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एचिनोक्ला क्रुस्गैली

कुल: पोसी (Poaceae)

विवरण:

  • गुच्छेदार वार्षिक घास।
  • ऊंचाई - 30- 60 सेमी, मोटा, भद्दा, अधिकतर सीधी खड़ी होती है और आधार में शाखाएं फैलाती हैं।
  • अवृंत पत्तियां जो एक चिकने आवरण से ढकी होती हैं। यह आवरण लीगल की अनुपस्थिति में तने को घेर लेता है। पत्तियां 10 से 30 सेमी लंबी और 5-20 सेमी चौड़ी होती हैं। मिडरिब प्रमुखता से होता है।
  • तना मजबूत होता है। शाखाएं आधार में परिपक्व होती हैं और नई पौध को जन्म देती हैं।
  • गर्म प्रदेशों में व्यापक रूप से पाए जाते हैं.
  • प्रजनन – बीज।
24
Aug

चावल पर खरपतवार का प्रभाव

चावल पर खरपतवार का प्रभाव

1. पोषक तत्वों, पानी और सूर्य के प्रकाश के लिए साथ प्रतिस्पर्धा कर चावल की गुणवत्ता और मात्रा घटा देता है

             - उच्च भूमि में सीधे बोये गए चावल : उत्पादन में 35-45% कमी

             - गीली जमीन में सीधे बोये गए चावल : उत्पादन में 20-25% कमी

             - प्रतिरोपित चावल : उत्पादन में 10-15% कमी

2. खरपतवार एक वैकल्पिक मेज़बान बनकर कीटों और रोगों की समस्या बढ़ा देता है, इससे फसल पर बुरा असर पड़ता है

3. जमीन की उत्पादकता कम हो जाती है

4. पानी दुषित होने से संबंधित समस्याएं

उत्तर प्रदेश राज्य में चावल की खेती में खरपतवार प्रबंधन

खेतों में चावल प्रतिरोपण के 3-4 दिन बाद प्रभावी शाकनाशी बुचेलर 50 ईसी को 1.5 लीटर (1.5% प्रति हेक्टेयर) 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसे प्रति हेक्टेयर 50 किग्रा मिट्टी के साथ मिश्रित कर उपयोग में लिया जा सकता है। शाकनाशी की अनुशंसित मात्रा महीन मिट्टी (50 किग्रा/हेक्टेयर) में मिलाएं और प्रतिरोपण के एक सप्ताह के अंदर समान रूप से छिड़काव कर दें। शाकनाशी का छिड़काव करते समय खेत में पानी का स्तर 1-2 सेंटीमीटर होना चाहिए और प्रभावी खरपतवार नियंत्रण के लिए शाकनाशी के छिड़काव के 24 घंटे बाद पानी का स्तर फिर बढ़ा (4-5 सेमी) देना चाहिए।

श्री विधि में: प्रतिरोपण के 15 और 10 दिन बाद क्रिस-क्रॉस विधि से 3-4 गुना कॉनोवीडर काम में लें।

प्लास्टिक ड्रम सीडर चावल बुवाई में : खेतों में चावल प्रतिरोपण के 3-4 दिन बाद प्रभावी शाकना

रासायनिक

जिन यौगिकों की रासायनिक क्रिया से चूहे मारे जा सकते हैं उन्हें रोडेन्टिसाइड्स करते है। ये ज़हरीले रोडेन्टीसाइड्स दो समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं।

सटीक/एक खुराक में मारने वाले ज़हर : ज़िंक फॉस्फेट, बैरियम क्लोराइड आदि कुछ ऐसे यौगिक हैं जिनका उपयोग जूहे के ज़हर के रूप में हुआ है। इन्हें 'सटीक ज़हर' के रूप में जाना जाता है क्योंकि ये बेहद ज़हरीली प्रकृति के होते हैं। यानी इनका असर तुरंत और घातक होता है। इन सटीक ज़हर की कमी यह है कि रोडेन्ट्स में ज़हर से दूर रहने और चारे के प्रलोभन से बचने की प्रवृत्ति पनप जाती है। उदाहरण ज़िंक फॉस्फाइड 2 हिस्से, अन्न के दाने 96 हिस्से और कोई भी खाने का तेल 2 हिस्से.

b. दीर्घकालिक / कई खुराकों में ज़हर देना : गोदामों या घरों में चूहे मारने की नई विधि है एन्टीकॉगुलेण्ट्स का उपयोग करना। यदि इसकी पर्याप्त मात्रा का

रोडेन्ट नियंत्रण की जैविक विधियां

a. परभक्षी : चूहों के लिए साँप और नेवले बहुत जाने-माने परभक्षी हैं। चूहे के बिल के पास बाँस के डंडे रोपना। उल्लू, चील आदि पक्षी उन बाँस पर बैठते हैं और जैसे ही चूहा बाहर आता है वे झपट कर उसे मार देते हैं। घर में बिल्लियां पालने से भी चूहों की संख्या काबू में रखी जा सकती है।

b. परजीवी रोडेन्ट नियंत्रण के लिए साल्मोनेल्ला प्रजाति के वाइरस का उपयोग किया जा सकता है लेकिन उससे अन्य अलक्षित प्राणियों को खतरा होने के कारण उसकी सलाह नहीं दी जाती है।

रोडेन्ट नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

a. गहरी जुताई : 18” (45 सेमी) तक की गहरी जुताई से चूहे के बिल खुल जाएंगे और वे सीधे अपने दुश्मनों जैसे कुत्ता, बिल्ली, कीट आदि के सामने आ जाएंगे। लेकिन यह सब बुवाई शुरू करने से पहले ही किया जा सकता है। अपनी उच्च प्रजनन क्षमता के कारण वे अपनी संख्या बहुत जल्दी उसी स्तर पर पहुंचा सकते हैं।

b. खेतों में पानी भरना : खेतों में बने बिलों में पानी भरा जा सकता है। उससे चूहे मर जाएंगे।

c. संकरी बंड का निर्माण : रोडेन्ट बिल बनाने के लिए चौड़ी बंड पसंद करते हैं।

रोडेन्ट नियंत्रण की मैकेनिकल विधियां

a. ट्रैपिंग : इससे जनसंख्या कम तो होती है लेकिन उससे आगे की वृद्धि रुकती नहीं है। यह तभी प्रभावी है जब उनकी संख्या कम हो। पकड़े गये चूहों के पिंजरों को तालाब में डूबाकर उन्हें मारना चाहिए और मरे हुए चूहों को गाड़ना चाहिए। बैक ट्रैप्स तोड़ने से ट्रैपिंग के समय चूहे मर जाते हैं। ट्रैप कहां लगाया है और उसमें क्या चारा रखा है, इनसे तय होता है कि खेतों, घरों और गोदामों में कितने प्रभावी ढंग से चूहे पकड़े जाएंगे. तंजावुर बाँस के ट्रैप, पॉट ट्रैप और ब्रेक बैक ट्रैप खेतों में चूहे पकड़ने में काफी उपयोगी साबित होते हैं। मालगोदामों/घरों में जो भौतिक विधियां अपनाई जाती हैं, वे हैं खड्डों में काँच के टुकड़ों के साथ सीमेंट का प्लास्तर करना, अच्छी तरह बंद होने वाले दरवाज़े लगवाना, बिना किसी सीढ़ी के 75 सेमी ऊंची चौकी बनवाना, दरवाजों के न

रोडेन्ट नियंत्रण की भौतिक विधियां

a. रैट प्रूफिंग : नए गोदाम बनवाते समय ध्यान रखें कि उन्हें रैट प्रूफ बनवाएं। आदर्श गोदाम की कुछ विशेषताएं हैं: गोदाम चूहों की बस्ती से दूर होने चाहिए। उसका आधार ऊंचा होना चाहिए। देखें कि कहीं आस-पास पानी इकट्ठा न होता हो। भवन-निर्माण के काम आने वाले पक्के सीमेंट से इमारत बनानी चाहिए। गोदाम की छत पर पेड़ों की शाखाएं नहीं आनी चाहिए। सभी खिड़कियों रोशनदानों, गटर, नालियों आदि पर 24 गेज ¼” (0.6 सेमी) मोटी मेटल मेश फिट करवाएं। दरवाजे अच्छी तरह बंद करें। दरवाजे और फर्श के बीच का स्थान ¼ “ (0.6 सेमी) से अधिक नहीं होना चाहिए। कम से कम 3’ (90 सेमी) गहरी पक्की नींव होनी चाहिए। दरवाजों में नीचे मेटल शीट की 9” (25 सेमी) की लाइनिंग होनी चाहिए। गोदाम के सामने प्लेटफॉर्म सीढ़ियां रात भर नहीं रखनी चाहिए। प्लेटफॉर्म 12” (30.5 सेमी) ऊंचा और उल्टे एल आक

23
Aug

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण

रोडेन्ट नियंत्रण के लिए निम्न विधियां अपनाई जा सकती हैं-

  • गैर रासायनिक और
  • रासायनिक

I. गैर-रासायनिक विधियों में शामिल है

  • भौतिक विधियां
  • मैकेनिकल
  • परंपरागत
  • जैविक

II. रासायनिक विधियों में शामिल है  

  • सटीक/ एक खुराक में मारने वाले ज़हर
  • दीर्घकालिक/ अनेक बार ज़हर देना
  • चूहों के बिलों में धुआं करना
23
Aug

छोटे घूस (बैंडिकूट)

छोटे बैंडिकूट, छछुंदर, लघु बैंडिकूट, बाहरी चूहे, बैंडिकोटा बेंगैलेन्सिस

नुकसान का प्रकार : ये सर्वभक्षी होते हैं और अनाज, फल, सब्जियां, मेवे, कभी-कभार बच्चों का और मरे जानवरों का मांस भी खा लेते हैं। ये खेतों में फसलों (गन्ना, गेहूं, चावल, मक्का आदि) और बगीचों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कभी-कभार भंडार में रखे अनाज को भी नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन ये अनाज के दानों को कम नुकसान पहुंचाते हैं क्योंकि ये अनाज की फसल, विशेषतः उसकी बालियों को नुकसान पहुंचाते हैं और इस तरह फसल को अच्छा-खासा बरबाद कर देते हैं। यह 6 किलो तक अनाज अपने बिलों में ले जाता है। कभी-कभी ये मुर्गियों पर भी हमला कर देते हैं। ये प्लेग के प्रमुख वाहकों में है। गोदामों में अपशिष्ट छोड़ने और उन्हें दुषित करने के अलावा ये बदबू भी छोड़ते हैं। इनकी बीट इधर-उधर बिखरी हुई और अंडाकार होती है।

स्वभाव : ये ब

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