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1. कृंतकों के नियंत्रण स्वदेशी स्मोक जेनरेटर का भी फसल की वृद्धि के दौरान प्रभावशाली तरीके से खेत में या नालियों के मेड़ पर और खेत के फार्म के अन्दर बने रास्तों पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. एल्युमिनियम फॉस्फाइड जैसे धूमक प्रभावी होता है और इसका प्रयोग बिलों में रहने वाले खेत के कृंतकों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है। पंजाब के खेतों में Bandicota bengalensis के लिए इसके आकलन में पाया गया कि इसकी मारण क्षमता 66.6% है।

1. कृंतकनाशी दवा के एकल डोज का प्रयोग करने की स्थिति में पूर्व-प्रलोभन जरूरी होता है। 2. जिंक फॉस्फाइड एक पारंपरिक एकल डोज वाला कृंतक विष है। ब्रोमोडायलोन एकमात्र ऐसी कृंतकनाशी दवा है जो एंटीकॉग्युलेंट है। 3. प्रलोभन के लिए जिंक फॉस्फाइड को मूंगफली के तेल और कुचले हुए गेहूं या चावल के साथ भार के हिसाब से 2 g: 2g: 96 g की दर से मिलाना चाहिए। 4. ब्रोमोडायलोन एकल डोज वा एंटीकॉग्युलेंट है और इसे नारियल-चावल की सम्मिलित कृषि उत्पादन प्रणाली के तहत नारियल के पेड़ों की फुनगी पर रखा जा सकता है। 5. रोबन जैसा प्रयोग के लिए तैयार नुस्खा भी बाजार में 0.25% के सान्द्रण पर उपलब्ध है।

कृंतकों का सांस्कृतिक नियंत्रण

1. खेत का आकार बड़ा रखें और मेड़ों को छोटा।

2. फसल में और मेड़ों पर खरपतवार को नियंत्रित रखें ताकि चूहों को अलग से कोई भोजन उपलब्ध न हो।

3. संभव हो तो एक साथ बड़े इलाके में धान का रोपन।

4. बांस की कमानी वाली चूहेदानी फसल में कल्ले फूटने की अवस्था में बहुत प्रभावी होता है।

5. खेत में चिड़यों के बैठने के लिए संरचना बनाकर उल्लू जैसे पक्षियों द्वारा कृंतकों का शिकार करवाया जा सकता है।

1. प्रभावी कृंतक प्रबंधन के लिए एकीकृत रूप से सामुदायिक तौर पर चूहेदानियों, विष-प्रलोभन, धूम्रीकरण (धूमन) और सांस्कृतिक नियंत्रण विधियों, जैसे- फसल चक्रण, मेड़ों की सफाई आदि का सहारा लिया जा सकता है।

1. चूहे अपने शारीरिक भार के 10% के बराबर अनाज रोज चट कर जाते हैं।

2. चूहों के कारण हापुर के आसपास के गांवों में सालाना 1.36-3.59 टन अनाज की क्षति होती है।

3. कृंतकों द्वारा न केवल अनाज खाया जाता है बल्कि जितना वे खाते हैं उसका 20 गुना अधिक अनाज को प्रादूषित कर देते हैं। भंडारित अनाज का 2.5% कृंतकों के द्वारा नष्ट किया जाता है।

4. कृंतक अनाज को खराब करते हैं, अपने मल-मूत्र और बालों से अनाज को दूषित करते हैं और कभी-कभी तो मरे हुए चूहों से भी अनाज प्रदूषित होता है।

5. औसतन एक चूहा अपने मल के 25-150 दानें, 10-20 मिलि मूत्र रोज गिराते हैं और उनके 5 लाख बाल झड़ते हैं।

1. कभी-कभी रोपे गए बिचड़े को भी कृंतकों द्वारा उखाड़ा और काट दिया जाता है जिस कारण मुख्य खेत में खाली स्थान बन जाते हैं।

2.. आमतौर पर उनकी गतिविधियां खेत के भीतरी भागों में- चारों ओर से 2-4 मी. छोड़कर- देखी जाती है।

3. शुरू में, फसल का नुकसान पट्टियों के रूप में दिखाई पड़ते हैं लेकिन बाद ये पट्टियां फैलते-फैलते एक बड़ी पट्टी का रूप ले लेती है। पुष्पगुच्छ के निकलने पर नुकसान की मात्रा बढ़ जाती है और यह पुष्पगुच्छों के विकसित होने तक जारी रहता है।

1. नर्सरी अवस्था में कृंतकों से क्षति सबसे अधिक तब पहुंचती है जब बीज में अंखुए फूटते हैं।

2. इस अवस्था में, नर्सरी से पानी निकाल दिया गया होता है और बीज शैय्या पर कृंतक आजादी से घूम-घूमकर अंकुराए बीजों को नुकसान पहुंचाते हैं। बाद में, वे जल की सतह से 1-2 इंच ऊपर बिचड़े को भी काट देते हैं।

1. अनुमान किया जाता है कि भारत में कृंतकों से चावल के उपज को 5-10% तक क्षति पहुंचती है। मौसम, स्थान और पारितंत्र के अनुसार क्षति की मात्रा भिन्न-भिन्न होतीहै। 2. खेत में लगी फसलों में चावल की फसल को कृंतकों द्वारा सबसे अधिक हानि पहुंचती है। 2-90% तक नुकसान होता है। कृंतक किसी भी किस्म को नहीं छोड़ते और फसल पर उनका हमला किसी भी अवस्था में, किसी भी मौसम में हो सकता है। 3. धान के कल्लों को काटने के अलावा वे पकी हुई बालियों को भी काटकर अपने बिलों में ढेर लगा देते हैं। Bandicota bengalensis और Musmeltada जैसे चूहों की भंडारण क्षमता तो गजब की होती है। कटाई के दौरान Bandicota bengalensis द्वारा बिलों में जमा किए गए अनाज देखे जा सकते हैं।
02
Sep

Types of rodents कृंतकों के प्रकार

चूहों के कई प्रकार होते हैं 1. लेसर बैंडिकूट चूहा: Bandicota bengalensis 2.खेत वाले मूस: Mus boodga 3.भारतीय गर्बिल(हिरनमूस): Tatera indica 4.मुलायम बालों वाले खेत वाले मूस : Rattus meltada 5. आन्ध्रप्रदेश के सिंचित परिस्थिति वाले तटीय जिलों में Bandicota bengalensis एवं Mus booduga ऐसे दो कृंतक हैं जो धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
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Sep

Rodents कृंतक

1. गण के जंतु होते हैं जिनके अंतर्गत चूहे और मूस आते हैं। 2. चूहे Muride कुल के जीव हैं। 3. अनुमान है कि विश्व में कुल अनाज उत्पादन का 1% चूहे चट कर जाते हैं। विकासशील देशों में यह इनके द्वारा अनाज की बरबादी 3.5% अनुमानित है। 4 . कृंतकों द्वारा मानव में टायफाइड, पाराटायफाइड और स्कैबीज जैसे लगभग 50 प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं।
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