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02
Jul

चावल की जड़ें(मूल)

चावल की जड़ें(मूल):


1.चावल के दानों के अंकुरण के तुरंत बाद पौधे के आधार भाग के बाहर और भीतर की ओर रेशेदार मूल तंत्र विकसित होता है।
2.अंततः तने (नाल) के निचले पर्व से शाखायुक्त उपस्थानिक मूल निकलते हैं।
3.जड़ों की साइज और लंबाई विभिन्न होती हैं। जल निकास की दशा में जड़ों का विकास अच्छा होता है जो कि पौधे के ऊपरी विकास के समानुपाती होता है।
4. जड़ों का अधिकतम विकास टिलरिंग अवस्था में होता है, इसके बाद इसमे कमी आने लगती है और दाने लगने की अवस्था तक आते-आते इनका विकास रुक जाता है।

02
Jul

चावल के पौधे का परिचय

चावल के पौधे का परिचय

1.    चावल(Oryza sativa) एक जलीय घास है जो  Poaceae फैमिली से संबंधित है। यह उष्णकटिबंधीय और उपोष्ण कटिबंधीय द.पूर्वी एशिया और अफ्रीका की मूल वनस्पति है।

2.    वर्धन के लिए गर्मी और आर्द्रता की आवश्यकता वाला यह पौधा 2-6 फीट तक लंबा होता है  और इसके पत्ते लंबे,चौरस,नुकीले होते हैं और इसमें डंठल वाली बालियां होती हैं जिनमें दाने लगते हैं जिन्हें चावल कहा जाता है।

3.    आनुवंशिक जैव-विविधता के मामले में चावल आत्यंत समृद्ध है जिसके दुनिया भर में उगने वाले हजारों किस्में हैं।

4.    विश्व भर में यह हजारों लाखों लोगों के लिए भोजन का मुख्य श्रोत है। दुनिया भर के समाजों के सांस्कृतिक विरासत में चावल की बड़ी गहरी उपस्थिति है।

5.    विश्व का 4/5 चावल छोटे किसानों द्वारा उगाया जाता है और स्थानीय रूप से खपत किया जाता है।
 

 

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