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12
Aug

Cooperatives storage सहकारी भंडारण

1. किसानों को सहकारी भंडारण सुविधाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जाता है जिससे भंडारण व्यय में कमी आती है। 2. ये सहकारी संस्थाएं भंडारित उपज के ऊपर वायदा ऋण भी उपलब्ध कराते हैं और पारंपरिक भंडारण की तुलना में इनका भंडारण अधिक व्यवस्थित और वैज्ञानिक होता है। 3. सरकारी संस्थाओं और बैंकों द्वारा सहकारी भंडारण व्यवस्था की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता और अनुदान भी दिए जाते हैं। 4. भंडारण क्षमता की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम(NCDC) द्वारा गांव और मंडी स्तरों पर सहकारिता के जरिए भंडारन सुविधाओं के निर्माण को बढ़ावा दिया जाता है। 5. NCDC की मदद से प्रमुख राज्यों में स्थापित भंडारण व्यवस्था की संख्या और क्षमता नीचे दिए गए हैं।
1. देश में विभिन्न राज्यों द्वारा अपने –अपने भंडारण निगम स्थापित किए गए हैं। राज्य भंडारण निगमों के परिचालन क्षेत्र राज्य के जिले होते हैं। 2. राज्य भंडारण निगमों की कुल शेयर पूंजी में केन्द्रीय भंडारण निगम और राज्य भंडारण निगम के द्वारा बराबर-बराबर योगदान दिया जाता है। 3. राज्य भंडारण निगम ( SWCs) राज्य भंडारण निगम और केन्द्रीय भंडारण निगम के दोहरे नियंत्रण में काम करते हैं। 4. दिसंबर 2002 के अंत में SWCs द्वारा देश के 17 राज्यों में 1537 गोदामों का संचालन किया जा रहा था जिनकी कुल क्षमता 201.90 लाख टन थी।
1. केन्द्रीय भंडारण निगम( CWC) की स्थापना 1957 में की गई थी। सार्वजनिक क्षेत्र में यह देश का सबसे बड़ा गोदाम परिचालक है। 2. मार्च 2002 में, CWC द्वारा 475 गोदमों का संचालन किया जा रहा था। इसके 16 क्षेत्र हैं जिनके तहत 225 जिले आते हैं और कुल भंडारण क्षमता 89.1 लाख टन है। 3. भण्डारण के अतिरिक्त CWC द्वारा अनाजों के निस्तारण और संचरण, परिचालन और परिवहन, वितरण, कीड़ों से बचाव, धम्रीकरण और अन्य संबंधित सेवाएं जैसे सुरक्षा और हिफाजत, बीमा, मानकीकरण और दस्तावेजीकरण के कार्य भी किए जाते हैं। 4. CWC ने किसानों को वैज्ञानिक भंडारण के लाभों के बारे में शिक्षित करने हेतु किसानों के लिए एक्सटेंशन सेवा की योजना भी कुछ चुनिन्दा केन्द्रों पर शुरू की है।
12
Aug

Mandi godowns मंडी के गोदाम

1. कटाई के बाद अधिकांश धान/चावल मंडी में बिकने चले जाते हैं। आमतौर पर हर राज्य में धान को थोक में या बोरों में भंडारित किया जाता है, जबकि चावल को केवल बोरों में ही रखा जाता है। 2. ज्यादातर राज्यों और केन्द्रीय प्रदेशों में कृषि उत्पादों के विपणन विनियम कानून ( APMC) लागू कर दिए गए हैं। APMCs द्वारा मंडियों में भंडारण गोदामों का निर्माण किया गया है। 3. गोदामों में उपज को रखने के समय भंडारित किए गए अनाज का प्रकार और वजन को दर्शाते हुए एक रशीद जारी किया जाता है। रशीद को मोल-तोल किए जा सकने वाले उपकरण के तौर पर देखा जाता है और यह वायदा वित्त के लिए सक्षम होता है। 4. CWC और SWCs को भी मंडियों में गोदाम के निर्माण के लिए अधिकृत किया गया है। मंडियों में सहकारी संस्थाओं द्वारा भी गोदामों का निर्माण किया जाता है। 5. उत्पादन और उपभोग केन्द्रों पर व्यापारियों द्वारा भी स्थायी गोदाम बनाए
12
Aug

Rural godowns ग्रामीण गोदाम

1. कृषि उत्पादों के विपणन में ग्रामीण भंडारों के महत्व को ध्यान में रखते हुए विपणन और निरीक्षण निदेशिका द्वारा नाबार्ड के साथ मिलकर ग्रामीण गोदाम के लिए पहल किए गए हैं। 2. इसका उद्देश्य है ग्रामीण इलाकों में अच्छी सुविधाओं से युक्त वैज्ञानिक भंडारण गोदामों का निर्माण करना और राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों में ग्रामीण गोदामों का एक नेटवर्क तैयार करना। 3. 31-12-2002 तक 2373 गोदामों के निर्माण को नाबार्ड और एनसीडीसी की मंजूरी मिल चुकी है जिनकी कुल क्षमता 36.62 लाख टन है। 4. इसके अतिरिक्त, 0.956 लाख टन की क्षमता वाले 973 गोदामों के निर्माण को नवीनीकरण और विस्तार योजना के तहत मंजूरी दी गई है।
12
Aug

Producers’ storage उत्पादक का भंडार

1. अनेक प्रकार के पारंपरिक और नई संरचनाओं का इस्तेमाल करते हुए किसानों द्वारा बड़ी मात्रा में धान/चावल को खेत में स्थित गोदामों या घर में बने भंडारों में रखा जाता है। 2. आम तौर पर, इन भंडारों के पात्रों का इस्तेमाल छोटी अवधि के लिए किया जाता है। 3. विभिन्न संस्थानों और संगठनों द्वारा धान/चावल के भंडारण के लिए विभिन्न क्षमताओं वाले सुधरी हुई संरचनाओं का विकास किया गया है, जैसे- हापुर कोठी, पूसा पात्र, नन्दा पात्र, PKV पात्र आदि। 4. ईंटों के बने ग्रामीण गोदाम, कीचड़ पत्थर के गोदाम जैसी विभिन्न भंडारण संरचनाएं भी इस उद्देश्य हेतु प्रयुक्त की जाती हैं। 5. अस्थायी भंडारों को ढकने के लिए किसान लचीली पीवीसी शीटों का भी इस्तेमाल करते हैं। 6. कुछ किसान धान/चावल को जूट के बोरों या प्लास्टिक के अस्तरों वाले बोरों में भरकर कमरे में भंडारित करते हैं।
12
Aug

Storage facilities भंडारण सुविधाएं

भंडारण की सुविधाएं अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग होती हैं जिनमें शामिल हैं उत्पादक का भंडार, गांव का गोदाम, मन्डी का गोदाम, केन्द्रीय भंडारण निगम, राज्य भंडारण निगम और सहकारी भंडार।

1. बिटुमेन/कोलतार ड्रम . धातु के पात्रों के विकल्प के तौर पर

2. हापुर पात्र/कोठी 2, 5, 7.2 और 10 क्विंटल की क्षमता वाले वृत्ताकार पात्र जो बड़े किसानों की भंडारण जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।

3. उदयपुर पात्र ये पात्र उपयोग किए हुए कोलतार के ड्रमों से बने होते हैं। इनमें 1.3 क्विंटल गेहूं और मक्का भी रखे जा सकते हैं। इन पात्रों में अधिक वायुरुद्ध ढक्कनों का इस्तेमाल किया जा सकता है और ड्रम के निकास मार्ग के रूप में एक छोटी काट बनाई जाती है।

4. पत्थर के पात्र पत्थर के पात्र (चित्तौड़ पात्र) का निर्माण स्थानीय तौर पर उपलब्ध 40 मिमि मोटाई के पत्थर के स्लैब से किया जाता है जिनकी माप 680 x 1200 मिमि होता है और ये वर्गाकार क्रॉस सेक्शन वाले होते हैं। इन पात्रों की क्षमता 3.8 क्विंटल होती है।

5. बांस निर्मित पात्र ये पात्र बांस की दो दीवारों से बने होते हैं जिनके बीच पॉलिथीन सा अस्त

12
Aug

Traditional structures पारंपरिक संरचनाएं

पारंपरिक भंडारण संरचनाएं हैं:

1. विभिन्न क्षमता (35, 50, 75 और 100 किग्रा) वाले जूट की बोरियां जो प्लास्टिक के अस्तर युक्त या उनसे रहित हो सकती हैं।

2. 100-1000 किग्र वाले कच्ची मिट्टी के पात्र।

3. पकी मिट्टी के 5-100 किग्रा क्षमता वाले पात्र।

4. फर्श पर या घर के कोने में ढेर (100-1500 क्विंटल) के रूप में।

5. बांस की संरचना।

6. लकड़ी के पात्र और जमीन के नीचे बनी संरचनाएं।

12
Aug

Storage structures

भंडारण संरचनाओं में पारंपरिक और आधुनिक संरचनाएं आती हैं।
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