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22
Aug

राइस लीफ फोल्डर

राइस लीफ फोल्डर

लैटिन नाम: नैफैलोक्रोसिस मेडिनलिस, पाइरालिडे, लेपिडोपटेरा

सामान्य नाम: पत्ती लपेटक

हमले के लक्षण:

  • लंबवत या तिरछी तरफ से पत्तियां रेशम के साथ मुड़ जाती है और ऐसे स्थानें पर स्क्रैप्ड पैच होते हैं।

क्षति की प्रकृति:

  • लारवा बंद पत्ती के अंदर रहता है और पत्ती का हरा हिस्सा खत्म कर देता है जिससे सफेद धब्बे पत्तियों पर रह जाते हैं।

प्रबंधन

रासायनिक नियंत्रण: एक हेक्टेयर के लिए एंडोसलफान35 ईसी या क्वलीनोलफोस 25 ईसी @2 लीटर 500 लीटर पानी में डालकर छिड़काव करने से कीटों की जनसंख्या को नियंत्रित करने में अत्यधिक प्रभावी पाया गया है।

22
Aug

चावल का घुंडी बग/ईयर हेड बग

चावल का घुंडी बग/ईयर हेड बग

वैज्ञानिक नाम: लैपटोकोरिसा एक्यूटा, एलीडिडे, हेमिटेरा

हमले के लक्षण:

  • पत्तियां पीली हो जाती है और बाद में सिरे से नीचे की ओर रस्टिड हो जाती है।
  • खाने के स्थलों पर बहुत सारे भूरे रंग के धब्बे / दानों में कुम्हलाहट दिखाई देने लगती है।
  • पर्याक्रमण ज्यादा हो जाने की स्थिति में पूरे के पूरे ईयरहेड में परिपक्व दाने नहीं रहते हैं।
  • खेत में इसकी उपस्थिति के बारे में इसकी तीखी गंध के द्वारा पता लगता है।

क्षति की प्रकृति:

  • वयस्क और निंफ दोनों ही नुकसान करते हैं।
  • अंडे सेने के 3 से 4 घंटे बाद ही निंफ खाना शुरू कर देते हैं।
  • वे पत्ती के सिरे के नजदीक सैप /दूधिया स्तर पर विकसित होने वाले स्पाइकलेट के दूधिया सैप को खाते हैं।
  • दूधिया सैप को चूसने के कारण दाने अच्छी तरह से नहीं भरते/आधे भरते हैं और भूसी जैसे हो जाते है।
  • अत
22
Aug

राइस स्वार्मिंग कैटरपीलर

राइस स्वार्मिंग कैटरपीलर

वैज्ञानिक नाम: पोडोटेरा मॉरीशिया, नाक्ट्विडी, लेपीडोपटेरा

हमले के लक्षण:

रातों-रात नर्सरियों को पूरी तरह से कैटरपीलर द्वारा खाया हुआ पाया गया।

क्षति की प्रकृति:

  • कैटरपीलर बहुत बड़ी संख्या में शाम के समय आते हैं और सुबह होने तक धान के बीजांकुरों की पत्तियों को खाते हैं और दिन के समय छिप जाते हैं।
  • वे बहुत ही तेजी से खाते हैं और खेत में खाने के बाद दूसरे खेत की ओर चल देते हैं।
  • अत्यधिक पर्याक्रमण की स्थिति में फसल चरे हुए पौधों की तरह नजर आती है।
  • जिन पौधों पर हमला होता है वे केवल ठूंठ रह जाते हैं।
  • वे नर्सरियां जो कि ऐसे दलदली क्षेत्रों में होती है जिनके पानी की निकासी अच्छी तरह से नहीं होती उन पर सूखी जमीन की तुलना में पहले हमला होता है।
  • जुलाई से सितंबर के दौरान नुकसान अधिक होता है।

चावल के स्वार्मिंग कैटरप

22
Aug

राइस गॉल मिज (सनरहाकीट)

राइस गॉल मिज (सनरहाकीट)

वैज्ञानिक नाम: ओरसियोलिया ओरिजी, सेसिडोमाइटी, डिपटेरा

सामान्य नाम: सनरहाकीट

हमले के लक्षण:

  • केंद्रीय शूट पत्ती का उत्पादन करने के बजाय एक लंबी ट्यूबलर संरचना को पैदा करती है।
  • क्षति के एक बाहरी लक्षण के रूप में जब गॉल लंबा हो जाता है तो उस समय कीट प्यूपल चरण में होता है और प्रकट होने के लिए तैयार होता है।

क्षति की प्रकृति:

  • टिलर के बढ़ते हुए बिंदु पर मैग्ट छेद करता है और पत्ती के शीथ में असामान्य वृद्धि पैदा करता है जो कि सफेद ट्यूबलर आकार की हो जाती है और एक दम से समाप्त हो जाती है।
  • यह हल्के हरे रंग, गुलाबी या बैंगनी रंग की हो सकती है।
  • टिलर का आगे होने वाला विकास रूक जाता है।
  • इसे ओनियन शूट या सिल्वर शूट कहा जाता है।
  • कीड़े और उसके लार्वा के स्राव जिसमें एक सक्रिय सेसीडोजन नामक पदार्थ होता है, म
22
Aug

तना बेधक का प्रबंधन

तना बेधक का प्रबंधन

नर्सरी में : नर्सरी के 10 - 12 दिन के पौधों में कारबोफ्यूरेन 3 जी @ 250 ग्राम, या फोरेट @ 100 ग्राम प्रति 100 m2 नर्सरी क्षेत्र में डालें।

रफिंग: जिन टिलरों में डेड हार्ट दिखाई दें उन्हें हटा दिया जाना चाहिए और उन्हें खेत से बाहर नष्ट करना चाहिए ,इससे पर्याक्रमण कम हो जाता है।

जैविक नियंत्रण: एक हेक्टयर के लिए प्रतिरोपण के एक महीने के बाद एक सप्ताह के अंतर पर 8 ट्राइकोकोर्ड का प्रयोग (जैव – एजेंट ट्राइकोग्रामा) करें ।

रासायनिक नियंत्रण: इस कीट की जनसंख्या को नियंत्रित करने में कारटोप हाइड्रोक्लोराइड 4G @ 20 किलो / हेक्टेयर अत्यधिक प्रभावी पाया गया है।

22
Aug

चावल स्टेम बोरर ( तना बेधक)

चावल स्टेम बोरर ( तना बेधक)

वैज्ञानिक नाम: स्कीरपोफैगा इनसरटुला, पाइरासटीडे, लेपिडोपटेरा

सामान्य नाम: तना बेधक

हमले के लक्षण:

  • कई मरे हुए स्टेम बोरर कीड़े खेतों के पानी पर तैरते हुए दिखाई देते हैं।
  • पौधे उगने के चरण पर प्रभावित अंकुरों में उनके मरे हुए हार्ट दिखाई देते हैं और प्रजनन के स्तर पर व्हाइट इयर देखा जा सकता है।

क्षति की प्रकृति:

  • कीट नर्सरी में ही पौधों पर हमला करना शुरू कर देते हैं विशेष रूप से लंबी अवधि की किस्मों में ।
  • जून से सितम्बर के मौसम में इनका असर हल्का होता है लेकिन बाद में अक्तूबर से जनवरी और फरवरी में यह बहुत बढ़ जाता है।
  • कैटरपीलर तने में घुस जाता है और बढ़ती शूट को खाने लगता है।
  • इसके परिणामस्वरूप बीच की शूट सूख जाती है और डेड हार्ट का लक्षण दिखाई देता है।
  • बीजांकुर विभिन्न स्तरों पर प्रभावित हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की चावल फसल के कीड़े

उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों के चावल की फसल पर पांच प्रमुख कीड़ों द्वारा हमला किया जाता है। ये हैं-

1. चावल स्टेम बोरर

2. चावल गॉल मिज

3. चावल स्वार्मिगं कैटरपीलर

4.चावल लीफ फ़ोल्डर

5. चावल घुंडी बग/इयरहेड बग

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