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Crop Protection

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सप्टेंबर

उद्बत्ता रोग के रोग चक्र

1. कवक आरंभ में आंतरिक रूप से बीज जनित होता है, संक्रमण पुष्प-गुच्छ के निकलने के समय उत्पन्न होता है।.

2. बिचड़े का संक्रमण इस रोग की प्रमुख संक्रमण विधि है।

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उद्बत्ता रोग का वैकल्पिक पोषक पौधा

• इसका कवक कई प्रकार के घास पौधों, जैसे Isachne elegans, Eragrostis teneefolia, Arthraxon ciliaris, Saccolepsis indica, Cynodon doctylon, Pennisetum sp तथा राइ ग्रास पर विकसित होता है।

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उद्बत्ता रोग के पूर्व-प्रवृत्त कारक

• नर्सरी में बुआई के पहले सप्ताह में मिट्टी का उच्च तापमान (28 डिग्री से.) तथा मिट्टी की प्रचुर नमी तथा आगे की अवस्था इनके विकास के लिए अनुकूल होती है।

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उद्बत्ता रोग का सामान्य रोगाणु

उद्बत्ता रोग ब्लैंसिया ऑरिजा सैटाइवा द्वारा उत्पन्न होता है।

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उदबत्ता रोग के लक्षण

 उदबत्ता रोग के लक्षण:                             

1. इसके लक्षण पुष्प-गुच्छ के उगने पर दिखाई पड़ते हैं, आवरण के अंदर मौजूद पुष्प-गुच्छ कवक के मायसीलियम द्वारा साथ गुंथ जाते हैं। 

2. वे एकल, छोटे बेलनाकार रॉड की तरह उभरते हैं, जो माइसीलियम से घिरे होते हैं। संक्रमित पौधों की वृद्धि रुक जाती है। 

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उदबत्ता रोग का आर्थिक महत्व

• यह एक मामूली रोग है।

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उद्बत्ता रोग का वितरण तथा मौजूदगी

भारत में  उदबत्ता रोग निम्न हिस्से में देखा जाता है। 

• मैसूर 

• मद्रास का तेलंगुपलयम 

• आंध्र प्रदेश का आराकू घाटी

• बॉम्बे का उत्तर कनारा जिला 

 

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http://www.new.dli.ernet.in/rawdataupload/upload/insa/INSA_1/20005b6d_432.pdf
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उद्बत्ता रोग का इतिहास

• ब्लैंसिया ऑरिजा सैटाइवा द्वारा उत्पन्न उद्बत्ता रोग पहले पहल सायडो (1914) द्वारा वर्णित किया गया था। भारत में शिवनंदप्पा तथा गोविंदू (1976) ने उदबत्ता रोग को महत्वपूर्ण माना। बैंगलूरु में इससे होने वाली क्षति 1.75 से लेकर 3.69% पायी गई।

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उद्बत्ता रोग

1. उद्बत्ता रोग चावल का एक छोटा रोग है।  

2. उद्बत्ता रोग का सामान्य रोगाणु है "Ephelis oryzae Syd. 

3. उद्बत्ता रोग का स्थानीय नाम " उदुबत्ती रोगा " है। 

4. देहाती नाम: अगरबत्ती, माथापुकड्डी रोगा, कारी कड्डी रोगा, चिप्सू होडे रोगेक 

5. यह रोग क्षेत्रविशेष में पैदा होता है तथा भारत के कुछ हिस्सों में इसका मामूली असर ही देखा गया है। 

 

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लीफ स्मट के नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

लीफ स्मट के नियंत्रण की पारंपरिक विधियां

• कटाई के बाद गहरी जुताई

• संक्रमित कचरों को जलाना

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लीफ स्मट का प्रबंधन विकल्प

• चूंकि यह आर्थिक रूप से अहम रोग नहीं होता है, इसलिए इसके लिए कोई खास नियंत्रण विधि नहीं है।

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लीफ स्मट का सामान्य रोगाणु

लीफ स्मट का सामान्य रोगाणु है Entyloma oryzae है।

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लीफ स्मट (Entyloma oryzae) के लक्षण

लीफ स्मट के लक्षण : 

1. पत्तियों पर छोटे-छोटे-काले आकार के धब्बे उत्पन्न होते हैं। 

2. उगे हुए धब्बे फूटते हैं और हवा में अपने स्पोर बिखेरते हैं। 

3. संक्रमण कभी-कभी भारी होता है, जिससे पत्तियों के अग्र भाग नष्ट हो जाते हैं। 

 

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लीफ स्मट का आर्थिक महत्व

• लीफ स्मट वृद्धि के मौसम में उगता है तथा थोड़ा-बहुत आर्थिक हानि उत्पन्न करता है।

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लीफ स्मट

1. लीफ स्मट कवक जनित छोटा रोग होता है, जिसमें पत्तियों पर छोटे काले धब्बे उत्पन्न होते हैं।

2. उगे धब्बे टूट कर हवा के जरिए बिखेरते हैं। इसके संक्रमण से पत्तियों के अगले सिरे नष्ट हो जाते हैं।

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प्रबंधन विकल्प – फॉल्स स्मट

फॉल्स स्मट के नियंत्रण की विधियां: 

1. ऐसी किस्मों की खेती करना जो इस रोग के विरुद्ध प्रतिरोधी तथा सहनशील हो। 

2. संक्रमित पौधों के पुआल तथा ठूंठ को नष्ट कर इस रोग को कम किया जा सकता है।  

3. कैप्टन, कैप्टाफोल, फेंटिन हाइड्रॉक्साइड तथा मैकोजेब द्वारा कोनाइडियल अंकुरण को रोका जा सकता है। 

4. कवकनाशी, प्रॉपिकोनाजोल, कॉल ऑक्सीक्लोराइड, मैंकोजेब तथा क्लोरोथालोनिल इस रोग को प्रभावी रूप से कम करता है। 

 

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पूर्व-प्रवृत्त कारक – फॉल्स स्मट

फॉल्स स्मट के लिए पूर्व-प्रवृत्त कारक:

1. यह रोग उष्णकठिबंधीय तथा गर्म पर्वतीय क्षेत्रों की अपेक्षा समशीतोष्ण कटिबंधीय ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों अधिक व्यापक तथा गंभीर रूप में देखा गया है।  

2. देश के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में इसे कई हाइब्रिड चावल उत्पादक क्षेत्रों में गंभीर रूप से पैदा होते देखा गया है। 

3. यह उच्चभूमि वाले चावल उत्पादक क्षेत्र में अधिक आसानी से पैदा होता है, जहां हेडिंग समय के समय गीले मौसम का संयोग हो जाता है। 

4. नमी की उच्च मात्रा रोग के विकास को बढ़ावा देता है। 

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फॉल्स स्मट के प्रति पोषक पौधों का प्रतिरोध

• बाला, कावेरी, साबरमती, प्रकाश तथा पंकज किस्मों को जब इस रोग से बुरी तरह से प्रभावित महसूरी भूखंड पर उगाया गया तब यह पाया गया कि इन किस्मों में संक्रमण नहीं हुआ।

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फॉल्स स्मट के सामान्य रोगाणु

फॉल्स स्मट रोग के सामान्य रोगाणु हैं:

• Ustilaginoidea virens (कूक) टाका (एनामॉर्फ),

• Claviceps oryzae-sativae हैशिओका (टेलोमॉर्फ)

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लक्षण- फॉल्स स्मट(Ustilaginoidea virens)

फॉल्स स्मट के लक्षण                    

1. फॉल्स स्मट के लक्षण पुष्पण के बाद देखे जाते हैं। 

2. रोगाणु  Ustilaginoidea virens अंडाशय में वृद्धि करते हैं और उसे बड़े, पीले और वैल्वेट हरे बॉलों में बदल डालते हैं, जो आगे चलकर काफी बड़े हो जाते हैं। 

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