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Crop Protection

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सप्टेंबर

क्राउन शीथ रॉट के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां

क्राउन शीथ रॉट के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां :

1. गैर-घास वाली फ़सलों के साथ फ़सल चक्रण.

 2. चावल की बुआई से पहले गर्मियों में खेत में डिस्क के इस्तेमाल और सफाई बनाए रखने से पौधे के अवशेषों की समाप्ति होती है और इस प्रकार इस रोग में नियंत्रण में सहायता मिलती है।

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http://165.91.154.132/Texlab/Grains/Rice/ricebss.html
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क्राउन शीथ रॉट के पूर्व प्रवृत्त कारक

क्राउन शीथ रॉट रोग को बढ़ावा देने वाला कारक है:

1. अत्यधिक नाइट्रोजन का इस्तेमाल।

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http://www.lsuagcenter.com/NR/rdonlyr es/B2731525-EFA1-4336-8640-5FF16D 8470B4/58936/RiceDiseaseIDphotolink.pdf
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क्राउन शीथ रॉट का सामान्य रोगाणु

• क्राउन शीथ रॉट का सामान्य रोगाणु "Gaeumannomyces graminis" है।

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क्राउन शीथ रॉट के लक्षण

क्राउन शीथ रॉट के लक्षण:

1. जल स्तर के समीप काले से भूरे रंग के बिखरे हुए जख्म देखे जाते हैं, पर्थेसिया नेक्स ऊपरी सतह से बाहर निकलते हैं, जिनमें पत्रावरण तथा कल्म के बीच मोटा कवक मैट निर्मित होता है।

2. गंभीर स्थिति में यह पौधे को लुंज-पुंज बना देता है।

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क्राउन शीथ रॉट का वितरण तथा मौजूदगी

क्राउन शीथ रॉट का वितरण:

• पूरे लुइसियाना में यह रोग वहां काफी गंभीर रूप में देखा गया जहां नाइट्रोजन उर्वरकों की काफी अधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा था।

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क्राउन शीथ रॉट

1. इसे ब्लैक शीथ रॉट के नाम से भी जाना जाता है।

2. इस रोग का सामान्य रोगाणु "Gaeumannomyces graminis" है।

3. ब्लैक शीथ रॉट या क्राउन रॉट को टेक्सास में कई दशकों तक मामूली रोग माना जाता रहा, पर गंभीर संक्रमण देखे जाने के बाद इसे महत्वपूर्ण मान लिया गया।

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ब्लैक कर्नल का सामान्य रोगाणु

• ब्लैक कर्नल रोग का सामान्य रोग Curvularia Boedijn है।

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ब्लैक कर्नल के लक्षण

ब्लैक कर्नल के लक्षण :

1. ग्लूम का रंग फीका पड़ जाता है।

2. गंभीर संक्रमण में चावल के दाने काले पड़ जाते हैं।

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ब्लैक कर्नल का आर्थिक महत्व

ब्लैक कर्नल का आर्थिक महत्व :

1. राव तथा सलाम (1954) ने पाया कि भारत में चावल के 60% बदरंग दाने कर्वुलैरिया द्वारा संक्रमित होते हैं।

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http://www.knowledgebank.irri.org/smta/in dex.php?option=com_content &view=arti cle&id=271&catid=35&Itemid=84
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ब्लैक कर्नल का इतिहास

1. मार्टिन (1939) तथा मार्टिन एवं अल्टस्टैट (1940) ने पाया कि पॉलिश किए जाने के बाद संक्रमित चावल के दाने काले बीज का निर्माण करते हैं।.

2. गंभीर रूप से संक्रमण की स्थिति में वे सीड्लिंग ब्लाइट भी उत्पन्न करते हैं या बिचड़े को कमजोर कर डालते हैं।

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ब्लैक कर्नल का परिचय

• कर्वुलैरिया की कई प्रजातियां चावल के दानों का रंग फीका कर डालती हैं तथा उनमें से कुछ दानों को जमा देती हैं साथ ही कुछ परिस्थितियों में पत्तियों पर धब्बों का निर्माण करती हैं।

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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां

ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के नियंत्रण की पारंपरिक पद्धतियां :

1. फ़सक की कटाई के बाद ठूठों को जलाने से इस रोग के नियंत्रण में काफी मदद मिलती है। 

2. संक्रमित फ़सल के सभी अवशेषों को पूर्ण रूप से हटाने से काफी नियंत्रण होता है। 

3. मोल्डबोर्ड जुताई, फ़सल चक्रण से भी बचे हुए इनोकुलम के विकास को रोका जा सकता है। 

4. चावल की बुआई घने रूप से नहीं करना चाहिए क्योंकि उनसे रोग को बढ़ावा मिल सकता है। 

5. टिलरिंग के बाद पूरे खेत में उन्हें साप्ताहिक रूप से जांच करें और ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट का पता लगाएं। 

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http://www.ipm.ucdavis.edu/PMG/r682100311.html
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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के पूर्व प्रवृत्त कारक

ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के पूर्व प्रवृत्त कारक:

1. उच्च आद्रता

2. भारी वर्षा

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http://cecolusa.ucdavis.edu/files/54685.pdf
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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट का सामान्य रोगाणु

• ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट रोग उत्पन्न करने वाला सामान्य रोगाणु Rhizoctonia Oryzae-sative है।

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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के लक्षण

ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के लक्षण:

1. ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट के जख्म टिलरिंग अवस्था के दौरान जल स्तर के पास की निचले पत्रावरण पर उभरते हैं। 

2. जख्म वृत्ताकार से लेकर ग्रहपथाकार होते हैं, और उनके मध्य भाग धूसर-हरे से आरंभिक जख्म के चारों ओर बार-बार अतिरिक्त किनारे निर्मित होते हैं, जिससे एक संकेद्रित पट्टी की श्रृंखला बनती है। 

3. जख्म के केंद्र से नीचे की ओर एक हल्के रंग की नेक्रोटिक कोशिकाओं की पट्टी निकलती है। 

4. आगे के मौसम में कई बार ठीक जल स्तर के ऊपर द्वितीयक संक्रमण उत्पन्न होते हैं। 

 

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http://www.ipm.ucdavis.edu/PMG/r682100311.html
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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट का वितरण तथा इसकी मौजूदगी

• ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट रोग चीन, जापान, भारत, ईरान, थाइलैंड तथा कैलिफॉर्निया में पाया जाता है।

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ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट

1. ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट पौधों में जख्मों का निर्माण करता है, जो वृत्ताकार से लेकर ग्रहपथाकार और धूसर-हरे से लेकर पुआल के आकार के मध्य भाग वाला होता है और यह भूरे रंग के किनारे से घिरा होता है। 

2. ऐग्रेगेट शीथ स्पॉट कवक  Rhizoctonia Oryzae-sative द्वारा उत्पन्न होता है। 

3. यह कवक चावल की संक्रमित पत्रावरण पर ग्लैबोज स्क्लेरोटिया तथा संक्रमित उत्तक के भीतर बेलनाकार स्क्लेरोटिया का निर्माण करता है।  

4. लैंगिक अवस्था Cerabasidium oryzae है। यह अवस्था पत्रावरण के बाहर अस्पष्ट गेहुंए स्तर के रूप में उत्पन्न होती है। 

 

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http://cecolusa.ucdavis.edu/files/54685.pdf
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उद्बत्ता रोग का रासायनिक नियंत्रण

उद्बत्ता रोग का रासायनिक नियंत्रण:

1. 10 मिनट के लिए 54 डिग्री से. पर गर्म जल उपचार तथा Granosan MDB + Vitavax जैसे कवकनाशी इस रोग से बचाव में कारगार माने जाते हैं।

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http://www.new.dli.ernet.in/rawdat aupload/upload/insa/INSA_1/200 05b6d_432.pdf
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उद्बत्ता रोग के नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

 उद्बत्ता रोग के नियंत्रण की पारंपरिक विधियां :

• रोगमुक्त बीजों का इस्तेमाल करना। 

• 10 मिनट के लिए 54 डिग्री से. के लिए गर्म पानी से बीज का उपचार करना। 

• खेत में रोगग्रस्त पुष्प-गुच्छ का नाश कर उसे हटाना। 

 

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उद्बत्ता रोग के प्रबंधन विकल्प

1. उद्बत्ता रोग के प्रबंधन विकल्पों में शामिल हैं पारंपरिक पद्धतियां, रासायनिक नियंत्रण तथा प्रतिरोधी किस्मों की बुआई।

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ttp://www.new.dli.ernet.in/rawdata upload/upload/insa/INSA_1/200 05b6d_432.pdf
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