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राइस टंग्रो रोग का परिचय

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1. इस रोग से दो वायरस कण संबंधित हैं- पहला  RTSV – जो एक RNA वायरस होता है तथा दूसरा  RTBV- जो एक DNA पारा रिट्रोवायरस है। 

2. ये वायरस हरे टिड्डों (जीएलएच),  Nephotettix virescence तथा N.nigropictus के जरिए फैलते हैं, जिनके लिए चावल काफी उचित पोषक पौधा होता है।  

3. वायरसयुक्त हरे टिड्डों के जरिए ये वायरस चावल की पत्तियों में प्रवेश करते हैं, जहां वे उनके पोषक तत्वों का चूषण करते हैं। 

4. इस प्रकार टंग्रो से संक्रमित पौधे को वायरस तथा कीट दोनों से नुकसान पहुंचता है। यह रोग नर्सरी से लेकर किसी भी अवस्था में फैल सकता है। 

5. इस रोग का प्रसार वायरस द्वारा संक्रमित पौधों की उपलब्धता, वाहक कीट की संख्या तथा चावल किस्म की संवेदनशीलता पर निभर करता है।

 

File Courtesy: 
DRR मैनुअल
Image Courtesy: 
CRRI
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