Best Viewed in Mozilla Firefox, Google Chrome

22
Aug

चावल ब्लास्ट का प्रबंधन

चावल ब्लास्ट का प्रबंधन

  • खेत के बांध और नाली में से अतिथि घास-फूस (वीड) को हटा कर नष्ट कर दें।  
  • बीज का उपचार: कार्बेन्डैज़िम 50 WP या बीम (ट्राइसाइक्लैजोल) @ 2 ग्राम/कि.ग्रा. बीज के लिए।  
  • बायोकंट्रोल (जैवनियंत्रण) एजेंट के माध्यम से बीज उपचार : ट्राइकोडर्मा वाइराइड@ 4ग्राम/कि.ग्रा. से या स्यूडोमोनस फ्लूरेसेन्स @ 10 ग्राम/कि.ग्रा बीज के लिए।
  • मुख्य खेत में पास पास में सीडलिंग बोने से बचें।  
  • 8 सेन्ट नर्सरी के लिए कार्बेन्डैज़िम 25 ग्राम या एडिफेनफोस 25 मि.ली. का छिड़काव करें।  
  • कार्बेन्डैज़िम 50 WP (1ग्राम/लीटर पानी की दर से) का 0.1% घोल या 0.06% बीम (ट्राइसाइक्लैजोल) (6 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
  • चावल ब्लास्ट के विस्तार का प्रकार और उसका जीवन

    यह बीमारी मुख्यतः वायुजनित कोनिडिया के माध्यम से फैलती है क्योंकि फंगस के स्पोर्स पूरे साल भर विद्यमान होते हैं। संक्रमित तने वाले भाग (सट्रॉ) और बीज में माइसीलियम और कोनिडिया इनोक्युलम के प्रमुख स्रोत हैं। सिंचाई वाला पानी के माध्यम से कोनिडिया अन्य खेतों में भी जा सकते हैं। फंगस अन्य अतिथियों (कोलैट्रल हॉस्ट्स) पर भी बसर करते हैं जैसे पैनिकम रेपेन्स, डिजिटेरिया मैग्रजिनैटा, ब्रैशिएरिया म्यूटिका, लिर्सिया हेक्सैन्ड्रा, डिनेब्रा रिट्रोफ्लिया, एकिनोक्लोओ क्रूसगल्ली और स्टेनोटैफ्रम सेकण्डैटम।

    चावल ब्लास्ट के लिए उपयुक्त परिस्थितियां

    नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों, पारी-पारी से पानी की बौछार, बादल भरा मौसम, उच्च सापेक्षिक आर्द्रता (93-99 प्रतिशत), रात में कम तापमान (15-200c के बीच या 260c से कम), अधिक दिनों तक वर्षा का होना, अधिक समय तक ओस का बना रहना, बादल भरा मौसम, धीमी गति की हवा और साथ में रहने वाले अन्य अतिथियों की मौजूदगी।

    22
    Aug

    चावल ब्लास्ट

    चावल ब्लास्ट

    लक्षण:  

    • नर्सरी में सीड्लिंग की अवस्था से मुख्य खेत में पौधो के फूटने (हेडिंग) की अवस्था तक हर अवस्था में यह फंगस (कवक) फसल पर आक्रमण करता है।  
    • इसके सामान्य लक्षण पत्तियों पर, लीफ शीथ, रैचिस, नोड्स और यहां तक कि ग्लम्स पर भी आक्रमण होते हैं।  
    • पत्तियों पर पानी में भींगे नीला हरा धब्बा जैसे चोट का निशान बनना शुरू हो जाता है।  
    • कुछ ही दिनों में बड़ा होकर यह अपनी प्रकृतिगत रूप में भूरा केंद्र और गहरा भूरा मार्जिन वाला तुंत आकार का धब्बा बन जाता है (लीफ ब्लास्ट)।
    • जैसे जैसे बीमारी बढ़ती है धब्बे एक दूसरे से जुट जाते हैं और पत्ती का बहुत पड़ा भाग सूख झाता है और मुरझा जाता है।  
    • ऐसे ही धब्बे उसके आवरण (शीथ) पर भी बन जाते हैं। बुरी तरह प्रभावित नर्सरी और खेत जला हुआ सा दिखता है।
    • संक्रमित नोडों में नोड के चारों ओर अनियमित काला क्षेत्र

    उत्तर प्रदेश राज्य में चावल की बीमारियां

    उत्तर प्रदेश राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चावल की फसल पर निम्नलिखत 5 मुख्य बीमारियां आक्रमण करती हैं -

    1. चावल ब्लास्ट

    2. चावल के पत्ती पर प भूरे रंग का धब्बा (चावल का ब्राउन लीफ स्पॉट)

    3. चावल का शीथ ब्लाइट

    4. चावल का बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट (बी.एल.बी)

    5. चावल का फॉल्स स्मट

    22
    Aug

    राइस लीफ फोल्डर

    राइस लीफ फोल्डर

    लैटिन नाम: नैफैलोक्रोसिस मेडिनलिस, पाइरालिडे, लेपिडोपटेरा

    सामान्य नाम: पत्ती लपेटक

    हमले के लक्षण:

    • लंबवत या तिरछी तरफ से पत्तियां रेशम के साथ मुड़ जाती है और ऐसे स्थानें पर स्क्रैप्ड पैच होते हैं।

    क्षति की प्रकृति:

    • लारवा बंद पत्ती के अंदर रहता है और पत्ती का हरा हिस्सा खत्म कर देता है जिससे सफेद धब्बे पत्तियों पर रह जाते हैं।

    प्रबंधन

    रासायनिक नियंत्रण: एक हेक्टेयर के लिए एंडोसलफान35 ईसी या क्वलीनोलफोस 25 ईसी @2 लीटर 500 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने से कीटों की जनसंख्या को नियंत्रित करने में अत्यधिक प्रभावी पाया गया है।

    22
    Aug

    चावल का घुंडी बग/ईयर हेड बग

    चावल का घुंडी बग/ईयर हेड बग

    वैज्ञानिक नाम: लैपटोकोरिसा एक्यूटा, एलीडिडे, हेमिटेरा

    हमले के लक्षण:

    • पत्तियां पीली हो जाती है और बाद में सिरे से नीचे की ओर रस्टिड हो जाती है।
    • खाने के स्थलों पर बहुत सारे भूरे रंग के धब्बे / दानों में कुम्हलाहट दिखाई देने लगती है।
    • पर्याक्रमण ज्यादा हो जाने की स्थिति में पूरे के पूरे ईयरहेड में परिपक्व दाने नहीं रहते हैं।
    • खेत में इसकी उपस्थिति के बारे में इसकी तीखी गंध के द्वारा पता लगता है।

    क्षति की प्रकृति:

    • वयस्क और निंफ दोनों ही नुकसान करते हैं।
    • अंडे सेने के 3 से 4 घंटे बाद ही निंफ खाना शुरू कर देते हैं।
    • वे पत्ती के सिरे के नजदीक सैप /दूधिया स्तर पर विकसित होने वाले स्पाइकलेट के दूधिया सैप को खाते हैं।
    • दूधिया सैप को चूसने के कारण दाने अच्छी तरह से नहीं भरते/आधे भरते हैं और भूसी जैसे हो जाते है।
    • अत
    22
    Aug

    राइस स्वार्मिंग कैटरपीलर

    राइस स्वार्मिंग कैटरपीलर

    वैज्ञानिक नाम: पोडोटेरा मॉरीशिया, नाक्ट्विडी, लेपीडोपटेरा

    हमले के लक्षण:

    रातों-रात नर्सरियों को पूरी तरह से कैटरपीलर द्वारा खाया हुआ पाया गया।

    क्षति की प्रकृति:

    • कैटरपीलर बहुत बड़ी संख्या में शाम के समय आते हैं और सुबह होने तक धान के बीजांकुरों की पत्तियों को खाते हैं और दिन के समय छिप जाते हैं।
    • वे बहुत ही तेजी से खाते हैं और खेत में खाने के बाद दूसरे खेत की ओर चल देते हैं।
    • अत्यधिक पर्याक्रमण की स्थिति में फसल चरे हुए पौधों की तरह नजर आती है।
    • जिन पौधों पर हमला होता है वे केवल ठूंठ रह जाते हैं।
    • वे नर्सरियां जो कि ऐसे दलदली क्षेत्रों में होती है जिनके पानी की निकासी अच्छी तरह से नहीं होती उन पर सूखी जमीन की तुलना में पहले हमला होता है।
    • जुलाई से सितंबर के दौरान नुकसान अधिक होता है।

    चावल के स्वार्मिंग कैटरप

    22
    Aug

    राइस गॉल मिज (सनरहाकीट)

    राइस गॉल मिज (सनरहाकीट)

    वैज्ञानिक नाम: ओरसियोलिया ओरिजी, सेसिडोमाइटी, डिपटेरा

    सामान्य नाम: सनरहाकीट

    हमले के लक्षण:

    • केंद्रीय शूट पत्ती का उत्पादन करने के बजाय एक लंबी ट्यूबलर संरचना को पैदा करती है।
    • क्षति के एक बाहरी लक्षण के रूप में जब गॉल लंबा हो जाता है तो उस समय कीट प्यूपल चरण में होता है और प्रकट होने के लिए तैयार होता है।

    क्षति की प्रकृति:

    • टिलर के बढ़ते हुए बिंदु पर मैग्ट छेद करता है और पत्ती के शीथ में असामान्य वृद्धि पैदा करता है जो कि सफेद ट्यूबलर आकार की हो जाती है और एक दम से समाप्त हो जाती है।
    • यह हल्के हरे रंग, गुलाबी या बैंगनी रंग की हो सकती है।
    • टिलर का आगे होने वाला विकास रूक जाता है।
    • इसे ओनियन शूट या सिल्वर शूट कहा जाता है।
    • कीड़े और उसके लार्वा के स्राव जिसमें एक सक्रिय सेसीडोजन नामक पदार्थ होता है, म
    22
    Aug

    तना बेधक का प्रबंधन

    तना बेधक का प्रबंधन

    नर्सरी में : नर्सरी के 10 - 12 दिन के पौधों में कारबोफ्यूरेन 3 जी @ 250 ग्राम, या फोरेट @ 100 ग्राम प्रति 100 m2 नर्सरी क्षेत्र में डालें।

    रफिंग: जिन टिलरों में डेड हार्ट दिखाई दें उन्हें हटा दिया जाना चाहिए और उन्हें खेत से बाहर नष्ट करना चाहिए ,इससे पर्याक्रमण कम हो जाता है।

    जैविक नियंत्रण: एक हेक्टयर के लिए प्रतिरोपण के एक महीने के बाद एक सप्ताह के अंतर पर 8 ट्राइकोकोर्ड का प्रयोग (जैव – एजेंट ट्राइकोग्रामा) करें ।

    रासायनिक नियंत्रण: इस कीट की जनसंख्या को नियंत्रित करने में कारटोप हाइड्रोक्लोराइड 4G @ 20 किलो / हेक्टेयर अत्यधिक प्रभावी पाया गया है।

    Copy rights | Disclaimer | RKMP Policies