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Crop Protection

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10
ऑगस्ट

जड की गांठ के निमेटोड का जैविक नियंत्रण

1. ट्राइकोडर्मा हर्ज़ेनिअम रिफाइ के संवर्धित छने हुए भाग का सामना करने पर एम.ग्रेमिनिकोला के किशोरों की अधिकतम मृत्यु दर (> 96%) थी।
2. 20 ग्राम पर्ति वर्ग मीटर स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का अनुप्रयोग निमेटोड की संख्या कम करने तथा अनाज की पैदावार बढ़ाने में कारगर पाया गया (ACRIPN, 2003)।
3. इन विवो स्क्रीनिंग परीक्षण में गैर-टीकाकरण नियंत्रण की तुलना में बेसिलस मेगाटेरियम ने तथा निमेटोड के प्रकोप तथा जे2 की पैठ को अत्यधिक कम किया।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गांठ के निमेटोड के प्रति मेज़बान पौधे का प्रतिरोध

1. लोकनाथ 505 तथा एम-36 जैसी चावल की किस्में इलाहाबाद में एम. ग्रेमिनिकोला (हसन व अन्य, 2004)।
2. सेंथिलकुमार व अन्य (2007) ने जानकारी दी कि टीकेएम 3, टीकेएम 7, टीकेएम 8, टीकेएम 9, एमडीयू 1, एमडीयू 2, टीकेएम 11 तथा पीवाय 1 किस्में इस निमेटोड के लिए प्रतिरोधी थीं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गांठ के निमेटोड द्वारा उपज को नुकसान

1. एम. ग्रेमिनिकोला का पर्याक्रमण ऊंची भूमि के चावल में गुठली के अधूरा भरने के कारण अनाज की उपज में 16-32% नुकसान का कारण बनता है।
2. प्रत्यक्ष प्राप्त चावल में पौधे की 10, 30 और 60 दिन आयु में नुकसान 10% करने के लिए सीमा का स्तर क्रमशः 120, 250 और 600 अंडे प्रति पौधे होता है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड पर पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव

1. पानी में 25 से 30oC एम. ग्रेमिनिकोला के अंडों से बच्चे निकलते हैं। 15 से 35 0C पर अंडों से बच्चे निकलना कम हो जाता है और 20oC पर यह यह 25oC की तुलना में थोडा कम रहता है।
2. मिट्टी में एम. ग्रेमिनिकोला के लार्वा की आबादी फ़रवरी-दिसंबर के दौरान अधिक थी जब मिट्टी का तापमान 20.9oC या कम था।
3. लार्वा का आक्रमण 32% नमी की मिट्टी में अधिकतम था, विकास और अंडे की मात्रा का उत्पादन मिट्टी में 20 से 30% नमी में अधिक था।
4. लार्वा का अधिकतम आक्रमण 3.5 पीएच पर हो सकता है, लेकिन आमतौर पर पीएच का निमेटोड के आक्रमण, बढत और विकास पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं होता है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के नेमाटोड का अन्य जीवों और रोग की जटिलताओं के साथ परस्पर व्यवहार

1. एम. ग्रेमिनिकोला का पराक्रमण तने तथा जडों में फिनॉल्स की कमी कर देता है और निमेटोड से संक्रमित पौधे चावल ब्लास्ट पेथोजन, पाइरिक्योलेरिआ ऑरिज़ी (इज़राइल व अन्य, 1963) तथा जड के फंगस, (फ्यूज़ेरिअम मोनिलिफॉर्मी) के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड के जड-परजीवी सम्बन्ध

1. जड की गाँठ का निमेटोड, एम. ग्रेमिनिकोला एक लाचार परजीवी और चावल का एक प्रमुख कीट है। एम.ग्रेमिनिकोला के द्वितीय चरण के संक्रामक किशोर जड में प्रवेश के लिए एक बिंदु का चयन करते हैं, आमतौर पर मेरिस्मेटिक क्षेत्र।
2. किशोर कोशिकाओं के बीच प्रवास कर तथा इसोफेगल ग्रंथि के स्राव द्वारा कोर्टिकल कोशिकाओं में व्यवधान, अतिवृद्धि, और हाइपरप्लासिआ उत्पन्न करते हैं।
3. यह निमेटोड फ्लोएम में 5-8 विशाल या स्थानांतरण की कोशिकाओं के विकास को उत्तेजित करते हैं। विशाल कोशिकाओं के आसपास असामान्य जाइलेम प्रसार होता है जो स्टेलर ऊतक में सूजन पैदा करता है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड का जीवन चक्र

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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Status of Rice Nematodes Research of India (DRR)
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड की क्षति के लक्षण

1. जड की गाँठ के निमेटोड से प्रभावित पौधे शक्ति में कमी, अवरुद्ध विकास, नर्सरी व मुख्य खेत में क्लोरोटिक व मुडी हुई पत्तियां दर्शाते हैं।

2. निमेटोड का संक्रमण जड़ों के सिरों के पास छोटे से घाव के गठन के रूप में दिखाई देता है।

3. प्रभावित जड़ों की में अत्यधिक शाखाएं होती हैं। फसल की क्षति मिट्टी में अंडों के घनत्व/दूसरे चरण के किशोरों पर निर्भर करती है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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Status of rice Nematode Research in India (DRR)
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड के मेज़बानों का विस्तार

1. एम. ग्रेमिनिकोला के मेज़बानों की व्यापक सीमा है जिसमें चावल आर्थिक रूप से एक महत्वपूर्ण मेजबान है।
2. यह शुरू में बाडे की घास, एकिनोकोला कोलोनम (गोल्डन एवं बर्कफील्ड, 1965) में पाया गया और इसका झाड़ी की सेम, जई, रेनंक्यूलस पसिलस, साइपेरस कॉम्प्रेस्सस एल., पैनिकम मिलेसिअम एल., पेन्निसेटम टाइफॉइड्स स्टेफ एवं सी.ई.हब तथा ग्लाइसिन मैक्स (एल.) मर्र जैसी कई घासों पर आक्रमण हुआ।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड का प्रसार

एम. ग्रेमिनिकोला का प्रसार दक्षिण एशिया के देशों, बर्मा, बांग्लादेश, लाओस, थाईलैंड, वियतनाम, भारत, चीन, फिलीपींस, नेपाल और संयुक्त राज्य अमेरिका में है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

जड की गाँठ के निमेटोड (मेलॉइडोगाइने ग्रामिनिकोला), गोल्डन तथा बर्कफील्ड

1. भारत में एम. ग्रेमिनिकोला चावल को संक्रमित करने वाली प्रमुख प्रजाति है। चावल व गेहूं दोनों तथा कुछ मोनोकॉट दीड्स को संक्रमित करने वाली एम. ट्रिटिकॉरिज़ी के भी भारत में पाए जाने की सूचना दी गई है लेकिन इसका पाया जाना कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित है।
2. मांड्या (कर्नाटक, भारत) में 1500 हेक्टेयर के चावल क्षेत्र में खरीफ,2001 के दौरान एम. ग्रेमिनिकोला का संक्रमण इस निमेटोड के सीमित ज्ञान की वजह से था (प्रसाद व अन्य, 2001)।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

पुटी निमेटोड पर रासायनिक नियंत्रण

1. चावल के बीज को ऑग्जॆमिल या कार्बोसल्फान के 0.2% घोल में 250 पीपीएम की दर से भिगोना एच ऑरिज़िकोला में पुटी के विकास को कम कर देता है।
2. कार्बोफ्यूरान या फोरेट को मिट्टी में रोपण के 7 व 50 दिन बाद 1 किलो ए.आइ./हेक मिलाना निमेटोड की सम्भावना को 70% कम कर देता है और अनाज की पैदावार 28% से बढ़ जाती है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

पुटी निमेटोड के विकास पर नियंत्रण

1. गैर मेजबान फसलों के साथ फसल रोटेशन पुटी निमेटोड प्रबंध में बेहद प्रभावी है क्योंकि उसके मेज़बान एक निश्चित सीमा में होते हैं।
2. एच.सेक्चारि के विरुद्ध सौरीकरण तकनीक प्रभावी थी। सौरीकरण के कारण तापमान में वृद्धि (5.750C) के फलस्वरूप पुटी के भीतर अंडे मरने की संभावना कम होती है लेकिन यह मेज़बान की अनुपस्थिति में अंडे सेने को प्रोत्साहित कर एच.सेक्चारि की जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित कर सकता है।
3. मक्का बाजरा, और जुवार, जो आमतौर पर पश्चिम अफ्रीका में चावल की फसल प्रणाली में लगाए जाते हैं, एच.सेक्चारि के प्रति उदासीन मेज़बान थे।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

मेजबान पुटी के निमेटोड के मेज़बान पौधे का प्रतिरोध

1. चावल जर्मप्लाज्म में पुटी नेमाटोड के लिए प्रतिरोध के स्रोतों पर बहुत सीमित जानकारी उपलब्ध है।
2. जांची गई जंगली चावल की 73 किस्मों में से ओ. ग्लेबेर्रिमा की 15 तथा ओ.बर्थी ए.चेव. 7 की किस्मों को एच.सखारी की कोंगोलीज़ प्रजाति के लिए प्रतिरोधी (रेवर्साट तथा डेस्तोम्बेस, 1998) पाया गया।
3. लल्नाकंडा-41, सीआर 142-3-2, रत्ना, हम्सा, एमटीयू-17 तथा एमटीयू-4 को एच.ओरिज़िकोला के लिए प्रतिरोधी पाया गया है (जयप्रकाश और राव, 1983)।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
ऑगस्ट

पुटी निमेटोड द्वारा उपज का नुकसान

1. एच.ओरिज़िकोला के प्रकोप की वज़ह से उपज में अनुमानित घाटा 21 से 42% के बीच था।
2. 10% नुकसान के लिए संक्रामक किशोरों का सीमा स्तर 85-100 प्रति पौधा, 30 दिनों के लिए था।

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10
ऑगस्ट

अन्य जीवों और रोग संकुलों के साथ पुटी के निमेटोड की सहभागिता

1. पुटी निमेटोड की उपस्थिति में जड़ों में स्क्लेरोशिअम रोल्फ्सी का संक्रमण बढ़ गया था, जबकि फंगस लगे हुए कोपलों में जडों तक निमेटोड की पहुंच और पुटी का गठन बाधित था।
2. एम.ग्रेमिनिकोला और एच.ओरिज़िकोला के बीच परस्पर विरोधी व्यवहार की सूचना दी गई है।
3. एम.ग्रेमिनिकोला तेजी से स्थापित होता है और एच.ओरिज़िकोला के गुणन को दबा देता है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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ऑगस्ट

पुटी के निमेटोड का जीवन चक्र

1. एच. ऑरीज़िकोला की मादाएं भग के शंकु से जुडे अंडे के बडे थैले में कई अंडे जमा करती हैं।
2. भ्रूण विकास और संक्रामक किशोरों का उद्भव आठ दिनों में पूरा हो जाता है।
3. जड़ों में प्रवेश एक दिन में हो जाता है। दूसरे चरण के लिए विकास की अवधि 6 दिन थी; नर और मादा के तीसरे चरण के लिए क्रमशः 4 और 8 दिन तथा नर और मादा किशोरों के चौथे चरण के लिए क्रमशः 5 और 8 दिन।
4. एंडो-परजीवी किशोर नर के रूप में 10 दिनों में और सफ़ेद मादा के रूप में 20 दिनों में विकसित हुए। अक्षत मादाओं ने नर को आकर्षित करने का एक तीव्र पदार्थ छोडा।

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ऑगस्ट

पुटी के निमेटोड की क्षति के लक्षण

1. पुटी निमेटोड से संक्रमित पौधों में पत्तियों का भूरापन व हरितरोग तथा नियत समय से 10-13 पहले फूल लगना सामान्य लक्षण हैं।
2. जड़ें किसी भी पित्त गठन को नहीं दर्शाती हैं, लेकिन संक्रमण के स्थल पर भूरे रंग की हो जाती है और शक्ति में कमी दर्शाती हैं।
3. उन्नत चरणों में जड़ों पर छोटे पुटी देखे जा सकते हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
ऑगस्ट

पुटी के निमेटोड के मेज़बान की सीमा

1. एच. ऑरीज़िकोला की चावल के लिए सीमित मेज़बान सीमा है जबकि केला मुख्य मेज़बान है।
2. साइनोडोन डेक्टिलॉन तथा ब्रेकिआरिआ स्प. जैसी घास-फूस अच्छी मेज़बान हैं, जबकि किल्लिंगा मोनोसिफाला रोट्टो इस निमेटोड के लिए कमज़ोर मेज़बान है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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ऑगस्ट

पुटी के निमेटोड का वितरण

1. एच. ऑरीज़िकोला केरल में व्यापक रूप से होता है, केले पर यह निमेटोड गोवा में और पश्चिम बंगाल में बांकुरा और बर्दवान में धान के खेतों में दर्ज किया गया।
2. हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा घाटी के चावल और गेहूँ के खेतों में भी पुटी के निमेटोड का प्रकोप हुआ था।

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