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22
Aug

चावल स्टेम बोरर ( तना बेधक)

चावल स्टेम बोरर ( तना बेधक)

वैज्ञानिक नाम: स्कीरपोफैगा इनसरटुला, पाइरासटीडे, लेपिडोपटेरा

सामान्य नाम: तना बेधक

हमले के लक्षण:

  • कई मरे हुए स्टेम बोरर कीड़े खेतों के पानी पर तैरते हुए दिखाई देते हैं।
  • पौधे उगने के चरण पर प्रभावित अंकुरों में उनके मरे हुए हार्ट दिखाई देते हैं और प्रजनन के स्तर पर व्हाइट इयर देखा जा सकता है।

क्षति की प्रकृति:

  • कीट नर्सरी में ही पौधों पर हमला करना शुरू कर देते हैं विशेष रूप से लंबी अवधि की किस्मों में ।
  • जून से सितम्बर के मौसम में इनका असर हल्का होता है लेकिन बाद में अक्तूबर से जनवरी और फरवरी में यह बहुत बढ़ जाता है।
  • कैटरपीलर तने में घुस जाता है और बढ़ती शूट को खाने लगता है।
  • इसके परिणामस्वरूप बीच की शूट सूख जाती है और डेड हार्ट का लक्षण दिखाई देता है।
  • बीजांकुर विभिन्न स्तरों पर प्रभावित हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की चावल फसल के कीड़े

उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के चावल की फसल पर पांच प्रमुख कीड़ों द्वारा हमला किया जाता है। ये हैं-

1. चावल स्टेम बोरर

2. चावल गॉल मिज

3. चावल स्वार्मिगं कैटरपीलर

4.चावल लीफ फ़ोल्डर

5. चावल घुंडी बग/इयरहेड बग

22
Aug

पोटाशियम (K)

पोटाशियम (K)

पौधे की जड़ों द्वारा मिट्टी के घोल को पोटेशियम आयन (K +) द्वारा सक्रिय रुप से लिया जाता है। शुष्क पदार्थ के आधार पर वनस्पति ऊतकों में K +की सांद्रता 1 से 4% की श्रेणी में होती है।

पोटेशियम के कार्य

1. प्रकाश संश्लेषण, क्लोरोफिल के विकास के लिए आवश्यक है।

2. यह पौधों की ताक़त में सुधार करता है और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों का सामना करने में उन्हें सक्षम बनाता है।

3. अनाज फसलों में लॉजिंग को कम कर देता है।

4. यह स्टौमैटा के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करता है।

5. यह पौधों के भीतर आयनों के आने-जाने को नियंत्रित करता है और इसलिए इसे पौधे का ट्रैफिक पुलिसकर्मी कहा जाता है।

6. एंजाइमों का सक्रियकरण, एंजाइमों का संश्लेषण, पेप्टाइड बांडों का संश्लेषण।

7. पौधों में H2O के असंतुलन को नियंत्रित करता है।

कमी के लक्षण

1. पौधों की वृद्धि कम हो जात

22
Aug

कमी और विषाक्तता के लक्षण

कमी और विषाक्तता के लक्षण

1.पी पौधों में एक स्थान से दूसरे स्थान पर चलता रहता है और जब इसकी कमी हो जाती है तो यह पुराने ऊतकों से स्थानांतरित होकर सक्रिय मेरिस्मैटिक क्षेत्रों में चला जाता है।

2. यह उपापचय को कम करता है जिसके परिणामस्वरूप पौधों की कुल एन की आवश्यकता में कमी हो जाती है।

3. समयपूर्व पत्तियों का गिरना।

4. पत्ती के डंठल और फलों में परिगलित क्षेत्र विकसित करता है।

5. पत्तियां में एक अलग सा नीला हरा रंग दिखाई देता है।

फास्फोरस की विषाक्तता

1. जड़ों में बहुत ज्यादा विकास अर्थात पार्श्व और रेशेदार जड़।

2. पत्तियों के हरे रंग के साथ यह सामान्य वृद्धि विकसित करता है।

3. यह कुछ मामलों में अल्प मात्रा में आवश्यक तत्वों यानी जिंक और आयरन की कमी कर सकता है।

22
Aug

फोस्फोरस (P)

फोस्फोरस (P)

1. फॉसफोरस अधिकांश पौधों में 0.1 और 0.4% के बीच सांद्रता में होता है।

2. पौधे या तो H2 PO2- या एच + PO42- को अवशोषित करते हैं । आर्थो PO4 H2 के आयन का अवशोषण कम पीएच मान पर अत्यधिक होता है जबकि HPO4- का अवशोषण मिट्टी के अधिक पीएच मान पर अधिक होता है, पौधे में HPO4- का अवशोषण H2 PO4- की तुलना में धीमा होता है।

पी के कार्य

  • ऊर्जा भंडारण और उसके हस्तांतरण में इसकी एक बड़ी भूमिका है।
  • यह न्यूक्लिक एसिड, फाइटिन और फोसफोलिपिड्स का एक घटक है।
  • यह कोशिका विभाजन और विकास के लिए आवश्यक है।
  • पी यौगिक पौधों के भीतर ऊर्जा मुद्रा के रूप में कार्य करते हैं। सबसे आम पी ऊर्जा मुद्रा वह है जो कि एडीबी और एटीपी में पाई जाती है। एटीपी से ऊर्जा से भरे हुए PO4 अणुओं का पौधों में उर्जा के लिए आवश्यक पदार्थों में स्थानातंरण “फोसफोराइलेशन” कहलाता है। -
  • यह जड़ के जल्दी विकास और वृद्धि को ब
22
Aug

N की कमी और विषाक्तता

N की कमी और विषाक्तता

1. पौधे देखने में छोटे और पीले नजर आते हैं।

2. क्लोरोप्लास्ट से प्रोटीन N की कमी पुराने पत्तों में पीलापन या क्लोरोसिस पैदा करती है। पहले यह निचली पत्तियों पर दिखाई देता है और ऊपरी पत्ते हरे बने रहते हैं । एन की बहुत अधिक कमी हो जाने पर नीचली पत्तियों का रंग भूरा हो जाता है और वे मर जाती है।

3. परिगलन पत्ती के सिरे से शुरू होकर मध्यशिरा की ओर जब तक बढ़ता है जब तक पत्ती मर नहीं जाती ।

नाइट्रोजन की अधिकता (नाइट्रोजन की विषाक्तता)

1. इससे पौधे की अधिक वृद्धि होती है, गहरे हरे रंग के पत्तों, लॉजिंग में वृद्धि होती है, परिपक्वता की अवधि बढ़ जाती है और कीट और रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। चावल में लॉजिंग होना बहुत आम है।

22
Aug

नाइट्रोजन (N)

नाइट्रोजन (N)

1. शीतोष्ण क्षेत्र में N का सस्ता स्रोत फसल के अवशेष हैं ,मिट्टी में N

2.6 टन / हेक्टेयर होता है। 2. अम्लीय उष्णकटिबंधीय मिट्टी में, N का स्तर 0.03-0.1% है। वर्षा भी N का एक स्रोत है जो 4.6 किग्रा N / हेक्टेयर में प्राप्त होता है।

3. प्रकाश के दौरान कार्बनिक पदार्थ डाले जाने से यह NO3 में परिवर्तित हो जाती है और उर्वरक इसके अन्य प्रमुख स्रोत हैं। N के कार्य

  • N प्रोटीनों का एक आवश्यक घटक है और पौधों की चयापचय प्रणाली में क्रियात्म महत्व के अनेक यौगिकों में मौजूद होता है।
  • N क्लोरोफिल का एक अभिन्न हिस्सा है, जो प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक ऊर्जा को अवशोषित करने वाला प्राथमिक पदार्थ है।
  • N पौधों के विकास में भी तीव्र वृद्धि करता है और पौधों को गहरा हरा रंग प्रदान करता है।

4. यह पौधों में जल्दी हरियाली पैदा करता है और पौधों की परिपक्वता की अवधि में देरी कर

22
Aug

एकीकृत पोषक प्रबंधन

एकीकृत पोषक प्रबंधन

अधिक उपज सुनिश्चित करने के लिए आईएनएम को अपनाना आवश्यक है। जहां तक संभव हो मिट्टी जांच की सिफारिश के अनुसार उर्वरक डालें। यदि इसका पालन नहीं किया जाता है तो सभी के लिए एक जैसी सिफारिश का पालन करें जैसा कि उत्तर प्रदेश राज्य में पालन किया जाता है।

सभी P2O5 और K2O को जुताई के समय आधार रूप में क्वार्टरिंग विधि के रूप में केवल कोर्स टेक्सचर्ड (कम सीईसी) में प्रयोग में लाया जाना चाहिए, K को दो चरणों में प्रयोग किया जाना चाहिए- 50% आधारभूत स्तर पर और 50% बीजों से अंकुर निकलने/पुष्पगुच्छ निकलने की शुरूआत होने के चरण पर लगाया जाए।

N को तीन चरणों की खुराकों में लगाया जाना चाहिए- 50% आधारभूत चरण पर + 25% बीजों से अधिकतम अंकुर निकलने के चरण पर + 25% चावल में पुष्पगुच्छ निकलने के चरण पर।

22
Aug

जल प्रबंधन

जल प्रबंधन

प्रभावी जल प्रबंधन के लिए खेत समतल होना चाहिए। प्रतिरोपण करने के समय से लेकर बीजांकुरण के समय (10 DAT) तक 1-2 सेमी तक का पानी का स्तर बना कर रखा जाना चाहिए और बीजों से अंकुर निकलने में सहयोग देने के लिए इसे बढ़ा कर 2-3 सेमी पर बना कर रखा जाना चाहिए। बीजों से अंकुर निकलने के अधिकतम चरण के बाद सैचुरेशन बनाए रखने के लिए पानी को निकाल देना चाहिए ताकि अनुपजाऊ बीजों से अंकुर निकलने से रोका जा सके और पौधों की एक समान वृद्धि और विकास हो। हेडिंग और पुष्पन के चरणों पर पानी का स्तर 10 सेमी की गहराई तक और मिल्किंग चरण पूरा होने तक पानी का स्तर 5 सेमी तक बना कर रखा जाना चाहिए। अंततः कटाई से 15 दिन पहले खेत से पानी को निकाल देना चाहिए।

नीची भूमि वाले चावल में जल प्रबंधन:

अनाज वाली फसलों में प्रति मिमि उपयोग किए गए पानी के लिए चावल की उत्पादकता बहुत कम है जो कि एक हेक्टेयर म

22
Aug

गुणवत्ता बीजों के लक्षण

गुणवत्ता बीजों के लक्षण

क) आनुवंशिक शुद्धता: बीज आनुवंशिक रूप से शुद्ध या अपने प्रकार के अनुसार या प्रजनन के विभिन्न चरणों ( बीज-पौधा-बीज) पर अपने मूल बीज से मेल खाने वाला होना चाहिए। ऐसा होना मौलिकता के साथ भावी पीढ़ी की विभिन्नता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

ख) शारीरिक शुद्धता: यह बीज की सफाई से संबंधित है। बीज को शुद्ध रूप से सजातीय और अंतर्निहित सामग्री, दूसरी फसलों के बीज और खरपतवार के बीजों से मुक्त होना चाहिए। यह बीज के स्वास्थ्य, उसकी आनुवंशिक और शारीरिक स्थिति को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

ग) बीज की क्रियात्मक स्थिति: बीज का अंकुरण और शक्ति, बीज का उच्च स्तर बना कर रखा जाना बीज का क्रियात्मक (फिजियोलॉजिकल) स्थिति कही जाती है। यह बीज के रोपण गुण को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

घ) बीज के स्वास्थ्य की स्थिति: स्वस्थ बीज कीट और रोगजनक हमले से मुक्त हो

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