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1. 8-10 सेमी ऊंचाई के उठे हुए बेड तैयार करें क्योंकि 8-12 दिन आयु के कोपलों की जडें 7.5 सेमी गहराई तक जाती हैं। 2. चारों ओर उठे हुए नर्सरी के बेड को सहारा देने के लिए लकडी की दराती/ पटिये या धान के पुआल के बंडल का उपयोग करें। 3. अतिरिक्त पानी के निकास के लिए चारों ओर चैनल्स बनाएं।

1. जहां तक हो सके एक कोने में या एक एकड के मुख्य खेत से सटी हुई जगह पर लगभग 40 वर्ग मीटर नर्सरी क्षेत्र का चयन करें। 2. यदि क्षेत्र एक एकड से अधिक बडा हो तो उपलब्ध मज़दूरों द्वारा क्रमबद्ध तरीके से व समय पर रोपाई के लिए खेत के हर एकड में 1-2 दिन के अंतराल पर नर्सरी बढाएं। 3. सिंचाई तथा जलनिकास की चैनल के उचित प्रावधान के साथ 1 x 10 मीटर के चार बेड या 1 x 20 मीटर के दो बेड प्रति एकड तैयार करें।
09
Aug

बीज को पहले से सोखना

चयनित बीजों को सादे पानी में 12 घंटों के लिए भिगोएं और पानी को बहा दें तथा अंकुरण व आसान सम्भाल के लिए बीजों को लगभग 24 घंटों के लिए एक टाट के बोरे में इन्क्यूबेट (सेने की प्रक्रिया) करें। ज़रूरत से अधिक सेने से बचें क्योंकि अधिक लम्बे कोपल एकसमान बुवाई को प्रभावित करते हैं।

1. 10 लिटर पानी में 1.65 किलो साधारण नमक मिलाकर बीज भिगोने के लिए आवश्यक लवणयुक्त घोल (सा.आ.1.08) तैयार करें। 2. एक ताज़े अंडे से लवणयुक्त घोल की सान्द्रता का परीक्षण करें, जिसमें अंडा तैरेगा। यदि अंडा डूब जाता है तो सान्द्रता बढाने के लिए और नमक मिलाएं। 3. लवणयुक्त घोल में नर्सरी बढाने के लिए चयनित किस्म के बीज डालें। 4. घोल में बीजों को अच्छी तरह हिलाएं, नीचे बैठ जाने दें और ऊपर तैर रहे बीजों को हटा दें। 5. घोल में नीचे बैठे हुए बीजों का चयन करें। 6. बीजों के दूसरे समूह के परीक्षण के लिए इसी लवणयुक्त घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
08
Aug

एस.आर.आइ में बीज दर

1. मुख्य खेत के एक एकड में अनुशंसित किस्म के 2-3 किलो स्वस्थ तथा अच्छे भरे हुए/ मोटे बीज का उपयोग करें।
08
Aug

एस.आर.आइ के लिए किस्म का चयन

1. सामान्यतः क्षेत्र के लिए अनुशंसित उच्च उपज की अधिकांश किस्में एस.आर.आइ के अंतर्गत सफलतापूर्वक उगाई जा सकती हैं। हालांकि, उच्च टिलरिंग किस्में एस.आर.आइ के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हैं। 2. फसल की अच्छी प्राप्ति के लिए स्थानीय तौर पर अनुशंसित तथा लोकप्रिय किस्म उगाएं। 3. एस.आर.आइ के अंतर्गत संकरों का प्रदर्शन बेहतर होता है और इसलिए उन्हें एस.आर.आइ के लिए अनुशंसित किया जाता है।

1. ऐसे खेतों का चयन करें जो अच्छी तरह समतल हों और जल-निकास की अच्छी व्यवस्था हो। 2. लवणयुक्त/ क्षारयुक्त तथा जलभराव वाले निचले स्तर के खेतों से बचें। 3. उपलब्ध पोषकों की स्थिति के लिए मिट्टी की जांच करें।
1. उचित खेतों का चयन। 2. किस्म का चयन (किस्म की पसन्द)। 3. बीज दर। 4. बीज को पहले से सोखना। 5. नर्सरी बेड की तैयारी। 6. अंकुरित बीज फ़ैलाना। 7. मुख्य खेत तैयार करना। 8. मुख्य खेत का ले-आउट। 9. प्रत्यारोपण।10. जल प्रबन्धन। 11. उर्वरक प्रबन्धन। 12. खरपतवार प्रबन्धन। 13. कीटों तथा रोगों का प्रबन्धन। 14. कटाई तथा कटाई के उपरांत प्रबन्धन। 15. एस.आर.आइ का लागत-लाभ विश्लेषण।

1. इस अनुभव के विपरीत कि एस.आर.आइ विधि विभिन्न किस्मों के लिए तटस्थ होती है, एस.आर.आइ के अंतर्गत किस्मों के बीच भारी अंतर देखा गया। समान्यतः, यह देखा गया कि संकरों (4-42% उपज लाभ) का प्रदर्शन किस्मों (2-17%) से बेहतर रहा। 2. किस्मों की तुलना में केआरएच-2, एचआरआइ 126 तथा पीएचबी-71 एवं डीआरआरएच-2 संकरों का प्रदर्शन बेहतर रहा। चूंकि एस.आर.आइ में बीज की कम मात्रा की आवश्यकता होती है, अधिकतर किस्में आमतौर पर बेहतर प्रदर्शन करती हैं लेकिन ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि कुछ किस्में दूसरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। 3. अतः, खरीफ 2008 के दौरान, विभिन्न जीनोटाइप की एस.आर.आइ के लिए प्रतिक्रिया पहचानने के लिए स्थानीय रूप से लोकप्रिय विभिन्न कालावधि की किस्मों का 16 स्थानों पर परीक्षण किया गया। परिणामों ने स्पष्ट रूप से दर्शाया कि जीनोटाइप (स्थानों के अनुसार शीघ्र मध्यम, संकर तथा विलम्बि
एस.आर.आइ द्वारा धान की उपज के लिए बीज की कम मात्रा – 2 किलो प्रति एकड की आवश्यकता होती है। अतः प्रति इकाई क्षेत्र (25 x 25 सेमी) कम पौधे जबकि मुख्यधारा की अधिक रसायन युक्त खेती में 20 किलो बीज प्रति एकड की आवश्यकता होती है (1 एकड = लगभग 0.4 हेक्टेयर)। एस.आर.आइ में उर्वरकों तथा पौधे की रक्षा के लिए प्रयुक्त रसायनों पर कम खर्च होता है। जड का विकास एस.आर.आइ में चावल की फसल प्राकृतिक अवस्थाओं में स्वस्थ रूप से बढती है तथा उसकी जडों का बहुत अधिक विकास होता है। वह मिट्टी की गहरी पर्तों से पोषक तत्व प्राप्त करती है। एस.आर.आइ में आरम्भ में श्रम की लागत अधिक होती है * प्रत्यारोपण तथा वीडिंग के लिए 50% अधिक मानव-दिवसों की आवश्यकता होती है। * लाभ के लिए मज़दूरों को काम पर लगाती है। * गरीब स्रोतों को यह एक विकल्प देती है, जो अपने परिवार के लोगो को मज़दूरी पर लगाते हैं। * एक बार सही कौशल सीखा तथ
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