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गॉल मिज की जैव-पारिस्थितिकी

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1. जुलाई और अगस्त में जब दिन के समय वर्षा अधिक होती है तब कीटों की घटना अधिक होती है, जो पौधों के अधिकतम टिलरिंग स्टेज में भी होती है। 

2. पौधों की निकट दूरी और उच्च नाइट्रोजन की मात्रा से कीटों का पर्याक्रमण बढ़ जाता है।  

3. मुख्य रूप से बादल के दिनों में या बरसात के मौसम में, उच्च टिलरिंग वाले प्रकार की खेती में, गहन प्रबन्धन उपायों और निम्न कीटनाशन द्वारा इसका जनसंख्या घनत्व की वृद्धि के अनुकूल होता है। 

4. भारत में गॉल मिज पर हमले के लिए लगभग 19 पैरासिटॉइड्स और 7 परभक्षियों का पता लगाया जा चुका है। इनमें से, Platygaster oryzae (Platygasteriidae: Hymenoptera) प्रमुख पैरासिटॉइड है जो कीटों के अंडे और लार्वा के स्टेजों पर हमले करता है। 

5.Neanastatus grallarius, प्यूपा के पैरासाइट भी महत्वपूर्ण हैं। 

 

 

 

File Courtesy: 
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