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फ़सल चक्र के बाहर भी  खर-पतवारों 

का नियंत्रण किया जा सकता है। 

1. कई लोग पारिस्थितिकी में रुचि रखते हैं। 

2. पारिस्थितिकी को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है: जीवों के एक-दूसरे तथा उनके परिवेश के प्रति संबंध के अध्ययन को  पारिस्थितिकी कहते हैं। 

3. संक्षेप में इसका अर्थ होता है कि खेत में मौजूद खर-पतवारों के प्रकार तथा उनकी संख्या उस खेत के लंबे समय के प्रबंधन का प्रतिबिंब होता है। 

 

1. इसका ध्यान रखें कि आपके उपकरण (पावर टिलर, 

ट्रैक्टर, पहिए, कम्बाइन हार्वेस्टर इत्यादि ) साफ-सुथरे हैं, ताकि आप अपने खेतों में खर-पतवार के प्रसार को रोक पाएं। 

 

02
Sep

खर-पतवारों की गंभीरता

1. खर-पतवारों के बीजों को फ़सल के बीजों में न जाने दें। 

खर-पतवार बड़ी मात्रा में बीज उत्पन्न कर सकते हैं, जो आने वाले कई वर्षों तक समस्या उत्पन्न करते रहेंगे।  

2. एक वर्ष का बीज = 7 वर्षों के  खर-पतवार।

 

• चावल उत्पादन में जल का प्रयोग खर-पतवार के 

उगने पर काफी असर डालता है, जो उनके नियंत्रण या उनके उन्मूलन में वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के भी नियंत्रण कार्यक्रम में अहम स्थान रखेगा। 

• जिन पौधों में C3 प्रकाश-संश्लेषण उपकरण रहते हैं, वे जल-मग्नता की स्थिति में उपजने वाले चावल में अधिक पाए जाते हैं, तथा C4 प्रकाश-संश्लेषण उपकरण वाले पौधे सूखी भूमि में उगने वाले चावल की फ़सल में अधिक पाए जाते हैं। 

• चावल C3 वाला पौधा होता है तथा  C3 वाले  खर-पतवार जैसे ही मौलिक प्रकाश-संश्लेषण पाबंदियां प्रदर्शित करता है, जबकि C4 पौधों में काफी अधिक प्रकाश-संश्लेषण सक्रियता होती है तथा उन्हें अधिक प्रकाश, आदर्श तापमान एवं निम्न आद्रता की आवश्यकता होती है। 

• खर-पतवार की समस्याएं अलग-अलग प्रजातियों, सूखे बीज वाले चावल या प्रतिरोपित चावल में अलग-अलग होती हैं, क्योंक

1. प्रतिरोपण मुख्यतः खर-पतवार के अच्छे नियंत्रण 

द्वारा किया जाता है। 

2. बिचड़ों के रोपण से खर-पतवार से 14-21 दिन पहले विकास हो जाता है तथा अच्छी गहराई तक की जलमग्नता की क्षमता प्राप्त होती है। 

3. यदि पौधे को कतार में रोपा जाए, हाथ से निराई-गुड़ाई की जाए अथवा यांत्रिक वीडर्स का इस्तेमाल की जाए तो खर-पतवार के नियंत्रण में आसानी हो जाती है। 

4. सीधे खेत में रोपे बीज की स्थिति में अधिक  खर-पतवार उगते हैं और उनका दबाव इस प्रकार रहता है: शुष्क प्रत्यक्ष बिचड़ा> गीला प्रत्यक्ष बिचड़ा> प्रतिरोपण। 

 

1. पौधे जितने निकट रोपे जाते हैं, वे खर-पतवारों 

के लिए उतने ही प्रतियोगी साबित होते हैं। 

2. पौधों के घनत्व से फ़सल की छत्ती काफी पास आ जाती है और इससे खर-पतवारों की वृद्धि में अवरोध पैदा होता है।  

3. पुष्प गुच्छ के आरंभ द्वारा फ़सल की छत्ती पास-पास आ जानी चाहिए और खर-पतवारों को छाया मिलनी चाहिए। 

4. 400 टिलर्स/sq m का लक्षित स्टैड प्रायः सही माना जाता है।  हालांकि यह मौसम, स्थान तथा किस्मों के आधार पर परिवर्तित होता रहता है।

 

1. स्वच्छ तथा खर-पतवार मुक्त पानी की नालियां, नाले, मार्ग तथा खेत के मेड़ खर-पतवारों की वृद्धि को रोकने में सहायक होते हैं।   

2. वे कई प्रकार के पीड़कों तथा रोगों के शरणस्थली के रूप में कार्य करते हैं।

3. साफ-सुथरे बांध  खर-पतवार के बीजों को खेत में जाने से रोकते हैं। 

4. जलीय पर्यावरण में खर-पतवार से नालों, जल परिवहन प्रणालियों तथा जल-निकास प्रणालियों में जल प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। 

5. जलीय  खर-पतवारों की तीव्र वृद्धि से जल प्रदूषित होता है, जिसमें ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और जलीय जीव तथा मछलियां मरने लगती हैं। 

• अच्छी गुणवत्ता के चावल के बीज से खर-पतवार की समस्या से काफी निजात मिलती है। क्योंकि बीजों के जरिए खर-पतवार के बीज एक महादेश से दूसरे में आसानी से पहुंच जाते हैं।  

• खराब गुणवत्ता वाले चावल के बीजों के जरिए खर-पतवारों के बीज एक किसान से दूसरे तक जा पहुंचते हैं। कई बार खर-पतवारों के बीज मशीन से चिपक जाते हैं या जल प्रवाह के जरिए एक खेत से दूसरे में जा पहुंचते हैं। 

• प्रायः खर-पतवार के बीज अपने रूप-रंग में मुख्य फ़सल के बीज से मेल खाते दिखते हैं, जिससे वे चावल के बीज में शामिल हो जाते हैं और उनका प्रसार हो जाता है। जो खर-पतवार फ़सल से पहले पकते हैं वे फसल के साथ पकने वाले खर-पतवारों की तुलना में कम प्रसार करते हैं तथा वे अधिकतर स्थानीय रूप में ही देखे जाते हैं।

• जल्दी पकने वाले खर-पतवार के बीज उपकरणों, जल तथा हवा द्वारा प्रसार करते हैं। 

• गुणवत्ताप

1. किसानों के लिए खर-पतवारों से बचने का पहला उपाय है 

खेत की अच्छी तैयारी करना। यह अच्छे बिचड़े निर्माण के लिए मानक पारंपरिक विधियों में एक है। अच्छी तरह से तैयार खेत में जल का अच्छा प्रबंधन होता है तथा इससे खर-पतवार कम उगते हैं। 

2. खेत की अच्छी तैयारी में एक जुताई, और उसके बाद हफ्ते भर के अंतराल पर 2-3 हैरोइंग तथा समतलीकरण शामिल रहते हैं। कीचड़ निर्माण से जुताई के बाद उगे खर-पतवारों के जड़ उखड़ जाते हैं और वे कीचड़ में दब कर नष्ट हो जाते हैं।  

3. इस प्रक्रिया से खर-पतवार बह जाते हैं और बाद के हैरोइंग द्वारा हटा दिए जाते हैं। अनुसंधान से यह पता चलता है कि खेती से प्रथम जल प्रवाह द्वारा 50% से 79% (बाकी तथा जेरिमिया जूनियर,2001) तक खर-पतवार हट जाते हैं। 

4. दूसरी तरफ समतलीकरण वहां काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, जहां जल-जमाव अच्छी तरह से नहीं किया जाता और खर-पतवारों की वृ

02
Sep

Caesula axillaries, Roxb का नियंत्रण

रासायनिक नियंत्रण : 1. 2,4-D Na 80 WP, 0.80 (kg a.i./ha), 20-25 DAT 2. बेंसल्फ्युरॉन-मीथाइल,60 DF (kg a.i./ha), 20-25 DAT 3. ट्राइसल्फ्युरॉन 20 WP, 0.006-0.009 (kg a.i./ha), 7-12 DAT 4. एथॉक्सीसल्फ्युरॉन 15 WSG , 0.015 (kg a.i./ha), 15 DAS 5. ऐल्मिक्स 20 WP + सर्फेक्टेंट (0.2%), 0.004( kg a.i./ha), 20-25 DAS
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