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रासायनिक

जिन यौगिकों की रासायनिक क्रिया से चूहे मारे जा सकते हैं उन्हें रोडेन्टिसाइड्स करते है। ये ज़हरीले रोडेन्टीसाइड्स दो समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं।

सटीक/एक खुराक में मारने वाले ज़हर : ज़िंक फॉस्फेट, बैरियम क्लोराइड आदि कुछ ऐसे यौगिक हैं जिनका उपयोग जूहे के ज़हर के रूप में हुआ है। इन्हें 'सटीक ज़हर' के रूप में जाना जाता है क्योंकि ये बेहद ज़हरीली प्रकृति के होते हैं। यानी इनका असर तुरंत और घातक होता है। इन सटीक ज़हर की कमी यह है कि रोडेन्ट्स में ज़हर से दूर रहने और चारे के प्रलोभन से बचने की प्रवृत्ति पनप जाती है। उदाहरण ज़िंक फॉस्फाइड 2 हिस्से, अन्न के दाने 96 हिस्से और कोई भी खाने का तेल 2 हिस्से.

b. दीर्घकालिक / कई खुराकों में ज़हर देना : गोदामों या घरों में चूहे मारने की नई विधि है एन्टीकॉगुलेण्ट्स का उपयोग करना। यदि इसकी पर्याप्त मात्रा का

रोडेन्ट नियंत्रण की जैविक विधियां

a. परभक्षी : चूहों के लिए साँप और नेवले बहुत जाने-माने परभक्षी हैं। चूहे के बिल के पास बाँस के डंडे रोपना। उल्लू, चील आदि पक्षी उन बाँस पर बैठते हैं और जैसे ही चूहा बाहर आता है वे झपट कर उसे मार देते हैं। घर में बिल्लियां पालने से भी चूहों की संख्या काबू में रखी जा सकती है।

b. परजीवी रोडेन्ट नियंत्रण के लिए साल्मोनेल्ला प्रजाति के वाइरस का उपयोग किया जा सकता है लेकिन उससे अन्य अलक्षित प्राणियों को खतरा होने के कारण उसकी सलाह नहीं दी जाती है।

रोडेन्ट नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

a. गहरी जुताई : 18” (45 सेमी) तक की गहरी जुताई से चूहे के बिल खुल जाएंगे और वे सीधे अपने दुश्मनों जैसे कुत्ता, बिल्ली, कीट आदि के सामने आ जाएंगे। लेकिन यह सब बुवाई शुरू करने से पहले ही किया जा सकता है। अपनी उच्च प्रजनन क्षमता के कारण वे अपनी संख्या बहुत जल्दी उसी स्तर पर पहुंचा सकते हैं।

b. खेतों में पानी भरना : खेतों में बने बिलों में पानी भरा जा सकता है। उससे चूहे मर जाएंगे।

c. संकरी बंड का निर्माण : रोडेन्ट बिल बनाने के लिए चौड़ी बंड पसंद करते हैं।

रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

a. ट्रैपिंग : इससे जनसंख्या कम तो होती है लेकिन उससे आगे की वृद्धि रुकती नहीं है। यह तभी प्रभावी है जब उनकी संख्या कम हो। पकड़े गये चूहों के पिंजरों को तालाब में डूबाकर उन्हें मारना चाहिए और मरे हुए चूहों को गाड़ना चाहिए। बैक ट्रैप्स तोड़ने से ट्रैपिंग के समय चूहे मर जाते हैं। ट्रैप कहां लगाया है और उसमें क्या चारा रखा है, इनसे तय होता है कि खेतों, घरों और गोदामों में कितने प्रभावी ढंग से चूहे पकड़े जाएंगे. तंजावुर बाँस के ट्रैप, पॉट ट्रैप और ब्रेक बैक ट्रैप खेतों में चूहे पकड़ने में काफी उपयोगी साबित होते हैं। मालगोदामों/घरों में जो भौतिक विधियां अपनाई जाती हैं, वे हैं खड्डों में काँच के टुकड़ों के साथ सीमेंट का प्लास्तर करना, अच्छी तरह बंद होने वाले दरवाज़े लगवाना, बिना किसी सीढ़ी के 75 सेमी ऊंची चौकी बनवाना, दरवाजों के न

रोडेन्ट नियंत्रण की भौतिक विधियां

a. रैट प्रूफिंग : नए गोदाम बनवाते समय ध्यान रखें कि उन्हें रैट प्रूफ बनवाएं। आदर्श गोदाम की कुछ विशेषताएं हैं: गोदाम चूहों की बस्ती से दूर होने चाहिए। उसका आधार ऊंचा होना चाहिए। देखें कि कहीं आस-पास पानी इकट्ठा न होता हो। भवन-निर्माण के काम आने वाले पक्के सीमेंट से इमारत बनानी चाहिए। गोदाम की छत पर पेड़ों की शाखाएं नहीं आनी चाहिए। सभी खिड़कियों रोशनदानों, गटर, नालियों आदि पर 24 गेज ¼” (0.6 सेमी) मोटी मेटल मेश फिट करवाएं। दरवाजे अच्छी तरह बंद करें। दरवाजे और फर्श के बीच का स्थान ¼ “ (0.6 सेमी) से अधिक नहीं होना चाहिए। कम से कम 3’ (90 सेमी) गहरी पक्की नींव होनी चाहिए। दरवाजों में नीचे मेटल शीट की 9” (25 सेमी) की लाइनिंग होनी चाहिए। गोदाम के सामने प्लेटफॉर्म सीढ़ियां रात भर नहीं रखनी चाहिए। प्लेटफॉर्म 12” (30.5 सेमी) ऊंचा और उल्टे एल आक

23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण के लिए निम्न विधियां अपनाई जा सकती हैं-

  • गैर रासायनिक और
  • रासायनिक

I. गैर-रासायनिक विधियों में शामिल है

  • भौतिक विधियां
  • मैकेनिकल
  • परंपरागत
  • जैविक

II. रासायनिक विधियों में शामिल है  

  • सटीक/ एक खुराक में मारने वाले ज़हर
  • दीर्घकालिक/ अनेक बार ज़हर देना
  • चूहों के बिलों में धुआं करना
23
Aug

छोटे घूस (बैंडिकूट)

छोटे बैंडिकूट, छछुंदर, लघु बैंडिकूट, बाहरी चूहे, बैंडिकोटा बेंगैलेन्सिस

नुकसान का प्रकार : ये सर्वभक्षी होते हैं और अनाज, फल, सब्जियां, मेवे, कभी-कभार बच्चों का और मरे जानवरों का मांस भी खा लेते हैं। ये खेतों में फसलों (गन्ना, गेहूं, चावल, मक्का आदि) और बगीचों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कभी-कभार भंडार में रखे अनाज को भी नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन ये अनाज के दानों को कम नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि ये अनाज की फसल, विशेषतः उसकी बालियों को नुकसान पहुंचाते हैं और इस तरह फसल को अच्छा-खासा बरबाद कर देते हैं। यह 6 किलो तक अनाज अपने बिलों में ले जाता है। कभी-कभी ये मुर्गियों पर भी हमला कर देते हैं। ये प्लेग के प्रमुख वाहकों में है। गोदामों में अपशिष्ट छोड़ने और उन्हें दुषित करने के अलावा ये बदबू भी छोड़ते हैं। इनकी बीट इधर-उधर बिखरी हुई और अंडाकार होती है।

स्वभाव : ये ब

23
Aug

नॉर्वे चूहा

नॉर्वे रैट, भूरा चूहा, गटर का चूहा, जहाज का चूहा, रैटस नॉर्वेजिकस

नुकसान का प्रकार : अनाज खाते हैं. भंडार की वस्तुओं जैसे बैग्स/डब्बों आदि को नुकसान पहुंचाते हैं। अपने उत्सर्जन, मल और बालों से अनाज को दूषित करते हैं। कई तरह की बीमारियां फैलाते हैं। इनकी बीट समूह में पाई जाती है और तकलीनुमा होती है।

स्वभाव : ये अनाज भंडारों के बाहर बिल बनाते हैं लेकिन अकसर गटर में रहते हैं। ये बिल केवल सतह पर होते हैं और उसके दो से पांच मुंह होते हैं। सामान्यतया ये 25 से 30 मीटर के दायरे में जीवन यापन करते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं। जीवनकाल करीब 1 वर्ष होता है।

23
Aug

घरेलू चूहा

घरेलू चूहा, मुस मुस्कुलस

नुकसान का प्रकार : स्टोर रूम और गोदामों में एक विशेष तरह की गंध से इनकी उपस्थिति को पहचाना जा सकता है। ये खाद्यान्न, अन्न उत्पाद, सब्जियां, मांस, तेल, कार्बोहाइड्रेट आदि खाते हैं और लकड़ी के फर्नीचर, कागज़, कपड़े, रबड़, प्लास्टिक और चमड़े की वस्तुओं आदि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये जितना खाते हैं उससे ज़्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। ये बालों, मूत्र और मल से खाद्य पदार्थों को दुषित करते हैं; ये सैल्मोनेला नामक जीवों को भी फैलाते हैं जिनसे खाद्य विषाक्त (फूड पॉइज़निंग) हो जाता है। ये खाने-पीने की वस्तुओं के मुँह लगाकर और उनके ऊपर चलकर वायरस संक्रमण भी फैला सकते हैं। ये छूत की बीमारी जैसे दाद के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। इनकी बीट इधर-उधर बिखरी पड़ी रहती है और ये तकलीनुमा होती है।

स्वभाव : ये बिलों में, गहराई में या बक्सों के नीचे या कहीं अंधेर

23
Aug

घरेलु चुहिया

घरेलु चुहिया

घरेलू चुहिया, रुफ़ रैट, काली चुहिया, रैटस रैटस

नुकसान का प्रकार : यह हर तरह की खाद्य सामग्री खा सकती है और लकड़ी, प्लास्टिक, रबड़ और यहां तक कि मुलायम धातुओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है। चूंकि प्लेग के लिए भी यही ज़िम्मेदार है, इसलिए इसे भारत की सबसे नुकसानदायी चुहिया माना जाता है। सामान्यतया इसकी बीट इधर-उधर बिखरी पाई जाती है और वह केले की आकृति की होती है।

स्वभाव : ये रात्रिचर होते हैं, इसलिए दिन के समय मुश्किल से दिखते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं और पेड़ों पर आसानी से चढ़ जाते हैं. ये धूल भरे स्थानों में रहना पसंद करते हैं। कभी-कभार ये सीवर में भी दिख जाते हैं। घर से बाहर खुले में निकलना या बड़ी सड़क पार करना बहुत कम होता है। छतों से घर में घुसने के लिए ऊंचाई पर चढ़ जाते हैं।

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