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1. लवण दाब स्थिति में स्रोत के आकार की लवण की सीमा के कारण

निम्न में विलम्ब हो जाती है: जनन से जुड़ी संरचनाओं की संख्या, जैसे फूलों की संख्या/पुष्प-गुच्छों की संख्या काफी कम हो जाती है। 

2. ऊतक में लवणों की अत्यधिक मात्रा के संचय के कारण, प्रोटीन, एमीनो अम्ल, शर्करा तथा अन्य कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण बाधित हो जाता है। 

3. सामान्य मेटाबॉलिज्म के बाधित होने से निर्माण स्थल से मेटाबोलाइट की उपयोग स्थल की ओर गतिशीलता प्रभावित होती है। 

4.  इसलिए प्रजनन से जुड़ी संरचनाओं का विकास तथा आगे की परिपक्वन अवस्था काफी अधिक प्रभावित होती है, जो अंततः फ़सल की उपज को प्रभावित करता है। 

5.  लवण दाब के तहत असंतुलन के कारण हॉर्मोन संश्लेषण होने से फ़सल की गुणवत्ता तथा उपज में कमी आती है। 

 

1. क्लोरोप्लास्ट में Na2 तथा Cl- के उच्च जमाव से प्रकाश-संश्लेषण बाधित हो जाता है।    

2. चूंकि  प्रकाश-संश्लेषण से जुड़े इलेक्ट्रॉनों का परिवहन लवण के प्रति अपेक्षाकृत अवंदेनशील होता है, इसलिए कार्बन मेटाबॉलिज्म अथवा फोटो-फॉस्पोरिलेशन प्रभावित हो सकता है।  

3.  प्रकाश-संश्लेषी एंजाइम या कार्बन स्वागीकरण के लिए जिम्मेदार एंजाइम्स  NaCl की उपस्थिति के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। 

 

1. मिट्टी तथा जड़ क्षेत्र में आयनों के जमाव से, पौधे जल का अवशोषण में

अक्षम हो जाते हैं और इस लिए पौधों में जल की कमी उत्पन्न हो जाती है, जिसे फीजियोलॉजिकल ड्रॉट कहते हैं। 

2. वर्धी अवस्था के दौरान, लवण प्ररित जल से स्टोमेटा बंद हो जाता है, जिससे  CO2 के स्वांगीकरण तथा प्रस्वेदन में कमी हो जाती है। 

3. स्फीति दाब विभव का प्रभाव पत्तियों के प्रसार पर पड़ता है। पत्तियों के क्षेत्रफल में कमी से प्रकाश के रोक पर कमी हो जाती है, जिससे प्रकाश-संश्लेषण की दर कम हो जाती है, इससे श्वसन में तेजी आती है और बायोमास का जमाव कम हो जाता है।    

 

 

1. खारेपन की स्थिति में बीजों का अंकुरण तीन तरीके से प्रभावित होता है। 

2. मृदा घोल का परासरण में वृद्धि से बीजों में जल का अवशोषण तथा प्रवेश पर रोग लगती है। 

3. कुछ लवण घटक भ्रूण तथा बिचड़ों के लिए विषैले होते हैं। CO3, NO3, Cl-, SO4 जैसे एनायन बीज के अंकुरण के लिए अधिक हानिकारक होते हैं। 

4. लवण दाब से संचित सामग्रियों के मेटाबॉलिज्म बाधित होता है। प्रोटीएज एंजाइम बीज में घुलनशील प्रोटीन को घुलनशील नाइट्रोजन में उत्प्रेरित करता है, जो लवणता द्वारा बाधित होता है।   

5. a – एमाइलेज की गतिविधि पर काफी रोक लग काती है। अतः स्टार्च से शर्करा के रूपांतरण भी बाधित होता है। लवणता से न्युक्लिक अम्ल तथा RNAase के निर्माण में विलम्ब होता है।  

6. लवणता के कारण ग्लायोक्सीसोमल केटालेज तथा मैलेट सिंथेज एवं आइसोसाइट्रेज पर रोक लगता है, जिसके कारण ग्लिसराइड्स में कमी होती है

1. परासरणीय प्रभाव या जल की कमी का प्रभाव।

पौधों द्वारा जल लेने की क्षमता को कम करता है तथा इसके कारण उनकी वृद्धि बाधित हो जाती है। यह लवणता का परासरणीय या जल की कमी का प्रभाव होता है।

2. लवण का विशेष प्रभाव तथा आयन अधिकता का प्रभाव

प्रस्वेदन प्रभाव में लवण के प्रवेश करने से पत्तियों में प्रस्वेदन के दौरान कोशिकाएं घायल होती हैं, जिससे उनकी वृद्धि रुक जाती हैं।

2) गैर खारा मिट्टी – क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी) 

निम्न घुलनशील लवण, EC < 4 dS/m

विनिमय योग्य Na प्रतिशता > 15

pH is > 8.5

3) लवणीय क्षारीय मिट्टी

ESP युक्त घुलनशील लवण की उच्च सांद्रता 15 से अधिक। 

फ़सल की वृद्धि तथा विकास पर लवण दाब का प्रभाव। 

 

26
Sep

1) खारा मिट्टी

लवण की सांद्रता अधिक होती है तथा मिट्टी की EC > 4 dS/m

विनिमय योग्य सोडियम प्रतिशतता < 15

pH मान 8.5 से कम

26
Sep

लवणता का वर्गीकरण

1) खारा मिट्टी

2) गैर-खारा- क्षारीय मिट्टी: (सॉडिक मिट्टी)

3) Saline alkali soils खारा क्षारीय मिट्टी

26
Sep

मृदा लवणता के कारण

लवण दाब मुख्यतः दो कारकों से उत्पन्न होती है: 

1. सिंचाई जल 

सिंचाई के लिए भूमिगत जल का निरंतर प्रयोग, जिसके कारण भूमिगत क्षेत्र में अतिरिक्त नमक जमा होता है।  

2. मिट्टी के प्रकार 

वर्षापोषित स्थिति में उच्च वाष्पन-प्रस्वेदन के कारण, जल मिट्टी की संरचना से होकर ऊपर की ओर बढ़त अहै और मिट्टी की सतह पर लवण का निर्माण होता है।  

 

26
Sep

लवणता

1. लवणता दुनियाभर में फ़सल की वृद्धि तथा उत्पादकता को प्रभावित

करने वाला कारक है। पौधों में लवण दाब मिट्टी में लवण की अत्यधिक मात्रा के कारण उत्पन्न होता है, जिससे मिट्टी का जल विभव कम हो जाता है और मृदा घोल पौधे के अनुपलब्ध हो जाता है। 

एक आकलन के मुताबिक धरती पर लगभग एक तिहाई सिंचित भूमि लवण दाब से प्रभावित है। दुनिया भर में 1.5 अरब हेक्टेयर के कृषि भूमि का 23% लवणता तथा 37% सॉडिसिटी से प्रभावित है।      

लवणता:  यह Ca, Mg तथा सोडियम एवं SO4, NO3, CO3 व HCO3, Cl, आयनों के उच्च जमाव के कारण उत्पन्न होती है।  

सॉडिसिटी:  यह मिट्टी में सोडियम के उच्च जमाव तथा उच्च सांद्रता के कारण उत्पन्न होता है। 

 

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