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09
Aug

एस.आर.आइ में किफायत

1. एस.आर.आइ में चावल की खेती की पारम्परिक विधियों की तुलना में कम पानी, कम बीज, और रसायनों की कम लागत के साथ उपज में वृद्धि होती है। 2. इसका अर्थ है कि लागत पर प्राप्ति अधिक होती है, जो इस विधि को अधिकांश पारम्परिक विधियों की तुलना में अधिक लाभकारी बनाती है। 3. आरम्भ में इसमें बहुत अधिक श्रम की आवश्यकता होती है – मुख्य रूप से ज़मीन की तैयारी तथा वीडिंग के लिए। 4. एस.आर.आइ ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार उत्पन्न करने में योगदान दे सकती है। यह अलग बात है कि एस.आर.आइ कुल मिलाकर ज़मीन, पानी तथा पूंजी की उत्पादकता में वृद्धि की वज़ह से अधिक लोकप्रिय हो रही है।
1. एस.आर.आइ विधि में, अप्राकृतिक कीटनाशक के उपयोग को प्रोत्साहित नहीं किया जाता है। यदि समस्या गम्भीर हो जाए तो उसे अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 2. एकीकृत कीट प्रबन्ध (आइपीएम) की अनुशंसा की जाती है। अतः इन दोनों प्रथाओं में पौधों की सुरक्षा पर रसायनों की लागत बहुत कम होती है।
09
Aug

एस.आर.आइ में फसल की कम अवधि

1. चावल उगाने में एस.आर.आइ के अंतर्गत फसल पारम्परिक विधि की तुलना में 15 से 17 दिन पहले परिपक्व हो जाती है।
1. चूंकि एस.आर.आइ में अधिक दूरी दी जाती है, जिसमें पारम्परिक की तुलना में पौधों की एक तिहाई संख्या समाती है, यदि प्रशिक्षित श्रम का इस्तेमाल किया जाए तो इसमें प्रत्यारोपण के लिए कम श्रम की आवश्यकता होगी। 2. चूंकि एस.आर.आइ के अंतर्गत चावल के एक हेक्टेयर में प्रत्यारोपण के लिए केवल लगभग 50 स्क्वे.मी. क्षेत्र की आवश्यकता होती है, इसमें पारम्परिक पद्धति – जिसमें 500-750 स्क्वे.मी. क्षेत्र की आवश्यकता होती है - की तुलना में छोटा क्षेत्र प्रबन्धित करने के लिए कम श्रम लगेगा। 3. लगातार जलभराव बनाए रखने की तुलना में बारी-बारी से सुखाने व गीला करने के लिए कम श्रम की आवश्यकता होती है।
1. जब खेत में पानी ठहर जाता है तो जडें वायु की कमी की वज़ह से मर जाती हैं। 2. मृत जडें भूरी/जंग के रंग की हो जाती हैं। मिट्टी में मिट्टी के कण, वायु तथा नमी बराबर समानुपात में होने चाहिए। 3. हालांकि धान का पौधा स्थिर जल में भी जीवित रह सकता है, लेकिन धान के एक स्वस्थ पौधे के लिए खेत में पानी स्थिर अवस्था में नहीं होना चाहिए। 4. जब बीच-बीच में रुक-रुक कर सिंचाई की जाती है तो जडों को वायु प्राप्त होती है और वे स्वस्थ रूप से बढती हैं।
09
Aug

एस.आर.आइ में कम बीज

1. चूंकि एस.आर.आइ पद्धति में अधिक दूरी रखी जाती है, बीज की मात्रा कम होती है। 2. इसके परिणामस्वरूप उपर्युक्त लाभ प्राप्त होते हैं। और यह प्रयोग में आसान है तथा गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादित करती है।
09
Aug

एस.आर.आइ के लाभ

एस.आर.आइ के लाभों में शामिल है 1. कम बीज 2. कम पानी 3. कीटनाशकों पर कम खर्च 4. किफायती 5. पर्यावरण मित्र आदि

1. सामान्यतः, बीज तथा उर्वरकों पर खर्च कम होने की वज़ह से एस.आर.आइ में लाभ से लागत का अनुपात पारम्परिक विधि (1.43:1) की तुलना में अधिक (1.94:1) होता है

1. जब पैनिकल्स के सबसे निचले हिस्से में दाने डो अवस्था में हों तो खेत से पानी निकाल दें (50% पुष्पण से लगभग 20 दिन बाद)। 2. दानों को कडक होने दें और पुष्पण से 30-35 दिन बाद कटाई करें जब तने हरे ही हों, ताकि दाने निकल कर गिरें नहीं। 3. यह देखें कि कटाई के समय पुआल में नमी की मात्रा लगभग 20 से 24 प्रतिशत हो। 4. जितनी जल्दी हो सके, थ्रेशिंग करें, जहां तक हो सके, कटाई के एक दिन बाद और बीज को 14% नमी के स्तर पर भंडारित करें। 5. पिछले 4 खरीफ मौसमों के दौरान एआइसीआरआइपी के अंतर्गत किए गए परीक्षणों में यह स्पष्ट रूप से पता चला है कि पारम्परिक विधि की तुलना में एस.आर.आइ में दाने की उपज 7-20% अधिक होती है।
09
Aug

कीटों तथा रोगों का प्रबन्धन

1. फसल के विकास के विभिन्न चरणों में खेत की नियमित रूप से निगरानी करें। 2. आम विधि की तुलना में एस.आर.आइ में कीट तथा रोग की समस्याएं कम होती हैं। लेकिन जहां भी आवश्यक हो, प्राकृतिक/ जैव-कीटनाशकों के उपयोग को वरीयता दें ताकि कीट न्यूनतम आर्थिक सीमा से स्तर से नीचे हो। 3. प्रतिरोधी किस्मों का चयन कर, जैविक नियंत्रण एजेंट डालकर तथा उचित अवस्थाओं पर अधिक सुरक्षित व कम खुराक में कीटनाशक डालकर एकीकृत कीट प्रबन्धन अपनाएं।
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