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Crop Protection

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10
ऑगस्ट

पुटी का निमेटोड (हीटरोडेरा ओरिज़िकोला)

1. पुटी के निमेटोड (हीटरोडेरा ओरिज़िकोला) की उपस्थिति पर पहली सूचना केरल राज्य से 1976 में खरीफ मौसम के दौरान मिली।.

File Courtesy: 
भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

राइस स्टेम निमेटोड का रासायनिक नियंत्रण

1.चावल के प्रत्यारोपण में ईथोप्रोफॉस, कार्बोफ्यूरान एवं आइसाज़ोफॉस के अनुप्रयोग से अनुपचारित क्षेत्रों की तुलना में क्रमशः 0.9, 0.82 तथा 0.08 टन/हेक्टेयर अधिक उपज प्राप्त हुई।
2. मिट्टी में मोकैप व कार्बोफ्यूरान मिलाना, चारे में मौज़ूद उफ्र निमेटोड के विरुद्ध प्रभावी पाया गया (रहमान और मिआह, 1989; मोंडल व अन्य, 1990)।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड के संवर्धन का नियंत्रण

1. एक संगठित तरीके से सामुदायिक आधार पर संक्रमित चारे को जलाने से संक्रमण के दायरों को नष्ट करने में बहुत मदद मिल सकती है।
2. नदी से बाढ़ का पानी, जो कि उफ्र निमेटोड संक्रमण का स्रोत होता है, की खेत में प्रवेश से रोकथाम के लिए मेढ़ों को मजबूत बनाना लाभप्रद हो सकता है (सैन एवं ज़ान, 1977)।
3. उफ्र को नियंत्रित करने के सबसे उचित तरीकों में शामिल हैं खेत को पूरी तरह से सूखा रखना, परती ज़मीन को संक्रमण का फैलाव रोकने हेतु उपयुक्त तरीके से जोतना और नोड मेजबान पौधों के साथ फसल के चक्रीकरण का पालन करना।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल के स्टेम के निमेटोड का प्रबंधन

1. डी. एंगस्टस का प्रबंधन, गहरे पानी के चावल के पारिस्थितिकी तंत्र की प्रकृति की वजह से मुश्किल होता है।
2. अनुप्रयोग में कठिनाइयाँ, संदूषण से जुडी चिंताएं तथा कम आर्थिक लाभ निमेटिसाइड के उपयोग को सीमित करते हैं।
3. निमेटोड के प्रकोप के प्रबंधन हेतु उसके विभिन्न प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरोध और कल्चर का प्रबंधन सबसे प्रभावी विकल्प हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड द्वारा उपज में नुकसान

  •  डी. एंगस्टस के संक्रमण की वजह से नुकसान, उसकी किस्म, पैदावार के समय व संक्रमण की मात्रा तथा फसल के मौसम के दौरान मौज़ूद पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर वर्ष दर वर्ष अलग-अलग हो सकता है।
  • भारत में, उफ्र के प्रकोप की वज़ह से उपज का नुकसान उत्तरप्रदेश में 5-50% (सिन्ह, 1953); पश्चिम बंगाल में 10-15% तथा असम में इस निमेटोड के अनुकूल परिस्थितियों के स्थान पर 30%-100% (ए आइसीआरपीएन,1986) बताया गया।
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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड पर पर्यावरणीय कारकों का प्रभाव

1. संक्रमण, बीमारी के विकास और निमेटोड के प्रजनन के लिए 28-30 डिग्री सेल्सियस वायुमंडलीय तापमान और 80% से अधिक सापेक्षिक आर्द्रता अनुकूल हैं।
2. डी. एंगस्टस का अधिकतम प्रकोप जल्दी बोयी फसल में होता है और जैसे-जैसे बुवाई में देरी होती है, धीरे-धीरे घटने लगता है। उफ्र निमेटोड का संक्रमण आमतौर पर बाढ़ के पानी से होता है और ज्वार उफ्र निमेटोड के फैलाव में मदद करता है। फैलाव की फसल अक्सर प्रत्यारोपित चावल की तुलना में उफ्र के संक्रमण से अधिक ग्रस्त होती है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड की अन्य जीवों और रोग कॉम्प्लेक्सेस से परस्पर व्यवहार

1. डी. एंगस्टस से संक्रमित पौधों के आवरण पर धब्बे फुज़ेरियम, क्लैडोस्पोरियम तथा स्क्लेरोटियम के माध्यमिक प्रकोप के लिए शरण स्थल होते हैं।
2. निमेटोड से संक्रमित पौधे ब्लास्ट, आवरण की सडन एवं बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट रोगों (वॉंग, 1969) के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। रथैया (1988) ने असम में उफ्र से पीड़ित पौधों में लीफ और नोडल ब्लास्ट की सूचना दी।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड का मेजबान-परजीवी सम्बन्ध

1. डी. एंगस्टस एक्टो-परजीवी तरीके से बगैर पूरी तरह से उगी पत्तियों के अन्दरूनी भागों, आवरणों, कलियों और विकासशील पैनिकल्स से भोजन लेता है तथा उगाए गए व जंगली चावल में उफ्र रोग का कारण बनता है, और उसके विकास के सभी चरणों में खरपतवार होता है।
2. ताज़े कटे चावल के बीजों पर डी.एंगस्टस के व्यावहारिक, एनहाइड्रोबायोटिक किशोरों और वयस्कों की उपस्थिति इस प्रजाति के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
3. बीज के अंकुरित होने वाले भाग में निमेटोड की उपस्थिति भी (प्रसाद और वाराप्रसाद, 2001) देखी गई।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड का जीवन/रोग चक्र

1. डी. एंगस्टस अनिवार्य रूप से एक एक्टोपैरासाइट है जो चावल के जीवित पौधों पर पलता और संख्या में बढता है।
2. निमेटोड सक्रिय रूप से तैर कर सकता है। शुष्क परिस्थितियों में, सूखी मिट्टी या सूखे पौधे के भागों पर निष्क्रिय अवस्था में कुंडली मारकर रहता है और बारिश होने या खेत में जल भराव होने के तुरंत बाद वापस सक्रिय हो जाता है।
3. चावल के स्टेम का विकास चक्र किशोरावस्था के दूसरे चरण (J2) से वयस्क के लिए 15 दिन लेता है, J2 से अंडा 21 दिन तथा J2 से J3 चरण के लिए 24 दिन लेता है।

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10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड की क्षति के लक्षण

1.वनस्पति चरण में, डी. एंगस्टस के भोजन की वज़ह से ज़ख्म, जब डी एंगस्टस वनस्पति चरण में चावल को खिलाता है, उभरती या उभर रही पत्तियों के एक मोज़ेक या क्लोरोटिक रंग बिगड़ने में परिणीत होता है।

2. पीले या हल्के हरे रंग के स्प्लैश-पैटर्न प्रभावित

3. पत्तियों और पत्तियों के आवरण पर भूरे से गहरे भूरे रंग के धब्बे प्रकट होते हैं, और पत्तियों के किनारे विकृत हो जाते हैं।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति डीआरआर
10
ऑगस्ट

चावल स्टेम निमेटोड के मेज़बान

1. जोता हुआ चावल डी.एंगस्टस का मुख्य मेजबान है. इसके अलावा जंगली चावल प्रजातियां अर्थात् ओरीज़ा पेरेन्निस (मॉएंक), ओ.ग्लाबेर्रिमा (स्टेउड), ओ.क्यूबेंसिस (एक्मैन), ओ.ऑफिसिनालिस (वॉल एक्स वॉल), ओ.मेयरिआमा (ज़ॉल एट मॉर एक्स स्टेउड), ओ.लैटिफोलिआ (डेस्व), ओ.ऐचिंगेरि (ए.पीटर), ओ.अल्टा (स्वालन) भी इस निमेटोड के लिए मेजबान का कार्य करते हैं।

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10
ऑगस्ट

चावल के स्टेम के निमेटोड का फैलाव

1. डी. एंगस्टस भारत, मलेशिया, फिलीपींस, मिस्र, थाईलैंड, म्यांमार, वियतनाम, संयुक्त अरब अमीरात और मेडागास्कर के गहरे पानी के चावल के इलाकों में व्यापक रूप से पाया जाता है।
2. भारत में इस निमेटोड के बारे में शुरू में असम, उत्तर प्रदेश और भारत में पश्चिम बंगाल में गहरे पानी के चावल के खेतों से सूचना मिली थी.
3. उफ्र से क्षति के लक्षण उड़ीसा में भी दर्ज हुए थे, लेकिन कारक जीव अलग से नहीं पहचाना गया था (राव व अन्य, 1986a)।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
10
ऑगस्ट

चावल के स्टेम का निमेटोड (उफ्र निमेटोड) (डिटाइलेंकस एंगस्टस (बटलर) फ़िलिप्येव)

1. उफ्र निमेटोड, डी.एंगस्टस के बारे में सबसे पहले लगभग 90 साल पहले पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) नाओखाली, टिप्पेरा एवं ढाका ज़िलों से सूचना दी गई थी (बटलर, 1913a)।
2. इस रोग स्थानीय भाषा में डाक पोरा के रूप में कहा गया, क्योंकि इससे क्षति क्षेत्र में बिजली गिरने के मामले की तरह दिखती है।
3. यह रोग पहले एक किसान उल्फ़-उर-रहमान के चावल के खेतों में देखी गई और इसे उसके नाम के आधार पर नाम दिया गया।
4. डी.एंगस्टस पीले तना छिद्रक और रोडेंट के अलावा गहरे पानी के चावल का एक प्रमुख कीट है।

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भारत में चावल के निमेटोड पर शोध की स्थिति, प्रसाद, जे.एस., सोमशेखर, एन. तथा वाराप्रसाद, के.एस. (2011)। चावल ज्ञान प्रबन्ध पोर्टल के लिए लिखे गए दृष्टिकोण पत्र
9
ऑगस्ट

పొడ తెగులు నివారణ

పొడ తెగులు నివారణ

a. వేసవి దుక్కులు

b. విత్తన శుద్ధి

c. సరైన దూరంలో నాటడం

d. పొలాన్ని శుభ్రంగా ఉంచి, సకాలంలో కలుపును నిర్మూలించడం

e. నత్రజనిని మోతాదుకు మించి వాడకపోవడం

f. హెక్సాకొనజోల్ (2.0 మి.లీ.) లేక వాలిడామైసిన్ (2.0 మి.లీ.) లేక ప్రోపికొనాజోల్ (1.0 మి.లీ.) లీటరు నీటిలో కలిపి పిచికారీ చెయ్యడం.

g. పైరు బాగా తడిచేలా పిచికారీ చెయ్యడం

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రైస్ బ్లాస్ట్ డిసీస్ అండ్ ఇట్స్ మానేజ్మెంట్ (వరి అగ్గి తెగులు, యాజమాన్యం) - డా. కృష్ణవేణి
9
ऑगस्ट

పొడ తెగులు

ఆంగ్ల నామం : షీట్ బ్లైట్

తెగులును కలుగచేసే జీవి: రైజోక్టోనియా సొలానీ

లక్షణాలు :

1. పొడ తెగులు సాధారణంగా పైరు తర్వాతి దశలలో కనిపిస్తుంది.

2. దుబ్బు చేసే దశలో లేదా కణుపులు సాగే తొలి దశలలో (దాదాపు నీరు కట్టిన 10-15 రోజుల తరువాత) నీటి మట్టానికి దగ్గరగా, అడుగున ఉన్న ఆకులు, మట్టలపై మచ్చలు ఏర్పడతాయి. ఈ తెగులు తొలి దశలో కనిపించే లక్షణాలు ప్రాంతం బట్టి మారుతూ ఉంటాయి.

File Courtesy: 
రైస్ బ్లాస్ట్ డిసీస్ అండ్ ఇట్స్ మానేజ్మెంట్ (వరి అగ్గి తెగులు, యాజమాన్యం) - డా. కృష్ణవేణి
Image Courtesy: 
ఎ.పి.ఆర్.ఆర్.ఐ., మారుటేరు
7
जुलै

క్రిమిసంహారక మందులను వాడి పురుగులను అరికట్టుట

క్రిమిసంహారక మందులను వాడి పురుగులను అరికట్టుట:

  • సిఫారసు చేసిన మందులను ఆయా మోతాదులలో తగిన పద్దతులలో వాడాలి.
  • మనము ఎన్నుకొనే మందులు చీడ పురుగులను బాగా సంహరించి మేలుచేసే సహజ శత్రువులకు తక్కువ హానిచేసేవిగా ఉంటె మంచిది.
  • సింథటిక్ పైరిథ్రాయడ్స్ లాంటి మందులను, సిఫారసు చేయని రెండు మూడు రకాల పురుగు మందులను కలిపి వాడుటవలన మేలుచేసే బడనికలకు, భక్షకులకు నష్టం కలిగి హానిచేసే పచ్చదీపపు పురుగులు గోధుమరంగు దోమలు ఉధృతి పెరుగుతుంది.
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APRRI, Maruteru
7
जुलै

చీడ పీడలను తట్టుకొనే వంగడాల సాగు

చీడ పీడలను తట్టుకొనే వంగడాల సాగు: 

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APRRI, Maruteru
7
जुलै

జీవ నియంత్రణ పద్ధతులు

జీవ నియంత్రణ పద్ధతులు

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APRRI, Maruteru
7
जुलै

యాంత్రిక పద్ధతులు

యాంత్రిక పద్ధతులు 

  • కీటకాల ఉనికి పైరు మీద కనిపించిన వెంటనే వాటిని ఏరి తొలగించే పద్దతులను యాంత్రిక పద్ధతులంటారు.
  • నాటునప్పుడు నారు చివరలను (కొనలను) తుంచి నాటడం ద్వార కాండం తొలుచు పురుగు మరియు తాటాకు తెగులు (హిస్పా) ఉధృతిని తగ్గించుకోవచ్చు.
  • వరి పిలకలు ఆకుముడత మరియు గొట్టాల పురుగు పైరునాశిస్తే మొక్కల మీద తాడు అణిచి లాగితే ఆ పురుగులు నీటిలోపడి చేపట్టిన నివారణ చర్యలు సమర్థవంతంగా ఉంటాయి.
File Courtesy: 
APRRI, Maruteru
7
जुलै

యాజమాన్య పద్ధతులు

యాజమాన్య పద్ధతులు

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APRRI, Maruteru
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