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03
Sep

स्प्रे बहाव से कैसे बचें

1.  सुबह या शाम के समय छिड़काव करना, जब हवा का प्रवाह मंद रहता है, इससे संवेदनशील फ़सलों पर रसायन के कणों के पहुंच की संभावना कम रहेगी। 

2.  ऑपरेट करने के लिए केवल नोजल के लिए आवश्यक न्यूनतम दाब का इस्तेमाल करें। 

3.  अधिक बड़े क्षेत्र में स्प्रे करने के लिए बड़े नोजल का इस्तेमाल करें, जिससे बड़े आकार के जल कण मिलेंगे।  

4.  स्प्रेयर के नोजल को लक्ष्य के पास रखें। 

5.  यदि पास की फ़सल संवेदनशील हो तो चावल की फ़सल का 10 चौड़ी पट्टी को छिड़काव तहित रखना चाहिए। 

6.  खर-पतवारनाशी के नियंत्रण की गैर-रासायनिक विधियों का इस्तेमाल बिना छिड़काव धारियों पर किया जा सकता है। 

 

03
Sep

खर-पतवारनाशियों का बहाव

• खर-पतवारनाशियों का बहाव उस स्थिति में उत्पन्न होता है, जब स्प्रे के नन्हे कण लक्षित क्षेत्र से हवा द्वारा दूर प्रवाहित हो जाते हैं या किसी वाष्पशील खर-पतवारनाशियों से जब 2,4-D (वृद्धि नियंत्रण खर-पतवार नाशी) इत्यादि के छिड़काव के दौरान या उसके बाद वाष्प उड़कर दूर चला जाता है। ऐसी स्थिति में टमाटर, पुदीना, कपास, फल जैसे पौधों को नुकसान पहुंचता है।

 

1. मृदा एक बफर का कार्य करती है जो अधिकतर खर-पतवार नाशियों के सातत्य तथा उनकी नियति का संचालन करती है। 

2. खर-पतवार नाशियों में अवशिष्टों की समस्या कीटनाशियों की तुलना में कम होती है। 

3. रोपण या फ़सल की आरंभिक वृद्धि अवस्था के दौरान  खर-पतवार नाशी का इस्तेमाल करने पर पौधे तथा पर्यावरण में रसायनों के निम्नीकरण के लिए अधिक समय मिलता है, और कटाई के समय अवशिष्ट पदार्थों की मात्रा काफी कम रहती है। 

4. उष्ण-कटिबंधीय जलवायु में रसायनों का तीव्र निम्नीकरण होता है।  

5. अधिकतर खर-पतवारनाशी अनुशंसित ख़ुराक पर इस्तेमाल किये जाने पर खाद्य श्रृंखला या मिट्टी में नहीं मौजूद नहीं पाये जाते हैं। 

6. लंबे समय तक समान खर-पतवारनाशी का निरंतर इस्तेमाल किए जाने से मिट्टी में उसके अवशेष के खतरनाक स्तर तक जमा हो जाने की संभावना बनी रहती है और इससे आने वाली फ़सल तथा मिट

1. खर-पतवारनाशी की मात्रा तथा उनका विकास।

2. खर-पतवारनाशी के नियंत्रण की सलाह। 

3. उपलब्ध नियंत्रण उपाय। 

4. खर-पतवारनाशी के इस्तेमाल का सही समय। 

5. स्प्रे करने का अनुभव। 

6. खर-पतवारनाशी की सुरक्षा का संभावित लागत लाभ।

 

03
Sep

खर-पतवार नाशी के नुस्खे

व्यावसायिक ठोस नुस्खे (WP, WSP, दाने) –सांद्रता सक्रिय घटक तत्त्वों के भार तथा व्यावसायिक ठोस खर-पतवार नाशी के भार का अनुपात (भार/भार) की प्रतिशतता होती है। 

व्यावसायिक तरल नुस्खे (EC- सांद्रता को सक्रिय घटक तत्त्वों तथा व्यावसायिक एमल्सीकरण योग्य सांद्र खर-पतवार नाशी के अनुपात (भार/आयतन) के रूप में व्यक्त किया जाता है। विभिन्न  खर-पतवार नाशी फॉर्मुलेशन नीचे दिए जा रहे हैं: 

एमल्सीकरण योग्य सांद्रता (EC) –यह जल घुलेय नहीं होता है, बल्कि यह कार्बनिक विलायल में घुलेय होते हैं।  खर-पतवार नाशी के जल में मिलाने के समय एक स्थायी तेल-जल एमल्शन के निर्माण के लिए एक एमल्सिफायर को मिश्रित किया जाता है।  

वेटेबल पाउडर (WP) –वेटेबल पाउडर तुरंत जल के साथ मिश्रित हो जाते हैं, पर स्प्रे टैंक की तली में जम बैठ जाते हैं। यह सूखे सक्रिय घटक तत्त्व तथा क्ले जैसे ठोस अक्रिय

 

                        अनुशंसित ख़ुराक a.i.    (kg/ha) ___     X   100   X   क्षेत्रफल फॉर्मुलेटेड उत्पाद में % सांद्रता (a.i.) x   10,000

 

खर-पतवार के वाहक: एक-समान प्रसार के लिए ये खर-पतवार नाशी में मौजूद कुछ अक्रिय पदार्थ होते हैं, जैसे रेत, जल, सूखी मिट्टी, कीचड़ इत्यादि 

घोल के छिड़काव के लिए जल की आवश्यकता: किसी बड़े क्षेत्र में एक-समान अनुप्रयोग के लिए खर-पतवार नाशी को आवश्यक वाहकों की उचित मात्रा में मिलाते हैं। जल की प्रयुक्त मात्रा खर-पतवार नाशी की प्रभावशीलता को प्रभावित करती है, तथा इस्तेमाल करने में आसान हो जाता है। 

 

                एक निश्चित क्षेत्र में स्प्रे करने के लिए आवश्यक जल की मात्रा =   

                                        

 

                                        छिड़काव किए जाने वाला क्षेत्रm2 x स्प्रेयर का आउटपुट lit/ha                          
03
Sep

नोजल्स

खर-पतवार नाशी का इस्तेमाल कीटनाशी तथा कवकनाशियों की तरह नहीं करना चाहिए। खर-पतवार नाशियों के छिड़काव के लिए विशेष नोजलों का इस्तेमाल किया जाता है। 

• फ्लैट फैन नोजल: छिड़काव के लिए ये शुंडाकार सिरा बनाते हैं, और जब पत्र भेदन तथा कवरेज की आवश्यकता नहीं होती है, तब इस्तेमाल किए जाते हैं। ऑपरेटिंग दाब निम्न होनी चाहिए, ताकि मध्यम से मोटी बूंदें निकल सकें। 

• फ्लड जेट नोजल: तरलों तथा मिश्रित  खर-पतवार नाशियों के लिए उपयोगी। ये व्यापक कोण विन्यास तथा इनका वितरण विन्यास एक समान नहीं होता। ये बहाव कम करने की स्थिति में कम दाब में प्रभावी होते हैं। 

 

03
Sep

खर-पतवारनाशी का वर्गीकरण

1. ऐनिलिड्स, उदाहरण: बुटाच्लर, प्रेटिलैच्लर, प्रोपेनिल

2. बाइपाइरिडाइलिंस, उदाहरण: पाराकेट 

3. डाइनाइट्रो ऐनिलिन्स, उदाहरण: ब्युट्रालिन, पेंडिमेथालिन

4. ऑर्गेनोस्फोरस यौगिक, उदाहरण, ग्लाइफोसेट 

5. फेनॉक्सीएसीटिक अम्ल, उदाहरण 2,4,D, फेनोप्रोप, MCPA, 2.4.5.T

6. थायोकार्बामेट्स, उदाहरण- मोलिवेट, थायोबेन्कार्ब 

7. ट्रायजिम्स, उदाहरण: साइमेट्रिन, डायमेथेमीट्रिन 

8. सल्फोनील्युरीयाज, उदाहरण- बेन्सल्फ्युरॉन 

9. पॉलीसाइक्लिक अल्कैल्नोइक अम्ल, उदाहरण: फेनोक्सेप्रोप 

10. अन्य खर-पतवार नाशी, उदाहरण- ब्युटायन, क्लोमीथॉक्सीनिल, सिन्मीथाइलिन, ऑक्साडायरियोन, पिपरफोस, क्विंक्लोरैक

 

• सभी विधियों में रासायनिक विधि प्रभावी होती है तथा खर-पतवार नाशी के सस्ते, भरोसेमंद होने के कारण इससे कृषि विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव आया है। वर्तमान में खर-पतवार नाशी कृषि में प्रयुक्त उत्पादन का दो-तिहाई हिस्सा निर्मित करता है।  

• अमेरिका,जर्मनी, फ्रांस तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में दुनिया भर में कीटनाशियों की बिक्री का 50 से 70% हिस्सा बेचा जाता है। भारत में खर-पतवार नाशकों का इस्तेमाल कुल कीटनाशकों का केवल 15 से 25% होता है और मुख्यतः यह सिंचित गेहूं, धान, सोयाबीन, सब्जियां, चाय, कपास, मक्का, ज्वार तथा गन्ना के लिए प्रयुक्त होता है।   

• खर-पतवारनाशी ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जो कोशिका विभाजन, ऊतक विकास, क्लोरोफिल के निर्माण, प्रकाश-संश्लेषण, प्रस्वेदन, नाइट्रोजन, नाइट्रोजन उपापचय तथा प्रोटीन, वसा तथा विटामिक जैसे अहम तत्त्वों के जैव संश्ल

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