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गॉल मिज द्वारा हुई क्षति की प्रकृति

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1. गॉल मिज की प्रमुख अवस्था जिससे क्षति होती है वह मेगट है। मेग़ट बढ़ते शीर्ष को खाता है और पत्ते के मूल विभेदन को रोकता है।

2. इसमें शामिल है पत्ते के मूल के आंतरिक भाग से रेडियल रिज का विकास और साथ ही पत्ते लम्बे होते जाते हैं। 

3. एक खाली प्रकोष्ठ जिसे ‘गॉल’ कहते हैं, लार्वा के चारों ओर बनता है। चूंकि लार्वा गॉल को खाता है, आधार भाग पर चौड़ा होता है और प्याज के पत्ते की तरह लम्बे दिखाई देते हैं। 

4. लार्वा के तीन चरण होते हैं। प्राय: एक टिलर में एक मेगट पाए जाते हैं। 

5. पौधे के बढ़ते भाग पर पहुंचने के एक हफ्ते बाद पत्ते पर खरोंच के निशान दिखाई पड़ते हैं। यद्यपि, गॉल मिज के हमले का बाहरी लक्षण है ‘चांदी रंग की कली’ (सिल्वर शूट) अथवा ‘निशान/खरोंच’ जो प्याज के पत्ते की तरह होता है। 

6. कुछ मामलों में, निशान/खरोंच विकसित नहीं होते किंतु पौधे के बढ़ते हिस्से का मृत होना देखा गया है। प्रचुर मात्रा में टिलरिंग सकारात्मक रूप से सिल्वर शूट से संबंधित है। 

 

 

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