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24
Aug

रोग का प्रबंधन ( Management of disease)

पैनिकल इनिशियएन में 0.1% कार्बेन्डैजिम 50 WP के एक या दो छिड़काव करने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
मिट्टी की उर्वरता की कमी में सुधार कर और संतुलित पोषण का प्रयोग कर इस रोग से बचा जा सकता है।
24
Aug

ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)

लक्षण: इस रोग का मुख्य कारण हेल्मिन्थोस्पोरियल ओराइजी होता है। यह पत्तियों और प्लूम पर अंडाकार गहरा भूरा दाग बनाता है। यह रोग मुख्यतः पोषकहीन और कमजोर मिट्टी में पाया जाता है। गंभीर स्थिति में यह नर्सरी व खेत की फसलों को हानि पहुंचा सकता है।
A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें। B) रासायनिक नियंत्रण 1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए। 2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें। 3. बैविस्टिन (0.1%) के बाद हिनोसैन (0.1%) या डाइथेन M-45 (0.25%) का छिड़काव पहली बार रोग के प्रकट होते ही पाक्षिक (15 दिनों के) अंतराल पर किया जाना चाहिए। रोग पर ठीक से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए स्प्रे घोल के साथ सैन्डोविट या ट्राइटोन का उपयोग स्टिकर @0.2% के रुप में किया जाना चाहिए। तराई भूमि की फसलों के लिए खेत में स्थिर पानी होने पर टिलरिंग और बूटिंग अवस्था

1. पत्तियों के सामान्य घाव तंतु (स्पिन्डल) आकार के होते हैं जिसके केंद्र में भूरा (ग्रे) रंग होता है और जिसका किनारा आमतौर पर लालिमायुक्त पीला (रेडिश येलो) होता है। 2. अतिसंवेदनशील किस्म के पत्ते सूख जाते हैं। फंगस (कवक) तने के नोडों को भी प्रभावित कर सकते हैं जिस कारण इसका गहरा भूरा रंग काला हो जाता है और यह आसानी से टूट सकता है। 3. घाव पैनिकल नेक में भी हो सकता है। संक्रमित नेक काला हो जाता है और फिर टूट जाता है। नेक ब्लास्ट की वज़ह से पैनिकल में कुछ ही बीज पनप सकते हैं या बिल्कुल भी नहीं।
24
Aug

ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है। 2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में। 3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।

लीफ स्कैल्ड (पत्तियों का जलना)(Leaf scald)

लक्षण:

1. यह रोग रिन्कोस्पोरियम ओराइजी के कारण होता है;

2. गहरे और हल्के भूरे क्षेत्रों के साथ पत्तियां मुरझा जाती हैं।

3. लक्षण पत्ती के सिरे या किनारे पर दिखने शुरू होते हैं।

रोग का प्रबंधन ( Management of disease)

  • पैनिकल इनिशियएन में 0.1% कार्बेन्डैजिम 50 WP के एक या दो छिड़काव करने से बीमारी की गंभीरता को कम किया जा सकता है।
03
Aug

ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)

ब्राउन स्पॉट रोग ( Brown Spot disease)

लक्षण:

  • इस रोग का मुख्य कारण हेल्मिन्थोस्पोरियल ओराइजी होता है।
  • यह पत्तियों और प्लूम पर अंडाकार गहरा भूरा दाग बनाता है।
  • यह रोग मुख्यतः पोषकहीन और कमजोर मिट्टी में पाया जाता है।
  • गंभीर स्थिति में यह नर्सरी व खेत की फसलों को हानि पहुंचा सकता है।

ब्राउन स्पॉट रोग का प्रबंधन ( Management of brown spot)

  • मिट्टी की उर्वरता की कमी में सुधार कर और संतुलित पोषण का प्रयोग कर इस रोग से बचा जा सकता है।

ब्लास्ट रोग का प्रबंधन ( Management of blast disease)

A) ब्लास्ट-प्रतिरोधी की अलग-अलग किस्मों का उपयोग करें।

B) रासायनिक नियंत्रण

1. नर्सरी में बोने से पहले या ऊंची भूमि (अपलैन्ड) में होने वाले चावल के प्रसारण से पहले बीजों को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में भिगोना चाहिए।

2. तराई भूमि (लो लैन्ड) में होने वाले फसलों में अपरूटिंग (जड़ से उखाड़ने) के बाद अंकुरो को 0.1% कार्बेन्डाजिम 50 WP (बैविस्टिन, डेरोसॉल या जेकेस्टेन) में 12 घंटों के लिए जड़ तक भिगा कर उपचार करें।

3. बैविस्टिन (0.1%) के बाद हिनोसैन (0.1%) या डाइथेन M-45 (0.25%) का छिड़काव पहली बार रोग के प्रकट होते ही पाक्षिक (15 दिनों के) अंतराल पर किया जाना चाहिए। रोग पर ठीक से नियंत्रण प्राप्त करने के लिए स्प्रे घोल के साथ सैन्डोविट या ट्राइटोन का उपयोग स्टिकर @0.2% के रुप में किया जाना चाहिए। तराई भूमि की फसलों के लिए खेत मे

03
Aug

ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

ब्लास्ट रोग (Blast Disease)

1. कारक जीव – मैग्नापोर्था ग्राइसिया का प्रकोप उत्तर पूर्वी राज्यों में बहुत अधिक है।

2. यह रोग फसल को उसके विकास के हरेक चरणों में प्रभावित करता है जैसे नर्सरी, टिलरिंग और फूलों की अवस्था में।

3. किस्म और पर्यावरण की स्थिति के अनुसार फसल उत्पादन में 36-50% तक की क्षति होती है।

ब्लास्ट रोग के लक्षण ( Symptoms of blast disease)

1. पत्तियों के सामान्य घाव तंतु (स्पिन्डल) आकार के होते हैं जिसके केंद्र में भूरा (ग्रे) रंग होता है और जिसका किनारा आमतौर पर लालिमायुक्त पीला (रेडिश येलो) होता है।

2. अतिसंवेदनशील किस्म के पत्ते सूख जाते हैं। फंगस (कवक) तने के नोडों को भी प्रभावित कर सकते हैं जिस कारण इसका गहरा भूरा रंग काला हो जाता है और यह आसानी से टूट सकता है।

3. घाव पैनिकल नेक में भी हो सकता है। संक्रमित नेक काला हो जाता है और फिर टूट जाता है। नेक ब्लास्ट की वज़ह स

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