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राइस ग्रासी स्टंट

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1. राइस ग्रासी स्टंट रोग का वर्णन रिवेरा तथा अन्य (1966) तथा बर्गोनिया तथा अन्य (1966) द्वारा किया गया था। इसके वायरस का पता 1985 में हिबिनो तथा अन्य ने लगाया था। 

2. इस वायरस के लिए पर्याय है “राइस रिसेट वायरस” (बर्गोनिया तथा अन्य, 1966)

3. यह फिलामेंट कणों वाला एक वायरस है, जिनमें कई वृत्ताकार होते हैं, और आदर्श लंबाई 950-1350 x 6-8 nm की होती है।  

4. यह हरे टिड्डों द्वारा खासकर  Nilaparvata lugens द्वारा संचरित होता है। 

5. इसकी पोषक किस्में हैं Oryza spp. अत्था Nilaparvata spp. 

6. यह एशिया के चावल उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाया जाता है तथा यह उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। 

 

File Courtesy: 
http://www.dpvweb.net/dpv/showdpv.php?dpvno=320
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