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Crop Protection

Crop Protection
6
सप्टेंबर

राइस ब्लास्ट का आर्थिक महत्व

 राइस ब्लास्ट के कारण होने वाली आर्थिक क्षति: 

•इस रोग के कारण उपज में 75% या रोग के लिए अनुकूल परिस्थितियों में उससे भी अधिक का नुकसान होता है। 

 

File Courtesy: 
राइस ब्लास्ट रोग तथा इसका प्रबंधन ( डॉ. कृष्णवेणी)
6
सप्टेंबर

Micraspis crocea (Mulsant)

लैटिन नाम -  Micraspis crocea (Mulsant) 

समान्य नाम -  भृंग (Lady beetle)

होस्ट रेंज 

लीफ होपर, प्लांट होपर, लीफ-फीडिंग कीट और एफिड्स 

विवरण 

1. Micraspis crocea एक अंडाकार भृंग है। यह माथे पर अथवा प्रोनोटम पर एक जोड़ी काले धब्बे के साथ पीले रंग का होता है। 

2. पंख के खोल पर कोई निशान नहीं होता। यह कीट 4 से 5 मिमी लंबा होता है। 

जीव-विज्ञान 

File Courtesy: 
http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/54-scientific-name-micraspis-crocea-mulsant
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http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/54-scientific-name-micraspis-crocea-mulsant
6
सप्टेंबर

राइस ब्लास्ट का वितरण तथा मौजूदगी

 

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राइस ब्लास्ट रोग तथा इसका प्रबंधन ( डॉ. कृष्णवेणी)
6
सप्टेंबर

राइस ब्लास्ट का इतिहास

1. भारत में इस रोग पर तब ध्यान दिया गया जब भारत में तमिलनाडु के तंजावुर (तंजौर) के डेल्टा में 1919 में एक विनाशकारी महामारी फैली थी।  

2. यह रोग लगभग भारत के सभी चावल उत्पादक क्षेत्रों में देखा गया। हालांकि इस रोग की गंभीरता अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग देखी जाती है।  

File Courtesy: 
राइस ब्लास्ट रोग तथा इसका प्रबंधन ( डॉ. कृष्णवेणी)
6
सप्टेंबर

Menochilus sexmaculatus

लैटिन नाम -  Menochilus sexmaculatus (Fabricius) 

समान्य नाम -  भृंग (lady  beetle)

जीव-विज्ञान 

1.  भृंग धीरे-धीरे चलने वाले शिकार को वे पकड़ लेते हैं। जब मुश्किल आती है तो वे उड़ जाते हैं। वयस्क और लार्वा दोनों छोटे प्लांट होपर वयस्क, शिशुकीट और अण्डे का शिकार करते हैं।

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http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/53-scientific-name-menochilus-sexmaculatus-fabricius
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http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/53-scientific-name-menochilus-sexmaculatus-fabricius
6
सप्टेंबर

राइस ब्लास्ट ( Pyricularia grisea ) का परिचय

1. राइस ब्लास्ट चावल का सर्वाधिक गंभीर रोग है।

2. यह रोग विशेषकर आर्द्र तापमान वाले क्षेत्रों, ऊंची भूमि तथा पहाड़ी क्षेत्रों में काफी गंभीर होता है।

3. कई चावल उत्पादन वाले क्षेत्रों में महामारी के रूप में इस रोग के फैलने की सूचना मिली है।

4. इस रोग के कारण उपज में 75% या रोग के लिए अनुकूल परिस्थितियों में उससे भी अधिक का नुकसान होता है।

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राइस ब्लास्ट रोग तथा इसका प्रबंधन ( डॉ. कृष्णवेणी)
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राइस ब्लास्ट रोग तथा इसका प्रबंधन ( डॉ. कृष्णवेणी)
6
सप्टेंबर

लेडी बीटल/भृंग (Lady beetle)

समान्य नाम -  लेडी बीटल/भृंग (Lady beetle) 

लैटिन नाम -  Harmonia octomaculata (Fabricius)

लेडी बीटल (Lady beetle) का विवरण

1. Harmonia octomaculata काले धब्बों वाला भृंग है। यह लाल-भूरे रंग का होता है। 

2. प्रत्येक सामने वाले पंख या पंख के खोल पर पांच काले धब्बे होते हैं और प्रोनोटम पर क्वाड्रेट की एक से दो जोड़ी उप-अंडाकार काले धब्बे होते हैं। 

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http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/52-scientific-name-harmonia-octomaculata-fabricius
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http://www.knowledgebank.irri.org/ipm/index.php/predators/52-scientific-name-harmonia-octomaculata-fabricius
3
सप्टेंबर

Fumigation for control of rodents कृंतकों के नियंत्रण के लिए धूम्रीकरण (या धूमन)

1. कृंतकों के नियंत्रण स्वदेशी स्मोक जेनरेटर का भी फसल की वृद्धि के दौरान प्रभावशाली तरीके से खेत में या नालियों के मेड़ पर और खेत के फार्म के अन्दर बने रास्तों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. एल्युमिनियम फॉस्फाइड जैसे धूमक प्रभावी होता है और इसका प्रयोग बिलों में रहने वाले खेत के कृंतकों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। पंजाब के खेतों में Bandicota bengalensis के लिए इसके आकलन में पाया गया कि इसकी मारण क्षमता 66.6% है।

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DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
सप्टेंबर

Poison baiting for control of rodents कृंतकों के नियंतरण के लिए विष प्रलोभन

1. कृंतकनाशी दवा के एकल डोज का प्रयोग करने की स्थिति में पूर्व-प्रलोभन जरूरी होता है। 2. जिंक फॉस्फाइड एक पारंपरिक एकल डोज वाला कृंतक विष है। ब्रोमोडायलोन एकमात्र ऐसी कृंतकनाशी दवा है जो एंटीकॉग्युलेंट है। 3. प्रलोभन के लिए जिंक फॉस्फाइड को मूंगफली के तेल और कुचले हुए गेहूं या चावल के साथ भार के हिसाब से 2 g: 2g: 96 g की दर से मिलाना चाहिए। 4. ब्रोमोडायलोन एकल डोज वा एंटीकॉग्युलेंट है और इसे नारियल-चावल की सम्मिलित कृषि उत्पादन प्रणाली के तहत नारियल के पेड़ों की फुनगी पर रखा जा सकता है। 5. रोबन जैसा प्रयोग के लिए तैयार नुस्खा भी बाजार में 0.25% के सान्द्रण पर उपलब्ध है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
सप्टेंबर

cultural control of rodents कृंतकों का सांस्कृतिक नियंत्रण

कृंतकों का सांस्कृतिक नियंत्रण

1. खेत का आकार बड़ा रखें और मेड़ों को छोटा।

2. फसल में और मेड़ों पर खरपतवार को नियंत्रित रखें ताकि चूहों को अलग से कोई भोजन उपलब्ध न हो।

3. संभव हो तो एक साथ बड़े इलाके में धान का रोपन।

4. बांस की कमानी वाली चूहेदानी फसल में कल्ले फूटने की अवस्था में बहुत प्रभावी होता है।

5. खेत में चिड़यों के बैठने के लिए संरचना बनाकर उल्लू जैसे पक्षियों द्वारा कृंतकों का शिकार करवाया जा सकता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
सप्टेंबर

Rodent control in rice चावल में कृंतक-नियंत्रण

1. प्रभावी कृंतक प्रबंधन के लिए एकीकृत रूप से सामुदायिक तौर पर चूहेदानियों, विष-प्रलोभन, धूम्रीकरण (धूमन) और सांस्कृतिक नियंत्रण विधियों, जैसे- फसल चक्रण, मेड़ों की सफाई आदि का सहारा लिया जा सकता है।

File Courtesy: 
DRR ट्रेनिंग मैनुअल
3
सप्टेंबर

Rodents damage at grain storage भंडारित अनाज में कृंतकों का प्रकोप

1. चूहे अपने शारीरिक भार के 10% के बराबर अनाज रोज चट कर जाते हैं।

2. चूहों के कारण हापुर के आसपास के गांवों में सालाना 1.36-3.59 टन अनाज की क्षति होती है।

3. कृंतकों द्वारा न केवल अनाज खाया जाता है बल्कि जितना वे खाते हैं उसका 20 गुना अधिक अनाज को प्रादूषित कर देते हैं। भंडारित अनाज का 2.5% कृंतकों के द्वारा नष्ट किया जाता है।

4. कृंतक अनाज को खराब करते हैं, अपने मल-मूत्र और बालों से अनाज को दूषित करते हैं और कभी-कभी तो मरे हुए चूहों से भी अनाज प्रदूषित होता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
3
सप्टेंबर

Rodents damage at Main field मुख्य खेत में कृंतकों का प्रकोप

1. कभी-कभी रोपे गए बिचड़े को भी कृंतकों द्वारा उखाड़ा और काट दिया जाता है जिस कारण मुख्य खेत में खाली स्थान बन जाते हैं।

2.. आमतौर पर उनकी गतिविधियां खेत के भीतरी भागों में- चारों ओर से 2-4 मी. छोड़कर- देखी जाती है।

3. शुरू में, फसल का नुकसान पट्टियों के रूप में दिखाई पड़ते हैं लेकिन बाद ये पट्टियां फैलते-फैलते एक बड़ी पट्टी का रूप ले लेती है। पुष्पगुच्छ के निकलने पर नुकसान की मात्रा बढ़ जाती है और यह पुष्पगुच्छों के विकसित होने तक जारी रहता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
3
सप्टेंबर

Rodents damage at nursery stage नर्सरी अवस्था में कृंतकों से क्षति

1. नर्सरी अवस्था में कृंतकों से क्षति सबसे अधिक तब पहुंचती है जब बीज में अंखुए फूटते हैं।

2. इस अवस्था में, नर्सरी से पानी निकाल दिया गया होता है और बीज शैय्या पर कृंतक आजादी से घूम-घूमकर अंकुराए बीजों को नुकसान पहुंचाते हैं। बाद में, वे जल की सतह से 1-2 इंच ऊपर बिचड़े को भी काट देते हैं।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
2
सप्टेंबर

Rodents damage at differnt stages विभिन्न चरणों में

1. अनुमान किया जाता है कि भारत में कृंतकों से चावल के उपज को 5-10% तक क्षति पहुंचती है। मौसम, स्थान और पारितंत्र के अनुसार क्षति की मात्रा भिन्न-भिन्न होतीहै।
2. खेत में लगी फसलों में चावल की फसल को कृंतकों द्वारा सबसे अधिक हानि पहुंचती है। 2-90% तक नुकसान होता है। कृंतक किसी भी किस्म को नहीं छोड़ते और फसल पर उनका हमला किसी भी अवस्था में, किसी भी मौसम में हो सकता है।

File Courtesy: 
http://www.ikisan.com/Crop%20Specific/Eng/links/ap_riceRodentManagement.shtml
2
सप्टेंबर

Types of rodents कृंतकों के प्रकार

चूहों के कई प्रकार होते हैं

1. लेसर बैंडिकूट चूहा: Bandicota bengalensis

2.खेत वाले मूस: Mus boodga

3.भारतीय गर्बिल(हिरनमूस): Tatera indica

4.मुलायम बालों वाले खेत वाले मूस : Rattus meltada

5. आन्ध्रप्रदेश के सिंचित परिस्थिति वाले तटीय जिलों में Bandicota bengalensis एवं Mus booduga ऐसे दो कृंतक हैं जो धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।

File Courtesy: 
भंडारित अनाज के पीड़क जंतु और उनका प्रबंधन, IGSMARI – हैदराबाद
2
सप्टेंबर

Rodents कृंतक

1. गण के जंतु होते हैं जिनके अंतर्गत चूहे और मूस आते हैं।

2. चूहे Muride कुल के जीव हैं।

3. अनुमान है कि विश्व में कुल अनाज उत्पादन का 1% चूहे चट कर जाते हैं। विकासशील देशों में यह इनके द्वारा अनाज की बरबादी 3.5% अनुमानित है।

4 . कृंतकों द्वारा मानव में टायफाइड, पाराटायफाइड और स्कैबीज जैसे लगभग 50 प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं।

File Courtesy: 
भंडारित अनाज के पीड़क जंतु और उनका प्रबंधन, IGSMARI – हैदराबाद
10
ऑगस्ट

लेशिअन निमेटोड के समूह पर नियंत्रण

1.फेसिओलस रेडिएटस के साथ जुताई या चक्रीकरण से जड़-घाव के निमेटोड में कमी हुई।
2. नीम के केक ने निमेटोड की आबादी में सबसे अधिक कमी की।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

लेशिअन निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

1. प्रभावित फसलों के साथ मिट्टी में कार्बोफ्यूरान या फोरेट का 1 किलो ए.आइ. प्रति हेक की दर से अनुप्रयोग निमेटोड के घाव को कम करता है और अनाज की पैदावार में नुकसान को 48.5% तक कम करता है।
2. चूंकि लेशिअन निमेटोड द्वारा नुकसान मौसम के दौरान देरी से प्रकट होता है, रासायनिक उपचार जल्दी बोयी गयी फसल के लिए कारगर नहीं हो सकता।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

लेशिअन निमेटोड द्वारा उपज को नुकसान

1. भारत में वजह पी. ज़ी और पी. इंडिकस द्वारा संक्रमण की वज़ह से उपज को नुकसान क्रमशः 13-29% और 33% होता है।
2. उपज का नुकसान मुख्य रूप से गुठली के कम भराव और वजन में कमी के कारण होता है।
3. निमेटोड का संक्रमण दानों में प्रोटीन की मात्रा भी कम करता है।

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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