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1. एक वार्षिक खर-पतवार, पत्तियां 25-75 मिमी लंबी, कमोबेश रोमिल, ओवेट तथा ऐक्यूट या आयताकार, सेरेट, आधारी लोब युक्त या इसके बिना। 2. शाखाएं, शाकीय तथा प्रसारमान। इसमें मजबूत तथा गहरी मूसला जड़ होती है। पुष्प-क्रम 2-4 पुष्पयुक्त, पत्तियों के विपरीत। 3. पुष्पण अवधि अगस्त से अक्टूबर। कैप्स्यूल छोटा, 6 कोणीय, उनमें से 3 कोण डैनेदार। सिरे पर प्रत्येक सेल में बीज 1 सेरिएट।
वैज्ञानिक नाम - Corchorus acutangulus - कोर्कोरस अक्युटांगगुलस कुल - टिलिएसी (Tiliaceae) जीवन रूप – वार्षिक
रासायनिक नियंत्रण : 1. 2,4-D Na 80 WP, 0.80 (kg a.i./ha), 20-25 DAT 2. बेंसल्युरॉन-मीथाइल,60 DF (kg a.i./ha), 20-25 DAT 3. ट्राइसल्फ्युरॉन 20 WP, 0.006-0.009 (kg a.i./ha), 7-12 DAT 4. ईथॉक्सीसल्फ्युरॉन 15 WSG , 0.015 (kg a.i./ha), 15 DAS 5. ऐल्मिक्स 20 WP + सर्फेंकेटेंट (0.2%), 0.004( kg a.i./ha), 20-25 DAS
1. यह घास वाले बेकार भूमि तथा मक्के के खेत में पाया जाता है। यह पूरे देश भर में पाया जाता है।
यह बीज द्वारा अपना प्रसार करता है।
1. वार्षिक रूप से उगने वाला खर-पतवार, थोड़ा प्रोस्ट्रेट, फ़सल के पौधों तथा उनके कतारों के बीच के स्थान में उगता है, इसलिए मुख्य फ़सल को पोषण की कमी हो जाती है। 2. यह Trianthema monogyna से मेल खाता है। पत्तियां काफी ओवेट, प्रायः नीचे गेहुंआ, सममित युग्म में, लंबी 50 x 40 मिमी.। 3. तना: रस्टी प्युबेरुलस के साथ सकुलेंट। पुष्प-क्रम काफी छोटा, गुलाबी रंग, सेसाइल या लगभग सेसाइल या स्लेंडर पेडंकल पर छोटा अम्बेल या छरहरा। 4. पुंकेसर 2-3, फल 25-50 मिमी लंबा, 5 रिब युक्त; फूल तथा फल वर्षा ऋतु में उगते हैं।

वैज्ञानिक नाम - Boerhaavia difusa , बोर्हाविया डीफ्युसा कुल - Nyctaginaceae जीवन रूप – वार्षिक
रासायनिक नियंत्रण: 1. 2,4-D Na 80 WP, 0.80 (kg a.i./ha), 20-25 DAT 2. बेंसल्फ्युरॉन-मीथाइल,60 DF (kg a.i./ha), 20-25 DAT 3. ट्राइसल्फ्युरॉन 20 WP, 0.006-0.009 (kg a.i./ha),, 7-12 DAT 4. ईथॉक्सीसल्फ्युरॉन 15 WSG , 0.015 (kg a.i./ha), 15 DAS 5. ऐल्मिक्स 20 WP + सर्फेक्टेंट (0.2%), 0.004( kg a.i./ha), 20-25 DAS
1. यह खर-पतवार खेत में हर तरफ उगा दिखता है और इस प्रकार यह जम के मृदा पोषण का उपयोग कर मुख्य फ़सल की वृद्धि को बाधि करता है। यह मक्के तथा छोटे ज्वार में पाया जाता है। 2. यह समृद्ध तथा गीली मिट्टी के लिए अधिक अनुकूलित रहता है, जो सीधा बीज से बोए चावल के पौधों, गीले तथा शुष्क स्थान में प्रतिरोपित चावल में पाया जाता है।
यह बीज के जरिए अपना प्रसार करता है।
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