनत्व प्राप्त करने के लिए उपयुक्त किस्मों के अच्छे बीजों का पर्याप्त इस्तेमाल करें। इसमें प्राय: 80 किग्रा/हे. बीज की आवश्यकता हो

1. आसान होता है और फसल समय पर लगाया जा सकता है।

2. फसल लगाने में कम मजदूरों की आवश्यकता होते है।

3. जल की बचत होती है।

20
Sep

गीले बीजों की सीधी बुआई

1. गीले बीजों की सीधी बुआई में, जल निकास हुए खेतों में, अच्छी तरह से कीचड़ बने खेतों में अथवा जल जमाव से पहले वाले खेतों में बीजों के छिड़काव से पहले प्राय: बीजों में अंकुर निकल चुके होते हैं।

2. गीले बीजों की सीधी बुआई विधि का प्रयोग सामान्य रूप से सिंचित क्षेत्रों में किया जाता है।

1.  फसल की एकसमान स्थापन के लिए खेत की अच्छी तैयारी, खेत को समतलीकरण और जल प्रबंधन की आवश्यकता होती है। 

2. खर-पतवार एक बड़ी समस्या होते है और अच्छी उपज पाने के लिए इसका नियंत्रण जरूरी होता है। 

3. चूहों, चिड़ियों, झींगुर और चींटियों की समस्याएं उत्पन्न होती है। 

4. निमैटोड्स की समस्या भी आती है खासकर उन खेतों में जिसमें अत्यधिक जल की मात्रा नहीं होती। 

5. फसल के स्थापन के समय और अंकुरण के समय अत्यधिक वर्षा हो तो फसल बरबाद हो सकता है (खासकर भारी चिकनी मिट्टी में)। 

6. प्रतिरोपित चावल के पौधे की तुलना में मुख्य खेत का लंबा अधिग्रहण 15 दिनों का होता है। हल्की मिट्टी में, अंत:स्रवण क्षति के कारण अधिक जल की आवश्यकता होती है। 

 

वर्षापोषित प्रणाली के लिए निम्नलिखित अपवाद हैं: 

1. सीधी बुआई के लिए उपयुक्त किस्म के अच्छे बीजों की 60-80 किग्रा मात्रा प्रयोग करें। 

2. आधारीय ऊर्वरक का इस्तेमाल किया जा सकता है। 

3. बीज बोने के बाद सिंचाई करें (यदि वर्षा न हो तो)। 2-3 दिन बाद यदि अत्यधिक जल जमाव हो तो जल को बाहर निकाल दें ताकि बीज नम बना रहे और मिट्टी की परत न चढ़े (यह सूखे मौसम में महत्वपूर्ण होता है)। 

4. यदि बीजों को बिखेरने के बाद खेत से जल की निकासी कर दी जाए तो फसल लगने के 10 से 15 दिनों बाद दुबारा पानी डालें। 

 

1. खेतों में छोटे-छोटे नाले बनाए जा सकते हैं जिससे जल के निकास में मदद मिलती है और  जल जमाव वाले भाग में स्नेल की क्षति और बीजे के निकलने की समस्याओं से बचा जा सकता है। 

2. पर्याप्त बीजोका इस्तेमाल करें – जो सीधी बुआई के लिए उपयुक्त किस्म हो ताकि पौधे की 100-150 जनसंख्या प्रति वर्ग मीटर प्राप्त की जा सके। इसमें लगभग 120 – 150 किग्रा/हे. की आवश्यकता होती है। 

3. भूमि का अच्छी तरह से समतल न होने पर, खराब बीज और चिड़ियों या चूहों द्वारा बीजों की क्षति के कारण किसान कभी-कभी अधिक (150-200  किग्रा/हे.) बीजों का इस्तेमाल करते हैं। 

4. बीजों को एकसमान रूप से बोएं। हाथ से छिड़काव करने की स्थिति में, खेत को 5 मीटर चौड़ी पट्टियों (उपयुक्त दूरी जिसमें हाथ से समान रूप से बीज वितरित हो सके) में बांट लें। 

5. बुआई करने वाले व्यक्ति के लिए बीजों के ढ़ेर को छोटे-छोटे ढ़ेरों (10 मीटर चौड़ी प

1.अनुवर्ती चावल की फसल अथवा दूसरी ऊंची भूमि वाले फसलों के लिए प्रतिरोपित चावल के फसल मिट्टी पर हानिकारक प्रभाव डालती है। चावल की सीधी बुआई जो छोटे बिचड़ों के प्रतिरोपण के कीचड़ वाली अरुचिकर कार्यों से बचाती है, अडैफिक विरोधाभाषों के समाधान का विकल्प प्रदान करती है और फसल प्रणाली के निरंतरता को बढ़ाते है।  

2.कीचड़ बनाने के लिए दुर्लभप्राय जल की भारी मात्रा की आवश्यकता एक खुराक में होती है; जब जलाशयों में कम पानी बचा हो, मिट्टी की संरचना को नष्ट होती है और मिट्टी की उत्पादकता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित होते है। 

3.चावल की सीधी बुआई से मजदूरों की मौसमी कमी, मानसून का देर से आना, क्रियाविधि की अरुचिकर प्रक्रिया जिसकी वजह से प्रतिरोपण में देर होती है इत्यादि समस्याएं नहीं होती।  

4.कीचड़ वाले खेतों के विपरीत, सीधी बुआई वाले चावल के खेतों में दरार नहीं आत

20
Sep

सूखी सीधे बुआई

1. सूखे बीज की सीधी बुआई: वर्षा-पोषित और अत्यधिक पानी वाले पारिस्थितिकी में, सूखे बीजों को मिट्टी में हाथ से छींटते हैं और इसके बाद जुताई करते हैं।

कुछ स्थितियों में (जैसे, गहरे पानी वाला क्षेत्र), बीजों की छिटाई के बाद जुताई की आवश्यकता नहीं होती।

20
Sep

सीधी बुआई का परिचय

1. चावल की सीधी बुआई भारत में पुराने जमाने की विधि है, खासकर वर्षा-पोषित क्षेत्रों में, जहां किसान नर्सरी में बिचड़े का निर्माण और प्रतिरोपण पर बिल्कुल ध्यान नहीं देते।

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