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24
Sep

Mo की कमी के लक्षण, कारण

1.N की कमी से मिलते-जुलते हैं (पुरानी पत्तियां क्लोरोटिक हो जाती हैं)।

2. इसके अलावा  NO3 जमाव के कारण पत्तियों के किनारे पर नेक्रोटिक स्पॉट भी दिखाई पड़ता है। 

Mo  की कमी के कारण:

1.Mo.की कम मात्रा वाली मूल मिट्टी से खेती योग्य मिट्टी का निर्माण। 

2. निम्न मृदा pH (Fe ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड के कारण)। Mo एकमात्र ऐसा माइक्रोन्युट्रिएंट हैं, जिसकी उपलब्धता सामान्यतः pH के बढ़ने से बढ़ती है। 

3. उच्च P, NH4-N (Mo का मृदा खनन) तथा उच्च SO4, Cu (विपरीत कार्य के कारण) अनुप्रयोग। मृदा का अच्छा एरिएशन  (अच्छा जल निकास, एरोबिक मिट्टी की स्थिति)।

 

24
Sep

मॉलिब्डेनम (Mo) - Mo के कार्य

1.Mo मिट्टी में सबसे कम मात्रा में पाया जाता है। 

2. यह नाइट्रेट रिडक्टेज का एक घटक होता है जिसका उच्च भूमि के N03 –N में अहम भूमिका होती है। 

3. इसमें डाइ-नाइट्रोज्नाइज एंजाइम (N फिक्सर तथा लेग्यूम) होता है। 

4.Mo युक्त अन्य एंजाइम हैं- सल्फाइटीकोक्साइड/जेंथाइन ऑक्सिडेज/डिहाइरोजेनेज। 

 

1. प्राकृतिक रूप से Cu की विषाक्तता काफी विरले देखने में आता है और यह Cu खनन क्षेत्र में पाई जाती है। 

2. यह ऐसे कृषि खेतों में भी पाई जा सकती है, जहां Cu की अधिक मात्रा की प्राप्ति होती है, जो कवकनाशी/ कीटनाशी / वाइनयार्ड में कवकनाशियों के रूप में प्राप्त होता है। 

Cu की विषाक्तता के लक्षण:

1. यह Fe की कमी (क्लोरोसिस) से मेल खाता है, क्योंकि Cu की विषाक्तता सामान्यतः Fe की भी कमी दिखाता है।

 Cu की विषाक्तता के प्रबंधन:

1. मेटलोफाइट्स का प्रयिग जो चयनित रूप से धातु का संचयन करता है (बायो/फाइटोरेमेडिएशन) जहां Cu की विषाक्ता खनन जैसे औद्योगिक स्रोतों से उत्पन्न होता है।

2. कृषि भूमि के लिए  Cu की विषाक्तता से इसके उपयोग की मात्रा को यथासंभव कर बचा जा सकता है।  

 

24
Sep

Cu की कमी का प्रबंधन

1. अम्लीय मिट्टी के अतिरिक्त चूनाकरण से बचें। 

2.Cu की कमी वाली मिट्टियों में 3 साल के अंतराल पर 10-20 kg CuSO4/ha (25% Cu) की सलाह दी जाती है। इसके अलावा CuO (60-80% Cu), Cu फ्रिट्स (3.7%) तथा Cu चीलेट्स (Cu EDTA) का इस्तेमाल चावल पर सफलतापूर्वक किया गया है। 

3.1% CuSO4 में बिचड़े की जड़ को 1 घंटे तक उपचारित करने की अनुशंसा के जाती है। 

4. 0.1 से 0.2% CuSO4 का फोलियर स्प्रे का भी सुझाव दिया जाता है। 

5.  केरल में चावल की फ़सल के लिए बीजों को 24 घटों तक 0.25% CuSO4 में भिगोएं। 

 

24
Sep

Cu की कमी के कारण

1. उच्च कार्बनिक पदार्थों के कॉम्प्लेक्स वाली मिट्टी  Cu की कमी

(पीटी मिट्टी, हिस्टोसोल-एक्लामेशन रोग) पैदा करती है।

2. हल्की संरचना वाली बलुई मिट्टी तथा उच्च ऋतुक्षरण वाली अम्लीय मिट्टी (सामान्यतः केरल मे%) में इसकी कमी पाई जाती है। 

3. जलमग्नावस्था( Cu S जैसे अघुलनशील यौगिकों का निर्माण) 

4. अम्लीय चट्टानों (आग्नेय) से व्युत्पन्न मिट्टी। अम्लीय मिट्टी का अधिक चूनाकरण। 

5.NP K तथा Zn के अत्यधिक इस्तेमाल से मृदा खनन के कारण Cu की कमी होती है।

6. सरसों के कुल की फ़सल के चक्रण से  Cu की कमी बढ़ जाती है (जड़ों से मुक्त  S, Cu प्रसार करता है।)। 

 

24
Sep

Cu की कमी के लक्षण

1. मध्य शिरा के दोनों ओर क्लोरोटिक लकीर, जिसए बाद पत्ती के

शिखाग्र पर नेक्रोटिक क्षेत्र उभर आते हैं। 

2. कमी वाली पत्तियां नीली-हरी दिखाई पड़ती हैं।  

3. नई पत्तियां अनरोल नहीं होतीं।  

4. पत्तियां के शिखाग्र सूई की तरह दिखाई पड़ते हैं।    

5. शूकियों की उच्च अनुर्वरता। 

6. अपर्याप्त लिग्निन संश्लेषण के कारण लॉजिंग की संभावना बनी रहती है। 

 

24
Sep

तांबा (Cu)- के कार्य

1. फोटो सिस्टम  I (PS I) में फोटोसायनिन का एक अवयव होने के कारण Cu इलेक्ट्रॉन के परिवहन (प्रकाश-संश्लेषण) में शामिल रहता है। 

2. आण्विक ऑक्सीजन के साथ (साइटोक्रोम a 3 के भाग के रूप में) टर्मिनल ऑक्सीडेशन को उत्प्रेरित करता है। 

3. फेनोलोक्सिडेज के एक को-फेक्टर के रूप में यह टायरोसिन, क्विनिन, फायटोऐलेक्सिन, लिग्निन (रोगाणु के ख़िलाफ प्रतिरक्षा) में शामिल रहता है।

4. यह बीज निर्माण में भूमिका निभाता है, क्योंकि यह उपयुक्त पराग के निर्माण में मदद करता है। 

5.Cu SOD (सुपरऑक्साइड डिस्म्युटेज) प्रकाश-श्वसन में उत्पन्न O2 के विषहरण में भाग लेता है। 

 

24
Sep

B की विषाक्तता के कारण

1. निर्जल तथा अर्ध-निर्जल जलवायु में तेल (उच्च वाष्पण तथा निम्न निक्षालन के कारण अत्यधिक जमाव)   

2.B से भरपूर सिंचित जल /सीवेज जल का सिंचाई के लिए इस्तेमाल।

3.B से युक्त मूल मिट्टी (समुद्री मिट्टी).

4. नागरिक कचरों (कम्पोस्ट) का अत्यधिक इस्तेमाल 

5. तटीय नमकीन मिट्टियां 

 

24
Sep

B की विषाक्तता के लक्षण

1. पुरानी पत्तियों की टिप्स तथा किनारों पर अंतरशिरीय क्लोरोसिस।

2. आगे चलकर गहरे भूरे तथा नेकरोटिक स्पॉट (पीआइ अवस्था), जो भूरा होकर सूख जाता है।

24
Sep

B की कमी का प्रबंधन

1. 10 से 15 kg ha-1 बोरेट उर्वरक (Na2 B4 O75 H20) 14% B के साथ मिट्टी में डालना चाहिए, जिससे मोटी संरचना वाली मिट्टी में रोपण के समय आधारी प्रयोग के रूप में लगभग 1.5 –2.0 kg B /ha की आपूर्ति होती है। 

2. बोरेक्स को अमोनियम उर्वरकों के साथ मिश्रित नहीं करना चाहिए, जिससे  NH3 का वोलाटाइजेशन पैदा होता है। 

3. बोरोसिलिकेट ग्लास फ्रिट्स का भी इस्तेमाल करना चाहिए। 

4. 0.1-0.25% बोरिक अम्ल / सोडियम बोरेट के फॉलियर स्प्रे का भी इस्तेमाल करना चाहिए। 

5. चावल-गेहूं प्रणाली में गेहूं के लिए Mn का अनुप्रयोग किया जाता है,  ताकि जलमग्नता के बाद उपलब्धता के बढ़ने से चावल की अगली फसल को इससे लाभ पहुंच सके। 

 

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