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चावल का एकीकृत कीट प्रबंधन (आई.पी.एम)

  • यह एक व्यापक पर्यावरणीय कीट नियंत्रण दृष्टिकोण है जिसमें सभी ज्ञात कीट नियंत्रण उपायों का बेहतरीन मिश्रण तैयार किया जाता है ताकि कीटों की आबादी ई.टी.एल से कम रहे।
  • यह वैसी कीट प्रबंधन प्रणाली है जो यथासंभव सभी उपयुक्त तकनीकियों व विधियों का मिश्रित उपयोग संगत रूप से करती है और कीटों की आबादी आर्थिक हानि उत्पन्न करने वाले स्तर से कम रखती है।
  • यह फसल की सुरक्षा के लिए आर्थिक रूप से न्यायोचित और चिरकालीन सिस्टम है जो अधिकतम उत्पादकता में इस प्रकार मदद करता है कि सकल पर्यावरण पर बहुत ही कम प्रतिकूल प्रभाव हो।
22
Aug

चावल का फॉल्स स्मट

चावल का फॉल्स स्मट

लक्षण: फंगस अनाज के अलग-अलग दाने को मखमली हरे बॉल के रूप में परिवर्तित कर देते हैं। रोगजनकों के बीजाणुओं के विकास के कारण अंडाशय वृहत्त मखमली गरे द्रव के रूप में दिखते हैं। सामान्य तौर पर कुछेक स्पाइकलेट्स ही प्रभावित हो पाते हैं।

रोगजनक: यूस्टिलैजिनोइडिया वाइरेन्स (Syn : क्लैविसेप्स ओराइडी - सैटिवा)। स्पोरबॉल पर क्लैमाइडोस्पोर्स बनते हैं। ये गोलाकार से दीर्घवृत्ताकार, मोम जैसा और ओलिवैसियस होते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां: फूल खिलने और परिपक्वता अवधि के दौरान वर्षा व बादल भरे मौसम का होना अनुकूल माना जाता है।

चावल में फॉल्स स्मट का प्रबंधन

  • सुझाव अनुसार उर्वरक की मात्रा का प्रयोग।  
  • गर्मियों में खूंटी निकालने के लिए अंदर तक जोतना।
  • संक्रमित खेत से स्वस्थ खेत में सिंचाई पानी जाने से रोकें।
  • रासायनिक छिड़काव: 0.1% प्रो

चावल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी) का प्रबंधन

  • खूंटियां जला दें।
  • उर्वरक की उपयुक्त मात्रा का प्रयोग करें।
  • रोपण के समय सीड्लिंग के अग्रसिरा को नहीं तोड़ें।
  • बाढ़ जैसी स्थिति से बचें।
  • वीड (घास-पात) हटा दें।
  • प्रतिरोधी फसल जैसे बिरसामती, बिरसा विकास धान 110, बिरसा विकास धान 109, हजारीधान, सदाबहार, बिरसा धान 108, शिवम और स्वर्ण आदि ने चावल में बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी) के प्रति प्रतिरोधी दिखाया है।
  • बीज उपचार: कार्बेन्डैज़िम 50 WP या बीम (ट्राइसाइक्लाजोल) @ 2 ग्राम/कि.ग्रा. बीज का प्रयोग कर।  
  • फोलियर छिड़काव: 10 लीटर पानी में 2 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन (0.02%) का घोल बनाएं। 500 लीटर पानी में कुल 100 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन को घोलें और एक हेक्टेयर में 2 से 3 बार छिड़काव करें।

चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी)

जैन्थोमोनस ओराइजी पी.वी ओराइजी

लक्षण:

  • यह बीमारी सामान्यतः हेडिंग के वक्त नजर में आती है लेकिन गंभीर स्थिति में पहले भी देखी जा सकती है।
  • नर्सरी में सीडलिंग में किनारे में वृत्ताकार पीले धब्बे दिखते हैं जो बाद में बड़े होकर एक दूसरे से मिल जाते हैं और पत्तियां सूखने लगती हैं।
  • रोपण के 1-2 सप्ताह के बाद "क्रेसेक" लक्षण सीड्लिंग में देखे जाते हैं।
  • कटे हुए घाव के माध्यम से जीवाणु पत्तियों के सिरे में पहुंच जाते हैं, फिर हर जगह फैलकर पूरे सीड्लिंग की मृत्यु का कारण बन जाते हैं।
  • बड़े पौधों में पत्तियों के किनारे पानी से भींगे स्पष्ट धब्बे दिखते हैं।
  • ये धब्बे लंबाई और चौड़ाई दोनों में ही बड़े होते जाते हैं। किनारे की आकृति तरंगनुमा हो जाता है और कुछ ही दिनों में पुआल जैसा पीला हो जाता है।
  • यही स्थिति

चावल में शीथ ब्लास्ट का प्रबंधन

  • अधिक मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग न करें।
  • पौधों के बीच इष्टतम जगह खाली रखें।
  • वीड (घास-पात) आदि निकाल दें।
  • कार्बनिक पदार्थ का प्रयोग करें।
  • संक्रमित खेत में से स्वस्थ खेत में पानी जाने से रोकें।  
  • गर्मी में अंदर तक हल चलाएं और खूंटी आदि जला दें।
  • बीज उपचार: कार्बेन्डैज़िम 50 WP या बीम (ट्राइसाइक्लाजोल) @ 2 ग्राम/कि.ग्रा. बीज का प्रयोग कर।
  • बायोकंट्रोल (जैवनियंत्रण) एजेंट द्वारा बीज उपचार: प्रति 1 कि.ग्राम बीज के लिए स्यूडोमोनस फ्लोरेसेन्स का 10 कि.ग्रा.।
  • इसके बाद सीड्लिंग को 100 लीटर में 2.5 कि.ग्रा. या उत्पाद प्रति हेक्टेयर की दर पर 30 मिनट तक डुबाना।
  • रोपण के 30 दिनों के बाद 2.5 कि.ग्रा. /हेक्टेयर की दर पर पी.फ्लोरेसेन्स का प्रयोग मिट्टी में किया जाना। (इस उत्पाद को 50 कि.ग्रा. एफ.वाई.एम/बालू के साथ मिल

रोगजनक स्क्लेरोटिया या माइसिलियम के रूप में सूखी मिट्टी में लगभग 20 महीने तक जीवित रह सकते हैं लेकिन नम मिट्टी में 5-8 माह तक ही जीवित रह सकते हैं। 32 परिवार के फसल की 188 प्रजातियों से भी अधिक को यह संक्रमित कर देता है। स्क्लेरोटिया सिंचाई के पानी के माध्यम से फैलता है।

अनुकूल परिस्थितयां: उच्च सापेक्षिक आर्द्रता (96-97 प्रतिशत), उच्च तापमान (30-32 oC), पास में में पौधो को रोपा जाना और नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों का अधिक मात्रा में प्रयोग।

22
Aug

चावल में शीथ ब्लास्ट

चावल में शीथ ब्लास्ट

लक्षण:

  • फंगस फसल को उसकी टिलरिंग अवस्था से प्रारंभ कर हेडिंग (कली फूटने) अवस्था तक प्रभावित करता है।  
  • पानी के स्तर के आसपास लीफ शीथ पर पारंभिक लक्षण दिखते हैं।  
  • लीफ शीथ पर अंडाकार या दीर्घवृत्ताकार या अनियमित आकार के हरे धब्बे बन जाते हैं।  
  • जैसे ही धब्बे बड़े होते हैं, केंद्र भूरा सफेद सा हो जाता है जिसका किनारा अनियमित आकार का काला भूरा या बैंगनी भूरा सा दिखता है (चित्र. 18)।  
  • पौधों के ऊपरी भाग के धब्बे तेजी से बढ़ते हुए एक दूसरे से मिल जाते हैं और यह पानी के स्तर से फ्लैग लीफ तक के भाग में पूरे टिलर्स पर फैल जाते हैं।  
  • लीफ शीथ पर अनेकों बड़े बड़े धब्बों की उपस्थिति से सामान्यतः पूरी पत्ती सूख जाती है और गंभीर स्थिति में पौधा के सभी पत्तियां इस तरह से मुरझा जाती हैं।
  • संक्रमण आंतरिक शीथ तक फैल जाता है जिस कारण पूर

चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट के विस्तार का प्रकार और उसका जीवन

संक्रमण के मूल कारण का मुख्य स्रोत संक्रमित बीज होता है। संक्रमित अनाज पर मौजूद कोनिडिया और संक्रमित ऊतक के माइसिलियम में 2 से 3 वर्ष तक की जीवनक्षमता होती है। फंगस मिट्टी में 30OC पर 28 माह तक और 35OC पर 5 माह तक जिन्दा रह सकते हैं। वायुजनित कोनिडिया पौधों को नर्सरी और मुख्य खेत दोनों में संक्रमित करते हैं। कोनिडिया की अधिकतम उड़ान 4.0-8.8 घंटे की गति वाली वायु पर होती है। न्यूनतम तापमान 27-28OC, सापेक्षिक आर्द्रता 90-99% और वर्षा 0.4 -14.4 मि.मी. का वातावरण कोनिडिया के अधिकतम फैलाव के लिए उपयुक्त होता है। फंगस अन्य अतिथियों (कोलैट्रल हॉस्ट्स) जैसे लिर्सिया हेक्सैन्ड्रा, अरूण्डो डोनक्स और एकिनोक्लोरा कोलोनम पर भी बसर करते हैं।

अनुकूल परिस्थितियां :

80 प्रतिशत से अधिक सापेक्षिक आर्द्रता के साथ 25-30OC का तापमान बहुत ही अनु

चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट के रोगजनक

हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइजी (Syn : ड्रेक्सलेरा ओराइजी) (लैंगिक अवस्था: कोचलियोबोलस मियाबिनस)।

एच.ओराइजी ग्रे- भूरा से गहरा भूरा के मध्य में सेप्टेट माइसिलियम पैदा करता है। कोनिडियोफोर्स अकेले या छोटे समूह में वृद्धि करते हैं। ये सीधे होते हैं लेकिन कभी कभी तेजी से कोण पर मुड़े होते हैं और इनका रंग भूरा होता है। कोनिडिया सामान्य तौर पर वक्राकार होते हैं जिसका मध्य भाग फूला होता है तथा इसके दोनो किनारे पतले होते हैं। कभी कभी किनारे बिल्कुल सीधे भी होते हैं। यह पीला जैतूनी हरा रंग से स्वर्ण भूरा रंग का होता है और 6-14 सेप्टेट होते हैं। फंगस की पूर्ण अवस्था सी. मियाबिनस होती है। इसमें से 6-15 सेप्टेट वाले एस्की युक्त पेरिथेसिया उत्पन्न होता है। इसके स्कोपोर्स फिलामेंट आकार के या लंबे बेलनाकार, हियालाइन से पीला जैतूनी हरा रंग

चावल में ब्राउन लीफ स्पॉट (पत्ती में भूरा धब्बा)

लक्षण:

  • नर्सरी में सीडलिंग से लेकर मुख्य खेत में दूध की अवस्था तक फंगस फसल पर आक्रमण करता है।  
  • इसके लक्षण कोलियोप्टाइल, लीफ ब्लेड, लीफ शीथ, ग्लूम पर धब्बे के रूप में दिखते हैं और ये धब्बे लीफ ब्लेड व ग्लूम पर बहुत ही स्पष्ट होते हैं।  
  • बीमारी की शुरूआत में बहुत ही छोटा भूरा धब्बा होता है जो बाद में बेलनाकार या अंडाकार होते हुए वृत्ताकार हो जाता है।
  •  कई धब्बे एक साथ मिल जाते हैं और पत्ती सूख जाती है।  
  • सीडलिंग मर जाते हैं और प्रभावित नर्सरी को उसके भूरे झुलसी हुई आकृति को देखकर आप दूर से पहचान सकते हैं।  
  • गहरा भूरे या काले धब्बे भी ग्लूम पर दिखते हैं जिसमें फंगसे कोनिडिफोर्स और कोनिडिया बहुत अधिक संख्या में पाए जाते हैं।
  • इस कारण बीज में अंकुरण नहीं हो पाता है, सीडलिंग मर जाते हैं और अनाज
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