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Diseases

Diseases
26
सप्टेंबर

Disease Management in Rice Cultivation (in Odiya)

 

16
मे

అగ్గి తెగులు నివారణ చర్యలు

 

File Courtesy: 
Rice Section, Acharya N G Ranga Agricultural University, Rajendranagar
16
मे

అగ్గి తెగులు ఉదృతిని పెంచే కారణాలు, తెగులు వ్యాప్తి

 

File Courtesy: 
Rice Section, Acharya N G Ranga Agricultural University, Rajendranagar
16
मे

అగ్గి తెగులు లక్షణాలు




File Courtesy: 
Rice Section, Acharya N G Ranga Agricultural University, Rajendranagar
4
मे

ఆకు ఎండు తెగులు

File Courtesy: 
Directorate of Rice Research, Hyderabad
4
मे

అగ్గి తెగులు

File Courtesy: 
Directorate of Rice Research, Hyderabad
15
ऑक्टोबर

दानों का मलिनीकरण

दानों का मलिनीकरण

1. ऊंची भूमि तथा तराई दोनों में चावल की कुछ किस्मों में उसका रंग फीका पडना एक प्रमुख समस्या बनती जा रही है। यह अंकुरण कम कर देता है, कोपलों के क्षय का कारण बनता है, भोसीदार दाने उत्पन्न करता है और अनाज की खपत की गुणवत्ता कम करता है।

2. विकार अलग - अलग दानों तक सीमित रह सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में रेशिस सहित लगभग पूरा पैनिकल फीका पड़ जाता है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
Mr.Chaitanya, DRR
15
ऑक्टोबर

बंट

बंट

1.इस रोग में, एक इअर में कुछ दाने प्रभावित होते हैं, संक्रमण या तो आंशिक रूप से या पूरी तरह से होता है। लक्षण पहले सूक्ष्म काली धारियों के रूप में दिखाई देते हैं जो पकने पर ग्लुम्स में से बाहर आते हैं।

2. यदि संक्रमित दानों को उंगलियों के बीच कुचला जाए, तो बीजाणुओं का एक काले रंग का चूरेदार पिंड होता है। बीमारी का कारण टिल्लेशिआ बार्क्लेयाना जीव है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
15
ऑक्टोबर

पत्ती पर संकरे भूरे धब्बे

पत्ती पर संकरे भूरे धब्बे

1.यह भी एक छोटी सी बीमारी है और इसके लक्षण हैं पत्ती की धार पर भूरे रंग से लेकर गहरे रंग के रैखिक धब्बे होना। धब्बे पत्ती के आवरण, ग्लुम और तने के कुछ हिस्सों में हो सकते हैं।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
http://www.insectimages.org/browse/detail.cfm?imgnum=5390516
15
ऑक्टोबर

पत्ती पर मैल (लीफ़ स्मट)

पत्ती पर मैल (लीफ़ स्मट)

1.यह एक छोटी सी बीमारी है और इसकी विशेषता है पत्तियों पर सूक्ष्म, सांवले, हल्के, कोणीय पैच उभरना, जो सोरि का प्रतिनिधित्व करते हैं। संवेदनशील किस्मों में, अधिक आयु की पत्तियों की पूरी सतह को फंगस लगभग पूरी तरह से घेर लेता है।

2. यह रोग एंटिलोमा ऑरिज़ी के कारण होता है, जो टेलिओस्पोर्स उत्पन्न करता है और ये कोणीय से लेकर गोलाकार तक, चिकनी दीवारों के, रंग में हल्के भूरे होते हैं।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
http://www.ipmimages.org/browse/detail.cfm?imgnum=5390514
15
ऑक्टोबर

स्टैक बर्न

स्टैक बर्न

1. इस रोग के लक्षण कोपलों, वयस्क पौधों की पत्तियों और दानों गोल से लेकर अंडाकार गहरे भूरे सूक्ष्म धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं, जो अक्सर बड़े धब्बे के रूप में संगठित हो जाते हैं। गंभीर मामलों में, कोपलें शिथिल हो सकती हैं और पत्तियों पर सूक्ष्म काले बिन्दु उभरते हैं, जो गोलाकार फंगस के पिंड को दर्शाते हैं। दानों पर हल्के भूरे से लेकर सफेद घाव होते हैं जो काले भूरे रंग के मार्जिन से घिरे होते हैं और गुठली का रंग फीका पड़ जाता है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
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Dr. Krishnaveni, DRR
15
ऑक्टोबर

कृत्रिम कालिख (फॉल्स स्मट)

कृत्रिम कालिख (फॉल्स स्मट)

1.इस रोग का होना अच्छी फसल का संकेत देता है क्योंकि कृत्रिम कालिख के विकास के अनुकूल मौसम फसल के अच्छे उत्पादन के पक्ष में माना जाता है। रोग कानों पर उभरता है जहां अलग-अलग अंडाशय गोल से लेकर अंडाकार स्क्लेरोटिअल रूपों के बड़े मख़मली हरे पिंडों में तब्दील हो जाते हैं। चूंकि यह मैल के रूप में दिखाई देता है इसलिए इस रोग को कृत्रिम कालिख नाम दिया गया है। स्पिकेलेट में केवल कुछ दाने की संक्रमित होते हैं।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
Dr. Krishnaveni, DRR
15
ऑक्टोबर

आवरण की सडन

आवरण की सडन

पहले इस रोग को मामूली बीमारी के रूप में माना जाता था, लेकिन अब यह पूर्वोत्तर क्षेत्र के चावल उगाने के कई क्षेत्रों में एक प्रमुख रूप में प्रकट होता है। पैनिकल्स को ढकने वाले पत्ते के आवरण पर भूरे रंग के अनियमित मार्जिन के रूप में धब्बे विकसित होते हैं। युवा पैनिकल पत्ते के आवरण में ही रहते हैं या केवल आंशिक रूप से उभरते हैं। दाने बगैर भरे हुए या बदरंग होते हैं। गंभीर मामलों में पैनिकल सड़ सकते हैं।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
Dr. Krishnaveni, DRR
15
ऑक्टोबर

उद्बत्ता रोग

उद्बत्ता रोग

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ICAR NEH, Umiam
Image Courtesy: 
CRRI
15
ऑक्टोबर

आवरण कुम्हलाना

यह रोग वर्तमान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में बहुत गंभीर हो गया है। यह रोग ज्यादातर पत्ती के आवरण पर धब्बे या घाव उत्पन्न करता है, जो अनुकूल परिस्थितियों के तहत पत्तियों की धार तक होते हैं। घाव लम्बे होते हैं, और भूरे सफेद केंद्र तथा भूरे लाल या बैंगनी लाल मार्जिन के साथ आयताकार होते हैं। उन्नत चरणों में घावों में स्क्लेरोशिआ बनते हैं, जो आसानी से अलग हो जाते हैं। गंभीर मामलों में, पौधे के सभी पत्ते कुम्हला जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप पौधे की मृत्यु हो जाती है। यह एक मिट्टी जनित रोग है।

File Courtesy: 
ICAR NEH, Umiam
11
ऑक्टोबर

ग्रेन डिस्कलरेशन

लक्षण

1. यह पुष्पगुच्छी के प्रारंभिक चरण के समय पर होता है। 

2.  इस समय पर अनाज का रंग सामान्यत: सफेद से भूरे में बदल जाता है।

प्रबंधन 

1. 6 घंटे के लिए बाविस्टिन (0.2%) या विटावॅक्स (0.2%) के साथ बीज उपचार। 

2. बाविस्टिन 0.1% का छिड़काव करें।

 

 

11
ऑक्टोबर

खैरा डिज़ीज़

लक्षण

1. प्राय: नर्सरी में, मिडरिब के दोनों पक्षों पर क्लोरोटिक/ पत्ते के निचले हिस्से पर पीले धब्बे, प्रतिबंधित जड़ वृद्धि एवं अधिकतर मुख्य जड़ें भूरे रंग की हो जाती हैं।

प्रबंधन 

1. भूमि की तैयारी के समय स्थानांतरण या बीजारोपण से पूर्व 25 कि.ग्रा. झ़ेडएनएसओ4/एच.ए. का उपयोग करें। 

2. यदि फसल संक्रमित है, तो 600-700 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर में 5 कि.ग्रा. झ़ेडएनएसओ4 +25  कि.ग्रा. चूने का उपयोग करें। 

 

 

11
ऑक्टोबर

फॉल्स स्मट

कारणात्मक जीव :-  युस्टिलॅगो नोइड़िया वायरस

लक्षण 

1.  फॉल्स स्मट एक पतली चांदी के रंग की त्वचा की परत के अंतर्गत, हल्के हरे रंग के बीजाणु, गोलाकार रूप में शुरू होते हैं। नारंगी बीजाणुओं को उजागर करते हुए गोलाकार फूटते हैं।

2.  समयानुसार बीजाणु गहरे हरे से काले हो जाते हैं। अनाज की फसल के दौरान बीजाणुओं द्वारा अन्य अनाज में सम्मिश्रित हो कर स्मट्स नुकसान पहुँचाते हैं, साथ में पिस कर गुणवत्ता कठिनाइयाँ बढ़ाते हैं एवं क्वथन एवं खाना पकाने के समय विवर्णता का कारण बनते हैं।

प्रबंधन

11
ऑक्टोबर

शीथ ब्लाइट

कारणात्मक जीव : थॅनाटेफ़ोरस क्यूकुमेरिस                            

लक्षण

1. आरंभिक संक्रमण तने पर वॉटर लाइम के पास प्रकट होता है एवं अंडाकार घाव की तरह दिखता है जो अधिकतर सूख कर झुलस जाता है।

2. जड़ों के अतिरिक्त, पौधे के सभी भाग संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं। कोष गोलाकार क्षेत्रों में विकसित होते हैं एवं जिन्हें पक्षी घोंसले कहा जाता है उनका कारण बनते हैं।

11
ऑक्टोबर

ब्राउन स्पॉट

कारणात्मक जीव : हेल्मिन्थोस्पोरियम ओराइज़े                      

लक्षण

1. पत्तियों पर कई गहरे भूरे अण्डाकार धब्बे, अंकुर के कोलियोप्टाइल्स को संक्रमित करते हैं एवं पाला का कारण बनते हैं; संक्रमित गूदा मुरझा जाता है।

प्रबंधन

1. बीजारोपण से पूर्व कारबॅन्डाज़िम(2.5ग्रा./कि.ग्रा) के साथ बीज उपचार। 

2. मैन्कोज़ॅब (0.25%) या ऐड़िनोफॉस 0.1% के प्रकार के फफूंदनाशियों से उपचार।

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