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22
Aug

बीज गुणवत्ता

बीज गुणवत्ता

एक दाने को बीज बनने के लिए उसमें सजीवता होनी चाहिए। बीज अच्छी गुणवत्ता के उत्पादन का हो और उसमें बीज गुणवत्ता के गुण होने चाहिए (जैसा नीचे दिया गया है)। केवल अच्छी गुणवत्ता वाले बीज ही अच्छी तरह से प्रजनन कर सकते हैं और मूल गुणों में कोई परिवर्तन किए बिना भावी पीढ़ी को संरक्षित रख सकते हैं। बीज गुणवत्ता ऐसे बीजों की स्वीकृति है जिसमें शारीरिक और आनुवंशिक शुद्धता हो और आगे प्रवर्धन के लिए क्रियात्मक और अच्छी स्वास्थ्य की स्थिति को बना कर रखा गया हो ।

बीज गुणवत्ता का महत्व:

एक समान अंकुरण जिससे दुबारा रोपाई करने और न उगे हुए बीजों की खाली जगह भरने से बचाव हो जाता है।

  • बीजांकुरों की जोरदार वृद्धि, जो कि खरपतवार, बीमारियों और नुकसान को कम कर देती है।
  • वृद्धि के एक समान चरण, परिपक्वता और उत्पाद।  
  • भंडारण स्थितियों में अच्छी गुणवत्ता ब
22
Aug

प्लास्टिक ड्रम सीडर

प्लास्टिक ड्रम सीडर

  • इस विधि में अंकुरित बीजों को गीली जुताई किए हुए चावल के खेत में सीधे ही बोया जा सकता है।
  • इसमें कम समय लगता है क्योंकि इसमें नर्सरी का समय और खर्च, रोपाई और श्रम कम हो जाता है।
  • चावल के खेत की गीली जुताई के एक दिन बाद, जब पानी स्थिर हो तो बुवाई की जानी चाहिए।
22
Aug

प्रतिरोपण

प्रतिरोपण

मूलभूत उर्वरकों को डालने के बाद खेत की गीली जुताई करें और खेतों को समतल करें। बीजांकुरों को इच्छित दूरी और गहराई पर खुरपी से खोद कर लगाया जाता है।

पौधों का घनत्व और ज्यामिति: यह मिट्टी की उर्वरता, जीनोटाइप और मिट्टी के प्रकार के अनुसार बदलता रहता है। किसी भी प्रकार के जीनोटाइप की पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए पौधों की इष्टतम संख्या को अपनाया जाए।

रोपण की गहराई

  • क्ले मिट्टी: 5 से 6 सेमी
  • उथली मिट्टी: 2.5 से3.0 सेमी

बीजांकुरों की संख्या/ढेर

गीली नर्सरी: 1 से 2 बीजांकुर / ढेर

बड़े हो चुके बीजांकुरों का प्रबंधन

  • 25% मूलभूत नाइट्रोजन बढ़ाएँ।
  • बीच की दूरी कम करें।
  • 80 ढेर/मीटर2
  • बीजांकुरों की संख्या बढ़ाना / ढेर

प्रतिरोपण सदमा : यह तब होता है जब बीजांकुरों को नर्सरी से बाहर निकाल कर नए वातावरण में में लगाया जाता है। इस सदमे से उबर

22
Aug

प्रत्यक्ष बुवाई

प्रत्यक्ष बुवाई

यह विधि झारखंड क्षेत्रों की गैर पारंपरिक विधि है। चावल की सीधी बुवाई ब्राडकास्टिंग और ड्रिलिंग द्वारा की जाती है।

ब्राडकास्टिंग: इस विधि में एक हेक्टेयर भूमि के लिए 90-100 किलो बीज की आवश्यकता होती है।

ड्रिलिंग: इस विधि में हल में लगे सीड ड्रील के खांचे में एक हेक्टेयर भूमि के लिए 80 किलोग्राम बीजों की आवश्यकता होती है

बुवाई के 24 घंटे पहले बीजों को फफूंदीनाशक में डाला जाता है जैसे बाविस्टि या थिरम ( ट्राइसाइक्लोजोल) @ 2 ग्रा/1 किग्रा बीज के लिए और उसके बाद बीजों को प्रति हेक्टेयर बीजों के लिए 600 ग्राम एजोस्पीरीलियम में डाला जाता है। यह बीजों और मिट्टी से होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए आवश्यक है।

22
Aug

बीजों की बुवाई और प्रतिरोपण

बीजों की बुवाई और प्रतिरोपण

बीज बुवाई के तरीके:

I. प्रत्यक्ष बुवाई (ब्राडकास्टिंग और ड्रिलिंग)

II. प्रतिरोपण

III. प्लास्टिक ड्रम सिडर

22
Aug

गीली नर्सरी

गीली नर्सरी

बीज दर: 40 किग्रा / हेक्टेयर मोटी किस्म के लिए , 35 किग्रा/ हेक्टेयर मध्यम उत्तम किस्म के लिए, 30 किग्रा उत्तम किस्म के लिए और 15-20 किलो /हेक्टेयर संकर किस्मों के लिए।

बीजोपचार: बीजों का सूखा उपचार: बीजों को बोने से 24 घंटे पहले फफूंदीनाशक में डाला जाता है जैसे बाविस्टिन या थिरम @ 2ग्रा/किग्रा बीजों के लिए और प्रति हेक्टेयर बोए जाने वाले बीजों को 600 ग्रा एजोस्पीरिलियम में भी डाला जाता है ।

बीजों का गीला उपचार: 1 किलोग्राम बीजों को कारबेंडाजिम या पायरोक्विलान या ट्राइसाइक्लोजोल के घोल में 1 लीटर पानी में /2ग्राम में डालें। बीजों को 2 घंटे के लिए घोल में भिगोएं। घोल का बाहर निकाल दें, बीजों को अंकुरित होने पर उन्हें नर्सरी क्षेत्र में लगा दें। यह बीजांकुरों को बीजांकुर के दौरान होने वाले रोगों जैसे ब्लास्ट से 40 दिनों के लिए बचाव करता है।

नर्सरी क्षेत्र:

22
Aug

सूखी नर्सरी

सूखी नर्सरी

बीज दर: 40 किग्रा / हेक्टेयर मोटी किस्म के लिए, 35 किग्रा/हेक्टेयर मध्यम उत्तम किस्म के लिए, 30 किग्रा उत्तम किस्म के लिए और 15-20 किग्रा/ हेक्टेयर संकर किस्मों के लिए।

बीज उपचार: बीजों को बोने से 24 घंटे पहले फफूंदीनाशक में डाला जाता है, जैसे बाविस्टिन या थिरम या बीम(ट्राइसाइक्लोजोल) @ 2ग्रा/किग्रा बीज की दर से और प्रति हेक्टेयर बोए जाने वाले बीजों को 600 ग्रा एजोस्पीरिलियम में भी डाला जाता है।

नर्सरी भूमि की तैयारी: जमीन से थोड़ा ऊपर उठा हुआ 120 से.मी. चौड़ा , 15 सेमी ऊंचा और सुविधाजनक लंबाई वाला स्थान तैयार किया जाना चाहिए जिसके चारों तरफ आधा मीटर चौड़ा चैनल हो ताकि पानी को बाहर निकालने में सुविधा हो।

बुवाई: दवा से उपचारित किए गए बीजों को समान रूप से नर्सरी बेड में बोया जाए।

जल प्रबंधन: मिट्टी की प्रकृति के आधार पर सूखी नर्सरी की 2 या 3 दिन में एक बार सिंचाई

नर्सरी प्रबंधन

नर्सरी प्रबंधन का प्रमुख महत्व चावल के पौधों की एक समान जनसंख्या को सुनिश्चित करना है जो कि अधिक तेजी से पौधों को उगा सके और उपज अधिक हो।

चावल की नर्सरी के प्रकार

मुख्य रूप से चावल की दो विभिन्न प्रकार की नर्सरी होती हैं-

I. सूखी नर्सरी

II गीली नर्सरी

22
Aug

भूमि प्रणाली पैटर्न

भूमि प्रणाली पैटर्न

  • इस प्रणाली में जुताई खेत के बीच में से शुरू करने की आवश्यकता होती है और खेत के किनारों की ओर बढ़ती जाती है।
  • खेत का केंद्र बिंदु का पता लगाने के लिए इसमें कुछ माप की आवश्यकता होती है और यदि इसे सही ढंग से किया जाए तो इससे खेत समतल हो जाता है और किनारों पर जल निकासी के लिए चैनलों बन जाते हैं।
  • इस प्रणाली को सभी प्रकार के हलों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • बहुत बड़े खेतों में कई भूमियों को जोता जा सकता है।

ऊपर और नीचे या हेडलैंड पैटर्न

  • खेत को इस तरह से जोता जाता है कि जुताई के चक्कर एक दूसरे के समानांतर होते हैं।
  • ये चक्कर खेत की एक सीमा पर शुरू होते हैं और उसकी विपरीत सीमा पर जाकर समाप्त होते हैं और सिरो पर मुड़ते हैं।
  • यह प्रणाली केवल नोकदार उपकरणों, रोटोवेटरों, हैरो और रिवर्सिबल हलों के लिए ही इस्तेमाल की जा सकती है।
  • यह आमतौर पर सबसे अधिक खेत कुशल प्रणाली है और यदि उपकरण को सही ढंग से स्थापित करके चलाया जाए तो इसके द्वारा खेत में खांचे नहीं छोड़े जाने चाहिए।
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