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एस.आर.आइ विधि में नर्सरी, पौधे, मिट्टी, पानी तथा पोषक तत्वों का प्रबन्धन शामिल है। इस तरीके से बदलावों का समावेश कि पौधे, मिट्टी तथा पानी उत्कृष्ट रूप से प्रबन्धित किए जाएं सिस्टम ऑफ़ राइस इंटेंसिफिकेशन (या चावल की तीव्रीकरण प्रणाली) कहलाता है। यह प्रौद्योगिकी विशेष रूप से जल प्रबन्धन के उन पारम्परिक तरीकों को बदलने का प्रयास करती है जो हज़ारों वर्षों से विद्यमान थे। एस.आर.आइ पूर्ण सक्षमता से तब हासिल की जाती है जब निम्नलिखित छः महत्वपूर्ण तरीके उनके सहक्रियात्मक परस्पर सम्बन्ध के कारण साथ में अपनाए जाएं। एस.आर.आइ के मूल तरीके हैं 1. मैट नर्सरी में 2-3 किलो बीज बोना। 2. युवा (8-12 दिन आयु के) कोपल प्रत्यारोपित करना (तमिलनाडु में 14-15 दिन आयु के कोपल)। 3. उथली गहरी पर एकल कोपल का प्रत्यारोपण तथा स्थिर जल के स्थान पर 2 कोपल प्रति टीला प्रत्यारोपित करना। 4. अधिक दूरी अप
• सिस्टम ऑफ़ राइस इंटेंसिफिकेशन (या चावल की तीव्रीकरण प्रणाली) ( एस.आर.आइ ) एकीकृत फसल प्रबन्धन तथा पारम्परिक प्रत्यारोपण विधि की तुलना में देशभर में फैले लगभग 25 स्थानों पर मूल्यांकित की गई। • 4 वर्षों के परीक्षणों ने यह स्पष्ट रूप से दर्शाया कि एस.आर.आइ का प्रदर्शन एक स्थान से दूसरे पर भिन्न था जो यह परिलक्षित करता है कि एस.आर.आइ स्थान के अनुसार विशिष्ट होती है। • आधे स्थानों पर एकीकृत फसल प्रबन्धन (आइसीएम) तथा पारम्परिक विधि की तुलना में एस.आर.आइ द्वारा अधिक उपज दर्ज़ की गई (10-12)। एस.आर.आइ तथा आइसीएम 5-6 स्थानों पर तुल्य थीं और परम्परागत विधि कि तुलना में अधिक असरदार पाई गईं। सभी वर्षों में मिट्टी तथा स्थान के परे सामान्य विधि पर एस.आर.आइ के औसत उपज लाभ की सीमा 7-20 प्रतिशत तक थी।
08
Aug

एस.आर.आइ का इतिहास

  • सिस्टम ऑफ़ राइस इंटेंसिफिकेशन (या चावल की तीव्रीकरण प्रणाली) ( एस.आर.आइ ) जो 80 के दशक के अंत में मेडागास्कर में पनपी, सीमित संसाधन वाले किसानों को उपजाऊ भूमि पर अत्यंत घटी हुई सिंचाई की दर तथा बगैर बाहरी लागत के 15टन प्रति हेक्टेयर तक की उपज प्राप्त कराती है (विलेम ए., स्टूप व अन्य, 2002)।
  • यह विधि 1997 तक मेडागास्कर के बाहर ज्ञात नहीं थी। वर्तमान में विश्वभर में (चीन, इंडोनेशिया, कम्बोडिया, भारत, थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं क्यूबा) 1 लाख से अधिक किसान एस.आर.आइ इस्तेमाल कर रहे हैं।

  •  हालांकि किसानों ने इनमें से कुछ एस.आर.आइ प्रथाओं को मिट्टी, जलवायु तथा अन्य स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संशोधित किया है।
  • यह प्रणाली नवपरिवर्तन के लिए पर्याप्त सम्भावनाएं प्रदान करती है। इस पद्धति से जुडे कई लाभों को देखते हुए इसने चावल उगाने वाले कई राज्यों अर्थात तमिलनाडु, त्रिपुरा, उडीसा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ एवं आन्ध्रप्रदेश का ध्यान आकृष्ट किया है।
एस.आर.आइ : भ्रांतियां दूर करना 1. एस.आर.आइ के अंतर्गत धान के खेत पौधों की वृद्धि के चरण में जल से भरे नहीं होते हैं लेकिन नम रखे जाते हैं। बाद में केवल एक इंच जलस्तर बरकरार रखा जाता है। एस.आर.आइ में सिंचित चावल के लिए आवश्यक पानी की मात्रा की तुलना में केवल आधी मात्रा की आवश्यकता होती है। वर्तमान में विश्वभर में 1 लाख से अधिक किसान इस प्रणाली के साथ प्रयोग कर रहे हैं। .2. एस.आर.आइ धान की उपज में कम पानी की आवश्यकता होती है; खर्च कम होता है और अधिक उपज प्राप्त होती है। अतः, यह छोटे तथा मध्यम किसानों के लिए लाभकारी है। एस.आर.आइ सबसे पहले मेडागास्कर में 1980 के दशक में विकसित किया गया था। चीन, इंडोनेशिया, कम्बोडिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका तथा भारत में इसकी सम्भावनाएं परीक्षण के अंतर्गत है। आन्ध्रप्रदेश में 2003 के खरीफ के दौरान एस.आर.आइ का सभी 22 ज़िलों में प्रयोग किया गया
धान की खेती: कुछ भ्रांतियां 1. सभी इस बात पर विश्वास करते हैं कि चावल एक जलीय पौधा है और स्थिर जल में सबसे अच्छे तरीके से बढता है। चावल एक जलीय पौधा नहीं है: यह पानी में जीवित रह सकता है लेकिन ऑक्सीजन के घटे (हाइपॉक्सिक) स्तर में तेज़ी से विकसित नहीं हो सकता है। 2. चावल के पौधे सतत पानी में डूबी अपनी जडों में वायु के खंड (ऐरेंकाइमा टिशु) विकसित करने में अपनी काफी ऊर्जा खर्च करते हैं। पुष्पण काल आने तक चावल की लगभग 70% जडों के सिरे विकृत हो जाते हैं।
08
Aug

एस.आर.आइ के पितृपुरुष

  • एस.आर.आइ के सिद्धांत फ्रांसीसी पादरी फादर हेनरी द लौलानी द्वारा मेडागास्कर में प्रतिपादित किए गए, जिन्होंने चावल की खेती की इस नई विधि की घोषणा करने से पहले मेडागास्कर के चावल किसानों के साथ 30 वर्षों तक सघन रूप से कार्य किया।
  • कर्नाल विश्वविद्यालय के डॉ.नॉर्मन अपहॉफ़ ने पूरे विश्व में इस प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के प्रयास किए।
08
Aug

एस.आर.आइ क्या है

• सिस्टम ऑफ़ राइस इंटेंसिफिकेशन (या चावल की तीव्रीकरण प्रणाली), प्रौद्योगिकी के बजाय एक “प्रणाली” है क्योंकि वह कुछ निश्चित प्रथाओं का समूह नहीं है। • एस.आर.आइ में कुछ विशिष्ट तकनीकें होती हैं जिन्हे हमेशा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार परीक्षित कर अपनाया जाना चाहिए, बजाय इसके कि सीधे अपना लिया जाए। • इन प्रथाओं के अच्छे इस्तेमाल से, आमतौर पर चावल की उपज को 50 से 100% तक बढाना सम्भव है और जहां उत्पादन का आरम्भिक स्तर निम्न हो वहां 200 से 300% तक की बढत हासिल की गई है। इस प्रकार की बढत किसी किस्म या लागत के उपयोग में बदलाव की आवश्यकता के बगैर हासिल की जा सकती है। एस.आर.आइ में पानी की मात्रा केवल आधी लगती है, जो पानी की भारी बचत को सम्भव बनाती है।

1. एस.आर.आइ सिस्टम ऑफ़ राइस इंटेंसिफिकेशन (या चावल की तीव्रीकरण प्रणाली) का संक्षिप्त नाम है। यह किसी किस्म या संकर को नहीं लेकिन केवल चावल की खेती की एक विशेष बेहतर विधि को दर्शाता है। 2. चावल की खेती की यह बेहतर विधि मूलतः मेडागास्कर में 1983 में विकसित की गई थी और अब पूरे विश्व में चावल उगाने वाले अन्य देशों में फैल रही है। 3. एस.आर.आइ कई प्रथाओं का मेल है जिनमें नर्सरी के प्रबन्ध में बदलाव, प्रत्यारोपण का समय तथा जल, पोषक तत्वों व घास-फूस का प्रबन्धन शामिल हैं। 4. यद्यपि मूलभूत तरीके लगभग बगैर बदलाव के रहते हैं, एस.आर.आइ चावल की परम्परागत खेती में कुछ कृषिगत प्रथाओं में बदलाव पर ज़ोर देती है।
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