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1. उत्पत्ति- समृद्धि × आइआर 8608-298                   

2. परिपक्वता – 100-105 दिन

3. अनाज का प्रजाति- लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - i) गॉल मिज के लिए प्रतिरोधी एवं ब्राउन स्पॉट के लिए सहनशील।

ii) यह आरम्भ काल में होने के कारण खरीफ़ मौसम के अधिकतम कीट एवं रोगों से बच जाता है।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान -i) प्रारंभिक प्रजाति होने के कारण आम तौर पर सूखे के तनाव से बच जाता है।

                        ii) अच्छी शारीरिक सहनशीलता रखता है, सूखे के लिए भी।

6. अभिग्रहण के क्षेत्र - दंतेश्वरी छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश राज्य के सभी धान उगाने के क्षेत्रों की सिफ़ारिश करता है।

7. विशेष गुण – 1. लंबे महीन, स्वच्छ अनाज अच्छी हेड राइस रिकवरी के साथ।

                          2. गर्मी की खेती के लिए उपयुक्त।

8. औसत उपज - 30 से 35 क्विंटल/हेक्टेयर।

9. द्वारा व

1. उत्पत्ति- आरपी 2154-40-1 × आइआर 9828-23            

2. परिपक्वता – 130-135 दिन 

3. अनाज का प्रजाति - लंबा खड़ा अनाज

4. जैविक तनाव - बामलेश्वरी प्रजाति  बीएलबी के लिए प्रतिरोधी है एवं शीथ ब्लाईट एवं ब्राउन स्पॉट के लिए सहनशील है। यह प्रजाति  गॉल मिज एवं डब्यूपीएचबीपीएच के प्रति क्षेत्र सहनशीलता रखती है।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान – हालांकि सिंचित स्थिति के लिए इस प्रजाति की सिफ़ारिश की गई है, तथापि सूखे के लिए इसकी सहनशीलता का स्तर अच्छा है।

6. अभिग्रहण के क्षेत्र – 1. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश एवं पूर्वी उत्तरप्रदेश के राज्य के लिए 33वें ऑल इंडिया राइस वर्कशॉप द्वारा सिफ़ारिश की गई है।

                                     2. समस्त मिट्टियों पर सिंचित अवस्था एवं राज्य की वर्षा पूरित स्थिति के अंतर्गत "डोर्सा" एवं "कन्हार" मिट्टी के

1. उत्पत्ति - अभय × फाल्गुन                                            

2. परिपक्वता – 120-125 दिन

3. अनाज का प्रजाति - लंबा महीन अनाज

4. जैविक तनाव - आर से जीएम 1, बीपीएच, लीफ़ फ़ोल्डर, डब्यू, वाबीपीएच एवं नैक ब्लास्ट का सामान्य रूप से प्रतिरोधी, एवं लीफ़ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट एवं शीथ रूट के प्रति सहनशील।

5. सिफ़ारिश किए गए क्षेत्र/स्थान - छत्तीसगढ़ मैदानों के माध्यम से गाढी मिट्टी के सिंचित पर्यावरण प्रणाली एवं वर्षा पूरित क्षेत्रों के लिए सिफ़ारिश की गई है।

6. अभिग्रहण के क्षेत्र - छत्तीसगढ़ के साबुत धान उगाने वाले क्षेत्र।

7. विशेष गुण - यह संस्कृति, इसकी उच्च उपज क्षमता, निर्यात गुणवत्ता अनाज (ग़ैर बासमती) वांछनीय गुणवत्ता के साथ, किसानों को अत्यधिक स्वीकार्य है, अर्थात, मध्यवर्ती जीटी, उच्च ऐमिलेज़, मुलायम जेल स्थिरता एवं उच्च हेड राइस रिकवर

कम से कम एक वर्ष तक के लिये अनाज को बीज बनाने के उद्देश्य  से संग्रहित किया जाता है। अनाज को विशिष्टक भंडारण संरचना में संग्रहित किया जाता है। भंडारण किये गये अनाज में लगने वाले कीड़े को प्रमुख विनाशकारी कीट माना जाता है।

a.परंपरागत भंडारण संरचना के प्रकार

स्‍थानीय स्वारूप में उपलब्धत सामग्री से बनी हुई परंपरागत संरचनाओं में अनाज का अधिकतर भंडारण किया जाता है। जैसे:-

1. धान का भंडारण मृदा/मिट्टी से बनी हुई कच्चीर कोठी/मटके में किया जाता है।

2. धान की तूड़ी से बनी हुई भूसी में धान का भंडारण किया जाता है।

3. धान का भंडारण बॉंस से बनी हुई ढोलंगी में भी किया जाता है।

b. धान की भंडारण संरचना में अपनाए गए उपचार

परंपरागत भंडारण संरचना में धान के भंडारण के बाद अनाज की सुरक्षा के लिये कुछ अतिरिक्ता प्रयास करने पड़ते हैं:-

1. अनाज को धान की तूड़ी से ढ़कने के

11
Oct

अनाज भंडारण पध्द ती

1. अनाज की फसल को आनेवाले समय में खाने के लिये एवं बीज

के उद्देश्यी से संरक्षित रखा जाता है। इस क्षेत्र में अधिकतर धान का भंडारण किया जाता है, जिसे विविध प्रकार के भंडारण संरचनाओं में रखा जाता है।  

2. विविध प्रकार की भंडारण संरचनाएँ, जलवायु परिस्थितियॉं एवं संरचनाओं को बनाने के लिये आवश्याक सामग्री की उपलब्धडता पर निर्भर होती हैं। भंडारण की संरचना का प्रकार भंडारण के उद्देश्य‍ के अनुसार अलग-अलग प्रकार का होता है जैसे अनाजों में प्रमुख भंडारण कीट विस्ताउर निम्नशलि‍खित प्रकार का होता है – बीज, खाद्यान्नन एवं अनाज की बिक्री। 

3. छत्तीसगढ़ के किसान अनाज के पतंगे को अनाजों का सब से बड़ा शत्रु एवं चूहे को भंडारण किये गये सभी तरह के अनाज का सब से गंभीर विनाशक मानते हैं। किसानों के द्वारा भंउज्ञरण किया जानेवाला सब से प्रमुख अनाज धान होता है, जिसका भंडारण

धान की खेती की मृदाऍं सामान्य त: दो प्रकार की होती हैं।

1. बहुत महीन/बारीक पीली दूमट जिसका स्थाउनीय नाम मतासी है एवं जो धान की एकल फसल के लिये बहुत अच्छीो मानी जाती है।

2. फीके रंग की मतासी एवं गहरे रंग की कन्ह र का मिश्रण जिसका रंग गहरा स्लेनटी होता है एवं जिसे डोरसा कहते हैं तथा जो धान के बाद दालों की एक रबी फ़सल लेने में मदद करती है।

बहुत गहरी कन्होर मृदाऍं धान की खेती के लिये उपयुक्त नहीं मानी जाती हैं।

मृदा स्‍थानीय नाम (रायपुर) स्‍थानीय नाम (जगदालपुर) रेत डोरसा (भूरी) माल कीचडयुक्त मतासी (पीली) टीकरा चिकनी मिट्टी    कन्‍हर (काली) गभार दूमट   भाटा   मरहन

मौसमी नाम स्‍‍थानीय नाम बुवाई का समय कटाई का समय खरीफ़ खरीफ़ आरंभि‍क खरीफ़- मार्च-मई मध्‍य खरीफ़ जून-अक्‍तूबर जून-अक्‍तूबर   नवंबर-फरवरी रबी रबी नवंबर-फरवरी   मार्च-जून

11
Oct

वुडन हॅमर (मुथला)

1. लकड़ी से बना हथौड़ा बिलकुल हथौड़े जैसा परंतु आकार में बड़ा, 3-3.5 फ़ीट लकड़ी के हत्थे के साथ लकड़ी का निचला लॉग 2-2.5 कि.ग्रा. का होता है।

2. जुताई के बाद ग्रामीण इसे मैदान पर बड़े ढेले तोड़ने के लिए प्रयोग करते हैं।

11
Oct

हुलर्स/राइस मिलें

1. औसतन साफ धान 72 प्रतिशत चावल, 22 भूसी एवं 6 प्रतिशत चोकर की पैदावार करता है।

2. पारंपरिक हाथ से की गई कुटाई या पैरों से की गई कुटाई (ढेनकी) अब अप्रतिस्पर्धात्मक बन गया है। धान हुलर्स, शेलर्स एवं आधुनिक चावल मिलों ने लोकप्रियता हासिल की है।

3. हुलर्स शायद ही कभी 65 प्रतिशत कुल पैदावार देते हैं, 20-30 प्रतिशत टूटे के साथ, इसके अतिरिक्त यह पूरी तरह साफ चावल नहीं देते।

4. सबसे आधुनिक चावल मिलें (सिंगल पास), 2-4 टन प्रति घंटे की क्षमता में उपलब्ध हैं। छोटी आधुनिक चावल मिलें 150-550 किलोग्राम प्रति घंटे की क्षमता के साथ उपलब्ध हैं एवं उच्च रिकवरी की पैदावार देती हैं।

5. आधुनिक चावल मिलें केवल 10 प्रतिशत के अनाज के टूटे जाने के साथ 70 प्रतिशत की उपज रिकवरी देती हैं।

11
Oct

छानने वाले पंखे

1. हस्त संचालित एवं बिजली संचालित छानने वाले पंखे व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं।

2. वह धान जो हाथ से या पेडल द्वारा संचालित धान थ्रेशर से फटकाया गया हो, उसे इन पंखों का उपयोग करके साफ किया जाता है।

3. इन छानने वाले पंखों में लकड़ी, लोहे के कोण, वेल्डेड स्टील या दो के संयोजन से बने फ्रेम होते हैं, स्प्रॉकेट एवं चेन, बेल्ट एवं गरारियाँ एवं एकल या डबल कटौती यंत्र के साथ जैसी चालन प्रक्रिया के साथ।

पारंपरिक छानने वाले पंखे:

पंखे का आधार लकड़ी के फ्रेम का होता है जैसे लोहे वाले छानने के पंखे एवं ब्लेड में घुमाव के साथ, ब्लेड लोहे की चादर से बने होते हैं। यह दूरदराज के किसानों के लिए छानने के उद्देश्य से बनते हैं।

 

 

 

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