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1. अगात रोपण द्वारा पत्ते की क्षति से बहुत हद तक बचा जा सकता है।

2. पौधों के बीच अधिक दूरी और नाइट्रोजनी ऊर्वरक के कम प्रयोग से पत्ते की क्षति को कम किया जा सकता है।

 

लीफ फोल्डर का प्रबन्धन: ·राइस लीफ फोल्डर के प्रबन्धन में शामिल है कल्चरल, होस्ट प्लांट रेसिस्टेंट, जैविक और रासायनिक विधियां। यहां लीफ फोल्डर के प्रति प्रतिरोधी पौधों की किस्मों की सूची दी गई है:   टी एन ए यू एल एफ आर 831311 TNAU LFR 831311 कावेरी (Cauveri) आकाश (Akash) टी के एम् -6TKM-6 आई इ टी 7511 IET 7511 आई इ टी 9225 IET 9225 आई इ टी 9797 IET 9797    

1. लार्वा भोजन करने से पहले, पत्ते को लंबवत रूप से मोड़ते हैं और पत्ते के किनारे को सिल्क जैसे धागों से सिलते हैं। 

2. लार्वा हरे मेसोफिल को कुतरकर खाते हैं जिसके परिणामस्वरूप मद्धिम सफेद रेखा उभर आते हैं। दूसरे इंस्टर से, जब लार्वा नियमित रूप से पत्तों को लपेटते हैं वे निर्जन हो जाते हैं।    

3. सामान्य रूप से क्षतिग्रस्त पौधे की ताकत और प्रकाशसंश्लेषण की क्षमता में भारी कमी हो जाती है।  गंभीर पर्याक्रमण की स्थिति में पत्ते का किनारा और शीर्ष पूरी तरह से सूख जाते हैं और फसल सफेद जैसा दीखने लगता है। क्षतिग्रस्त पत्ते फफूंदी और कीटाणुओं के पर्याक्रमण के लिए प्रवेश द्वार का काम करने लगते हैं। 

4. विनाशकारी कीट जैसे दीमक, खटमल, राइस सीडलिंग फ्लाइ और रूट अफाइड ऊंची भूमि की चावल के लिए विशिष्ट होते हैं। 

 

22
Sep

लीफ फोल्डर का जीवनचक्र

C. medinalis के अंडे चौड़े और अंडाकार तथा पत्ते के दल पर होते हैं। लार्वा 3 से 5 दिनों में अंडे से बाहर निकल आते हैं। पहला तथा दूसरा इंस्टर लार्वा झुंड में होते हैं और टिलर में छोटे पत्ते के हल्के मोड़ के आधार भाग भोजन करते हैं। प्राय: पत्ते के प्रति लपेटन पर एक ही लार्वा पाया जाता है और एक परत को 2-3 दिनों में खाने के बाद वह दूसरे पत्तों में चला जाता है। लार्वा की अवधि लगभग 15 से 25 दिनों की होती है, इस दौरान लार्वा तीन से अधिक पत्तों पर हमला करते हैं। पत्ते के लपेटन में लार्वा पैदा होता है और इसकी अवधि 6 से 10 दिनों की होती है। वयस्क कीट 2 से 3 दिनों तक जीवित रहते हैं। अनुकूल परिस्थिति में, लीफ फोल्डर अनेक प्रजनन करते हैं।

1. नाइट्रोजन के आगमन से पहले की प्रतिक्रियाशील उच्च पैदावार

वाली किस्मों के लिए, यह कीट चावल की अधिकतर खेतों में छिट-फुट पाया जाता था।  

2. नई सिंचाई पद्धति, एक से अधिक चावल की फसलें, ऊंची पैदावार वाली किस्मों तथा नाइट्रोजनी ऊर्वरक की अधिकता के फलस्वरूप चावल के क्षेत्रों में वृद्धि के साथ-साथ कीटों ने भी अब बढ़ती अवस्था को प्राप्त कर लिया है। 

3. हाल के वर्षों में, कार्बनफ्यूरन और फोरेट की किसानों के खेतों में अविवेकपूर्ण अनुप्रयोगों के कारण कीटनाशियों में पुनरुत्थान हुआ है जो आगे चलकर लीफ फोल्डर समस्या उत्पन्न करता है। 

4. लगभग प्राकृतिक शत्रुओं की 80 स्पीसीज  जिनमें 45 परजीवी, 35 परभक्षी, 4 रोगजनक और एक निमेटोड्स संपूर्ण भारत में C. medinalis पर सूचित किए गए हैं।    

5. परजीवियों में, जो प्यूपा के स्तर पर हमला करते हैं जैसे Xanthopimpla, Brachymeria, Goniozus, Trichomma sp. इत्यादि बहुत ह

वर्तमान में, तीन स्पीसीज Cnaphalocrocis medinalis, Marasmia patnalis तथा M.exigua भारत में प्रबल है जबकि C. medinalis को खेतों में मौजूद एकल लीफ फोल्डर कीट के रूप में स्वीकार कर लिया गया है।

वर्ग         :   इंसेक्टा Insecta

क्रम         :   लेपिडोपटेरा Lepidoptera 

फैमिली    :   पईरालीडे Pyralidae

जीनस      :   नेफलोक्रोसिस Cnaphalocrocis 

स्पीसीज    :   मेडीनालिस medinalis  

 

•कार्बारिल carbaryl 50 WP  @  1500 ग्राम/हे. अथवा  

•मोनोक्रोटोफास Monocrotophos 36 WSC @ 1500 मिली/हेक्टेयर अथवा  

•बी.पि.एम्.सी BPMC 50 EC @ 1000  मिली/हेक्टेयर अथवा

•एसीफेट Acephate 50 WP @ 1200  ग्राम/हे. अथवा  

•फिप्रोनिल Fipronil 5 SC  @ 1000  मिली/हेक्टेयर अथवा

•इमिडाक्लोप्रिड Imidacloprid 200 SL @ 125  मिली/हेक्टेयर अथवा

•इतोफेनप्रोक्स Ethofenprox 10 EC @ 750  मिली/हेक्टेयर अथवा

•थयामिथोक्साम Thiamethoxam 25 WG @ 100  ग्राम/हे. अथवा  

•क्लोतियानीडीन् Clothianidin 50 WDG 30  ग्राम/हे. अथवा   

•धूल कार्बारिल  Dust Carbaryl 25 से 30 किग्रा का फॉर्मुलेशन प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।  

•उपचार के एक हफ्ते बाद भी यदि होपर मौजूद रहे तो इस उपचार को दुहराएं।  

•यदि 2-3 अनुप्रयोगों की आवश्यक्ता हुई तो, वैकल्पिक अनुशंसित कीटनाशी का प्रयोग करें।  

एक ही कीटनाशी का बार-बार प्रयोग न करें। 

 

 

परभक्षी:   सिरटोरैनस लिविडीपेन्निस Cyrtorhinus lividipennis, कोक्क्सिनेल्ला अर्क्युएटा Coccinella arcuata, मैक्रस्पिस स्पिशिस Micraspis sp., हारमोनिय ओक्टोमेक्युलेटा Harmonia ctomaculata, सी.रिपेंडा C.rependa, मेनोकैलस सेक्स्माक्युलेटस Menochilus sexmaculatus, ब्रूमोईडिस् सुतुरालीस Brumoides suturalis, मयिक्रोविलिया डौग्लासी अट्रोलिनियेटा Microvelia douglasi atrolineata, सुडोगोनाटोपस स्पिशिस Pseudogonatopus sp., ओफियोनिया नैग्रोफसियेटा Ophionea nigrofasciata, लाईकोसा सुडोअन्न्युलेटा Lycosa pseudoannulata, टेट्राग्नाता मक्सिल्लोसा Tetragnatha maxillosa, अर्जियोप स्पिशिस Argiope sp, अरेनियास स्पिशिस Araneus sp, ओक्सियोप्स स्पिशिस Oxyopes sp., एतैपेना फोर्मोसाना Atypena formosana., कोनोसेफालास लोंगिपेन्निस Conocephalus longipennis, अग्रियोक्नेमिस पिग्मेया Agriocnemis pygmaea.   रोगजनक: एन्टोमोफथोरा स्पिशिस Entomophthora spp, फ्युसेरियम स्पिशिस Fus

1.एग पैरासिटॉइड : 

अनाग्रस स्पिशिस Anagrus sp, 

गोनाटोसिरस स्पिशिस Gonatocerus sp., 

ओलिगोसीटा स्पिशिस Oligosita spp., 

2.नवजात/वयस्क पैरासिटॉइड्स : 

हप्लोगोनाटोपस स्पिशिस Haplogonatopus sp., 

एक्थ्रोडेलफाक्स फेयिर्चिळडी Ecthrodelphax fairchildii., 

एलेंकास स्पिशिस Elenchus sp (Sterpsiptera), 

हेक्समार्मिस स्पिशिस Hexamermis sp (Mermithid). 

 

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