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23
Aug

नॉर्वे चूहा

नॉर्वे रैट, भूरा चूहा, गटर का चूहा, जहाज का चूहा, रैटस नॉर्वेजिकस

नुकसान का प्रकार : अनाज खाते हैं. भंडार की वस्तुओं जैसे बैग्स/डब्बों आदि को नुकसान पहुंचाते हैं। अपने उत्सर्जन, मल और बालों से अनाज को दूषित करते हैं। कई तरह की बीमारियां फैलाते हैं। इनकी बीट समूह में पाई जाती है और तकलीनुमा होती है।

स्वभाव : ये अनाज भंडारों के बाहर बिल बनाते हैं लेकिन अकसर गटर में रहते हैं। ये बिल केवल सतह पर होते हैं और उसके दो से पांच मुंह होते हैं। सामान्यतया ये 25 से 30 मीटर के दायरे में जीवन यापन करते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं। जीवनकाल करीब 1 वर्ष होता है।

23
Aug

घरेलू चूहा

घरेलू चूहा, मुस मुस्कुलस

नुकसान का प्रकार : स्टोर रूम और गोदामों में एक विशेष तरह की गंध से इनकी उपस्थिति को पहचाना जा सकता है। ये खाद्यान्न, अन्न उत्पाद, सब्जियां, मांस, तेल, कार्बोहाइड्रेट आदि खाते हैं और लकड़ी के फर्नीचर, कागज़, कपड़े, रबड़, प्लास्टिक और चमड़े की वस्तुओं आदि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये जितना खाते हैं उससे ज़्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। ये बालों, मूत्र और मल से खाद्य पदार्थों को दुषित करते हैं; ये सैल्मोनेला नामक जीवों को भी फैलाते हैं जिनसे खाद्य विषाक्त (फूड पॉइज़निंग) हो जाता है। ये खाने-पीने की वस्तुओं के मुँह लगाकर और उनके ऊपर चलकर वायरस संक्रमण भी फैला सकते हैं। ये छूत की बीमारी जैसे दाद के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। इनकी बीट इधर-उधर बिखरी पड़ी रहती है और ये तकलीनुमा होती है।

स्वभाव : ये बिलों में, गहराई में या बक्सों के नीचे या कहीं अंधेर

23
Aug

घरेलु चुहिया

घरेलु चुहिया

घरेलू चुहिया, रुफ़ रैट, काली चुहिया, रैटस रैटस

नुकसान का प्रकार : यह हर तरह की खाद्य सामग्री खा सकती है और लकड़ी, प्लास्टिक, रबड़ और यहां तक कि मुलायम धातुओं को भी नुकसान पहुंचा सकती है। चूंकि प्लेग के लिए भी यही ज़िम्मेदार है, इसलिए इसे भारत की सबसे नुकसानदायी चुहिया माना जाता है। सामान्यतया इसकी बीट इधर-उधर बिखरी पाई जाती है और वह केले की आकृति की होती है।

स्वभाव : ये रात्रिचर होते हैं, इसलिए दिन के समय मुश्किल से दिखते हैं। ये अच्छे तैराक होते हैं और पेड़ों पर आसानी से चढ़ जाते हैं. ये धूल भरे स्थानों में रहना पसंद करते हैं। कभी-कभार ये सीवर में भी दिख जाते हैं। घर से बाहर खुले में निकलना या बड़ी सड़क पार करना बहुत कम होता है। छतों से घर में घुसने के लिए ऊंचाई पर चढ़ जाते हैं।

रोडेन्ट (चूहे) से नुकसान और उसका प्रबंधन

फसलों को, विशेषकर चावल की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले गैर-कीट श्रेणी के प्राणियों में रोडेन्ट मुख्य हैं। रोडेन्ट कशेरुकी (वर्टिब्रेटा) होते हैं और वे निम्न से संबंधित होते हैं-

वर्ग: मैमलिया और

श्रेणी: रोडेन्टिया।

चूहे के प्रकार

1. घरेलू चुहिया

2. घरेलू चूहे

3. नॉर्वे मुषक

4. छोटे घूस (बैंडिकूट)

5. बड़े घूस (बैंडिकूट)

रासायनिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

  • गुइनैलफोस मिथाइल पैराथियॉन, फोरेट और सिंथेटिक पाइटोथ्रॉइ्डस जैसे कीटनाशकों का प्रयोग कर कीटों पुनरुत्थान होने से रोकें।
  • आवश्यकतानुसार सुझाव दी गई खुराक अनुसार कीटनाशकों का प्रयोग।

पौधे संबंधी उत्पाद

  • बी.पी.एच, लीफ फोल्डर और जी.एल.एच के विरूद्ध एन.एस.के.ई 5% या नीम तेल 3% का छिड़काव किया जा सकता है।
  • आइपोमिया पत्ती चूर्ण और प्रोसोपिस पत्ती चूर्ण इयरहेड बग के विरूद्ध प्रभावी होते हैं।
  • इयरहेड बग के विरूद्ध नीम बीज कर्नेल सारतत्व 5% (NSKE 5%) या नीम तेल का प्रयोग करें।

चूहा प्रबंधन

  • फसल कटाई के बाद चूहों के बिल और चूहों को नष्ट कर दें।
  • बांध संकरा रखें।
  • उल्लू का बसेरा (आउल पर्च) बनाएं
  • जहरीली पत्ती के 1 भाग जिंक फॉस्फाइड को पॉप्ड मक्का/चावल/सूखी मछली के 49 भाग के साथ प्रयोग करें या व

जैविक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) पैकेज

  • बार-बार कीटनाशक का प्रयोग न कर तथा सुरक्षित कीटनाशकों का प्रयोग कर मकड़ियों, मिरिड्स (पत्तियों पर रहने वाला एक प्रकार का कीड़ा) और अन्य प्राकृतिक शत्रुओं को संरक्षित रखना।  
  • स्टेम बोरर के विरूद्ध 30 व 37 डी.ए.पी पर दो बार एक लाख प्रति हेक्टेयर की दर से टी. जपोनिकम का प्रयोग करना तथा लीफ बोरर के विरूद्ध 37, 44 व 51 डी.ए.पी पर तीन बार एक लाख प्रति हेक्टेयर की दर से टी. चिलोनिस का प्रयोग करना
  • गॉल मिड्ज के विरूद्ध रोपन के 10 दिन बाद प्लैटिगैस्टर ओराइजी परजीवित गॉल्स का प्रयोग @ 1 /10 की दर पर करना।
  • चावल स्टेम बोरर पर नियंत्रण के लिए रोपण के 1 माह बाद एक सप्ताह के अंतराल पर एक हेक्टेयर खेत में 8 ट्राइकोकॉर्ड (जैव-कारक ट्राइकोग्रैमा) का प्रयोग तीन बार (कुल 24 बार) करें।

सांस्कृतिक एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम) के तहत किए जाने वाले कार्य

  • जुताई के बाद खूंटियों को हटाकर नष्ट कर दें।  
  • खेत के बांधों की कांट-छांट और मजबूतीकरण करते रहें और खेतों से घास पात हटा दें।
  • बोने में समानता बनाए रखें
  • बेकार जगह खाली छोड़ दें
  • विशेष क्षेत्रों में रोपण के दौरान निकटता से बचें
  • उचित पानी प्रबंधन
  • अधिक उर्वरक के प्रयोग से बचें, विशेषकर नाइट्रोजन युक्त उर्वरक जिसमें बी.पी.एच और लीफ फोल्डर शामिल होते हैं।
  • रोपण के दौरान चावल सीड्लिंग के अग्रसिरा को डुबाकर स्टेम बोरर अंडा द्रव्य हटा दें।

अतिथि पौधा प्रतिरोध: चावल की फसल में कीट नियंत्रण के लिए प्रतिरोधी प्रजातियों का प्रयोग करना सबसे सस्ती विधियों में से एक है।

व्यवहारजनक: चावल के खेत में कीटों के नियंत्रण व उसे पकड़ने के लिए फंदे (ट्रैप) का प्रयोग करन

एकीकृत कीट प्रबंधन की शक्तियां (गुण)

  • चिरकालीनता - लागत
  • कम आर्थिक लागत - स्वास्थ्य
  • स्वास्थ्य पर कम बुरा प्रभाव - पर्यावरण की गुणवत्ता
  • गैर-लक्षित जीवों के लिए पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित, किसी भी प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण नहीं।
  • सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता
  • स्थानीय इनपुट के प्रयोग द्वारा।  
  • स्थानीय ज्ञान – देशी खेती, पारंपरिक जुताई और तरीके भी एकीकृत किए जा सकते हैं।
  • कृषिगत पदार्थों का निर्यात – कार्बनिक फार्मिंग के माध्यम से उपजाना।
  • पुनरुत्थान या प्रतिरोध के अवसर नहीं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बिल्कुल उपयुक्त।

एकीकृत कीट प्रबंधन की सीमाएं (अवगुण)

संस्थागत सीमाएं: फैक्लटी के बीच आपस में समन्वय की कमी की तरह शोध वैज्ञानिकों में संस्थागत बाधाएं।

सूचनात्मक सीमाएं: किसानों में आई.पी.एम तकनीकी की कमी।

सामाजिक सीमाएं: कीटनाशक के प्रयोग के लिए अधिकतर किसानों में समन्वय की कमी,समाज में समन्वय की कमी।

आर्थिक सीमाएं: क्रेडिट पर कीटनाशकों प्राप्त करने के लिए और कीट नियंत्रण विधि के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए किसान दुकानदारों या कीटनाशक के डीलरों पर निर्भर होते हैं।

राजनीतिक सीमाएं: सरकार द्वारा कीटनाशकों हेतु सब्सिडी किसानों द्वारा आई.पी.एम स्वीकार नहीं करने की सबसे बड़ी बाधा है।

एकीकृत कीट प्रबंधन के उद्देश्य

  • कीटों का मूलनाश करने के बजाए उन्हें ई.टी.एल स्तर से कम पर रखना।
  • जैव-विविधता सहित पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण।
  • छोटे किसानों के लिए भी पौधों की सुरक्षा संभव, सुरक्षित और आर्थिक बनाए रखना।

एकीकृत कीट प्रबंधन की रणनीतियां

  • यदि कीटों का घनत्व ई.टी.एल से कम हो तो कुछ न करें।  
  • कीटों की आबादी कम करें - विशेषकर जब कीटों की आबादी ई.टी.एल तक पहुंच जाए।  
  • कीटों से होनेवाले नुकसान के प्रति फसल की संवेदनशीलता कम करें
  • अति प्रभावी व पर्यावरणीय अपेक्षित रणनीति एच.पी.आर तथा पर्यावरणीय कौशलता।  
  • कीटों की आबादी तथा संवेदनशीलता दोनों कम करें।
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